मंगलवार, 8 सितंबर 2026

अगर मैं पछि होता

 कविता 

अगर मैं  पछि होता 
साड़ी दुनिया का सैर करता 
कभी पूर्व जाता 
कभी पच्छिम जाता 
अगर मई पछि होता 
साडी दुनिया की सैर कर पता 
बड़े बड़े बागों में जाता 
मीठे मीठे फल खाता 
अगर मैं  पछी होता
साड़ी दुनिया घूम के आता  
कविता हमारे कवी अभिषेक कुमार द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023  में आये  थे  अजय इस समय कक्षा 8  में पढ़ते है | अपना घर में 3   साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है

सोमवार, 7 सितंबर 2026

बदल रहा है रोज़ मौसम

 कविता 

बदल रहा है रोज़ मौसम 
कभी लगता कडुआ धुप 
तो कभी दिखने लगता औसम 
कभी तो बरसात की धुन में लगा रहता 
कभी सूरज अपना झलक दिखा देता 
हर चाँद मिंटो में बदलता रहता 
कभी तो बारिश आकर बरसा देता 
जिनको लोग न गईं पता 
हर समय मौसम अपना अहसास है दिलाता 
कभी पानी बरसता तो कभी धुप निकालता 
कविता हमारे कवी अजय कुमार द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2014 में आये  थे  अजय इस समय कक्षा 12 में पढ़ते है | अपना घर में 14  साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है

शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

पानी का बहाओ

 कविता 

पानी का बहाओ 
बांध टूटते  ही थिरक उठते है 
पानी का बहाओ 
पाथर में भी रास्ता बनाते है 
मुश्किलों में भी साथ रहते है 
एक दूसरे का हाथ पकड़कर 
जो हर मंजिल तक साथ निभाते है 
पानी का बहाओ 
जो अपना लिया है लोगों ने उनका रास्ता 
अब बरी है उनकी बहने के 
टूट जाये सरै मंजिले 
या टूट जाये घर गिरना 
पानी का बहाओ 

कविता हमारे कवी सुल्तान   कुमार   द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 201 3   में आये  थे  सुल्तान   इस समय कक्षा १२ में पढ़ते है | अपना घर में 14  साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है

बुधवार, 2 सितंबर 2026

बड़ा मुशकील है ये जीवन

 कविता 

बड़ा मुश्किल  है ये जीवन 
इससे बढ़िया है 
पढ़ लिख कर कुछ बन जाना 
क्यों सोचते हो पढ़ाई को ठुकराना 
अब पड़े से ही है मंजिल पाना 
पड़ी से न कभी दूर जाना 
जब पढाई के लिए जान लगाओगे 
तभी जिंदगी में कुछ कर पाओगे 
पढाई है जीवन की कुंजी 
जिसके बिना है जिंदगी अधूरी 
 कविता हमारे कवी अभिषेक   कुमार   द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023   में आये  थे  अभिषेक   इस समय कक्षा 8  में पढ़ते है | अपना घर में 2   साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |    

मंगलवार, 1 सितंबर 2026

ढूंढने निकल पड़े उस राह को

 कविता 

ढूंढने निकल पड़े उस राह को
जहाँ पर खुशियों का उपहार है 
चलते चलते पहुँच जायेंगे उस मंजिल तक 
जहाँ पर शांति का त्यौहार है 
हर जगह एक नयी चुनौती आएगी 
केवल ठोकर देकर जाएगी 
जारी रखो बस अपना सफर 
तुम्हे मिल जाएगी वो डगर
जहाँ से होगा जीत का सफर  
ढूंढने निकल पड़े उस राह को 
 कविता हमारे कवी अजय  कुमार   द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023   में आये  थे  अजय    इस समय कक्षा 5    में पढ़ते है | अपना घर में 2   साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |    

शनिवार, 29 अगस्त 2026

आओ बच्चों खेल सिखाएं

 कविता 

आओ बच्चों खेल सिखाएं 
खेल का भी मजे दिलाये 
ऊपर नीचे नीचे ऊपर 
कूदो उछलो खेलों खेल 
आओ  बचो खेले खेल 
खेल को भी अपने साथ ले लो 
आओ बच्चों कुछ जो बातें 
खेल का भी हो जाये मुक़ाबला 
ये कविता हमारे कवी विष्णु  कुमार   द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023   में आये  थे विष्णु    इस समय कक्षा 4   में पढ़ते है | अपना घर में 2   साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |    

