कविता
अकेला ही चलना है रास्ते पर
तय खुद करना है
कैसे जीना है इस बेमतलबी दुनिया मे
हर अवसर खास होगा पर
खुद तय करना है
कबतक लड़ना है यहाँ पर
हर लड़ाई अपनी न हो फिर भी
लड़ना है लोगों के लिए
इन रास्तो में मुश्किलें यूँ खड़ी होगी
जैसे कोई नामुराद पत्थर
राह का पत्थर हटाना है
अकेला ही चलना है रस्ते पर
तय खुद करना है
कैसे जीना है इस बेमतलबी दुनिया मे
हर अवसर खास होगा पर
खुद तय करना है
कबतक लड़ना है यहाँ पर
हर लड़ाई अपनी न हो फिर भी
लड़ना है लोगों के लिए
इन रास्तो में मुश्किलें यूँ खड़ी होगी
जैसे कोई नामुराद पत्थर
राह का पत्थर हटाना है
अकेला ही चलना है रस्ते पर
नाम - साहिल
कक्षा -10