"बहस"
क्या अंत भी है ऐसी बात चीज का ।
सही जो लगता हो एक को । ।
तो दूसरे को गलत ।
क्या लगता है । ।
ऐसी बातो में ।
छिपा है कैसी रहस्य । ।
घंटो -घंटो रहते अड़े ।
करते रहते जिसपे बहस । ।
निकलता है क्या सही समाधान।
टाले गए सवालों का । ।
जिस बात चीत में ।
पूरी बात भी होती कहाँ?। ।
कर देते जिस तहस - नहस ।
क्या यही अधूरी बाते । ।
इंसानो में है एक बहस। ।
कवि
कवि: पिंटू कुमार, कक्षा: 11th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"