गुरुवार, 16 जुलाई 2026

बीत रहे है साल

कविता 

बीत रहे है साल 
छोड़ते जा रहे है यादें 
निकलता जा रहा है समय 
याद नहीं आ रही क्या यार 
चला गया है बहुत दूर 
छोड़ गया है अपनी लहार बातों की 
क्या खो गया है पता जो खो गए हो 
तुम वहां 
कितने वसंत बीत गए 
जाने पतझड़ भी कितने निकल गए 
याद नहीं आयी क्या तुम्हे 
मेरे यार 
क्या बीतते साल में 
भूल गया है मुझे भी यार
नाम- साहिल 
कक्षा -10   
(अपना घर )

आज है रविवार

 कविता 

आज है रविवार 
सभी करेंगे सफाई और करेंगे सफाई 
लिखते है कविता और पड़ते है भाई 
आज है रविवार 
सोते है और मौज मस्ती करते है 
आज है रविवार 
और आ रहे है पेपर 
करते है सभी बच्चे पड़े 
आज है रविवार 
आज है रविवार 

नाम- रमेश 

(अपना घर )

बुधवार, 15 जुलाई 2026

कितना लम्बा है ये सफर

 कविता 

कितना लम्बा है ये सफर 
जहाँ कोई न आता है नजर 
न छांव है न है मस्ती की डगर 
कास छोटा होता ये सफर 
जहां न है कोई घर 
बस अति है पड़े ही नजर 
बस कैसे भी पार  करना है ये डगर 
फिर शुरू करते है दूसरा सफर 
कितना लम्बा है ये सफर 
जबतक पूरा न होगा ये सफर 
तबतक कोई दूसरी न चुनेगे डगर
 

नाम- सुल्तान 

कक्षा -12  

मंगलवार, 14 जुलाई 2026

बहुत अनजान है ये आसमां

कविता 

बहुत अनजान है ये आसमां 
दिन में लोगों को अपनी रौशनी से है दिया जला 
न जाने क्यों बेखबर है ये आसमां 
न दे दिन में चलने हवा 
न दे रात में थोड़ी सी भी राहत 
क्यों गर्मी जला देती है लोगों को 
बहुत अनजान है ये आसमान 
 न जीने का ठिकाना 
न राहत देने को है हवा 
अब बस चाहत यही है गर्मी न दुबारा वापस आना 
अपने संग न इतनी गर्मी लाना 
बहुत अनजान है ये आसमान 

नाम- अभिषेक 

कक्षा- 8 

सोमवार, 13 जुलाई 2026

कब से पड़ी हुई है रूखी सी जिन्दगी

 कविता 

कब से पड़ी हुई है रूखी सी जिन्दगी 

बेजान सी है ये ख़ुशी 

बदली नहीं ये दुःख की घडी 

टूट चुकी है एक आशा बड़ी 

छूट गयी सारि कड़ी 

कब से पड़ी हुई है रूखी सी जिंदगी 

सब्र छूट रहा है ध्यान खो रहा है 

पता नहीं क्यों बेजान हो रहा है 

 

नाम- साहिल 

कक्षा- 10 

(अपना घर )

शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

न हो रही है बरसात

 कविता 

न हो रही है बरसात 

गर्मी चल रही है साथ साथ 

आसमान से बरसाने की है आस 

लोग हो हाय बहुत परेशान 

ये गर्मी को नहीं हो रहा अहसास 

सिर्फ धुप धुप से तेजी गर्मी 

बस लोगों को लगी है वर्षा की आस 

ये सूरज की चमक और मुस्कान 

लोगॉन को खूब कर रहा परेशान 

ये गर्मी को नहीं हो रहा अहसास 

नाम - नवलेश 

कक्षा -12


शनिवार, 27 जून 2026

ये खूबसूरत प्रकृति में

कविता 

ये खूबसूरत प्रकृति में 
कैसे बिखर रही है लालिमा 
श्रंगार करती दिख रहि है 
शुशोभित है कितना 
देखो खिलखिलाती फूलों को 
हरी भरी सुकुमार कलियों को जिसकी सुगंध में डूब रही 
जगमगाती जुगनू को भी 
दिख रही है खूबसूरत 
रत की रानी चाँद अपनी 
कैसे बिखर रही है लालिमा  
श्रंगार करती दिख रहि है 
नाम -शिवा 
कक्षा 10 

गुरुवार, 25 जून 2026

तबाही मचा रहा है इस साल की गर्मी

 कविता 

तबाही मचा रहा है इस साल की गर्मी 
बहुत परेशान कर रही है ये गर्मी 
इतनी तेज धुप और ये लहरे 
इतनी तेज गर्मी नहीं है होती थी पहले 
बहुत तेज हो  धुप 
और तेजी से चल रही है ये लहरे 
इतनी तेज नहीं होती धुप लहरे पहले 
बहुत तबाही मचा रही है 
इस साल ये गर्मी 
लोगों को बहुत परेशाँ कर रही है ये गर्मी 

नाम - नवलेश 

कक्षा -12 

मंगलवार, 23 जून 2026

कविता: "बहस"

"बहस"
क्या अंत भी है ऐसी बात चीज का । 
सही जो लगता हो एक को । । 
तो दूसरे को गलत । 
क्या लगता है । । 
ऐसी बातो में । 
छिपा है कैसी रहस्य । । 
घंटो -घंटो रहते अड़े । 
करते रहते जिसपे बहस । । 
 निकलता है क्या सही समाधान। 
टाले गए सवालों का । । 
जिस बात चीत में । 
पूरी बात भी होती कहाँ?। । 
कर देते जिस तहस - नहस । 
क्या यही अधूरी बाते । । 
इंसानो में है एक बहस। । 
कवि
कवि: पिंटू कुमार, कक्षा: 11th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"


 

बुधवार, 17 जून 2026

गाँव की गलियों से निकलकर

कविता 

गाँव की गलियों से निकलकर 
शहरों की गलियों में 
भटक क्यों रहा हूँ इन अनजान गलियों में 
गलियारे ही बचे है क्या 
क्यों खो गए खेत कहाँ 
कहाँ खो गयी वो बूढ़ी नजरे 
जो रात रात भर जागकर हाल पूछती थी 
सब बदल सा गया है 
है लगता है की गाँव गलियों से निकलकर 
मई खो गया हूँ 
या फिर मैं गाओ को  भूल सा गया हूँ 
नाम - साहिल कुमार 
कक्षा -10 


गुरुवार, 11 जून 2026

भूल जाते है कदमो का आस

 कविता 

भूल जाते है कदमो का आस 
जो मेहनत से होता है पास  
वे करते है रोज़ प्रयास 
आकर फिर भी न जाने क्यों 
खुद से  दूर चला जाता है  
ठुकरा देता है ये समय 
भूल जाते है कदमो का आस 
जो मेहनत से होता है पास 
वे करते है रोज़ प्रयास 
नाम - रवि 

(अपना घर )