मंगलवार, 12 जुलाई 2022

कविता : " धूप खिली चारों ओर "

" धूप खिली चारों ओर "

 धूप खिली चारों ओर | 

सुबह -सुबह हुई है भोर ,

हर तरफ है बादल घनघोर | 

बादल देख के नाचे मोर ,

है घर गली में शोर | 

धूप खिली है चारों ओर ,

कर देते मन को झकझोर | 

बादल गरजते आकाश ओर ,

कब पानी लेके बरसे जोर से |

धूप खिली है चारों ओर से ,

कविता : विक्रम कुमार , कक्षा : 12th 

अपना घर

 
                                                                   
 
              
                                               
                     

कोई टिप्पणी नहीं: