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गुरुवार, 24 मार्च 2011

कविता - काम की तलाश में

 काम की तलाश  में 
मैं रोज सुबह उठता हूँ 
काम की तलाश  में जाता हूँ 
काम मिला तो कर लिया 
नहीं तो वापस आ गया
घर में यूँ ही बैठकर
कुछ काम करने के लिए  सोचता हूँ
अगर काम मिल जाता हैं तो उसे करता हूँ
रोज मेहनत करता हूँ 
आखिर इतनी मेहनत क्यों करता हूँ 
शुरू से लेकर आखिरी  तक मेहनत करता हूँ 
बिना रुके बिना झुके खूब मेहनत करता हूँ 
जब तक प्राण निकल न जाये 
तब तक रोज मेहनत करता हूँ 
केवल दो रोटी के लिए मेहनत करता हूँ 
शारीर को कभी आराम नहीं दे पता हूँ
ऐसे ही काम  करते - करते थक कर मर जाता हूँ
लेखक -मुकेश कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर , कानपुर






बुधवार, 23 मार्च 2011

कविता - मच्छर का गाना

कविता - मच्छर का गाना 
सुनो -सुनो सब भाई- बहना ,
मैंने सुना हैं मच्छर का गाना ...
गाने में क्या लय थी और सुर ताल,
सुनकर गाना हुआ  मैं बेहाल ...
गाना तो वह  ऐसा गाते ,
हाँ -हाँ कर जैसे हम हँसते....
ज्यादा गाना याद नहीं हैं ,
ये बात हकीकत हैं कोई जोग नहीं हैं .....
एक लाईन याद मुझे हैं आयी ,
खून पियेंगे हम सब मच्छर भाई....
नींद खुली जब हमने देखा ,
मुझे हुआ बहुत ही धोखा ....
मच्छरों का मुझ पर जाल बिछा था ,
एक मच्छर आ कान में कुछ कह रहा था .....
सो जा मेरे प्यारे राजा मुन्ना ,
हम पेट भरेंगे सुना के तुझको गाना....
लेखक - आशीष कुमार 
कक्षा - ८ अपना घर , कानपुर


सोमवार, 7 मार्च 2011

कविता -गर्मी

कविता -गर्मी 
गर्मी हैं आने वाली ,
सबका पसीना छुड़ाने वाली....
गर्मी में जब उगता सूरज ,
तब सबको दिखता हैं पूरब.....
गर्मी में जब पकते हैं आम ,
इसलिए आमो के कम हो जाते हैं दाम.. 
गर्मी हैं अब आने वाली  ,
सबका पसीना हैं छुड़ाने वाली......                                                                                                                                                                                                                                                                                                                   
लेखक - ज्ञान 
कक्षा - ७, अपना घर , कानपुर