शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

कविता : कोरोना का कहर

" कोरोना का कहर "

कोरोना का कहर ,

रहा नहीं ठहर | 

उसका डर हर किसी में ,

दम नहीं किसी दवा में,

जो रोक सके हवा में |

 दिन पर दिन बढ़ता जा रहा, 

पारा सब का चढ़ता जा रहा | 

कुछ लड़कर जित गए,

कुछ का समय बीत  गए |

सब को लग रहा जहर | 

कोरोना का कहर ,

रहा नहीं ठहर |

 कवि : अखिलेश कुमार ,कक्षा : 10th , अपना घर 

 

 

गुरुवार, 13 अगस्त 2020

कविता : दुनियाँ में शांति

 " दुनियाँ में शांति "

 दुनियाँ में शांति है हमको लाना,

जग में रोशनी  है फैलाना | 

हर पल को हमको है सजाना,

समय की कीमत सबको है  समझना | 

चाह है सब कुछ पाने का ,

ढूँढू  दुनियाँ हर जमाने का | 

भविष्य में नाम अपना है बनाना ,

सब कुछ कर के है दिखाना | 

 कवि :कुलदीप कुमार,  कक्षा : 9th , अपना घर 

बुधवार, 12 अगस्त 2020

कविता : उड़ चले

" उड़ चले "

हर वन में हर उपवन मे,

पक्षियों की है जोरों से शोर |

उड़ती -उड़ती धरती की हर कोने में,

नई संदेशा  ला रही है | 

गगन की उचाई को छू जा रही है | 

अपनी फुर्तीली उड़ान से,

 पूरी दुनिया  घूमना चाह रही है |

इसी तरह अपनी सफर वह पूरी करती ,

अपनी नई दुनिया की खोज में ,

उड़ चली अपनी पथ की ओर |

 

कवि  :पिंटू कुमार , :कक्षा  5th , अपना घर 

मंगलवार, 11 अगस्त 2020

कविता : कोरोना से लड़ाई

 

" कोरोना से लड़ाई "

सारे डॉक्टर पस्त हो गए है ,

सारी दवाइयाँ  नाकाम हो गई है | 

सफल नहीं हो पा रहा कोई ,

अपनी दवाइयों  को लेकर |  

प्राकृतिक दवाइयाोंको लेने पर ,

हो रहे मजबूर  ऐसी  क्या वजह है | 

जो हम सब इतना संघर्ष कर रहे है ,

दिन -रात  लगातार | 

दवाइयों की खोज में लगे रहे है,

वजह सिर्फ है मानव जाति  को है बचाना | 

इस धरती पर शान्ति  फिर से लाना ,

हर एक चेहरे पर मुस्कान लौटना है | 

 कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 10th ,  अपना घर

 

 

सोमवार, 10 अगस्त 2020

कविता : लक्ष्य

" लक्ष्य "

न मुझे मांग सकेंगे ,

न मुझे कोई  छीन सकेंगे | 

बस मुझे पाने के लिए लाख,

कोशिशों कर सकेंगे | 

बहुत मुश्किल से मुझे चुना ,

फिर हिसाब से उतने पैसे गिना है | 

तुम्हारे बिना मै कुछ कह नहीं सकते ,

शायद मै कभी चैन से | 

जी नहीं सकते।,

कवि : देवराज , कक्षा : 10th , अपना घर



रविवार, 9 अगस्त 2020

कविता : बादल पानी बरसा दो

 

" बादल पानी बरसा दो "

 बादल -बादल पानी तो बरसा दो,

सूखे हुए पौधों को पानी तो पिला दो  |

बादल -बादल पानी तो बरसा दो,

चिड़िया को  पानी तो पिला दो |

 गर्मी से तुम राहत दिला दो,

सूखे हुए पौधे को पानी तो पिला दो |

बादल -बादल  पानी तो बरसा दो,

अपना कहर तुम सबको दिखा दो,

बादल -बादल  पानी तो बरसा दो | 

सूखे पौधे को तुम खिला दो,

 बादल -बादल तो बरसा दो | 


कवि : अजय कुमार , कक्षा : 6th , अपना घर

शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

कविता : शिव भक्त

" शिव भक्त "

 बम बम भोले की गूँज रही है 

चारो ओर शिव के भक्त डोल रहे हैं | 

चढ़ा है शिव का नशा इन पर,

बोल रहे रहे है बम चारो धाम घूमकर | 

सावन के महीने में भांग बाँट रहे,

भांग पीकर शिव का गीत गा रहे | 

 होश हवाब खो बैठे हैं सारे भक्त,

दौड़ रहा है उनके शरीर में शिव का रक्त | 

 केवल बम -बम भोले बोल  रहे हैं,

सारे भक्त मस्ती डोल रहे हैं | 

 

कवि : रविकिशन , कक्षा : 11 , अपना घर

 

 

 

गुरुवार, 6 अगस्त 2020

कविता : पर्यावरण का ख्याल

" पर्यावरण का ख्याल "

बारिश भी कुछ कहना चाहता है,
अपने बातों को बताना चाहता है |
छुआ - छूत से हो रहे परेशान,
बनकर जहरीले बूँदें बरस रहे है |
पर नहीं समझ रहे हैं इंसान,
कोई लकड़ी  तो कोई कोयला |
कोई डीज़ल तो कोई पेट्रोल जला है,
नहीं रख रहे पर्यावरण का ख्याल |
बारिश भी कुछ कहना चाहता है,
अपने बातों को बताना चाहता है |

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर

बुधवार, 5 अगस्त 2020

कविता : होंगे सपने पूरे


" होंगे सपने पूरे "

कृषक जैसा संघर्ष जो करता,
मेहनत का मैदान नहीं छोड़ता |
जब तक सफल वह हो न जाए,
नींद - चैन को त्यागता जाए |
ये रास्ता जिस ओर को मुड़ता,
हमेशा सफलता उधर ही चलता |
कामयाबी की सोच हरियाली लाती,
मेघा जैसी खुशियाँ छा जाती |
देख भूमि पर झूमती हरियाली को,
जमीं की मिटटी को उठाकर  देखो |
 तब होंगें तुम्हारे सपने पूरे,
नहीं बैठोगे तुम कभी अधूरे |

कवि : पिंटू कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर





मंगलवार, 4 अगस्त 2020

कविता : शहर है प्यारा

" शहर है प्यारा "

हम सब मिलकर ये सपथ जताएँ ,
आओ मिलकर कानपुर को स्वच्छ बनाएँ |
ऐसे पेड़ पौधे इस शहर में लगाएँ,
रोडवेज़ पर कूड़ा न फैलाएँ | 
पॉलीथिन पर प्रतिबन्ध लगाए,
पेपर बैग का उत्पादन बाधाएँ |
जगह जगह जागरूकता अभियान चलाएँ,
हर  बच्चों को शिक्षा दिलाएं |
शहर में ऐसे दीप जलाएँ ,
हर वर्ष शुभ मंगल कार्य करवाएँ |
तभी जगमाएगा ये शहर दुबारा,
अपना शहर है सबसे प्यारा |

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 11th , अपना घर

सोमवार, 3 अगस्त 2020

कविता : हाशिल करनी है ऊँचाइयों को

" हाशिल करनी है ऊँचाइयों को "

आओ चले कुछ सोचे,
हाथ पर हाथ रखे न बैठे |
जीवन मैं तुम्हारे पास बहुत से हैं कार्य,
नहीं करना है तुम्हें अभी आराम |
जिस दिन जगे उसी दिन होगी शुरुआत,
हर दिन अपना कार्य करते रहना |
एक दिन जरूर प्रसंसा होगी,
वह दिन तेरे लिए खास होगा |
मत बैठने देना अपने अंदर के ज्वाला को ,
मेहनत करना है तुम्हें जी तोड़ कर तुम्हे,
हाशिल  करना है तुम्हे उन ऊचाइयों को| ,
जो इंतज़ार कर रही तेरे आने का |
 कर दिखा अब अपने अंदर के आत्मविश्वास को,
बता दे मैं कितना आतुर हूँ कुछ करने को |

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर