कविता
कुछ पता नहीं चला
पड़ते पड़ते ठंडी आ गयी
कुछ पता नहीं चला
मेने सपनो में सोचा था
ठंडी जल्दी आ गया
वो भी हमको पता नहीं चला
पड़ते पड़ते ठंडी आ गया
(बच्चों का आकाश .... बच्चों के लिए)
कविता
कविता
कविता
कविता
कविता
इस बदलते मौसम के दिन
चल रही है पसीने के बिन
रज़ाई है कम्बल है
फिर भी ठंडी है
मुश्किल हो गया है लोगो का नहाना
सब ठंडी का नाम लेकर करेंगे बहाना
बदलते मौसम के दिन
अब कैसे रहे कम्बल के दिन
हो रही है आजकल जल्दी शाम
सुबह का नहीं ले रहा है नाम
इस ठंडी के मौसम में
ये कविता हमारे कवी नीरू के द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे | इनको कविता लिखना बहुत पसंद है, ये इस वक्त कक्षा 10 के छात्र है | ये यहाँ के बहुत होनहार छात्र है | इनको अपना घर में रहते हुए 8 साल हो गए है | ये हर काम में यहाँ के मदद करते है और इनका चरित्र बहुत अच्छा है |
कविता
कविता हमारे कवी विष्णु द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2024 में आये थे विष्णु इस समय कक्षा 4 में पढ़ते है | अपना घर में 2 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के |
कविता
कविता हमारे कवी नवलेश द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे नवलेश इस समय कक्षा 12 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |
कविता
कविता हमारे कवी बिट्टू द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे बिट्टू इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |
कविता
कविता हमारे कवीसाहिल द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे साहिल इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |