बुधवार, 6 मई 2026

राजा महाराजा बन गया

कविता 
राजा महाराजा बन गया 
राज्य राजधानी बन गया 
कानून गले का फन्दा बन गया 
उन्न्ति के नाम पर 
इंसान इंसानियत भूल गया 
राजा महाराजा बन गया 
राज्य राजधानी बन गया 
चिड़िया पिंजरे में रहकर भी 
बकता है 'मै आज़ाद परिंदा हूँ' 
समझदार लोग अपनी 
अपनी समझ को गुल्लक में रख लिया 
सब ज्ञानियों के साथ खेल कर गया 
संग में उनके गेम कर गया है
घोटाला  कर गया 
कुछ गवाँर लोग मान के 
बैठे है समाज उन्नति को 
खुद जो है अनपढ़ वो भी सोच रहे है 
उनसे ही हो पायेगा उन्नति 
जो है पड़े लिखू वो घुम रहे है उनके पीछे 
 झूँठ बोल बोलकर लोगों को गुमराह कर रहे है 
पड़े लिखे लोगो को अपने पीछे घुमा रहे है
खुद कर्रप्ट है 
मगर खुद दूसरों को कर्रप्ट कहते है 
ऐसा प्रशाशन है जो देश को लूट रहा है 
राजा महाराजा बन गया 
राज्य राजधानी बन गया 

नाम-अप्तर

कक्षा-9      

 

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