रविवार, 7 जुलाई 2019

कविता : बारिस

" बारिस " 

रिमझिम - रिमझिम बारिस आई,
अपने संग काले बादल लाई |
लहराते हुए हवाओं में,
पेड़ों की बौछारों में |
ख़ुशी चहचाहट लाई,
खेतों में हरियाली लाई |
रिमझिम -रिमझिम सी बारिस आई,
अपने संग काले बादल लाई |
बूँदों के गिरने से हम,
भूल गए हम अपने सारे गम |
बूँदों ने खुशियां ही भर दी,
सब जगह को हरियाली कर दी |

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर


कवि परिचय : यह हैं सार्थक जिन्होंने यह कविता लिखी है जिसका शीर्षक है " बारिस " | सार्थक मूल रूप से बिहार के निवासी हैं | वर्तमान समय में अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | सार्थक को खेलना बहुत अच्छा लगता हैं | पढ़ लिखकर इंडियन आर्मी में जाना चाहते हैं |

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