कविता
बाल सजग
(बच्चों का आकाश .... बच्चों के लिए)
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026
कुछ भी कहते हो तुम
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026
रोको मत आगे बढ़ने दो
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026
सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती
कविता
आसमान में लालिमा बिखराती
अपनी मनोरम दृष्टि से
संसार को चमकती
अपनी तेज ऊर्जा पृथिवी पर बरसाती
सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती
आसमान में लालिमा बिखराती
ऊर्जा सूरज की लेकर
पेड़ अपना जीवन प्रक्रिया चलता
खाना इसी की मदद से बनाता
प्राणदायिनी वायु देता
खुद दूषित वायु लेता
इसे किसी न जरुरत पड़ती
सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती
शनिवार, 3 अक्टूबर 2026
पढ़ते पढते ठंडी आ गया
कविता
कुछ पता नहीं चला
पढते पढते ठंडी आ गया
कुछ पता नहींचला
सपनो में सोचा की
ठंडी कितनी जल्दी आ गया
वो भी हमको पता नहीं चला
पढ़ते पढ़ते ठंडी आ गया
कुछ हमको पता नहीं चला
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026
इस बदलते मौसम के दिन
कविता
इस बदलते मौसम के दिन
चल रही है पसीने के बिन
रज़ाई है कम्बल है
फिर भी ठंडी है
मुश्किल हो गया है लोगो का नहाना
सब ठंडी का नाम लेकर करेंगे बहाना
बदलते मौसम के दिन
अब कैसे रहे कम्बल के दिन
हो रही है आजकल जल्दी शाम
सुबह का नहीं ले रहा है नाम
इस ठंडी के मौसम में
ये कविता हमारे कवी नीरू के द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे | इनको कविता लिखना बहुत पसंद है, ये इस वक्त कक्षा 10 के छात्र है | ये यहाँ के बहुत होनहार छात्र है | इनको अपना घर में रहते हुए 8 साल हो गए है | ये हर काम में यहाँ के मदद करते है और इनका चरित्र बहुत अच्छा है |
गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026
बारिश हो रही है ज़ोरदार
कविता
रिमझिम रिमझिम
बहुत दिनों से लगता है मौसम नाराज़ है
हर तरफ से पानी है बरसा रहा
लगातार बारिश कहर है अपना दिखा रहा
घर के अंदर बैठे बैठे हो रहे है बोर
बारिश हो रही है जोर जोर
बच्चे भी खूब नहा रहे है
बारिश हो राजहि है जोर जोर
रिमझिम रिमझिम
कविता हमारे कवी विष्णु द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2024 में आये थे विष्णु इस समय कक्षा 4 में पढ़ते है | अपना घर में 2 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के |
मंगलवार, 29 सितंबर 2026
नई चीजों से करोगे शुरुआत
कविता
गलती से आगे सीखकर
आगे बढ़ते रहोगे इस साल
चाहे कितनी भी हो समस्या
सरे समस्या से भिड़कर
आगे बढ़ना है इस साल
नै साल में करोगे नै शुरुआत
पिछली गलतियों से सीखकर
आगे बढ़ते रहेंगे हर साल
कविता हमारे कवी नवलेश द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे नवलेश इस समय कक्षा 12 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |
सोमवार, 28 सितंबर 2026
गर्मी का मौसम है आया
कविता
हरे भरे पेड़ पौधों पर है फूल आया
गर्मी से पसीना टपक रहा है
पंखा हवा देना बंद कर दिया है
गर्मी का मौसम है आया
कभी गर्मी ठंडी
का महीना आता रहता है
जब पेड़ पर फूल आते है तो भोंरे भी घर से निकल आते है
गर्मी का मौसम है आया
कविता हमारे कवी बिट्टू द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे बिट्टू इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |
गुरुवार, 24 सितंबर 2026
हर किसी को बढ़ना है
कविता
बचपना छोड़ बड़ा होना है
अपनी अपनी मंजिल ढूंढ़ना है
मंजिल के लिए आगे बढ़ना है
कुछ बढ़ने के चक्कर में पड़कर
जीना भूल गए
अपना बचपना छोड़ जल्दी ही बड़े हो गए
खुद को आगे निकलना है
यही सोचकर लोग एकदूसरे से भिड़ गए
जीतने के लिए
सब एक दूसरे को हारने में लग गए
बचपना छोड़ बड़े हो गए
कविता हमारे कवीसाहिल द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे साहिल इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |
बुधवार, 23 सितंबर 2026
कभी कभी लगता है
कविता
कभी कभी लगता है
की मंजिल सामने है
न जाने अब क्या होगा
की अब मंजिल से दूर हो गया
ये वक्त का दिन अब देखना पड़ता है
की मंजिल मिलेगा या नहीं
कभी कभी लगता था मंजिल सामने है
कविता हमारे कवी शिवा द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे शिवा इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |
सोमवार, 21 सितंबर 2026
पेड़ो की है दुनिया निराली
कविता हमारे कवी रवि द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023 में आये थे रवि इस समय कक्षा 5 में पढ़ते है | अपना घर में 2 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |