शनिवार, 4 अप्रैल 2020

कविता : पौष्टिक खाना

" पौष्टिक खाना "

दूध -भात जो नित खाता है,
वही स्वस्थ बन पाता है | 
जो पौष्टिक भोजन करता है,
वो कभी बीमार नहीं पड़ता है | 
दिन में ठीक से खाना खाना है,
अपने आप को स्वस्थ बनाना है | 
पानी सेहत के लिए ठीक है,
अगर आप इसके जितना नजदीक हैं | 
फल को भी खाना है,
अपने को भी स्वस्थ बनाना है | 
खाओ सदा पौष्टिक खाना,
रहो तंदुरस्त और जिओ ज़माना |

नाम : गोपाल कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता गोपाल के द्वारा लिखी गई है | गोपाल ने यह अपनी पहली कविता का शीर्षक            " पैष्टिक खाना " दिया है | कविता में कैसा भोजन करना है उसके बारे में जिक्र किया है ताकि हम स्वस्थ रह सके | गोपाल एक बहित ही चंचल बालक है |

कविता : कोरोना

" कोरोना "

कोरोना में कुछ नहीं हुआ सुधार,
तब भी कोरोना से हो रहे हैं बीमार | 
कोरोना बाहर सबका कर रहा है इंतज़ार,
उसको बस मौका मिल जाए एक बार | 
हम लोग जाएगें तो होंगें बीमार,
इसीलिए घर में ही करना है आराम | 
कोरोना है बिलकुल खतरनाक,
बच कर रहना नहीं तो होंगे बीमार | 
डरना नहीं है हमें इस कोरोना से,
लड़ना है इससे बड़ी हिम्मत से | 
 कोरोना में कुछ नहीं हुआ सुधार,
तब भी कोरोना से हो रहे हैं बीमार | 

कवि : नवलेश कुमार , कक्षा : 6th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता नवलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं और अपना घर संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | नवलेश को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है और पढ़ाई में  बहुत अच्छे हैं

कविता : कुछ कर दिखाना है

" कुछ कर दिखाना है "

जिंदगी में कुछ अनोखा करना है,
जलते मशाल से भी ऊँचा उठना है | 
नीले आसमान से बादलों को देखना है,
पहाड़ों में चढ़कर मुझे दिखाना है | 
जिंदगी में कुछ अनोखा करना है,
चमकते तारों को करीब से देखना है | 
अपनी जिन्दगी में नया करना है,
लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाना है | 
उस जिन्दगी को नया करना है,
जो सालों से बंजर थी 
प्रेम के बीज डाल , उन्हें उपजाऊ बनाना है | 

नाम : संजय कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता संजय के द्वारा लिखी गई है जो की झारखण्ड के रहने वाले हैं | संजय को कवितायेँ लिखना और उन्हें लोगों तक पहुँचाना बहुत अच्छा लगता है | संजय को मेहनती की तरह काम करा पसंद है और सारे कामों को बहुत ही लगन से करते हैं |

सोमवार, 30 मार्च 2020

कविता : एक दूजे का साथ देना होगा

" एक दूजे का साथ देना होगा "

क्यों खुशियों  का समंदर
आज शमशान सा लगने लगा है,
क्यों वो जानी पहचानी वो सड़कें 
आज अनजान सी लगने लगी हैं | 
ये तो वही खुशियाँ है 
जहाँ हम एक साथ हँसते थे,
ये तो वही वो सड़कें हैं 
जहाँ हम -तुम साथ चलते थे | 

क्यों आज हँसी में रुकावटें आ रही है,
क्यों प्यार का भँवरा कहीं और मंडरा रही है | 
क्यों वो मिटटी के खिलौने आज टूटने लगे है 
क्यों आज हम एक दूसरे से लड़ने लगे हैं | 

हम अब भी खुशियों को सजा सकते हैं,
उन टूटे खिलौनों को फिर बना सकते हैं | 
इस शुभ कार्य को अब ही करना होगा,
इस भीड़ भाड़ की दुनियाँ में 
एक दूजे का साथ जीवन भर देना होगा | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " एक दूजे का साथ देना होगा " है | बढ़ती दुनिया में रिश्ते -नाते ख़त्म न हो इसीलिए इस कविता को लिखने का मकसद है | इस कविता में पुराने दिन को compare कर आज जो चल रहा है और उसमें क्या बदलाव आ रहे हैं उसको लिखा है | 

शनिवार, 28 मार्च 2020

कविता :सर्दी

" सर्दी "

सर्दी है अब जाने वाला,
गर्मी है अब आने वाला | 
कौन सा मौसम है अच्छा वाला,
क्या कहूं हर मौसम है मतवाला | 
सर्दी में मन गर्मी को भाई,
गर्मी में मन सर्दी को भाई | 
सर्दी में है लोग सिकड़ने,
गर्मी में लगे पसीने से चिढ़ने | 
सर्दी में लोग आग तापते,
गर्मी कम हो ये कामना जापते |
सर्दी है अब जाने वाली,
इसीलिए मैं पंखा निकाल ली |

कवि : पिंटू कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता पिंटू के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | पिंटू को  लिखने का बहुत शौक है | क्रिकेट खेलने में बहुत माहिर हैं | एक दूसरों से बहुत ही अच्छे से बात करते हैं |  

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

कविता : नाख़ुश है पत्ते

" नाख़ुश है पत्ते "
 
क्यों मायूश  दिखते ये पत्ते,
क्यों इस ताप से नाख़ुश है पत्ते | 
गिरते , गिड़गिड़ाते और मुरझा जाते,
समय होते ही जमीं पर आ जाते | 
क्या यूँ ही झरकर गिरना था,
या फिर हरियाली की सीढ़िया चढ़ना था | 
क्यों सहमें से लगते है पत्ते,
क्यों एक बार छूने से डरते है पत्ते | 
ये पत्तों की कहानी है,
यही उनकी किस्मत और कहानी हैं | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर 

कविता : कोरोना का कहर

" कोरोना का कहर "

कोरोना ने मचा दिया तबाही,
सब परेशां हो गए मेरे भाई | 
कोई खोज नहीं पाया इसकी दवाई,
कुछ परेशां हुए ,कुछ बच न पाई | 
फिर भी कोरोना का पेट न भर पाई | 
कोरोना ने छोड़ा  अपना कहर,
गांव हो या फिर हो कोई शहर | 
घर में पड़े पड़े हो रहे परेशां,
अब क्या करें यही है समाधान | 

कवि : कामता कुमार , :कक्षा  : 8th,  अपना घर

गुरुवार, 26 मार्च 2020

कविता : महामारी

" महामारी "

फ़ैल रही है महामारी,
ये है कोरोना जैसी घातक बीमारी | 
एक को होकर दूसरे को होए,
जो भी उन बीमारों को छुए | 
इसका संक्रमण तेजी से फैलता,
कोरोना का इलाज मुश्किल से मिलता | 
खुद तो मौज से घूम रहा  है,
लोगों को यूँ ही कैद कर रहा है | 
मैं इसके बारे में क्या बताऊँ,
पूरा शहर है इससे lockdown | 

कवि : प्रांजुल कुमार।  कक्षा : 10th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | पढ़लिखकर एक नेक इंसान बनने के साथ अपने परिवार वालों की मदद करना चाहते हैं | प्रांजुल पढ़ने में बहुत ही होशियार हैं | हमेशा लोगों को अपनी बातों से प्रेरित करते हैं |

कविता : कोरोना को मिलकर भगाएँगें

" कोरोना को मिलकर भगाएँगें "

ये कैसा समय आ गया  मेरे भाई,
क्यों ये दुःख की घडी छाई 
कोई न अब रोड पर जाए,
जाए तो बस कोरोना जाए | 
ये क्रोना क्यों आया भारत देश में,
जबकि यह उत्पन्न हुआ विदेश में | 
कितनों को इसने सताया,
पर कुछ को डॉक्टरों ने बचाया | 
मुँह , हाथ और कान को बंद है छूना,
अब तो लोगों को घरों में है जीना | 
कोरोना का बढ़ता कहर,
दिन , शाम और दोपहर |
एक दूसरे का साथ निभायेंगें,
इस कोरोना से पीछा छुड़ाएंगें | 

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के रहने वाले हैं और अपना घर संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | समीर इसके आलावा गीत भी बहुत अच्छा गाते हैं और लोगों तक अपनी बातें गीत के जरिए पहुँचाते हैं |

बुधवार, 25 मार्च 2020

कविता : बसंत के मौसम में

" बसंत के मौसम में "

बसंत के मौसम में,
कुछ तो अलग होगा 
चाँद और सितारों के बीच
 कोई तो राज़ होगा | 
बसंत के मौसम में,
शहर में खुशहाली है | 
भगवान के चरणों में पीला फूल चढ़ा है
यह मौसम कितना बड़ा है |
इस बसंत में होगी हरियाली,
चिड़ियों की रंग बिरंगें निराली |
बसंत के मौसम में,
कुछ तो अलग होगा | 

कवि : संजय कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता संजय के द्वारा लिखी गई है जो की झारखण्ड के रहने वाले हैं | संजय एक बहुत ही मेहनती बालक है और हमेशा पढ़ाई के प्रति अटल रहता है | संजय को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है |

मंगलवार, 24 मार्च 2020

कविता : रंगों की होली

" रंगों की होली "

होली है रंगों का त्यौहार,
बच कर रहना मेरे यार |
अबीर -गुलाल लगा रहे हैं,
अच्छा - अच्छा खिला रहे हैं |
सबको रंग लगा रहे हैं
उड़ रहा है रंगों का फौवार,
ख़ुशी से मना रहे हैं त्योहार |
गीले पड़ें हैं सारे रास्ते,
कैसे चलूँ किसी के वास्ते |
पापड़ों में भी है अलग स्वाद,
 यही है रंगों का त्यौहार मेरे यार |
होली है रंगों का त्यौहार,
बच कर रहना मेरे यार |

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | कुलदीप पढ़ -लिखकर एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं |   पढ़ने में बहुत ही होशियार है और अपने समाज और परिवार वालों  चाहते हैं |