कविता
बहुत है गर्मी ये हम मानते है
अक्सर बिजली नहीं आती
ये सभी जानते है
छह के भी कुछ नहीं कर सकते
और फिर से बिजली का इंतजार करते है
कुछ देर बिजली आती है
और फिर वापस चली जाती है
गुस्सा भी आता है
परेशां भी होते है
पर उम्मीदों को नहीं खोते है
मुस्कुराते है और फिर से इंतजार करते है
अक्सर बिजली नहीं आती
ये सभी जानते है
छह के भी कुछ नहीं कर सकते
और फिर से बिजली का इंतजार करते है
कुछ देर बिजली आती है
और फिर वापस चली जाती है
गुस्सा भी आता है
परेशां भी होते है
पर उम्मीदों को नहीं खोते है
मुस्कुराते है और फिर से इंतजार करते है
कविता हमारे कवी गोविंदा द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे गोविंदा इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है