कविता
राजा महाराजा बन गया
राज्य राजधानी बन गया
कानून गले का फन्दा बन गया
उन्न्ति के नाम पर
इंसान इंसानियत भूल गया
राजा महाराजा बन गया
राज्य राजधानी बन गया
चिड़िया पिंजरे में रहकर भी
बकता है 'मै आज़ाद परिंदा हूँ'
समझदार लोग अपनी
अपनी समझ को गुल्लक में रख लिया
सब ज्ञानियों के साथ खेल कर गया
संग में उनके गेम कर गया है
घोटाला कर गया
कुछ गवाँर लोग मान के
बैठे है समाज उन्नति को
खुद जो है अनपढ़ वो भी सोच रहे है
उनसे ही हो पायेगा उन्नति
जो है पड़े लिखू वो घुम रहे है उनके पीछे
झूँठ बोल बोलकर लोगों को गुमराह कर रहे है
पड़े लिखे लोगो को अपने पीछे घुमा रहे है
खुद कर्रप्ट है
मगर खुद दूसरों को कर्रप्ट कहते है
ऐसा प्रशाशन है जो देश को लूट रहा है
राजा महाराजा बन गया
राज्य राजधानी बन गया
राज्य राजधानी बन गया
कानून गले का फन्दा बन गया
उन्न्ति के नाम पर
इंसान इंसानियत भूल गया
राजा महाराजा बन गया
राज्य राजधानी बन गया
चिड़िया पिंजरे में रहकर भी
बकता है 'मै आज़ाद परिंदा हूँ'
समझदार लोग अपनी
अपनी समझ को गुल्लक में रख लिया
सब ज्ञानियों के साथ खेल कर गया
संग में उनके गेम कर गया है
घोटाला कर गया
कुछ गवाँर लोग मान के
बैठे है समाज उन्नति को
खुद जो है अनपढ़ वो भी सोच रहे है
उनसे ही हो पायेगा उन्नति
जो है पड़े लिखू वो घुम रहे है उनके पीछे
झूँठ बोल बोलकर लोगों को गुमराह कर रहे है
पड़े लिखे लोगो को अपने पीछे घुमा रहे है
खुद कर्रप्ट है
मगर खुद दूसरों को कर्रप्ट कहते है
ऐसा प्रशाशन है जो देश को लूट रहा है
राजा महाराजा बन गया
राज्य राजधानी बन गया
नाम-अप्तर
कक्षा-9
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