कविता
बीत रहे है साल
छोड़ते जा रहे है यादें
निकलता जा रहा है समय
याद नहीं आ रही क्या यार
चला गया है बहुत दूर
छोड़ गया है अपनी लहार बातों की
क्या खो गया है पता जो खो गए हो
तुम वहां
कितने वसंत बीत गए
जाने पतझड़ भी कितने निकल गए
याद नहीं आयी क्या तुम्हे
मेरे यार
क्या बीतते साल में
भूल गया है मुझे भी यार
छोड़ते जा रहे है यादें
निकलता जा रहा है समय
याद नहीं आ रही क्या यार
चला गया है बहुत दूर
छोड़ गया है अपनी लहार बातों की
क्या खो गया है पता जो खो गए हो
तुम वहां
कितने वसंत बीत गए
जाने पतझड़ भी कितने निकल गए
याद नहीं आयी क्या तुम्हे
मेरे यार
क्या बीतते साल में
भूल गया है मुझे भी यार
नाम- साहिल
कक्षा -10
(अपना घर )