शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

कविता : तोता राजा

" तोता राजा "

तोता राजा  तोता राजा,
तुम कितने ही प्यारे हो | 
तुम अपने ये पंख कहाँ से लाए हो,
तोता राजा तोता राजा 
छोटी सी चोंच कहाँ से लाए हो,
तुम कितने ही सरमते हो 
मीठा मीठा  गीत गाते हो |

कवि : शिवा कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता शिवा के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | शिवा ने इस कविता का शीर्षक " तोता राजा " दिया है | शिवा एक पुलिस अफसर बनना चाहते हैं |  

गुरुवार, 21 नवंबर 2019

कविता : दोस्ती

" दोस्ती "

अरे यह दोस्ती है,
जिसको कभी नहीं भूल सकते | 
अरे यह दूसरों की ख़ुशी है,
हर चेहरे पर मुस्कराहट है | 
कभी नहीं भूल सकते,
बीता हुआ समय ,आने वाला समय को, 
कभी सोच नहीं सकते | 
जीवन में बाधाएं आती है,
पर हमें उनका सामना करना चाहिए | 
अरे यह दोस्ती है,
जिसको कभी नहीं भूल सकते | 

कवि : अमित कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता अमित के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | अमित को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक  है और बहुत सी कवितायेँ लिख भी चुके हैं उनमें से यह भी एक कविता है जिसका शीर्षक " दोस्ती" है | अमित पढ़ाई में बहुत अच्छा हैं | हमें उम्मीद है की अमित और भी रोचक भरी कवितायेँ लिखेंगें | 

बुधवार, 20 नवंबर 2019

कविता : एक नेक इंसान बन

" एक नेक इंसान बनना है "

दुकान जाना है,
वहां से किताब ,कॉपी लाना है |
हमें दिमाग लगाना है,
भारत देश को स्वस्थ बनाना है |
चेहरों पर खुशियाँ लाना है,
दोस्तों से मिलने जाना है |
हमें पढ़ाई में दिमाग लगाना है,
पूरे में से पूरे नम्बर लाना है |
हमें स्कूल पढ़ने जाना है,
पढ़ाई में दिमाग लगाना है |
हमें पेपर देना है,
हमें अपनी प्रतिभा को पहचानना है |
हमें एक नेक इंसान बनना है,
महा पुरुषों की राह को अपनाना है |

कवि : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता नवलेश के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " नेक इंसान बनना है " है | इस कविता के माध्यम से नवलेश एक नई जीवन की और जाने की शिक्षा दे रहा है की हमें एक नेक इंसान बनना है | नवलेश पढ़ाई में बहुत अच्छा है | 

मंगलवार, 19 नवंबर 2019

कविता : जिंदगी को अपने शरण देती हैं

" जिंदगी को अपने शरण देती हैं "

मैं  उस आसमाँ के बारे सोचता हूँ, 
जो इतने सरे जिंदगी को अपने शरण देती हैं | 
मैं उस बात को सोचता हूँ,
जो कुछ अजीब सा जिंदगी देते हैं | 
कभी - कभी मैं कुछ और सोचता हूँ,
जो हंसी  और उल्लास से भर देती है | 
एक मनुष्य इतने सारी गलतियाँ 
इस स्तिथि में रहना सीख लें | 

कवि : विक्रम कुमार ,  कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता विक्रम के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | विक्रम को कवितायेँ लिखने  बहुत शौक है | विक्रम  ने इस कविता का शीर्षक " जिंदगी को अपने शरण देती हैं " दिया है | इस कविता के माध्यम से हमें बहुत ही शिक्षा मिलती है 

रविवार, 17 नवंबर 2019

कविता : बूँद

" बूँद "

देखो क्या क्या लाई बूँद,
पत्तों से फिर टपकती बूँद |
मोती जैसी चमकती बूँद,
जैसे कोई इंद्रधनुष | 
सीधे आकर जमीं पर,
गिरती थकी हुई सी लगती है | 
यही चाहते हैं हैं हम सारे
कल फिर से बरसों बून्द | 

कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 5th , अपनाघर

कवि परिचय : यह कविता सुल्तान के द्वारा लिखी गई है  जो की बिहार के रहने वाले हैं  |  सुल्तान को कवितायेँ लिखना बहुत पसंद है | सुल्तान ने इस कविता का शीर्षक " बूँद " दिया है | सुल्तान पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं और और अच्छे बनने की कोशिश करते हैं | 

गुरुवार, 14 नवंबर 2019

कविता : भारत देश

" भारत देश "

भारत  देश है सबसे अच्छा,
हर एक बच्चा बोलता सच्चा |
जिन्होंने अंग्रेजों को मार भगाया,
वही भारत माँ का सच्चा बच्चा |
भगत सिंह ,राजगुरु को दे दिया फँसी,
तब भी बोल बाहें थे हम है भारतवासी |
जहाँ लोग बच्चों को मौका देते,
बच्चों को पढ़ाते और खिलाते |  
भारत  देश है सबसे अच्छा,
हर एक बच्चा बोलता सच्चा |

कवि : गोविंदा कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता गोविंदा के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " भारत देश " है | यह गोविंदा की पहली कविता है इन्होने इस कविता को लिखनेके लिए बहुत कोशिश की थी | गोविंदा एक बहुत ही होनहार छात्र है पढ़ाई के साथ - साथ खेल कूद में भी अच्छा है | 

बुधवार, 13 नवंबर 2019

कविता : पेड़ की इच्छा

" पेड़ की इच्छा "

एक छोटे से पौधे को,
जरा पानी देकर तो देखो | 
वे जन्नत जैसा महसूस करेंगें,
तेरे हर सफर में साथ देंगें | 
चाहे वह एक मुसाफिर की तरह हो,
वे अपने छाया में तुझे बैठाएंगे | 
तेरी हर कठिनाई को झेलेगा,
तेरे लिए एक नया संसार बनाएगा | 
जीवन को खुशियों से भर देगा,
तेरी जरूरतों को पूरा कर देगा | 
जरा पानी तो देकर देख, 
वह तेरे लिए क्या बन जाएगा | 

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सार्थक के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | सार्थक को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | यह कविता एक पेड़ की इच्छा के प्रति लिखी है | सार्थक पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं | सार्थक इस कविता के द्वारा एक सीख देना चाहता है | 

मंगलवार, 12 नवंबर 2019

कविता : पर्यावरण को स्वच्छ बनाना होगा

" पर्यावरण को स्वच्छ बनाना होगा "

दिल्ली में छाई धुंध,
हो रही है कठिनाइयाँ खूब | 
तापमान बढ़ता जा रहा है,
प्रदूषण का प्रकोप मंडरा रहा है | 
जनता हो रही है बेबस,
बच्चो को झेलना पड़ रहा है शोषण | 
अब सुधरा दिल्ली अगर,
तो बच जाएगा यह जगत | 
अब लोगों को करना है हड़ताल,
जब हो गया सब बर्बाद | 
देश हो रहा है बेकार,
न जाने कब सुधरेगा यह संसार | 
जल बचावके लिए लड़ना होगा,
नै पीढ़ी के लिए कुछ करना होगा | 
जगह जगह पेड़ लगाना होगा,
 पर्यावरण को स्वच्छ बनाना होगा | 

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वे हैं | कुलदीप ने इस कविता का शीर्षक " पर्यावरण को स्वच्छ बनाना होगा " दिया है क्योंकि हर दिन पर्यावरण ख़राब ही होता जा रहा है लोग इसके लिए जागरूक नहीं है इसीलिए यह कविता उन लोगों के लिए है जिसमें दिल्ली एक उदहारण है | कुलदीप को कवितायेँ लिखना बहुत पसंद है | 

सोमवार, 11 नवंबर 2019

कविता : पानी

" पानी "

हाथ धोऊँगा पानी से,
मुन्ना कहता नानी से |
प्यासे को पानी पिलाना चाहिए,
पानी को स्वास्थ्य रखना चाहिए,
हम जाने कितना पानी है,
ये तो बहुत बड़ी कहानी है |
कहीं ओस है तो बर्फ है कहीं,
पानी ही क्या भाप नहीं | 
धरती पर जीवन लाया,
पानी सींचकर खेत लहराया | 

कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सुल्तान के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " पानी " है | सुल्तान को कवितायेँ लिखने  का बहुत शौक है | यह कविता पानी की सुरक्षा क लिए है | सुल्तान को कवितायेँ लिखने का बाहत शौक है | 

रविवार, 10 नवंबर 2019

कविता : आज़ादी नहीं है

" आज़ादी नहीं है "

हम उदास  नहीं हैं,
हमें उदास कर दिया गया है |
हम हँसना चाहतें हैं ,
सबके सामने
पर हंसने नहीं दिया जाता है |
 नहीं देते हमें पूरी आज़ादी,
घूमने की और कहीं जाने की |
नहीं देते आज़ादी,
अपने इच्छा को प्रकट करने की |
मन तो विचल रहा है,
पर इसे यूँ ही रोक दिया जाता है |

कवि : राज कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता राज के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " आज़ादी नहीं है " है | राज ने यह कविता किसी सन्देश पर लिखी है की कैसे अपना समाज सभी को दबाता है आज़ादी नहीं देता है |

कविता : मत कर तू बुराई

" मत कर तू बुराई "

अब बहुत हो गया है भाई,
अब तू न कर मेरी बुराई |
क्योंकि करना है मुझे पढ़ाई,
अब नहीं करना है किसी से लड़ाई |
चाहे मुझे बिछानी पड़े चटाई,
फिर भी मैं करूँगा पढ़ाई |
मुझे लगता था कर नहीं पाउँगा,
उन उचाईयों को छू नहीं पाउँगा |
चाहे जो भी हो जाए करूँगा मैं पढ़ाई,
छू लूंगा मैं वो सभी उचाई |

कवि : समीर कुमार  ,  कक्षा : 9th , अपना घर 
कवि परिचय :   यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के रहने वाले हैं |समीर ने इस कविता का शीर्षक " मत कर तू बुराई " है | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | समीर एक संगीतकार बनना चाहते हैं |

शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

कविता : प्रदूषण

" प्रदूषण "

अँधेरा सब तरफ छाने लगा,
दूषित होने लगी है हवा | 
कहीं है ज़्यादा कहीं है कम,
अभी भी नहीं समझें है हम | 
हिस्सेदारी इसमें सबकी है,
आज की नहीं 
बीते हुए कल की है | 
ये ले जा रही है तबाही की ओर,
चारों तरफ मच जाया शोर | 
अब तो इसे रोकना होगा, 
आने वाले पीढ़ी के लिए कुछ सोचना होगा | 

कवि अखिलेश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता अखिलेश के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " प्रदूषण " है | इस कविता में अखिलेश जी नई लिखा है की प्रदूषण दर पे दर बढ़ता ही जा रहा है अगर अभी भी इसको नहीं रोकने की कोशिश करेंगे तो आने वाली पीढ़ी पर बहुत ही बुरा असर पडेगा | 

गुरुवार, 7 नवंबर 2019

कविता : ठण्डी

" ठण्डी "

ठण्डी आया ठण्डी आया,
साथ में अपने कोहरा लाया | 
देखने में होती सभी को दिक्कत,
धुंधला हो जाता है जगह जगह का रास्ता | 
ठण्डी आया ठण्डी आया,
साथ में अपने कोहरा लाया | 
सभी गतिविधियों में आ जाती रूकावट, 
ठण्डी है सभी के सजा की आहट | 
सभी पहन लो गर्म कपड़े की बनावट,
क्योंकि ठण्डी है मुश्किल घड़ी सजावट | 

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता  विक्रम के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक है " ठण्डी " | विक्रम को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | बढ़ते ठंडी की और यह कवितायेँ संकेत दे रही है की सभी लोग सतर्क हो जाए | विक्रम एक ऑफिसर बनना चाहते हैं | 

बुधवार, 6 नवंबर 2019

कविता : मछुआरा

" मछुआरा "

पड़े रहतें हैं वे नदी के किनारे,
 बिना किसी मछली के सहारे |
मछली  मिले एक भी कभी,
बस ताकते रहतें हैं वे सभी |
कभी मिली तो कभी नहीं,
न मिली तो जातें है कहीं | 
नदी में हो या तालाब में
बस मछुआरा तो रहता
मछलियों की तलाश में |
मछुआरों की जिंदगी मछली है,
उनके हाथों से नहीं निकली मछली | 

कवि : रविकिशन , कक्षा : 10th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता रविकिशन के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " मछुआरा " है | रविकिशन बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | रविकिशन को कवितायेँ लिखने में बहुत रूचि है | रविकिशन ने यह कविता मछुआरे के जिंदगी पर लिखी है | 

मंगलवार, 5 नवंबर 2019

कविता : वातावरण

" वातावरण "

सर्दी का मौसम आ रहा है,
वातावरण में कुहरा छ रहा है |
इस पल रहना है सावधान,
क्योंकि फ़ैल रहा है खतरनाक जुकाम |
डेंगू मलेरिया  से हमें है बचना,
नहीं तो इस बीमारी से मरना |
ओस से भरा पड़ा है मैदान,
जब तक हो जाए पैर स्नान |
सर्दी का मौसम आ रहा है,
वातावरण में कुछ कोहरा छा रहा है | 

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " वातावरण " है | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | कुलदीप एयरफोर्स में जाना चाहते हैं | कुलदीप पढ़ाई में बहु अच्छे हैं | इस कविता के माध्यम से लोगो को बढ़ते प्रदूषण के बारे में जागरूक करना चाहते हैं | 

सोमवार, 4 नवंबर 2019

कविता : क्यों किया बर्बाद

" क्यों किया बर्बाद "

मैंने सोचा था जब इस जहाँ के बारे में,
इसे खूब बर्बाद किया है यारों ने | 
इस जहाँ को नहीं रखा जीवन लायक,
फिर भी वे सोचते हैं हम हैं खलनायक | 
बिना किसिस वजह के क्यों किया बर्बाद,
फिर क्यों किया इस देश को आज़ाद | 

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के रहने वाले हैं | समीर को कवितायेँ लिखने  का बहुत शौक है और अभी तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | समीर एक सिंगर बनना चाहते हैं | 

रविवार, 3 नवंबर 2019

कविता : बोना है सफलता के बीज

" बोना है सफलता के बीज "

राह है कठिनाइयों से भरे,
इतना की उम्मीद से परे |
 जिसे करना है पार,
 झूझना है ताकि न हो हार |
कहीं चढान तो  कहीं ढलान,
कहीं ऊँचा तो कहीं नीचा |
चढ़े  न इतना जल्दी थकान,
उन्ही से बनोगे तुम महान |
उभरना है कठिनाइयों के बीच,
बोना है तुम्हें सफलता के बीज | 
इतना से ख़त्म नहीं हुआ रास्ता,
दूसरों के सहारे मत रखो वास्ता | 
राह है कठिनाइयों से भरे,
इतना की उम्मीद से  परे | 

कवि : अखिलेश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता अखिलेश के द्वारा लिखी गई  जिसका शीर्षक " बोना है सफलता के बीज " है | इस कविता के माध्यम से अखिलेश यह बताना कि किसी भी लक्ष्य की सफलता पाने  राह  आने वाली कठिनाइयों  सामना ज़रूर करना होता है | अखिलेश बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं और अपना घ संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं | 

शनिवार, 2 नवंबर 2019

कविता : बापू

" बापू "

बापू हमारे देश के प्यारे,
हम सब उनके ही सहारे | 
बापू ने हमें राह पर चलना सिखाया,
अंग्रेजों को वह पाठ पढ़ाया | 
बापू ने हमें अंग्रेजों से भिड़ना सिखाया,
बिना तलवार और बिना हथियार 
अंग्रेजों से हमें मिलना बताया | 
बापू हमारे देश के प्यारे,
हम सभी उनके ही सहारे | 
इंग्लैंड में की थी पढ़ाई,
वहीँ से देश के लिए कदम बढ़ाई | 
बापू हमारे देश के प्यारे,
हम सभी उनके ही सहारे | 

