बुधवार, 28 जून 2023

कविता : "मेरा गांव "

 "मेरा गांव "
 सुन्दर सुसील सा गांव मेरा | 
जिस को मैंने पेड़ों से था घेरा 
कोड़े को हटा हटा  के किया था साफ | 
आज  भी देखते है सुन्दर सा ख्वाफ 
कभी कभी रोया करता था मै अकेले | 
सभी के साथ मैंने बहुत से मैच खेले 
सुन्दर सुसील सा गांव मेरा | 
जिस को मैंने पेड़ो से था घेरा 
कवि :गोविंदा कुमार ,कक्षा :7th
अपना घर  

मंगलवार, 27 जून 2023

कविता :"गर्मी "

"गर्मी "
 इस गर्मी के मौसम ने | 
किया सबको बेहाल 
ऐसी और पंखा इस गर्मी | 
में काम ना आये 
पसीना रुकने का नाम ना ले | 
इस गर्मी के मौसम ने 
किया सबको बेहाल | 
तापमान दिन पर बढ़ता ही जाता 
रात में गर्मी की मार न 
चैन से नींद न आते है | 
सिर्फ पसीना से बेहाल है  
इस गर्मी के मौसम ने | 
किया सबको बेहाल 
कवि :संतोष कुमार  ,कक्षा :8th
अपना घर  

सोमवार, 26 जून 2023

कविता :"एक मौका"

"एक मौका" 
 एक मौका देकर तो देखो | 
हम सवर जाएंगे 
चाहे कितनी कठिन क्यों न हो रास्ता | 
हम खड़े हो जाएंगे 
जो वर्षों से सूखी पड़ी थी जमीन | 
वो जाने कब मर जाएंगे 
एक मौका देकर तो देखो | 
बूंद बनकर बरस जांएंगे 
चाहे कितनी गहरी क्यों न हो यह समुद्र | 
गोता लगाकर हम आएंगे 
वर्षों से रोता था अपनों के लिए | 
आज वो मिल जाएंगे 
एक मौका देकर तो देखो | 
हम संभल जाएंगे 
कवि :सुल्तान ,कक्षा :9th
अपना घर  

रविवार, 25 जून 2023

कविता :"गर्मी"

"गर्मी" 
 गर्मी में नहीं आता  है नींद | 
जल्दी  ही हो गर्मी मौसम का एन्ड 
सोते समय से हो जाओ लतपत | 
पंखा का पता नहीं अब तक 
गर्मी में  नहीं आता है नींद | 
बस एक ही चीज ओटते रात  दिन
बारिश का कोई अता पता नहीं | 
बूंद का कोई पता नहीं 
कवि :अजय कुमार ,कक्षा :9th
अपना घर  

शनिवार, 24 जून 2023

कविता :"गर्मी "

"गर्मी "
 पसीना से हो गए लतपत | 
कूलर ऐसी लगाओ झटपट 
गर्मी में राहत मिले | 
 जब पंखा चले सर सर सर 
रोक न पाए इस गर्मी को अब | 
झुलस गए पेड़ -पौधे सब 
सूख  गए तालाब नदियां सब | 
निकला जोर से सूरज तब 
पसीना से हो गए लतपत | 
कवि :सुल्तान ,कक्षा :9th 
अपना घर 

शुक्रवार, 23 जून 2023

कविता : "आज़ादी "

 "आज़ादी "
आजादी की  जंग में | 
मंगल पांडेय ने दिया बलिदान 
कुछ ने नशों के भांग में | 
किया दुश्मनो का सम्मान 
कुछ ने अपने दोस्तों के संग में | 
बाली सी उम्र में  गवाई जान 
मान सम्मान कपे  तुम उनको | 
जिन्होंने आजादी की लिया 
गवाए अपने जान | 
कवि :महेश कुमार ,कक्षा :9th 
अपना घर 

गुरुवार, 22 जून 2023

कविता :"गर्मी "

"गर्मी "
 गर्मी का यह मौसम | 
गर्म हवा की बहाव चारो ओर 
ठंडा हवा के  लिए लाचार हो रहे | 
बारिश की इंतजार कर रहे 
इस मौसम से लोग बेचैन हो रहे | 
गर्मी का यह मौसम 
बगीचे में आमो का पकना | 
पेड़ो से झुलसकर गिरना 
गर्मी का यह मौसम | 
नहाये बिना काम न चलता 
पानी के लिए तरस ही जाता | 
गर्मी का यह मौसम 
कवि : अमित कुमार ,कक्षा :9th 
अपना घर 

बुधवार, 21 जून 2023

कविता :"कोशिश "

"कोशिश "
 मै कोशिश कर  रहा हूँ आगे बढ़ने की | 
अपने कदम को आगे बढ़ाने की  
धीरे -धीरे मै चलना सीख  रहा हूँ | 
चलते वक्त भले ही गिर रहा हूँ 
फिर भी मै कोशिश  कर रहा हूँ| 
अचानक से मै दौड़ नहीं सकता  
पर एक -एक कदम बढ़ाता हूँ | 
आज मै भले ही हजार  बार गिरता  हूँ 
पर शायद मै चलना सीख रहा  हूँ |  
कवि :नितीश कुमार ,कक्षा :12th 
अपना घर 

मंगलवार, 20 जून 2023

कविता :"गर्मी"

"गर्मी"
 लगाए बैठे उम्मीद सभी | 
बुझेगी तो प्यास कभी 
धरती प्यासी तड़प रही | 
धूप की गर्मी कड़क रही 
पेड़ पौधों मुरझाने लगे | 
हवाएं पास से जब जाने लगे 
सभी देखते बादल को जाते|  
काश दो बूंद इधर भी गिर जाते 
टप -टप करते टपक ही जाते|  
कवि :संतोष कुमार ,कक्षा :8th 
अपना घर 

सोमवार, 19 जून 2023

कविता :"मौसम "

"मौसम "
 आसमान  में है बादल काले -काले | 
लटक रहे है बूंद ढ़ेर सारे 
तरल हवाएं बह रही है | 
मौसम अपने आप सज रही है 
शाम सुहाना हो जाता है | 
रिमझिम -रिमझिम बूंद टपक रहे है
पत्तों से मस्त लटक रहे है|  
फल गिर रहे है टप -टप 
मौसम को देखकर हो खुश सब | 
कवि :कुलदीप कुमार ,कक्षा :12th 
अपना घर 

रविवार, 18 जून 2023

कविता :"जिन्दगी "

"जिन्दगी "
जिन्दगी एक रास्ता है | 
जिस पर चलना आना चाहिए 
कुछ करना आए या न आए|  
मेहनत और मुसीबत का सामना करना आना चाहिए 
इस  जिन्दगी के रस्ते में | 
बहुत से गलत रस्ते होते है 
लेकिन उनमे कौन सा रास्ता सही है|  
आपको पहचानना आना चाहिए 
इन्ही रास्तों में  | 
उतार चढ़ाव भी होते है 
जिसमे आपको उतरना और चढ़ना आना चाहिए|  
ऐसी जिन्दगी पाने के लिए जल्दवाजी नहीं 
थोड़ा धैर्य होना चाहिए | 
जिन्दगी एक रास्ता है 
जिसपर चलना आना चाहिए | 
कवि :देवराज कुमार ,कक्षा :12th
अपना घर 

गुरुवार, 15 जून 2023

कविता :"रिजल्ट "

"रिजल्ट "
 सोच सोचकर था मै परेशान | 
जिसका था वर्षों से इंतजार 
न  गुजर रहा था सुबह और शाम|  
इधर उधर को भटकते रहते 
एक जगह ना मैं चैन  से बैठता | 
हर  पल रिजल्ट की याद आता 
हर लोग के सवाल से लड़ते | 
सुबह शाम एक ही बाते सुनने को मिलता 
कवि :सार्थक कुमार ,कक्षा :12th 
अपना घर 

शनिवार, 10 जून 2023

कविता :"छुट्टी "

"छुट्टी "
 छुट्टी  हो गई है स्कूल से | 
घर जाने के लिए तैयार हो जाओ 
मौज मस्ती करो और खुश रहो|  
समय मिलने पर सुस्त रहो 
आराम करो रूम में छुप के | 
आम का मजा खाकर लो 
आस -पास के पेड़ो से | 
पढाई मन लगाकर करो 
कुछ अच्छा बन जाओगे | 
समाज और परिवार का नाम रोशन करोगे 
कवि :अमित कुमार ,कक्षा :9th
अपना घर  

बुधवार, 7 जून 2023

कविता :"खिड़की के पास"

"खिड़की के पास"
 आज मै  बैठा था खिड़की के पास | 
देख रहा था मै उस पार 
पेड़ -पौधे लगे थे आस पास | 
उस पर चिड़िया फुदक रही थी डाल डाल 
कोयल थी अपने में बेहाल | 
कुहक -कुहक कर पूँछ रही थी हालचाल 
होगया सवेरा अब उठ जाओ|  
देखो कैसा है नजारा 
उसमे तुम मगन हो जाओ | 
कवि :नितीश कुमार ,कक्षा :12th
 अपना घर  

मंगलवार, 6 जून 2023

कविता :"गर्मी "

"गर्मी "
 ये गर्म धूप की मार ने  | 
लू की चपेट ने 
कर गया सबका बुरा हाल|  
कैसे कट रहा ये साल 
जिंदगी चल रहे मालगाड़ी की चाल में |  
कभी पेड़ के नीचे बैठकर चैन की सास ले 
तो कभी घर के अंदर बैठकर आनंद ले | 
ये गर्म धूप की मार ने 
लू की चपेट ने | 
कवि :सार्थक कुमार ,कक्षा :12th
अपना घर  

सोमवार, 5 जून 2023

कविता :"छुट्टियां "

"छुट्टियां "
 गर्मी की छुट्टियां हुई शुरू | 
बच्चे चले घूमने घर को 
कोई बुआ तो कोई नानी के घर को|  
चाहते नहीं समय गवाना 
जल्दी हो जाए घर को रवाना | 
रह ले  कुछ पल परिवार के संग 
रंग जाए अपने में रंग | 
घर जाने को अपना उमंग
रह ले  कुछ पल परिवार के संग| 
कवि :अजय  कुमार ,कक्षा 9th
 अपना घर  

रविवार, 4 जून 2023

कविता :"गर्मी "

"गर्मी "
 तर -तर पसीना चू रहा है | 
पूरा बदन पानी से भीग रहा है, 
गर्मी में हल बेहाल है | 
मौसम में भी थोड़ा उबाल है, 
सूरज का अपना भौकाल है | 
दोपहर में निकलना खराब है, 
पूरा भारत गर्मी से परेशान है| 
ये गर्मी प्रदूषण की पहचान है, 
तर -तर पसीना चू रहा है |  
पूरा बदन पानी से भीग रहा है, 
कवि :कुलदीप कुमार ,कक्षा :9th 
अपन घर 

कविता :" रूठ गई वह मौसम "

"  रूठ   गई  वह  मौसम "
  रूठ   गई  वह  मौसम | 
जो शीतल हवाएं देती थीं ,
झुलस गए वो  पौधें | 
जिस पर फूल निराली खिली थीं, 
आज काले छाए है बादल|  
जो वर्षों से नहीं दिखती थी, 
रूठ गई वह हवा | 
जो दिल को ठंढक पहुंचती थी, 
रूठ गया वह सूरज|  
अब तो पानी का न ठिकाना था, 
सूख गई तालाब -नदियाँ | 
क्योंकि जमाना ही बेगाना था, 
कवि :सुल्तान ,कक्षा :9th 
अपना घर 

शुक्रवार, 2 जून 2023

कविता :"हार से सीख "

"हार  से सीख "
 एक बार में कोई कुछ कर नहीं गुजरता | 
कुछ पाने की जिज्ञासा रखना सीख ,
हर बार कोई जीत के हारना नहीं सीखता|  
तू हार  के जीतना सीख ,
सब तो जीत के भी बेहतर करने की सोचते है| 
तू हार के  जीत से बेहतर करने की सीख ,
जीतों से तो  कोई भी जीत लेता है | 
पर तू हारों से सीख लेना सीख ,
अपने मन और आचना को दूसरों के खातिर|  
सीख लेना सीख, कुछ पाने की जिज्ञासा रखना सीख | 
कवि :महेश कुमार ,कक्षा :9th 
अपना घर 

गुरुवार, 1 जून 2023

कविता :"सवाल "

"सवाल "
 सवाल आते है मन में हजार | 
जो कर देता है मुझको लाचार,
जबाब जानने के हर पल बेकरार|  
कभी मिलता कभी नहीं मिलता,
ऐसा होता  है हर बार | 
सोचने पर मजबूर हो जाता, 
क्या  करू समझ नहीं आता | 
काफी देर उलझने  बाद ,
सुलझा सा उत्तर मिलता|   
कवि :अखिलेश कुमार ,कक्षा :12th 
अपना घर