गुरुवार, 27 अगस्त 2026

कौन है वह

 कविता 

कौन है वह 
जंगलों के बीच गया जो 
लेना चाहता जान उसी से 
किधर है वह जीवित गाछा 
जिसकी नीचे मग्न हो 
जंगल में मोर नाचा 
रंग बिरंगे पछियों का जमघट 
अन्य पछियों का आना झटपट 
ऊँची चहचहाट और 
कोमल की मीठी गान 
डालता मोरो में जान 
फिर नचाये दुन्दुन दमाकदुम 
कौन है वह 
सुना हो जिसने ये गाथा 
मग्न हो जहाँ 
जंगल में मोर नाचा  

ये कविता हमारे कवी पिंटू कुमार   द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018  में आये  थे पिंटू   इस समय कक्षा 11  में पढ़ते है | अपना घर में 8  साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |    

बुधवार, 26 अगस्त 2026

ये मंजिल तक तो पहुंचना है मुझे

 कविता 

ये मंजिल तक तो पहुंचना है मुझे 
हम हर नहीं मानेंगे ें नन्हे क़दमों से 
आगे बढ़ते ही रहेंगे 
हर कदम पर हर राह पर 
कठिनाइयो से भरा होगा 
मैं अपने दुःख को हौसलों के सिवा 
कोई और मेरे पास न होगा 
इतना आसान नहीं होता 
है भाई मंजिल तक 
पहुंचना पर कोशिशे 
तो करना चाहिए 
ये मंजिल तक तो पहुँचना है 
मुझे हम हार  नहीं मानेंगे 
इन नन्हे नन्हे कदमों से 

ये कविता हमारे कवी रमेश   द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023 में आये  थे शिवा  इस समय कक्षा 6 में पढ़ते है | अपना घर में 3 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |    

मंगलवार, 25 अगस्त 2026

इस कड़कती धुप में

 कविता 

इस कड़कती धुप में 
चिलचीलाती धुप में 
अपनी  चलती अपने साथ में 
सूरज ने उसका नाम लू रखा 
गर्म हवाएं दिवार चीर कर अंदर आ रही है 
दिन पर दिन टेम्प्रेचर बड़ा रही है 
कभी छांव तो कभी घाम  है 
न जाने सूरज हमसे क्या चाहती है 
पेड़ पौधे अब सुख रहे है 
पारा अब बढ़ रहा है 
धरती को तालाब कर  है 
रखने  को अब ज़मी  बचा है 
 ना जाने सूरज क्या चाहता है 
ये कविता हमारे कवी निरु  द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018    में आये  थे शिवा  इस समय कक्षा 10    में पढ़ते है | अपना घर में 8    साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के /   

सोमवार, 24 अगस्त 2026

रोशन सूर्य से देश हमारा

कविता 

रोशन सूर्य से देश हमारा 

हरा भरा कहीं 

कहीं है पीला और नीला 

और खेतों की परिदृशं जहां 

तो सुन्दर सुशिल मस्तानी में खोया 

ऐसा है देश हमारा 

मौसम जहाँ रंगो में है डूबा डूबा 

रौशन सूर्य से देश हमारा 

ये कविता हमारे कवी शिवा द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018    में आये  थे शिवा  इस समय कक्षा 10    में पढ़ते है | अपना घर में 8    साल से रह रहे है |   

शनिवार, 22 अगस्त 2026

हो रही है बारिश दिन रात

 कविता 

हो रही है बारिश दिन रात 

हम करते है सूरज निकलने की बात 

कब आये सूरज दादा 

फैलाये अपनी किरण 

दुनिया में आधा आधा 

कह दो सूरज दादा से 

उनको नमस्कार करेंगे 

जल्दी निकले उन्हें देखकर सर झुकायेंगे 

ये कविता हमारे कवी रोहन  द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023   में आये  थे नीरू इस समय कक्षा 7    में पढ़ते है | अपना घर में 3   साल से रह रहे है |  |