कवि : पंकज कुमार , कक्षा : 4th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता पंकज के द्वारा लिखी गई है जो की कक्षा 4 में पढ़ते हैं | पंकज ने इस कविता का शीर्षक " बापू " दिया है | पंकज को कहानियां पढ़ना बहुत अच्छा लगता है | पढ़ाई में बहुत ही अच्छे हैं और हमेशा अपने पढ़ाई के लिए बहुत मेहनत करते हैं | 

शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

कविता : शिक्षा को पहचानों

" शिक्षा को पहचानों "

वह शिक्षा क्या जो दूसरों में बाँटी न जा जाए,
वह जीवन क्या जो दूसरों के साथ बिताया न जाए |
तुमने डिग्री हासिल की तो क्या  ही कर लिया,
जब तक तूने ग्रहण किया ज्ञान जीवन से उतार दिया |
बहुत ही किया तुमने उन चीजों की व्याख्या,
बहुत सी खोज को तुमने देखा |
सभी चीजों को जानकर तो देखो
उन सभी को पहचानकर तो देखो |
ये चीजें सुख से आलम्बित है
ये चीजें दूसरों के हित के लिए है |
शिक्षा को समझो फिर बांटों,
न समझाने पर खुद को डाँटो |


कवि : राज कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर


कवि परिचय : यह कविता राज के द्वारा लिखी गये है जो की हमीरपुर  के रहने वाले है | राज को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | राज ने इस कविता का शीर्षक " शिक्षा को पहचानों " दिया है | राज पदिखकर एक जज बनना चाहतें हैं | 

गुरुवार, 31 अक्तूबर 2019

कविता : शीत

" शीत "

यह एक शीत की है कहानी
एक वाष्प तो है फिर भी है पानी |
सर्द ऋतु में जन्म तो लेती है
ठण्ड से नमीं को भर देती हैं |
हरे घास को ठण्ड है पहुँचाती,
कहाँ गिरेगी यह खुद नहीं जानती
छूते ही यह विलुप्त हो जाती
अपनी प्रतिभा को यूँ ही बतलाती
शीत कभी समाप्त नहीं होती
हर सुबह सूरज से पहले होती

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घ

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक है " शीत " | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | प्रांजुल हमेशा प्रकति पर कवितायेँ लिखना पसंद करते हैं | पढ़ लिखकर एक इंजीनीर बनना चाहतें हैं |


कविता : बिगड़ती पर्यावरण

" बिगड़ती पर्यावरण "

जिनको  जीना था,
वे सब जी गए 
बड़े आराम से 
 जब सब कुछ साफ था, सुंदर था
 तो वे जिए बड़े आसानी से | 
 कठिन कर दिया जीना, 
हमारी युवा पीढ़ी को | 
जिसने बेकार कर दिया, 
इस साफ पर्यावरण को | 
नष्ट कर रहे है,
हम सबका भविष्य
जो हम जीने वाले हैं, 
ख़त्म कर रहे है वे सपने 
जो मैंने देखे हैं | 

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता नितीश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | इस कविता का शीर्षक
" बिगड़ती पर्यावरण " है | नितीश इस कविता के माध्यम से यह  बताना चाहतें है की पर्यावरण दिन बद्र ख़राब हो रहा है और इसके कारण है आज के इंसान | आने वाली पीढ़ी कैसे जिएगें यह नहीं सोच रहे है | पर्यावरण को शुद्ध रखें | 

बुधवार, 30 अक्तूबर 2019

कविता : मेरा पन्ना

" मेरा पन्ना "

