शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

जब घर की दीवारे गिर जाये

 कविता 


तो सब उजड़ जाता है 
ये दुःख नहीं है 
ये दुःख तो तेरा दोस्त है 
सुख की तलाश में यहां वहां न फिर 
क्योंकि ये तो चंद दिनों साथ रहेगा तुम्हारे 
पर दुःख दोस्त बनकर किसी न किसी रूप में साथ रहेगा तुम्हारे 
गिरती हुई दिवार का दुःख मत झेल 
इस दुःख को दोस्त बना 
और फिर से दिवार को बना 
कविता हमारे कवी साहिल  द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018   में आये  थे  साहिल  इस समय कक्षा 10   में पढ़ते है | अपना घर में 8   साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है

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