बुधवार, 29 जून 2022

कविता : "मेरा चाह"

"मेरा चाह"

 मेरा चाह है कि मैं जेई क्लियर करू | 

पर समझ न आए इसके लिए क्या करू ,

चक्कर खा जाता है इतना बड़ा सिलेबस देखकर | 

सोच में पड़ जाता हूँ उन सब को फेककर ,

टाइम मैनेज करना हो जाता है मुश्किल | 

सोच में पड़ जाता है क्या कर पाऊंगा लक्ष्य हाशिल ,

घण्टों विताना पड़ता है पढ़ने में | 

खूब दिमाग लगाना पड़ता है कुछ करने में ,

कविता : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 12th 

अपना घर 



मंगलवार, 28 जून 2022

कविता : " चाह है दूर जाने की "

" चाह है दूर  जाने की  "

चाह है दूर  जाने की  | 

पास से टिमटिमाते तारे को देखने की ,

महकते फूलो की बगिया में बह जाने की | 

लहराते झरनों की लहर में बह जाने की ,

चाह है दूर जाने की | 

अपनी अभिलाषा को पूरा करने की ,

कदमो -कदमो से मिलाकर |

सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ने की ,

महकते फूलो की बगिया में खो जाने की | 

चाह है दूर जाने की  ,

कविता : अमित कुमार , कक्षा :8th 

अपना घर  

शुक्रवार, 20 मई 2022

कविता : 26 जनवरी

26 जनवरी

 जान हथेली में लेकर वो चल दिए | 

बीन सोचे वह घर से  निकल लिए ,

चाह भी इस देश को आजाद कराऊ | 

इस भारत को एक स्वतंत्र देश बनाऊ ,

कोई खाया गोली तो कोई लगाया फासी | 

पर दी उन्होने हमें आजादी ,

26 जनवरी को उन्होंने बनाया अपना खास दिन |

याद रखा अपना हर रात -दिन ,

कुछ उनमें  सबके प्यारे |

पर कुछ छुपे हुए है बेचारे ,

कवि : कुल्दीप कुमार , कक्षा : 10th 

अपना घर


 

शुक्रवार, 13 मई 2022

कविता : " आंधी"

" आंधी"

 किस ओर चली ये आंधी |  

ठण्ड हवाओ का झोखा अपने संग बांधी ,

थोड़ी वर्षा यहाँ भी गिरा जाओ |  

इस भीषड़ गर्मी में हमको न तड़पाओ ,

सारे पेड़ों में मारी है आम की झोली | 

तुम देखका डर गई हमारी पेड़ भोली ,

थोड़ा हमपर रहम है करना | 

सारे आम को तुम मत झोरना ,

खटटे  -मिट्ठे  पके  आम हमारे | 

तेरे आते डर जाते हम सारे ,

झोपड़ियों को तुम मत उड़ा ले  जाना | 

पड़ता है उन्हें फिर दुबारा बनवाना ,

किस ओर चली ये आधी | 

कवि : कुल्दीप कुमार , कक्षा : 10th 

अपना घर

 

मंगलवार, 10 मई 2022

कविता : "माँ "

"माँ  "

नहीं चाहता धन और दौलत | 

न चाँदी न सोना ,

मुझे चाहिए मेरी माँ का | 

कभी न हो ,

जीवन को त्यागना | 

नहीं चाहता धन और दौलत ,

न चाँदी न सोना | 

क्योकि मेरी माँ है सब से प्यारी ,

माँ की ममता भी अनमोल होता है | 

जिसको नहीं चाहिए खोना ,

ये  भी नहीं चाहता कि |

मेरी वजह  से मेरी माँ को ,

पड़ जाए रोना | 

नहीं चाहता धन और दौलत ,

न  चाँदी न सोना | 

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 8th 

अपना घर

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

कविता : " दोस्ती उसे बनाओ "

" दोस्ती उसे बनाओ "

 दोस्ती उसे बनाओ | 

जिनमें दोस्ती की लायक हो ,

अच्छे बुरे वक्त में काम आये | 

सफलता को एक राह बन जाए ,

मुसीबतों में पहाड़ बन जाए |  

बुलंद हौसले का त्यौहाररौनक  कराए ,

तारो की तरह टिम तिमाएँ | 

जुगुनू की तरह दोस्ती में फैलाए ,

दोस्ती उसे बनाओ | 

जिसमे दोस्ती का भरोसा हो ,

सूरज की तरह हर जिन्दगी में रौशनी बन जाए | 

विशाल दोस्ती का पहचान बनाए,

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर

बुधवार, 9 मार्च 2022

कविता : " होली का त्यौहार"

" होली का त्यौहार" 

 होली का त्यौहार ही | 

कुछ ऐसा है ,

जिसमे सब के चेहरे खिले होते है | 

और रंगलगाने का तरीका तो देखो ,

पहले अबीर फिर रंग लगाते है | 

होली का त्यौहार ही कुछ ऐसा है ,

जिस में बुरा मानने का त्यौहार नहीं | 

सब लोग मिल जुल कर खेलते है ,

होली का त्यौहार ही कुछ ऐसा है| 

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

 

सोमवार, 7 मार्च 2022

कविता : "कितना याद गार होगा "

"कितना याद गार होगा "

 ये बिताये हुए पल क्लॉस में | 

कितना याद गार होगा ,

छोटी -छोटी शरारतें करते | 

क्लॉस के बीच में खाना खाते ,

तो कभी पीरियड बेकार करता | 

और दोस्तों के संग मौज मस्ती करता ,

ये सब जाने के बाद याद आएगी | 

वे गुजारे हुए एक पल ,

जीवन मैं नया सीखा जाते है | 

ये बिताये हुए पल क्लॉस में ,

कितना याद गार होगा | 

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर

 

रविवार, 6 मार्च 2022

कविता : " काश मैं पेड़ होता"

" काश मैं पेड़ होता"

 काश मैं पेड़ होता तो | 

अपनी बात सबको बताता ,

जो हो रहा हम पर अत्याचार | 

उन सबका कोई तो हल निकालता ,

काश मैं पेड़ होता तो | 

अपनी महत्व के बारे में बताता ,

और खुशहाल जिंदगी गुजरता | 

हर समय साथ निभाता ,

काश मैं पेड़ होता तो | 

अपनी बात सबको बताता,

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर

शनिवार, 5 मार्च 2022

कविता : " सूरज की ओर कड़कती किरण "

" सूरज की ओर कड़कती किरण "

 सूरज की ओर कड़कती किरण | 

हर जगह को अनजान बना देती है ,

पेड़ -पौधे को सुखा डालता है | 

जीना बेहाल कर देती है ,

जब उस जगह पर पहला बूंद गिरता है |

एक अनजान जगह से हरियाली में बदल जाता है ,

सूरज की ओ कड़कती किरण | 

हर जगह को अनजान बना देता है ,

मन का मनोबल डाउन कर देता है | 

सूरज की ओ कड़कती किरण,

कवि : अमित कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर 

मंगलवार, 1 मार्च 2022

कविता : "वायु प्रवाह "

"वायु प्रवाह "

 जन्म लेते ही हमसे मिल जाए | 

साथ वो छोड़े मरने पर ,

न देखें वो राज महल को | 

और न जाने निर्धन -घर ,

कभी ममता मयी स्पर्श देती | 

कभी चूमे सबके मन को ,

सब को यह एहसास कराये | 

सुख न केवल है दुनियाँ में ,

कष्ट भी मिलता है तन को |

हिन्दू -मुस्लिम को न जाने सब जाने इंसान ,

उसी के दम से दुनियाँ सारी वरना है श्मशान | 

कवि : राहुल कुमार , कक्षा : 8th 

अपना घर

शनिवार, 26 फ़रवरी 2022

कविता : "गर्मी का मौसम हो गया सुरु "

"गर्मी का मौसम हो गया सुरु " 

गर्मी का मौसम हो गया सुरु | 

कही छाँव तो कही पंखा के नीचे ,

काटेंगे दिन अपना | 

पढ़ाई में तो मन नहीं लगेगा ,

क्योंकि सूरज निकलना हो गया सुरु | 

दिन भर इधर -उधर भटकते रहेंगे ,

कभी रूम में तो कभी लाइब्रेरी | 

सब इंतजार करते है उस समय का ,

जब खेलने का काम होता है सुरु | 

कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर  

बुधवार, 23 फ़रवरी 2022

कविता : " नया कुछ करने का"

" नया कुछ करने का"

 अब जा के मन को राहत मिल रहा | 

फूलो के होटो पर एकनया मुस्कान खिला रहा है ,

चहचाती हुए चिड़िया भी | 

एक दूसरे से मिल रहा ,

गिलहरी की आवाज | 

मन को छू जा रहा ,

मन को न मिले | 

पर गिलहरी को राहत मिल पा रहा ,

ये फाल्गुन के मौसम में मन करता है | 

 कुछ नया करने का ,

आगे बढ़ने का और राह पर चलने का | 

ये फाल्गुन के मौसम में मन करता है ,

नया कुछ करने का | 

कवि : अजय कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर


मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

कविता : "गरजता है बरसता नहीं "

"गरजता है बरसता नहीं "

 गरजता है | 

बरसता नहीं ,

चक्कर घिन्नी -सा घूमता रहता है | 

माथे पर हर बार ,

जाने कहाँ से लेकर आया है | 

वो अपना रंग हर कोई दुसता है ,

आसमान में ठहर गए है | 

बादल अपनी मर्जी का मालिक है ,

गरजता है | 

बरसता नहीं,

कवि : राहुल कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर  

सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

कविता : "सब चाहते है उसका बेटा पढ़ लिख जाए "

"सब चाहते है उसका बेटा पढ़ लिख जाए "

सब चाहते है उसका बेटा पढ़ लिख जाए | 

पढ़लिखकर उँचा नाम कमाए ,

और अपने सोसाइटी में बदलाव लाए |

एक चोर भी यही चाहता है ,

कही उसका बेटा चोरी न सीख जाए | 

सब चाहते है,उसका बीटा पढ़लिख जाये ,

और संसार में एक | 

बड़ा नाम कमाए,

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

शनिवार, 19 फ़रवरी 2022

कविता : " मैं निकला हूँ अपने तालाश में "

" मैं निकला हूँ अपने तालाश  में "

 मैं निकला हूँ अपने तालाश  में |

कोई नजर नहीं आता आस -पास में ,

कहाँ खो बैठा उनको | 

जो रहता था मेरे पास में ,

मैं निकला हूँ अपने तालाश में |

भूखे प्यासे घूमता रहता हूँ ,

खोजने की कोशिश करता हूँ | 

मैं रहना चाहता था उसको पास में ,

मैं निकला हूँ अपने तालाश में | 

कवि : कामता कुमार , कक्षा : 10th 

अपना घर 

कविता : " धुआँ है कितना खराब "

धुआँ है कितना खराब "

 धुआँ है कितना खराब | 

पेड़ -पौधों को कर देता है खराब ,

धुआँ अब नहीं फैलाना है | 

सुद्ध ऑक्सीजन पाना है ,

हमें बिमार अब नहीं पड़ना है | 

अधिक से अधिक पेड़ लगाना है ,

धुआँ है कितना खराब |

पेड़ -पौधों को कर देता है खराब ,

कवि : गोपाल कुमार , कक्षा : 4th 

अपना घर

 

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2022

कविता : "मन की चाह को कहाँ से शुरुआत करुँ "

"मन की चाह को कहाँ से शुरुआत करुँ "

