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गुरुवार, 2 जून 2011

कविता -बढ़ता ही गया

बढ़ता ही गया 
रात को किसी के घर से निकला ,
वो था शायद अन्दर से पगला .....
शायद वो नयी राह चला था ,
किसी के पैसे के झंझट में पड़ा था......
रास्ते में उसको एक राही मिला ,
जैसे उसको लगा कोई पहाड़ खड़ा....
लेकिन वो पहाड़ से टकरा कर आगे बढ़ा,
और आगे जीवन में बढ़ता ही गया .....
रात को किसी के घर निकला ,
वो था शायद अन्दर से पगला .....
लेखक -ज्ञान कुमार 
कक्षा -८ अपना घर ,कानपुर

गुरुवार, 24 मार्च 2011

कविता - भारत में कोई नहीं बोलने वाला

 भारत में कोई  नहीं बोलने वाला  
देश में अपने होता घोटाला ,
नेता -मंत्री न कोई बोलने वाला ....
नेता मंत्री क्यों बोले ,
अपना मुँह वह क्यों खोले ....
नेता मंत्री खुद करते है घोटाला,
लगाके गोदामों में ताला ....
राजा हो या कलमाड़ी ,
सब के सब करते हैं घोटाला...
भारत में कोई नहीं बोलने वाला,
ये हैं देश के भ्रष्ट नेता ....
गरीबों की रोजी मारे,
पैसों से भरते अपने झोले....                                                                                                  देश में अपने होता  घोटाला, 
नेता -मंत्री न कोई  बोलने वाला ....
लेखक - मुकेश कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर , कानपुर

कविता - काम की तलाश में

 काम की तलाश  में 
मैं रोज सुबह उठता हूँ 
काम की तलाश  में जाता हूँ 
काम मिला तो कर लिया 
नहीं तो वापस आ गया
घर में यूँ ही बैठकर
कुछ काम करने के लिए  सोचता हूँ
अगर काम मिल जाता हैं तो उसे करता हूँ
रोज मेहनत करता हूँ 
आखिर इतनी मेहनत क्यों करता हूँ 
शुरू से लेकर आखिरी  तक मेहनत करता हूँ 
बिना रुके बिना झुके खूब मेहनत करता हूँ 
जब तक प्राण निकल न जाये 
तब तक रोज मेहनत करता हूँ 
केवल दो रोटी के लिए मेहनत करता हूँ 
शारीर को कभी आराम नहीं दे पता हूँ
ऐसे ही काम  करते - करते थक कर मर जाता हूँ
लेखक -मुकेश कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर , कानपुर






सोमवार, 7 मार्च 2011

कविता -गर्मी

कविता -गर्मी 
गर्मी हैं आने वाली ,
सबका पसीना छुड़ाने वाली....
गर्मी में जब उगता सूरज ,
तब सबको दिखता हैं पूरब.....
गर्मी में जब पकते हैं आम ,
इसलिए आमो के कम हो जाते हैं दाम.. 
गर्मी हैं अब आने वाली  ,
सबका पसीना हैं छुड़ाने वाली......                                                                                                                                                                                                                                                                                                                   
लेखक - ज्ञान 
कक्षा - ७, अपना घर , कानपुर