कविता
वो मज़दूर है और खुद
के कमाए पैसों पर जीते है
धुप में तपते है पर काम
से पीछे नहीं हटते है
कष्ट तो होता है उनकों भी बहुत
पर मन से वह उड़ते है
बारिश में भी लगते है और
ठण्ड में हवाएं में भी जुटते है कष्ट तो होता है उनको भी बहुत
पर मन से उठते नहीं है
खुद की लड़ाई खुद ही लड़ते है
इंसाफ जहा मिलना चाहिए
उसके लिए भी भिड़ते है
कामयी तो अक्सर नहीं मिलती
पर खुलकर जीते है
कसगत तो होता है उनको भी
पर मन से उतट नहीं है
नाम- गोविंदा
क्लास -9