"उदास बैठा मेरा यार"
न जाने मेरा आज मुझसे क्यों उदास अलग बैठा है।
आज कल मेरा दोस्त बात भी करना बंद कर दिया है।।
बात करो तो आँखे बचाता है पता नहीं वो क्या चाहता है ।
उसका हर उदासी मेरी है उसका बहता हर एक आँसू मेरे है ।।
पूछने पर इंकार करता है पता नहीं वो क्या चाहता है ।
कही न कही मेरे लिए तो जगह होगा उसके दिल में ।।
उसे भी बुरा लगता होगा जब मैं उदास हो जाउ।
उसके उदास हो जाने ऐसा लगता है जैसा । ।
आज सूरज आसमा में न हो ।
बीते समय है याद आते, ये सोच कर दिल मेरा रोता है । ।
पर आँखों से आँसू निकल न आ पाते नहीं ।
आखिर क्या चाहता है वो।।
गाँव की गलियों में क्रिकेट अक्सर खेला करते थे ।
खेत खलियानो में घूमा करते थे एक दूसरे को चिढ़ाया करते थे । ।
हसी खुशी नहर में नहाया करते थे घर पे हो तो ।
माँ एक ही प्लेट खाना परोस देती थी दोनों भाई की तरह खा लिया करते थे । ।
बीते समय है याद आते, ये सोच कर दिल मेरा रोता है ।
न जाने मेरा आज मुझसे क्यों उदास अलग बैठा है। ।
आज कल मेरा दोस्त बात भी करना बंद कर दिया है।।
कवि: नीरज II, कक्षा: 5th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"