 कहाँ से शुरुआत करू | 

आँगन आसमान लंबी -चौड़ी ,

सागर या वसुधरा | 

अपनी मन की चाह को ,

कहाँ से शुरुआत करुँ |

बीत गया सालों -साल ,

मन की चाह को कहाँ से शुरुआत करुँ | 

देखा था जो आँखों से अब देखनाचाहू न ,

बोला था जो मुँह से अब दोबारा कहना चाहू न | 

गलत सुना हुआ कानो से ,

सुनना और सुनाना किसी को चाहू न | 

अब दोबारा क्यों न सुनू ,

मन की माग कब और कैसे पूरी करुँ | 

कवि : पिन्टू कुमार , कक्षा : 6th 

अपना घर 

गुरुवार, 17 फ़रवरी 2022

कविता : "माँ की याद आती है "

"माँ की याद आती है "

माँ आज मुझे तेरी बहुत याद आ रही है | 

तेरी वो लोरिया लगता है मुझे बुला रही है ,

कैसे होगी मेरी माँ ये बहुत सताता है | 

फोन पर बात करते वक्त रोना भी आ जाता है ,

वो मुझे अपने गोद में उठाती थी | 

रूठ जाऊ तो बार -बार मनाती थी ,

पता नहीं इतना सारा प्यार मेरे लिए कहाँ से आती थी | 

अपने काम से लौट के ,

मेरे लिए कुछ न तो कुछ जरूर लाती थी | 

जब रूठ जाऊ तो खूब प्यार जताती थी ,

माँ आज तेरी बहुत याद आ रही है | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 12TH 

अपना घर

बुधवार, 16 फ़रवरी 2022

कविता : "जिन्दगी का सफऱ कहाँ खत्म होगा "

"जिन्दगी का सफऱ कहाँ खत्म होगा "

सागर के बहन में ये जिन्दगी का | 

इस जिन्दगी का कोई ,

तो किनारा होगा | 

मेरी  इस छोटी जिन्दगी में ,

मेरा कोई तो सहारा होगा | 

मैं राह के लक्ष्य के खतीर ,

मुझे उठाने वाला कोई होगा | 

मुझे उस किनारे का ही तो ,

मुझे है इन्तजार है | 

सागर के बहाव में ये जिंदगी का ,

इस जिंदगी का कोई | 

तो किनारा होगा ,

कवि : संजय कुमार , कक्षा : 11TH 

अपना घर 

 

शनिवार, 12 फ़रवरी 2022

कविता : "जिन लोगो ने जन्म लिया था"

"जिन लोगो ने जन्म लिया था"

 भारत माता की गोद में | 

जिन लोगो ने जन्म लिया था ,

अपने लहू के हर कतरे से | 

भारत को आज़ाद कराया था ,

सीने में गोली खा कर भी | 

अग्रेज़ को मारा करता था ,

भारत माता की गोद में | 

वीरों ने जन्म लिया था ,

आज भी उन लोगो का नाम लिया करते है | 

जिन लोगों ने जन्म लिया था ,

कवि : रोहित कुमार , कक्षा : 4th 

अपना घर 

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2022

कविता : "अपने मंजिल को पाने के लिए "

"अपने मंजिल को पाने के लिए "

शाम सूरज को ढलना सिखाती है | 

शमा परवाने को जलना सिखाती है ,

गिरने वालों को होती है तकलीफ | 

पर ठोकर ही इंसान को ,

आगे का रास्ता दिखाती है |  

हर तकलीफ से जूझती है ,

अपने मंजिल को पाने के लिए | 

हर गलतियों को माफ करती है,

कवि : राहुल कुमार , कक्षा : 8th 

अपना घर 

गुरुवार, 10 फ़रवरी 2022

कविता : "उन बीते दिनों को याद करता हूँ "

"उन बीते दिनों को याद करता हूँ "

आज मैं याद कर रहा हूँ | 

उन बीते दिनों को ,

जब हमें चलना तक नहीं आता था | 

याद करता हूँ  ,

उन लम्हें को |

जो अपने गाँव में बिताया है ,

याद करता हूँ  |

उन दोस्तों को ,

जो मेरे साथ खेला करते थे | 

लेकिन आज मैं देखता हूँ ,

उन सब को | 

तो वो बात नहीं रही उन सब में ,

जो बचपन में हुआ करता था | 

कवि : संतोष कुमार , कक्षा : 6th 

अपना घर 

 

बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

कविता : "जब -जब मुझको कुछ याद न आता "

"जब -जब मुझको कुछ याद न आता "

जब -जब मुझको कुछ याद न आता | 

 तो तेरी याद आती है ,

मेरी नजरें ढूढे तुझे | 

क्या तू मेरे पास बैठी है ,

जब भी मैं कुछ गलती करता | 

मुझको माफ़ तू करती है ,

लेकिन क्या है खाश तुझमे | 

जो तू मेरी गलती सहती है ,

जब भी मै फोन करता | 

मैं कैसा हूँ ,खाना खाया ,न खाया ,

पहले पूछती हूँ | 

मेरी माँ तू ही तो है ,

जो मुझसे प्यार करती है | 

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर 


मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022

कविता : "कल -कल करते है सब "

"कल -कल करते है सब "

कल -कल करते है सब | 

फस गए है हम अब ,

हर काम में आ जाता है कल | 

पर कब आता है ये कल ,

काम से बचने का अच्छा तरिका | 

सबका कल इसी कल पर टिका ,

हर चीज में होता है कल | 

जीवन बिता पर ख़त्म न हुआ ये कल ,

किसने ये शब्द बनाया | 

सारी दुनियाँ को इसने है सताया ,

कल -कल करते है सब | 

कवि : कुल्दीप कुमार , कक्षा : 10th 

अपना घर

 

सोमवार, 7 फ़रवरी 2022

कविता : " ये कोरोना कब जाएगा "

ये कोरोना कब जाएगा "

 ये कोरोना कब जाएगा | 

एक साल जाता है ,

और दो साल के लिए आता है | 

पूरे स्कूल भी हो गए है बंद ,

ऑनलाइन में नहीं लगता है मन | 

सब का पढ़ाई हो गया है भंग,

 कोरोना कब होगा कम | 

ये कोरोना कब जाएगा ,

कवि : नवलेश कुमार , कक्षा : 7th 

 अपना घर


 

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2022

कविता : "मैं असफलता से जूझ रहा था "

"मैं असफलता से जूझ रहा था "

मै बैठकर कुछ सोच रहा था | 

 मंजिल की राह में कितना जूस रहा हूँ ,

छोटी - छोटी असफलता से जीवन में | 

कितना मुसीबतों से लड़ना पड़ रहा है ,

 कभी उदास होकर , रूम में रोता रहता हूँ | 

तो कभी खुद को मोटीवेट करता हूँ ,

खुद पर भरोसा रखकर मैं | 

और कड़ी मेहनत मैं लग जाता हूँ ,

हर एक चीज़ में ख़ुशी को तलासे करता हूँ | 

काश वो एक दिन तो आयेगा ,

जब असफलता भी मंजिल को कदम चूमेंगी | 

मैं बैठकर कुछ सोच रहा था,

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर


बुधवार, 2 फ़रवरी 2022

कविता : "ये भारत का हर एक लाल कहता है "

"ये भारत का हर एक लाल कहता है "

ये भारत का हर एक लाल कहता है | 

 कि उनके दिल में हमेशा ,

भारत का नाम रहता है | 

भारत माता के लाल बनकर ,

वो हरदम आगे बढ़ते जाते है | 

और जब उनसे कोई कुछ पूछता है ,

तो वो खुद को हिन्दुस्तानी बताते है | 

आओ मेरे भारत के भाई एव बहनों ,

हम सब एक साथ भारत माता के नारे लगाते है | 

जिसके लिए भगत ,सुभाष ने प्राण गवाँए थे ,

ये भारत का हर एक लाल कहता है | 

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर


सोमवार, 24 जनवरी 2022

कविता : "पेन हमारा कितना प्यारा "

"पेन हमारा कितना प्यारा "

पेन हमारा कितना प्यारा | 

तुम हो हम सबका सहारा ,

तुम से हम लिखा पढ़ी करते है | 

तुम से हम हिसाब किताब करते है ,

पेन हमारा कितना प्यारा | 

पेन को अपने साथ रखते है  ,

क्यों कि पेन होता  दोस्त हमारा | 

पेन जिस कागज पर चल जाता है ,

समझ जाओ वह कभी नहीं मिटता है | 

पेन हमारा कितना प्यारा ,

तुम हो हम सबका सहारा| 

कवि : निरंजन कुमार , कक्षा : 5th 

अपना घर  


गुरुवार, 20 जनवरी 2022

कविता : "काश मेरा वह वक्त बदल जाये "

"काश मेरा वह वक्त बदल जाये "

काश मेरा वह वक्त बदल जाये | 

 शदियों से बन्दी जंजीर की ताला फीसल जाये ,

मैं आजाद हो जाऊगा | 

काश इस जिंदगी में कोई नई मोड़ आ जाये ,

पेरान रात्रि में जहाँ कोई न हो  | 

पेड़ शांत हो , आसमा में चद्रमा खोई हुई हो ,

बस मुझे उस पथ पर रौशनी दिखा जाये  | 

काश मेरा वक्त बदल जाये ,

इस मजबूर वाणी  , बनजर प्राणी में | 

कही से पानी आ जाये ,

फैल जायेंगी सारे जहाँ | 

सवर जाये वह पेड़ , खिल जायेगे वह फूल ,

काश इसका वह वक्त  आ जाये | 

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर

बुधवार, 19 जनवरी 2022

कविता : "चलो पतंग उड़ाए "

"चलो पतंग उड़ाए "

चलो पतंग उड़ाए | 

इस महीने के माघ में ,

कभी बाएँ ,कभी दाएँ |

कभी नीचे ,कभी ऊपर ,

पतंगों को हम खुब लड़ाएं | 

एक दुसरे के डोरे काटे ,

सब बच्चे आंनद उठाए | 

इस मौसम के महीने में ,

चलो पतंग उड़ाए | 

कवि : सनी कुमार , कक्षा : 10th 

अपना घर

सोमवार, 17 जनवरी 2022

कविता : "मेरा भारत कब ऐसा होगा "

"मेरा भारत कब ऐसा होगा "

मेरा भारत कब ऐसा होगा | 

जब सब पढ़े होंगे ,सब बढ़े होंगे ,

और सबके योगदान की कीमत | 

इस पर पैसो से बढ़कर होगा ,

मेरा भारत कब ऐसा होगा | 

जब सब के चेहरे पर ,

एक नया मुस्कान खिला होगा | 

जब सभी लड़कियों को ,

पढ़ने का अधिकार मिला होगा | 

मेरा भारत कब ऐसा होगा ,

जब बेटी के जन्म पर | 

ख़ुशी मनाया जाएगा ,

और शादी में पैसो का  दहेज़ | 

बंद कराया जाएगा ,

ये वक्त कब आएगा | 

जब सबको अपना -अपना अधिकार मिला होगा ,

मेरा भारत कब ऐसा होगा | 

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

 

शनिवार, 15 जनवरी 2022

कविता : "ये खिलखिलाते से चेहरे"

"ये खिलखिलाते से चेहरे"
ये खिलखिलाते से चेहरे पर | 
एक अनमोल सी मुस्कान खिली ,
खेल की मैदान में सोर उठी | 
छक्के -चौक्के की बरसात हुए ,
ढोल नागारे लगे बजने | 
छोटे -छोटे बच्चे लगे नाचने ,
लड्डू -पेड़ा लगे बाटने | 
ख़ुशी बाटने लगे हर ओर ,
ये खिलखिलाते से चेहरे पर | 
एक अनमोल सी मुस्कान खिली ,
कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 11th 
अपना घर

शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

कविता : "कवि का एक मक्सद होता है "

