कविता
सबसे बड़ा मुर्ख है
पहले पेड़ कट्टा है, फिर कागज और कलम बनाकर
लिखते है ,हमें काटना चाहिए
इंसान मुर्ख नहीं तो क्या है
पहले पेड़ कट्टा है, फिर कागज और कलम बनाकर
लिखते है ,हमें काटना चाहिए
इंसान मुर्ख नहीं तो क्या है
पहाड़ तोड़ते घर बनाते
फिर कहते है की मौसम में खराबी है
इंसान मुर्ख नहीं तो क्या है
फिर कहते है की मौसम में खराबी है
इंसान मुर्ख नहीं तो क्या है
पवित्र गंगा को गन्दा करते
फिर कहते
फिर कहते
गंगा क्यों गन्दा है
इंसान मुर्ख नहीं तो क्या है
मनो इंसान तो क्या है
कवी- अप्तर
कक्षा -9