मंगलवार, 14 जुलाई 2026

बहुत अनजान है ये आसमां

कविता 

बहुत अनजान है ये आसमां 
दिन में लोगों को अपनी रौशनी से है दिया जला 
न जाने क्यों बेखबर है ये आसमां 
न दे दिन में चलने हवा 
न दे रात में थोड़ी सी भी राहत 
क्यों गर्मी जला देती है लोगों को 
बहुत अनजान है ये आसमान 
 न जीने का ठिकाना 
न राहत देने को है हवा 
अब बस चाहत यही है गर्मी न दुबारा वापस आना 
अपने संग न इतनी गर्मी लाना 
बहुत अनजान है ये आसमान 

नाम- अभिषेक 

कक्षा- 8 

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