कविता
फुदक फुदकर हो रही है बारिश
थोड़ा ही बहुत सही हो रही बारिश
तूफान का नामोनिशान नहीं है \
हवा बस काम सही है
फुदक फुदकर हो रही है बारिश
चमक उठे है ये कलियाँ सारी
बाह रही है ये नदियां सारी
सूरज का अब काम है
बारिश तो यूँ ही बदनाम है
फुदक फुदकर हो रही है बारिश
थोड़ा ही बहुत सही हो रही बारिश
थोड़ा ही बहुत सही हो रही बारिश
तूफान का नामोनिशान नहीं है \
हवा बस काम सही है
फुदक फुदकर हो रही है बारिश
चमक उठे है ये कलियाँ सारी
बाह रही है ये नदियां सारी
सूरज का अब काम है
बारिश तो यूँ ही बदनाम है
फुदक फुदकर हो रही है बारिश
थोड़ा ही बहुत सही हो रही बारिश
ये कविता हमारे कवी नीरू द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे नीरू इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 10 साल से रह रहे है | |