बुधवार, 3 मार्च 2021

कविता:-सुहाने इस मौसम की घटाओ में

"सुहाने इस मौसम की घटाओ में" 
सुहाने इस मौसम की घटाओं में।
 कुछ तो ऐसी बात है इस मौसम में।।
जो हर किसी को भा जाता है।
कभी काली घटा जो घिर आ जाता है।।
किसानो के चहरे खुशी से भर जाता है।
क्योकि उन्हें अपने खेतों की याद आता है।।
खेत में बुआई कर खुशिओं की चाह आती है।
बारिश के कारण बच्चो की खुशियाँ खो जाती है।।
हर तरफ हर गली में पानी भर आती है।
चलना सभी को पड़ता है सम्भल संभलकर।।
सुहाने इस मौसम के घटाओं में।
कुछ तो बात है इस सुहाने मौसम में।।
 कविः- समीर कुमार, कक्षा - 10th, अपना घर, कानपुर,
कवि परिचय:- ये समीर कुमार है। उत्तर प्रदेश इलाहाबाद के रहने वाले है। इन्हे संगीत में बहुत रूचि है। ये बड़े  गायक बनाना चाहते है। ये कविता भी अच्छी लिखते है।
 
 
 
 
 
 
 

मंगलवार, 2 मार्च 2021

कविता:- काश मै उड़ता फिरुँ आसमान में

"काश मै उड़ता फिरुँ आसमान में"
 काश मै उड़ता फिरुँ आसमान में। 
घूमूँ घर और बागवान में।।
मीठे मीठे फल मै खाऊँ।
अपने दोस्त संग मैं जाऊँ।। 
पंख अपने रोज धोकर।
रोज सज सवर कर।।
दुनियाँ की सैर कर आऊँ। 
काश मै उड़ता फिरुँ आसमान में।।
घूमूँ घर बागवान में। 
कविः- कुलदीप कुमार, कक्षा -9th, अपना घर, कानपुर,
 

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।  कुलदीप पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं।  कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं।  कुलदीप अपनी कविताओं से लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं।  इनको  क्रिकेट खेलना पसंद है।

रविवार, 28 फ़रवरी 2021

कविता:-चिड़िया आया चिड़िया आया

"चिड़िया आया चिड़िया आया"
 चिड़िया आया चिड़िया आया। 
चिड़िया ने दो दाना लाया।।
साथ में अपने बच्चों को खिलाया।
चिड़िया गया चिड़िया गया।।
आसमान में चिड़िया गया।
चोंच हैं उनके छोटे-छोटे।।
पकड़ लाये कीड़े मोटे-मोटे।
खाया उसे कर छोटे-छोटे।।
चिड़िया आया चिड़िया आया।
साथ में अपने दाना लाया।।
कविः- गोविन्दा कुमार, कक्षा -3th, अपना घर, कानपुर

शनिवार, 27 फ़रवरी 2021

कविता:-अपनी माँ की तलाश में

"अपनी माँ की तलाश में"
मै अब निकला हूँ।
अपनी माँ की तलाश में।।
कोई नजर नहीं आता आस-पास।
क्यों खो बैठा मैं उनको।।
जो रहती थी हमेशा मेरे पास।
मै बैठा अपनी माँ की आस में।।
अब भूख भी नहीं लगती माँ की आस में।
माँ को खोजने की कोशिश में।।
खो दिया सारा बचपन।
अब मै निकला हूँ।।
अपनी माँ की खोज में।
कविः-सुल्तान कुमार, कक्षा- 6th, अपना घर, कानपुर 

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

कविता:- कवि सभा के मंच पर

"कवि सभा के मंच पर"
कवि सभा के मंच पर। 
सुना रहें हैं कविता।।
पीछे से वाह-वाह किये जा रहें हैं।
सुर और ताल दिए जा रहें हैं।।
कवि सभा के मंच पर। 
सुना रहे हैं  कविता।।
तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी है।
हर चेहरे पर खुशी की।।
 लहर झूम उठी है।
कवि सभा के मंच पर।।
कविता सुना रहें हैं।
कवि:- अवधेश कुमार, कक्षा- 7th, अपना घर, कानपुर, 

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

कविता:- इस सुहाने मौसम में

"इस सुहाने मौसम में"
इस सुहाने मैसम में।।
पक्षी उड़ते हैं गगन में।।
इस सुहावने मौसम में।
खूबसूरत सारा जहाँ है।।
 हर किसी को यह मौसम भाता है।
इस सुहावने मौसम में।।
गाना सुनकर होते हैं मगन। 
काम करने में आता है आनंद।।
बिना रुके ही करते है।
 हर काम करते हैं अराम से ख़त्म।।
इस सुहावने मौसम में।
पक्षी उड़ते हैं गगन में।।
कविः- कुलदीप कुमार, कक्षा -9th, अपना घर, कानपुर,
 

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।  कुलदीप पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं।  कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं।  कुलदीप अपनी कविताओं से लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं।  इनको  क्रिकेट खेलना पसंद है।
 

बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

कविता:-आज मैं जो हूँ

 "आज मैं जो हूँ"
आज मैं जो हूँ। 
वाकय में मैं हूँ।।
खुद पे यकीन नहीं होता।
कि मै एक इंसान हूँ।।
मेरा कर्तव्य क्या है। 
मैं किसके लिए जी रहा हूँ।।
मुझे खुद ही नहीं पता।
क्या करुँ क्या न करुँ।।
किसके लिए करुँ और क्यों करुँ।
ये सवाल मन में हैं रहता।।
लेकिन जीना ही।
सबका मकसद होता है।।
कैसे जीना होता है।
उसे पता नहीं होता है।।
आज मैं जो हु।
वाकय में मैं हूँ।।
कविः- रविकिशन, कक्षा- 11th, अपना घर, कानपुर,

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

कविता:- कितना सुहावना मौसम

"कितना सुहावना मौसम"
कितना सुहावना मौसम।
आज मैंने देखा।।
लाल सूर्य सुबह की।
और बनी थी रेखा।।
चिड़िया अपने घरों को छोड़कर।
जा रही थी किसी और ओर।।
मछुआरे निकले नदी की ओर।
तालाब में फेक बंसी की डोर।।
बच्चे लेकर बस्ते।
चले स्कूल के रस्ते।।
चाय,टोस्ट और सुबह के नास्ते।
चल देते हैं स्कूल के वास्ते।।
कितना सुहावना मौसम।
आज मैंने देखा।। 
   कविः -प्रांजुल कुमार ,कक्षा -11th ,अपना घर ,कानपुर ,

कवि परिचय :- यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढाई कर रहे हैं।  प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है।  प्रांजुल पढ़कर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और फिर इंजीनियर बनकर समाज के अच्छे कामों में हाथ बटाना चाहता हैं। प्रांजुल को बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।

सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

कविता:- वह अनजान है

"वह अनजान है"
वह अनजान है।।  
इस दुनियाँ से।।  
 उसे कुछ मत कहना।
घुम लेने दो दुनियाँ उसको।।  
पता तो चले यह कैसा है।
कैसा इसका रंग है ।।  
कैसा इसका रूप है।
देख लेने दो दुनियाँ उनको 
उसे कुछ मत कहना।
बेजान है उसके चेहरे।।  
देखो तो ये हैं कैसे।
 वो अनजान है।।  
इस दुनियाँ से।
 उसे कुछ मत कहना।।  
 
कविः -शनि कुमार ,कक्षा -9th ,अपना घर,कानपुर,
कवि परिचय :- ये शनि कुमार है। जो बिहार के रहने वाले है। इस समय अपना घर हॉस्टल में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे है।  ये पढ़ने में बहुत अच्छे है।ये पढ़ लिखकर अपने परिवार और समाज के लिए काम करना चाहते है। इनको कविता लिखना पसन्द है।
 

रविवार, 21 फ़रवरी 2021

कविता:-तितली रानी तितली रानी

"तितली रानी तितली रानी"
तितली रानी तितली रानी।
कितनी सुन्दर तुम्हारी कहानी।।
फूल-फूल पर जाती हो।
 सबका रस पी जाती हो।।
फूल-फूल मुश्कुराते हैं।
सभी को पास बुलाते हैं।।
तितली रानी तितली रानी।
पीती है रस और बताती है पानी।।
तितली रानी है बड़ी श्यानी।
 कितनी सुन्दर तुम्हारी कहानी।।
  तितली रानी तितली रानी।
 कविः-गोविंदा कुमार, कक्षा - 4th, अपना घर, कानपुर, 
कवि परिचय -ये गोविन्दा कुमार हैं। जो बिहार के रहने वाले हैं। इनको कविता लिखना पसंद है।  

शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

कविता:-युहीं नहीं इन्हें किसान कहा जाता है

 "युहीं नहीं इन्हें किसान कहा जाता है"
युहीं नहीं इन्हे किसान कहा जाता है।
 कुछ खास तो बात है इनमे।।
जो हर फसल में जान डाल जाते है। 
कभी काली घटा जो किसानों को।।
खुशियाँ बाँट चले जाते है।
क्योंकि पानी को देखकर।।
 जीने की आस बढ़ जाती है। 
हर तरफ खुशियाँ और।।
खेत लहलहा उठाते हैं।
किसान अपनी खुशियों को।।
आशुओं से बयाँ कर जाते हैं।
हर त्यौहार और खुशियाँ में जब।।
नए-नए व्यंजनों से भर जाते है।
 ये वही किसान है जो ।।
जात पात न देखकर।
सभी के घरो में अन्न पंहुचा आते है।।
ये किसान ही है जो।
सभी के दुःख दर्द को समझ जाते है।।
चूल्हा जलने का कारण भी।
ये किसान ही माने है।।
युहीं नहीं इन्हें अन्नदाता कहा जाता है।
बहुत सारा मेहनत छुपा होता है।।
माँ बेटे का रिश्ता होता है जमीन से। 
युहीं नहीं इन्हें किसान कहा जाता है।।
कविः- जमुना कुमार, कक्षा -12th, अपना घर, कानपुर,