शनिवार, 19 अगस्त 2017

कविता- प्यारे बनो ,न्यारे बनो

प्यारे बनो ,न्यारे बनो 

प्यारे बनो ,न्यारे बनो,
सबके दिल के दुलारे  बनो | 
करो सदा अच्छे काम ,
जिससे हो जग में तेरा नाम | 
जागनी  पड़ेगी सारी  रात, 
अगर  पाना चाहते हो अपना पथ |  
समय को कभी नहीं करना बर्बाद, 
हमेशा रखना यही याद | 
जिंदगी का लो पूरा आनंद, 
जैसे जिए थे विवेकानंद | 
कवि -देवराज कुमार , कक्षा - 7th ,अपनाघर 


कवि परिचय :  बिहार के रहने वाले देवराज | आजकल कविताओं के बादशाह माने जाते है | ये हमेशा कुछ नई सोच  के साथ अपनी कविताओं  को ख़ूबसूरत बनाते है | ये क्रिकेट खेल में भी माहिर है|  ए बी डिविलियर्स इनके बेस्ट खिलाडी है | इनको   डांस करना बेहद पसंद है | उम्मीद है की ये हमेशा नई सोच के साथ अपनी कविता को लिखेगें | 

8 टिप्‍पणियां:

'एकलव्य' ने कहा…

बहुत ख़ूब ! अतिसुन्दर रचना बेहद शिक्षाप्रद बेटा लिखते रहिए मेरी शुभकामना आपके साथ है आभार "एकलव्य"

'एकलव्य' ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 21 अगस्त 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"

yashoda Agrawal ने कहा…

शुभ प्रभात
कानपुरिया देवराज
पहले ही आतंक था चोटी काटने वाके का
अब कान काटने वाला कानपुरिया का आने वाला है
अशेष शुभकामनाएँ...
सादर

विश्वमोहन ने कहा…

भविष्य के भोर, नव सृजन के साज!
चरैवती , चरैवती, चरैवती देवराज !!..... बधाई और शुभ कामना!!!

Ritu asooja rishikesh ने कहा…

बहुत ही शिक्षाप्रद रचना लखते रहो ,बधाई।

Sudha Devrani ने कहा…

बहुत सुन्दर...
शुभकामनाएं...

BAL SAJAG ने कहा…

Vishwa Mohan Jee
आपके हौसलाफजाई और बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
बाल सजग टीम

BAL SAJAG ने कहा…

Sudha Devrani
Many - many thanks to read the poem .