"परीक्षा"
समय के साथ जिंदगी चल रही है।
अब सूरज कि तरह यह ढल रही है ।।
दिन का कोई अब अता - पता नहीं ।
फिर भी ये दिन आगे बढ़ने लगी है ।।
बस समय के साथ जिंदगी चल रही है ।
परीक्षा के दिन है आने वाले ।।
वही है हमारा मेहनत का राज बताने वाले ।
कौन किस हालत में रहा ।।
यही है सबको दिखने वाले ।
समय पर समय दिन घट रहा है ।।
वो पास आता जा रहा है ।
डरने वाली बात है उस दिन ।।
पर वो कुछ खास लाए रहा है ।
समय के साथ साथ वो पास आ रहा है ।।
और हमारे लिए कुछ खास ला रहा है ।
कवि: गोविंदा कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"