शनिवार, 13 जून 2009

कविता: आओ सीखे गिनती

एक बोलो एक
एक बोलो एक उड़ती चिरैया देख।
दो बोलो दो हाथ साफ से धो॥
तीन बोलो तीन बच्चों बजाओ बीन।
चार बोलो चार आ चलें बाजार॥
पॉँच बोलो पॉँच आ बंदरिया नाच।
छ: बोलो छ: सब बच्चों की जय॥
सात बोलो सात आ चले बारात।
आठ बोलो आठ बच्चों बिछाओ खाट॥
नौ बोलो नौ गिनती सीखो सौ।
दस बोलो दस बच्चों चलाओ बस॥
कविता: मुकेश कुमार, कक्षा ७, अपना घर

2 टिप्‍पणियां:

ओम आर्य ने कहा…

बहुत आसानी से आपने गिनती और कविता दोनो ही चीजो को सिखा दी........

डा0 हेमंत कुमार ♠ Dr Hemant Kumar ने कहा…

Ginatee sikhane ka bahut badhiya tareeka..achchha laga.
HemantKumar