कविता
बदल रहा है रोज़ मौसम
कभी लगता कडुआ धुप
तो कभी दिखने लगता औसम
कभी तो बरसात की धुन में लगा रहता
कभी सूरज अपना झलक दिखा देता
हर चाँद मिंटो में बदलता रहता
कभी तो बारिश आकर बरसा देता
जिनको लोग न गईं पता
हर समय मौसम अपना अहसास है दिलाता
कभी पानी बरसता तो कभी धुप निकालता
कभी लगता कडुआ धुप
तो कभी दिखने लगता औसम
कभी तो बरसात की धुन में लगा रहता
कभी सूरज अपना झलक दिखा देता
हर चाँद मिंटो में बदलता रहता
कभी तो बारिश आकर बरसा देता
जिनको लोग न गईं पता
हर समय मौसम अपना अहसास है दिलाता
कभी पानी बरसता तो कभी धुप निकालता
कविता हमारे कवी अजय कुमार द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2014 में आये थे अजय इस समय कक्षा 12 में पढ़ते है | अपना घर में 14 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है
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