मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

कविता : " कर्ण "

 "  कर्ण हूँ मैं   " 
जिसने मौत भी को ललकार दिया ,
युद्ध के मैदान में वीरो को भी पछाड़ दिया। 
थे वो एक महापुरष , 
न नसीब हो पाया माँ का प्यार।  
क्रोध भयंकर आता था लेकिन किया उनको नाकार 
युद्व के लिए हमेशा रहते थे वो त्यार। 
लोगो ने निचा कहा  और अपमान किया,
परशुराम ने दिया कर्ण को विद्द्या ,
महा युद्धा  कर्ण हमेशा से किया प्रतिज्ञा। 
और कोई नहीं वह परशुराम का शिष्य दानवीर कर्ण हुआ। 
उसभरे समाज में कर्ण ने अर्जुन को भी ललकारा दिया। 
फिर कर्ण का  देख यह रूप कुंती भी नाकार किया। 
था गुरु परशुराम मेरा नाम दानवीर कर्ण हुआ। 
जिसने मौत भी को ललकार दिया ,
युद्व के मैदान में विरो को पछाड़ दिया। 
कवि : निरु कुमार , कक्षा : 9th,
अपना घर। 

सोमवार, 31 मार्च 2025

कविता : " कभी काम आएगे "

" कभी काम आएगे "   
 वक्त पड़ने पर सब आते है ,
काम हो जाने के बाद चले जातें है। 
वो सिर्फ आप के साथ रहने का दिखवा करते है। 
और तुरंत ही भूल जाते है ,
छड़ भर  में वो बदल जाएगे। 
हमें आधे रास्ते पर ही छोड़ जाएगे। 
तो वो नजर कहा आएगे ,
हमारे साथ रहने का दिखावा करते है। 
जब काम पड़ता है ,
तब छड़ भर में ही भूल जाते है। 
 वक्त पड़ने पर सब आते है ,
काम हो जाने के बाद चले जातें है। 
कवि :मंगल कुमार, कक्षा : 9th,
अपना घर। 

कविता : " काम करो "

"कुछ काम करो  " 
 सुबह हो गया दोस्तों ,
उठाकर थोड़ा सा काम करो। 
क्या सोते रहोगे दिन भर ,
भविष्य में तुम पछताओगे। 
सुबह हो गया दोस्तों ,
उठकर थोड़ा सा काम करो। 
सोते - सोते मोटा हो जाओगे ,
उठकर थोड़ा काम करो। 
सुबह का ये मौसम बहुत अच्छा होता है। 
जल्दी उठकर काम करो। 
कवि : अवधेश कुमार, कक्षा : 12th,
 अपना घर। 

रविवार, 30 मार्च 2025

कविता : " माँ "

 "  मेरी माँ " 
ये लव्ज है तो उन्ही की बदौलत।  
जिंदगी भी तो उन्ही की बदौलत। 
जननी होकर मेरी अम्मा दरजा निभा  लिया। 
इतने काबिल है तो उन्ही की बदौलत ,
खुशियाँ  जिंदगी भेंट में दे दी। 
जिंदगी में मेरा नसीब लिख  दिया ,
दिग्गज है औलाद पर जिसने अपने अम्मा को भुला दिया ,
मेरी तो जान है वो। 
 जिसे मैने  हृदय  में बैठा। 
ये लव्ज है तो उन्ही की बदौलत।  
जिंदगी भी तो उन्ही की बदौलत। 
कवि : नवलेश कुमार , कक्षा : 10th ,
अपना घर। 

शुक्रवार, 28 मार्च 2025

कविता : " क्या लिखू "

 "  क्या लिखू "
लाइनों में न है कुछ खास ,
क्या लिखू न विचार है मेरे पास। 
सम्मान और आदर का रखता न मै आश , 
झूठी बातो से न करते अपने कविता का सारांश।  
तुम्हे मै क्यों बताऊ अपने मन की बात ,
सच्चे लोग , सच्चे बात।  
याद रखो लिखूँगा वही जो लगते अच्छे। 
लाइनों में न है कुछ खास , 
क्या लिखू न विचार मेरे पास। 
कवि : निरंजन कुमार , कक्षा : 9th,
अपना घर। 

कविता : " आशमा के दूर कही ,है एक जहां "

 "  आशमा के दूर कही ,है एक जहां  " 
 आशमा के दूर कही ,है एक जहां 
है तो वो पास नहीं ,पर जाना है वहां। 
रास्ते में रूकावट तो आएगी ही 
पर हमें भटकना नहीं है यहां - वहां। 
आशमा के दूर कही , है एक जहां 
हालातो से रोना नहीं है 
बस मेहनत करना है सोना नहीं है 
आज नहीं तो कल सही पर जाना है वहां। 
 आशमा के दूर कही ,है एक जहां 
जब मिलेंगे लोग हमसे , करेंगे बाते 
उनमे से कुछ लोग पूछ भी लिया करते है  
की बड़े होकर रहना है कहां 
आशमा के दूर कही , है एक जहां 
है तो वो पास नहीं ,पर जाना है वहां। 
कवि : गोविंदा कुमार , कक्षा : 9th,
अपना घर। 

गुरुवार, 27 मार्च 2025

कविता : " गैर लोग "

 " गैर लोग "
जो हमसे नजरे चुराते है 
या फिर लव्जो में कडुवाहट लाते है
अरे भूल गए हम उनको 
जो हमारे बारे में गलत फरमाते है। 
कष्ट उनको ना झेलना पड़े 
इस लिए हम शांत रहते 
वरना नजरे चुराना तो हमें भी आता है। 
लव्जो में कडुवाहट हम भी ला सकते है 
बस उनको कष्ट ना हो 
इसलिए हम थोड़ी सी लाज़ रखते है। 
समय आने पर मुँह मोड़ लेते है 
या फिर बोलना ही  छोड़ देते है 
 अरे छोड़ो गैर लोगो पर ध्यान देना 
जो अपनो से ही लड़ जाते है। 
खाख सफलता आए जिंदगी में उनकी 
 जो लोगो के बीच नफ़रत फहलाते है
अरे छोटी सी जिंदगी ही तो है 
अगर साथ जी ले तो क्या चला जाएगा 
बस अपने को जताने के लिए के लिए 
ईगो साथ में रखते है। 
कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 10th ,
अपना घर। 

गुरुवार, 20 मार्च 2025

Poem: " End - up of Examination "

  " End - up of Examination "
Ready for the end - up of examination,
after then there will be a Vacation. 
Children can have time learn and spend,
because there will be a dance, music will held. 
many students can also go to home,
to give time to Family and to Roam. 
there will be the time for the result of the year, 
after this new session will be near.
In new session, new class with new friends
and new teachers will be there,
lots of happiness will come with tear.
Ready for the end - up of examination,
I wish you enjoy you all summer vacation.

Poet: Pankaj Kumar, class: 10th,
Apna Ghar.

मंगलवार, 18 मार्च 2025

कविता : " होली आई "

 " होली आई " 
आ गया है होली का त्योहार। 
आ गया है रंगो का त्योहार। 
लोग भेद - भाव जैसा नहीं करते है व्यवहार , 
चाहे हिन्दू हो या मुश्लिम , 
सब मिलकर मनाते है  त्योहार।  
खुशियाँ लहलाती धीरे - धीरे मे ,
ये है होली का त्योहार। 
खाएगे चुर्री और गुजिया ,
बटेगे सबको प्यार। 
खुशी खुशी मे मनाऐंगे ,
ये होली का त्यौहार ,
आ गया है रंगों  का त्योहार। 
कवि ; नवलेश  कुमार , कक्षा : 10th, 
अपना घर। 

कविता : " परेशानी "

 " परेशानी "
कितनी बदली हुई है महफिले ,
जो फुर्सत नहीं किसी को, 
जो गुजरे हुआ कल को निहारे ,
हर किसी की अपनी परेशानीयाँ है। 
इन परेशानियाँ कि अपनी कहानियाँ है। 
जहा देखू उदासीन मिले जहान सारा ,
ना जाने क्यों बना बैठा बेगाना ,
नजरे भी अब झुक जाती है। 
इन नराहो पर जवाब दे जाती है। 
इन परेशानियाँ न जाने कितनी को दुख दे जाती है। 
कभी - कभी सोचता हूँ सब खत्म हो जाए ,
ये दुखो का पहाड़ कही गुम हो जाए। 
इतनी फुर्सत  नहीं है अब अपने को ,
जो देख सके बीते हुए सपने को ,
वो मस्त बचपन खेल राह था सपने को ,
मन की बात छपा न पाया मन में ,
अब कहाँ छिपाए इन परेशनियाँ को। 
कोई जगह नहीं जहाँ रखू इन कहानियों को। 
कवि : साहिल कुमार , कक्षा : 9th,
अपना घर। 

कविता : " ये मंजिल क्यों , क्यों है ये राह "

 " ये मंजिल क्यों , क्यों है ये राह "  
 तेरी मैं तलाश में 
मन - मन भटकता हूँ ,
हुआ नहीं कभी भेट ये मंजिल से  ,
एक बैठा जा किस वन - बाग में ,
दिखता नहीं तू कैसा है रे ,
धुँधला - धुँधला क्यों राह में ?

उम्मीदे झलख रही है ,
मन यूँ ही निराश है ,
चार कदम चले बिना है।  
चरण छितराए विराम करुँ, 
पड़ा हु आधी राह में। 
पूछ रहा हूँ तुझसे ये मंजिल ,
गुमसुम , क्यों है ये राह में ? 

माँ - बहन के हाथों खाए ,
हो रहे हैं लम्बे वक्त। 
ठेंस - ठेंस है यहाँ पे इतना ,
की भर आए मेरे आँख ये मंजिल। 
इस जख्म को करे कौन मरहम - पट्टी ,
मैं अकेला ही इस एकांत में। 
कहाँ मिलेगी सतरंग ये मंजिल ,
गरीबी  क्यों है ये राह में। 
कवि : पिंटू कुमार ,कक्षा : 10th,
अपना घर।  

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