बुधवार, 21 नवंबर 2018

कविता : धरती को स्वच्छ बनाएँ

" धरती को स्वच्छ बनाएँ "

आओ इस धरती को स्वच्छ बनाएँ,
हरे भरे पेड़ लगाकर इसे बचाएँ | 
 आओ  हाथ इसमें लगाओ,
हर यादगार दिन में पेड़ लगाओ | 
 सभी भाई बहन के साथ,
आओ इस मौके को बनाए खास | 
दो चार पेड़ लगाओ घर के आसपास,
जो बना दे हर दिन खास | 
जिंदगी का बदल दो नज़ारा,
जिससे चमक जाए यह जग सारा | 
आओ इस धरती को स्वच्छ बनाएँ,
हरे भरे पेड़ लगाकर इसे बचाएँ | 

कवी : संतोष कुमार , कक्षा : 5th ,  घर 

कवी परिचय :  यह कविता कक्षा पॉँच में पढ़ने वाले संतोष की है जो की बिहार के रहने वाले हैं | संतोष को फुटबॉल खेलना बहुत पसंद है और वह बड़ा होकर एक फुटबॉल का खिलाडी बनना चाहता है | 

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (26-11-2018) को "प्रारब्ध है सोया हुआ" (चर्चा अंक-3167) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक