कविता
कैसे बिखर रही है लालिमा
श्रंगार करती दिख रहि है
शुशोभित है कितना
देखो खिलखिलाती फूलों को
हरी भरी सुकुमार कलियों को जिसकी सुगंध में डूब रही
जगमगाती जुगनू को भी
दिख रही है खूबसूरत
रत की रानी चाँद अपनी
कविता
कविता
नाम - नवलेश
कक्षा -12
कविता
(अपना घर )
कविता
कविता
कविता
नाम- साहिल
कक्षा-10
कविता
कविता
कविता
कविता
कविता
कविता
नाम-नवलेश कुमार
कक्षा -12
कविता
नाम- साहिल
कक्षा -10
कविता
नाम-गोविंदा
कक्षा -10
कविता
नाम-अप्तर
कक्षा-9
कविता
नाम- नवलेश
कक्षा -12
कविता
कविता
नाम -निरंजन
कक्षा- 10
कविता
कविता
कक्षा - 10 ( अपना घर )
कविता
कविता
के कमाए पैसों पर जीते है
धुप में तपते है पर काम
से पीछे नहीं हटते है
कष्ट तो होता है उनकों भी बहुत
पर मन से वह उड़ते है
बारिश में भी लगते है और
ठण्ड में हवाएं में भी जुटते है कष्ट तो होता है उनको भी बहुत
पर मन से उठते नहीं है
खुद की लड़ाई खुद ही लड़ते है
इंसाफ जहा मिलना चाहिए
उसके लिए भी भिड़ते है
कामयी तो अक्सर नहीं मिलती
पर खुलकर जीते है
कसगत तो होता है उनको भी
पर मन से उतट नहीं है
नाम- गोविंदा
क्लास -9
POEM
कविता
कविता
कवि - साहिल
कक्षा -9
(अपना घर )