कविता
हो रही है बारिश दिन रात
हम करते है सूरज निकलने की बात
कब आये सूरज दादा
फैलाये अपनी किरण
दुनिया में आधा आधा
कह दो सूरज दादा से
उनको नमस्कार करेंगे
जल्दी निकले उन्हें देखकर सर झुकायेंगे
ये कविता हमारे कवी रोहन द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023 में आये थे नीरू इस समय कक्षा 7 में पढ़ते है | अपना घर में 3 साल से रह रहे है | |
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