कविता
तो सब उजड़ जाता है
ये दुःख नहीं है
ये दुःख तो तेरा दोस्त है
सुख की तलाश में यहां वहां न फिर
क्योंकि ये तो चंद दिनों साथ रहेगा तुम्हारे
पर दुःख दोस्त बनकर किसी न किसी रूप में साथ रहेगा तुम्हारे
गिरती हुई दिवार का दुःख मत झेल
इस दुःख को दोस्त बना
और फिर से दिवार को बना
कविता हमारे कवी साहिल द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे साहिल इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है
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