गुरुवार, 11 जून 2026

भूल जाते है कदमो का आस

 कविता 

भूल जाते है कदमो का आस 
जो मेहनत से होता है पास  
वे करते है रोज़ प्रयास 
आकर फिर भी न जाने क्यों 
खुद से  दूर चला जाता है  
ठुकरा देता है ये समय 
भूल जाते है कदमो का आस 
जो मेहनत से होता है पास 
वे करते है रोज़ प्रयास 
नाम - रवि 

(अपना घर )

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