मंगलवार, 18 अगस्त 2026

दुनिया तो चल ही रही है

कविता 

दुनिया तो चल ही रही है 
इस दुनिया में अच्छाइयों के साथ 
बुराइया भी बढ़ रही है 
दुसरो को बुरा मत कहना 
ऐ सुनो 
तुमसे ही तो माहौल बन रहा है 
हर बार का ये झूठ 
ये कहना कुछ भा नहीं रहा है 
 सब अपनी अपनी राह के राही है 
कुछ झूठ के साये के तो 
तो कुछ सच  के साथी है 
झूठी दुनिया का क्या भरोसा है 
सच का कुछ वजूद ही फीका है 
सचाई को जो बचा रहा है 
वह भी अपनी पहचान लगता  है खो रहा है 


ये कविता हमारे कवी साहिल  द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018   में आये  थे साहिल   इस समय कक्षा 10   में पढ़ते है | अपना घर में 10  साल से रह रहे है |  |  

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