कविता
ये खूबसूरत प्रकृति में
कैसे बिखर रही है
श्रंगार करती दिख रही है
देखो खिलखिलाती फूलो को
हरी भरी सुकुमार कलियो में
जिसकी सुगन्ध में डूब रही है
जगमगाती जुगनू से गलियां
सुंदरता बिखर रही है
धरती की धरोहर है
मनोहर है
बेकाबू करता है
ये खूबसूरत प्रकृति में
कैसे बिखर रही है
श्रंगार करती दिख रही है
देखो खिलखिलाती फूलो को
हरी भरी सुकुमार कलियो में
जिसकी सुगन्ध में डूब रही है
जगमगाती जुगनू से गलियां
सुंदरता बिखर रही है
धरती की धरोहर है
मनोहर है
बेकाबू करता है
ये खूबसूरत प्रकृति में
नाम -शिवा
कक्षा -10