कविता
आसमान में लालिमा बिखराती
अपनी मनोरम दृष्टि से
संसार को चमकती
अपनी तेज ऊर्जा पृथिवी पर बरसाती
सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती
आसमान में लालिमा बिखराती
ऊर्जा सूरज की लेकर
पेड़ अपना जीवन प्रक्रिया चलता
खाना इसी की मदद से बनाता
प्राणदायिनी वायु देता
खुद दूषित वायु लेता
इसे किसी न जरुरत पड़ती
सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती