सोमवार, 24 जनवरी 2022

कविता : "पेन हमारा कितना प्यारा "

"पेन हमारा कितना प्यारा "

पेन हमारा कितना प्यारा | 

तुम हो हम सबका सहारा ,

तुम से हम लिखा पढ़ी करते है | 

तुम से हम हिसाब किताब करते है ,

पेन हमारा कितना प्यारा | 

पेन को अपने साथ रखते है  ,

क्यों कि पेन होता  दोस्त हमारा | 

पेन जिस कागज पर चल जाता है ,

समझ जाओ वह कभी नहीं मिटता है | 

पेन हमारा कितना प्यारा ,

तुम हो हम सबका सहारा| 

कवि : निरंजन कुमार , कक्षा : 5th 

अपना घर  


गुरुवार, 20 जनवरी 2022

कविता : "काश मेरा वह वक्त बदल जाये "

"काश मेरा वह वक्त बदल जाये "

काश मेरा वह वक्त बदल जाये | 

 शदियों से बन्दी जंजीर की ताला फीसल जाये ,

मैं आजाद हो जाऊगा | 

काश इस जिंदगी में कोई नई मोड़ आ जाये ,

पेरान रात्रि में जहाँ कोई न हो  | 

पेड़ शांत हो , आसमा में चद्रमा खोई हुई हो ,

बस मुझे उस पथ पर रौशनी दिखा जाये  | 

काश मेरा वक्त बदल जाये ,

इस मजबूर वाणी  , बनजर प्राणी में | 

कही से पानी आ जाये ,

फैल जायेंगी सारे जहाँ | 

सवर जाये वह पेड़ , खिल जायेगे वह फूल ,

काश इसका वह वक्त  आ जाये | 

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर

बुधवार, 19 जनवरी 2022

कविता : "चलो पतंग उड़ाए "

"चलो पतंग उड़ाए "

चलो पतंग उड़ाए | 

इस महीने के माघ में ,

कभी बाएँ ,कभी दाएँ |

कभी नीचे ,कभी ऊपर ,

पतंगों को हम खुब लड़ाएं | 

एक दुसरे के डोरे काटे ,

सब बच्चे आंनद उठाए | 

इस मौसम के महीने में ,

चलो पतंग उड़ाए | 

कवि : सनी कुमार , कक्षा : 10th 

अपना घर

सोमवार, 17 जनवरी 2022

कविता : "मेरा भारत कब ऐसा होगा "

"मेरा भारत कब ऐसा होगा "

मेरा भारत कब ऐसा होगा | 

जब सब पढ़े होंगे ,सब बढ़े होंगे ,

और सबके योगदान की कीमत | 

इस पर पैसो से बढ़कर होगा ,

मेरा भारत कब ऐसा होगा | 

जब सब के चेहरे पर ,

एक नया मुस्कान खिला होगा | 

जब सभी लड़कियों को ,

पढ़ने का अधिकार मिला होगा | 

मेरा भारत कब ऐसा होगा ,

जब बेटी के जन्म पर | 

ख़ुशी मनाया जाएगा ,

और शादी में पैसो का  दहेज़ | 

बंद कराया जाएगा ,

ये वक्त कब आएगा | 

जब सबको अपना -अपना अधिकार मिला होगा ,

मेरा भारत कब ऐसा होगा | 

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

 

शनिवार, 15 जनवरी 2022

कविता : "ये खिलखिलाते से चेहरे"

"ये खिलखिलाते से चेहरे"
ये खिलखिलाते से चेहरे पर | 
एक अनमोल सी मुस्कान खिली ,
खेल की मैदान में सोर उठी | 
छक्के -चौक्के की बरसात हुए ,
ढोल नागारे लगे बजने | 
छोटे -छोटे बच्चे लगे नाचने ,
लड्डू -पेड़ा लगे बाटने | 
ख़ुशी बाटने लगे हर ओर ,
ये खिलखिलाते से चेहरे पर | 
एक अनमोल सी मुस्कान खिली ,
कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 11th 
अपना घर

शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

कविता : "कवि का एक मक्सद होता है "

"कवि का एक मक्सद होता है "
कवि का एक मक्सद होता है | 
उसके लिखे हुए पंक्तियाँ भी ,
 मुर्झाए को भी खिला देती है | 
हक़ीक़त में बदलना हो ,
तो देखते है सपने दिन -रात | 
क्योंकि पंक्तियाँ भी होती है कुछ खाश ,
कवि ऐसे ही नहीं बन जाते | 
उस कविता में ढालना पड़ता है ,
बस चार लाइनों में लिखा रहता | 
जैसे झरना गिरता हो कही आस -पास ,
यह कवि का संदेश है | 
मत भागों किसी के पीछे ,
खुद पर रखो विश्वास | 
कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 7th 
अपना घर
 

गुरुवार, 13 जनवरी 2022

कविता : "चमकता सूरज "

"चमकता सूरज "
चमकता हुआ सूरज | 
आज डूबने को है ,
कल यही सूरज | 
एक नया सवेरा लाने को है ,
कौन जानता है  | 
 जो आज हम सूरज देख रहे है ,
कल शायद हम न देखे | 
लोग सोचते  है ,
आज जो सूरज देखा  है | 
वो फिर कल निकलेगा ,
लोग सोच में रहते है | 
एक नई उम्मीद की ,
एक नई चमकती हुई रोशनी  की | 
शायद हम आज कुछ कर जाए ,
कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 11th  

बुधवार, 12 जनवरी 2022

कविता : "आ गई रौनक उन पौधों में "

"आ गई रौनक उन पौधों में  "

आ गई रौनक उन पौधों में |

जो कब से पड़ा था बेजान ,

गरज -गरजकर बरसा ऐसे | 

जो खिल -खिला उठे ,

मुड़ झाए हुए पौधे | 

इस बेमौसम बारिश ने ,

दे दिए एक ऐसा सौगात | 

जो पूरी उम्र रहेगा उन्हें याद ,

आ गई रौनक उन पौधों में | 

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 11th 

अपना घर


मंगलवार, 11 जनवरी 2022

कविता : " आओ तुम्हे सपनो के गलियों की सैर कराऊँगा"

" आओ तुम्हे सपनो के गलियों की सैर कराऊँगा"

कुछ बातें आओ मै तुमको सुनाता हूँ | 

इस सुनसान में नहीं आओ ,

तुम्हे सपनो के दुनिया में ले जाता हूँ | 

चाँद -तारे के गलियारों में तुम्हे घुमाउँगा ,

अगर वक्त बचे तो सूरज के घर भी ले जाउँगा | 

तितलियोँ से मिलाकर उनसे बाते करवाउँगा ,

रैंबो को बहका कर उसके रंग चुरा लाऊंगा | 

फूल के पंखुड़ियों से नाव बना कर ,

तुम्हे उस छोर ले जाऊंगा | 

ये बात मैं सबको बताऊंगा ,

आओ तुम्हे सपनो के गलियों की सैर कराऊँगा | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 12th 

अपना घर

 


सोमवार, 10 जनवरी 2022

कविता : " माँ "

 " माँ "

जब आँख खुली थी आँगन में | 

तो माँ का एक सहारा था ,

माँ का नन्हा दामन मुझको | 

दुनिया से भी प्यारा था ,

उसी गोद में रहना हर पल | 

मेरा आसमान में उड़ने जैसा था ,

चाहे कितना भी हो जाऊ बड़ा | 

आज भी तेरा बच्चा हूँ , और कल भी बच्चा था ,

जी करता माँ रहू मैं तेरे पास हर पल | 

जब आँख खुली थी आँगन में ,

तो माँ ला एक सहारा था | 

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 7th 

अपना घर

रविवार, 9 जनवरी 2022

कविता : "चाह होती है "

"चाह होती है "

चाह होती है | 

सभी के दिलों में ,

कठिन से कठिन | 

मंजिले पाने की ,

सपनो को सजाए रखे है | 

अपने दिलों में सपनो से ही आगे बढ़ने की ,

चाह होती है ,

सभी के दिलो में | 

कवि : गोपाल कुमार , कक्षा : 4th 

अपना घर