कविता
जंगलों के बीच गया जो
लेना चाहता जान उसी से
किधर है वह जीवित गाछा
जिसकी नीचे मग्न हो
जंगल में मोर नाचा
रंग बिरंगे पछियों का जमघट
अन्य पछियों का आना झटपट
ऊँची चहचहाट और
कोमल की मीठी गान
डालता मोरो में जान
फिर नचाये दुन्दुन दमाकदुम
कौन है वह
सुना हो जिसने ये गाथा
मग्न हो जहाँ
ये कविता हमारे कवी पिंटू कुमार द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे पिंटू इस समय कक्षा 11 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |