मंगलवार, 9 जनवरी 2018

कविता: काले बदल छाया है

"काले बदल छाया है" 

काले बदल छाया है, 
पानी बरसाने की  संभावना है | 
गरज रह था कड़ -कड़, 
बरस रहा था भड़ -भड़ |  
मेंढक की खुशीयां लाया है,
पानी में खूब नहाया है |  
जीवों को साथ में बुलाया हैं, 
सभी मिलकर बरसात का | 
आनंद जी भर के उठाया है | |  

नाम : विक्रम कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं अपने विक्रम भाई जो की बिहार के नवादा जिला से कानपुर जिला में पढ़ाई करने के लिए आये हुआ है | पढ़ाई में हमेशा अच्छे होने की कोशिश करते हैं |   

1 टिप्पणी:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’ऐतिहासिकता को जीवंत बनाते वृन्दावन लाल वर्मा : ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...