कविता
दुनिया तो चल ही रही है
इस दुनिया में अच्छाइयों के साथ
बुराइया भी बढ़ रही है
दुसरो को बुरा मत कहना
ऐ सुनो
तुमसे ही तो माहौल बन रहा है
सब अपनी अपनी राह के राही है
कुछ झूठ के साये के तो
तो कुछ सच के साथी है
झूठी दुनिया का क्या भरोसा है
सच का कुछ वजूद ही फीका है
सचाई को जो बचा रहा है
वह भी अपनी पहचान लगता है खो रहा है
इस दुनिया में अच्छाइयों के साथ
बुराइया भी बढ़ रही है
दुसरो को बुरा मत कहना
ऐ सुनो
तुमसे ही तो माहौल बन रहा है
हर बार का ये झूठ
ये कहना कुछ भा नहीं रहा है सब अपनी अपनी राह के राही है
कुछ झूठ के साये के तो
तो कुछ सच के साथी है
झूठी दुनिया का क्या भरोसा है
सच का कुछ वजूद ही फीका है
सचाई को जो बचा रहा है
वह भी अपनी पहचान लगता है खो रहा है
ये कविता हमारे कवी साहिल द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे साहिल इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 10 साल से रह रहे है | |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें