बुधवार, 14 अप्रैल 2021

कविता : " मचा रहा कहर कोरोना "

 " मचा रहा कहर कोरोना  "

मचा रहा कहर  कोरोना ,

घर बैठे आ रहा रोना | 

बचा नहीं  कुछ करने को ,

रह गया अब सोना -सोना | 

सभी जगह है बोला -बोला ,

लोग जपने लगे गाली  | 

काम न करे वैक्सीन ,

 मर रहे है सब समय गिन -गिन 

कवि : अखिलेश कुमार , कक्षा : 1oth , अपना घर




कोई टिप्पणी नहीं: