सोमवार, 14 सितंबर 2026

बहुत है गर्मी ये हम मानते है

 

कविता 

 बहुत है गर्मी ये हम मानते है 
अक्सर बिजली नहीं आती 
ये सभी जानते है 
छह के भी कुछ नहीं कर सकते 
और फिर से बिजली का इंतजार करते है 
कुछ देर बिजली आती है 
और फिर वापस चली जाती है 
गुस्सा भी आता  है
परेशां भी होते है 
पर उम्मीदों को नहीं खोते है 
मुस्कुराते है और फिर से इंतजार करते है 

 कविता हमारे कवी गोविंदा   द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018   में आये  थे  गोविंदा  इस समय कक्षा 10   में पढ़ते है | अपना घर में 8   साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है 


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