"कवि का एक मक्सद होता है "
कवि का एक मक्सद होता है | 
उसके लिखे हुए पंक्तियाँ भी ,
 मुर्झाए को भी खिला देती है | 
हक़ीक़त में बदलना हो ,
तो देखते है सपने दिन -रात | 
क्योंकि पंक्तियाँ भी होती है कुछ खाश ,
कवि ऐसे ही नहीं बन जाते | 
उस कविता में ढालना पड़ता है ,
बस चार लाइनों में लिखा रहता | 
जैसे झरना गिरता हो कही आस -पास ,
यह कवि का संदेश है | 
मत भागों किसी के पीछे ,
खुद पर रखो विश्वास | 
कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 7th 
अपना घर
 

गुरुवार, 13 जनवरी 2022

कविता : "चमकता सूरज "

"चमकता सूरज "
चमकता हुआ सूरज | 
आज डूबने को है ,
कल यही सूरज | 
एक नया सवेरा लाने को है ,
कौन जानता है  | 
 जो आज हम सूरज देख रहे है ,
कल शायद हम न देखे | 
लोग सोचते  है ,
आज जो सूरज देखा  है | 
वो फिर कल निकलेगा ,
लोग सोच में रहते है | 
एक नई उम्मीद की ,
एक नई चमकती हुई रोशनी  की | 
शायद हम आज कुछ कर जाए ,
कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 11th  

बुधवार, 12 जनवरी 2022

कविता : "आ गई रौनक उन पौधों में "

"आ गई रौनक उन पौधों में  "

आ गई रौनक उन पौधों में |

जो कब से पड़ा था बेजान ,

गरज -गरजकर बरसा ऐसे | 

जो खिल -खिला उठे ,

मुड़ झाए हुए पौधे | 

इस बेमौसम बारिश ने ,

दे दिए एक ऐसा सौगात | 

जो पूरी उम्र रहेगा उन्हें याद ,

आ गई रौनक उन पौधों में | 

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर


मंगलवार, 11 जनवरी 2022

कविता : " आओ तुम्हे सपनो के गलियों की सैर कराऊँगा"

" आओ तुम्हे सपनो के गलियों की सैर कराऊँगा"

कुछ बातें आओ मै तुमको सुनाता हूँ | 

इस सुनसान में नहीं आओ ,

तुम्हे सपनो के दुनिया में ले जाता हूँ | 

चाँद -तारे के गलियारों में तुम्हे घुमाउँगा ,

अगर वक्त बचे तो सूरज के घर भी ले जाउँगा | 

तितलियोँ से मिलाकर उनसे बाते करवाउँगा ,

रैंबो को बहका कर उसके रंग चुरा लाऊंगा | 

फूल के पंखुड़ियों से नाव बना कर ,

तुम्हे उस छोर ले जाऊंगा | 

ये बात मैं सबको बताऊंगा ,

आओ तुम्हे सपनो के गलियों की सैर कराऊँगा | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 12th 

अपना घर

 


सोमवार, 10 जनवरी 2022

कविता : " माँ "

 " माँ "

जब आँख खुली थी आँगन में | 

तो माँ का एक सहारा था ,

माँ का नन्हा दामन मुझको | 

दुनिया से भी प्यारा था ,

उसी गोद में रहना हर पल | 

मेरा आसमान में उड़ने जैसा था ,

चाहे कितना भी हो जाऊ बड़ा | 

आज भी तेरा बच्चा हूँ , और कल भी बच्चा था ,

जी करता माँ रहू मैं तेरे पास हर पल | 

जब आँख खुली थी आँगन में ,

तो माँ ला एक सहारा था | 

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

रविवार, 9 जनवरी 2022

कविता : "चाह होती है "

"चाह होती है "

चाह होती है | 

सभी के दिलों में ,

कठिन से कठिन | 

मंजिले पाने की ,

सपनो को सजाए रखे है | 

अपने दिलों में सपनो से ही आगे बढ़ने की ,

चाह होती है ,

सभी के दिलो में | 

कवि : गोपाल कुमार , कक्षा : 4th 

अपना घर

शनिवार, 8 जनवरी 2022

कविता : " नया साल "

