सोमवार, 20 जनवरी 2020

कविता : बेजान सी सर्दी

" बेजान सी सर्दी "

ओस की बूंदें बता रहीं हैं,
यूँ ही सर्दी में हमें सता रही हैं | 
हथकड़ियाँ पहनाकर बंद कर दी है,
क्या बताऊँ बाहर इतनी सर्दी है | 
ठण्ड हवा सांसों में समाए,
घर में ही रहें बाहर कहीं न जाए | 
सर्द में सभी को सताती है,
सूरज को भी अपनी बातों में फसाती है | 
यह कितनी बेजान सी नरमी है,
क्या कहूं इसी का नाम सर्दी है  |  


कवि : प्रांजुल कुमार ,कक्षा : 10th , अपना घर 
कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | 

कोई टिप्पणी नहीं: