शनिवार, 24 जुलाई 2021

कविता : " धरती मुझे गोद में लेकर "

" धरती मुझे गोद में लेकर "

धरती मुझे गोद में लेकर | 

मौसम -मौसम घुमाती है ,

धरती मुझे गोद में लेकर | 

हर मौसम के साथ जीना सीखती है ,

सूरज के चक्कर लगती है |

धरती मुझे गोद में लेकर ,

पूरा बह्रामंड में घुमाती है | 

धरती सब के साथ रहना सीखती है ,

कवि : रोहित कुमार , कक्षा : 4th 

अपना घर

 

शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

कविता : "काश पेड़ हमारे बराबर होते "

"काश पेड़ हमारे बराबर  होते "

काश पेड़ हमारे बराबर  होते | 

जब मन चाहता चिड़ियो के घोंसले में झाँक लेते ,

जब मन जब पेड़ से फल तोड़ लेते | 

चिड़ियो के बच्चो से  उनके बचपन में ही पहचान हो जाती ,

चिड़िया हमें जानती और पहचानतीं | 

उनके बच्चे के साथ खेला करते ,

भूख लगे तो उसे खिला देते | 

काश पेड़ हमारे बराबर होते ,

कवि : राहुल कुमार , कक्षा : 8th 

अपना घर

गुरुवार, 22 जुलाई 2021

कविता : " कहे पर निर्भर मत हो "

" कहे पर निर्भर मत हो "

कहे पर निर्भर मत हो | 

सुने सुनाए पर निर्भर मत हो ,

पहले खुद करके देखो |

अगर तुम में वो हिम्मत हो ,

तवे विश्वास करना उस पर | 

कोई समझाए तो ,

दूसरों को दोषी ठहरा देना | 

कहे पर निर्भर मत हो ,

कवि : रोहित कुमार , कक्षा : 4th 

अपना घर

सोमवार, 19 जुलाई 2021

कविता :"कौन थे भीम राव अमेडकर "

"कौन थे भीम राव अमेडकर  "

जब मैं बैठा माँ से हट कर | 

पूछा उनसे सवाल एक ठट कर ,

कौन थे  भीम राव अमेडकर | 

सोचने लगीं वो कुछ देर बैठकर ,

चुपके से लिया ख़िसक वहाँ से | 

माँ बैठी थी जहाँ पे ,

गया मै पुस्तकालय के अंदर |

दिखा मुझको ज्ञान का समंदर ,

एक किताब उठाकर देखा | 

उनके बारे में था लिखा ,

समझमे आया उसको पढकर | 

कौन थे भीम राव अमेडकर , 

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर

शनिवार, 17 जुलाई 2021

कविता : "कैसा जाएगा मेरा एग्जाम "

"कैसा जाएगा मेरा एग्जाम "

आज शाम को मै सोच रहा था | 

कि कैसा जाएगा मेरा एग्जाम ,

फिर मैने कहा कि | 

मन से पढ़ाई करेंगे तो ,

अच्छा जाएगा एग्जाम | 

अब तो पेपर के बाद ही दिखेगा ,

कि कैसा हुआ मेरा एग्जाम | 

पेपर के बाद एग्जामपेपर,

रहा किस के काम | 

आज शाम को मै सोच रहा था ,

कवि : नवलेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

कविता : "दोस्ती"

"दोस्ती"

दोस्ती भी क्या होता यार | 

जो देती जी भर कर प्यार ,

जगह -जगह पर साथ निभाता | 

हर मुसीबत  काम है आता ,

मेरी मुसीबत गले लगाता | 

जो वादा करो वो है निभाता ,

छोड़ देता सारा हार की परवाह | 

सम्हलता सिर्फ दोस्ती की राह ,

कवि : नंद कुमार , कक्षा : 5th 

अपना घर

गुरुवार, 15 जुलाई 2021

कविता : " गर्मी के मौसम में "

" गर्मी के  मौसम में "

 पेड़ -पौधे और जंगल में | 

शानंती का महौल बनाता ,

गर्मी के  मौसम में | 

कोई नज़र न आए धरती और आकाश में ,

हिमत न होता बहार जाने में | 

ठंडी की जगह गर्म हवा है चलती ,

गर्मी में पसीनो की महक है आता | 

राहत देता है पेड़ की छाया ,

कवि : रोहित कुमार , कक्षा : 4th 

अपना घर

 

बुधवार, 14 जुलाई 2021

कविता : "हर गलत इंसान को कुछ ना कुछ सिखाती है "

"हर गलत इंसान को  कुछ ना कुछ सिखाती है "

हर गलत इंसान को  कुछ ना कुछ सिखाती है | 

लेकिन कुछ गलत कर दे ,

तो वहीं गलत इंसान को हमेशा शातती है | 

हर कोई  कहता है जो ,

पहला गलती हुआ उसे सुधरने को  कहती है | 

हर गलत इंसान को कुछ ना कुछ सिखाती है ,

कुछ गलत काम करने से पहले सोचता है | 

कवि : गोपाल कुमार , कक्षा : 4th 

अपना घर

 

 

सोमवार, 12 जुलाई 2021

कविता : " कोरोना आया जब से "

" कोरोना आया जब से "

कोरोना आया जब से | 

देश का हर काम थक गया तब से ,

दूसरों चीजों से क्या जाती है | 

पर स्कूल याद बड़ा आती है ,

कोरीडोर व सीढ़ियो पर पर | 

अकड़ कर चलना ,

और क्लास में सबसे पीछे बैठकर | 

क्रिकेट के बारे में चर्चा करना ,

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर

कितना मज़ा  आता था

शनिवार, 10 जुलाई 2021

कविता : " जिसे हम पापा कहते है "

" जिसे हम पापा कहते है  "

 घर में होता है वह इंसान |
 जिसे हम पापा कहते है ,
सभी की खुशियां का ध्यान रखते |
 हर किसी की इच्छा पूरी करते हैं ,
खुद गरीब और बच्चों को अमीर बनाते हैं |
जिसे हम पापा कहते हैं,
बड़ों की सेवा भाई बहनों में लगाव |
पत्नी को प्यार ,बच्चों को दुलार ,
बेटी की शादी ,बेटों का मकान |
बहूओ की खुशियां दावानों का मान ,
कुछ ऐसे ही सफर में गुजर वह शाम |
जिसे हम पापा कहते हैं ,

कवि : संतोष कुमार , कक्षा : 6th 

अपना घर

गुरुवार, 8 जुलाई 2021

कविता: "कोई जगह ही था "

"कोई जगह ही था  "

जैसा भी था पर कोई जगह ही था |
नदी हो या फिर कोई नाला ही था ,
पर पानी से वह भरा ही था |
बाँस - बसेड़ियों और अन्य पेड़ों से था हरा हरा ,
अलग - अलग पक्षियों से भी था भरा |
पेड़ों पे और झाड़ियों में, था हलचल स कुछ हो रहा ,
 जब देख, तो कुछ जानवर था भाग रहा |
जैसा भी था पर कोई जगह ही था ,

कवि : पिंटू कुमार , कक्षा : 6TH 

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