" नया साल "

ये आखिर नया साल है क्या | 

जो इतने जोश और जुनून से मनांया जाता है ,

त्यौहार मनाने को बहुत सारे है | 

पर उनमे जोश और उत्साह देखेवह जाते ,

आखिर नया साल पर ही क्यों | 

क्योकि इस दिन नई शुरुआत करते है ,

नई सोच होते है | 

नई विचार होते है  ,

और नई हौसला होते है | 

मंजिल को पाने के लिए ,

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर

 

शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

कविता : "कोरोना का आया तीसरी लहर "

"कोरोना का आया तीसरी लहर "

कोरोना का आया तीसरी लहर | 

मजदुर काम करते दिन और दोपहर ,

जिसको होता वो जाते कहर | 

कोरोना का आया तीसरा लहर ,

कोरोना देगा मुश्किल दंड | 

कोरोना ने स्कूल को कर दिया था बंद ,

मौसम को बदल देता | 

हवा का लहर ,

कोरोना को जंग से | 

मिटाने में लगे है दिन और दोपहर ,

कवि : अजय कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

 

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

कविता : "नए साल"

"नए साल"

नए साल की हार्दिक सुभकामनाऍ सभी को | 

विश करता हूँ दिल से तुम को ,

अब पुराने साल तो बीत गया | 

जो होना था वो हो  गया ,

अब जोर मत डालो गुजरे हुए दिन पे | 

सोचना है कुछ  नया करने का ,

 अब सुरु हो गया जिंदगी का दूसरा पाठ | 

बस जो करना सोच समझ कर करना है ,

लोगों में तो उमगें लाना है पर | 

साथ -साथ ही पढ़ना लक्ष्य हमारा है ,

कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

बुधवार, 5 जनवरी 2022

कविता : "जिन्दगी इक रास्ता है "

"जिन्दगी इक रास्ता है "

जिन्दगी इक रास्ता है | 

जिसपे चलना आना चाहिए ,

कुछ करो य न करो लेकिन |

कुछ कराना व करना आना चाहिए ,

इस जिन्दगी के रास्ते में | 

बहुत से गलत रास्ते होते है ,

लेकिन उसमें कौन सा रास्ता सही है | 

आपको पहचानना आना चाहिए ,

इन्हीं रास्ते में | 

कुछ गढ्ढे व कुछ चढ़ाव भी होते है ,

जिसमें आपको उतरना | 

और चढान आना चाहिए ,

जिन्दगी इक रास्ता है | 

जिसमें चलना आना चाहिए ,

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

मंगलवार, 4 जनवरी 2022

कविता: "मंजिल"

"मंजिल"

कितना भी पास हो हमारी मंजिल | 

उसे पाना आसान नहीं ,

जिंदगी की हर एक मोड़ | 

सीधी नहीं होती ,

थक जाना थक कर फिर चलना | 

रुकने का जहन में कभी नाम नहीं ,

पसीने से लथपत हो जाना | 

 पर जिंदगी और मंजिल के ,

रास्तें पर न रुकना | 

दर्शाता है हर एक व्यक्ति की ,

मेहनत को और शाहस को | 

कभी भी अकेले न छोड़ना ,

कवि : समीर कुमार , कक्षा :11th 

अपना घर

सोमवार, 3 जनवरी 2022

कविता : "बिन हौसलो के"

"बिन हौसलो  के"

बिन हौसलो  के बिना | 

जिन्दगी सफल नहीं है ,

कठनाइयों से लड़ना पड़ता | 

बातों को सुनना पड़ता है ,

उम्मीदों को जगाना पड़ता है | 

बिन हौसलो के बिना ,

जिन्दगी सफल नहीं है | 

लोग तुम्हें रोकेंगे उस ओर जाने से ,

पर उम्मीदों को मत खोने देना | 

जिन्दगी में सफल होने के लिए ,

कवि : अमित कुमार , कक्षा :7th 

अपना घर