ऐसा क्या हो जाता है,
जब नम्बर कम आता है | 
मैं भी क्या सोचूँ ,
जो हर पल गलत ही लगता है | 
हर पन्ने को मैंने सजाया,
विचारों को उसमें समाया | 
सोचा न था हो जाएगी गलती,
इतना पढ़ा फिर भी मिला रददी |
हर शिक्षक के तने हैं पड़ते,
मैं भी जानूँ क्या की वे मुझसे जलते | 
हर पन्ने में चलता है लाल - लाल,
लगता है मैंने कर दिया कुछ बेहाल | 
ऐसा क्या हो जाता है, 
जब नम्बर कम आता है | 

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | कुलदीप ने यह कविता अपने एक पन्ने पर लिखी है जिसका शीर्षक " मेरा पन्ना " हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं |    

मंगलवार, 29 अक्तूबर 2019

कविता : खिलता हुआ फूल

" खिलता हुआ फूल "

खिलता हुआ फूल चहकता हुआ लगता है,
हर रंग को बदलकर संवरना अच्छा लगता है | 
खुशबू की महक से मोहित करने वह खाश अंदाज, 
और सजकर गले हर बनना उसे सुहाना लगता है | 
कीचड़ में हो तो भी महकने कोशिश करता है,
वह फूल जो खिलता हुआ मन को मोहित करता है | 
अपने पंखुड़ियों को जब फैलाता है,
आस्मां से आकाश ओर जब झाँकता है | 
हमें लगता वह प्रार्थना कर रहा है, 
की हम खिले रहे मुस्कान से मिले रहे हैं |  

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता विक्रम के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | विक्रम को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | विक्रम एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं | पढ़ लिखकर गरीबों की सहायता करना चाहते हैं | पढ़ने में बहुत होशियार है और समाज के प्रति सोचना बहुत अच्छा लगता है | 

सोमवार, 28 अक्तूबर 2019

कविता : इन्सां सोच

" इन्सां सोच " 

बदल रहा है जमाना, 
बदल रही है इन्सां सोच | 
बढ़ रही है जनसंख्या,
बढ़ रहीं है तकनीकी खोज |
पुराणी सोच को भुलाकर, 
भीड़ - भाड़ की जिंदगी में आकर | 
जीवन की रेस में दौड़ रहे है,
गिर रहे , फिसल रहे और
 वक्त आने पर संभल रहे है  | 
घड़ी की सुई बढ़ रही है, 
पल - पल वक्त बदल रहा है | 
मन तो मचल रहा है, 
पर सोच इन्सां को बदल रहा है | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो  की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | प्रांजुल पढ़ लिखकर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और गरीब बच्चों की मदद करना चाहतें हैं | 

कविता : बनना है तुझे महान

" बनना है तुझे महान "

राह  है  कठिनाई से भरी,
इतना की उम्मीद से परे | 
जिसे करना है पार,
झूझना है ताकि न हो हार | 
कहीं चढ़ान तो कहीं ढलान, 
कहीं ऊँचा तो कहीं नीचा |  
चढ़े न इतना जल्दी थकान,
बनना है तुझे इस राह में महान | 
उभारना है कठिनाइयों के बीच,
मरना है तुझे कुछ ऐसा ही तीर | 
राह  है  कठिनाई से भरी,
इतना की उम्मीद से परे | 

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी  गई है जिसका शीर्षक है "बनना है तुझे महान " | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | कुलदीप इस कविता के माध्यम से बताना चाहते हैं की जिंदगी दरबदर कठिन होती ही जा रही है | 

शनिवार, 26 अक्तूबर 2019

कविता : वह शिक्षा क्या जो

" वह शिक्षा क्या जो "

वह शिक्षा क्या जो, 
दूसरों में बाँटी न जा जाए | 
वह जीवन क्या जो, 
दूसरों के साथ बिताया न जाए | 
तुमने डिग्री हासिल कर , 
तो क्या  ही कर लिया | 
जब तक तूने ग्रहण किया
ज्ञान को जीवन में उतारा नहीं 
बहुत ही किया तुमने, 
उन चीजों की व्याख्या | 
सभी चीजों को जानकर तो देखो,
यह ज्ञान का समन्दर इसमें झाँक कर देखो | 

कवि : राज कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर 
कवि परिचय : यह कविता राज के द्वारा लिखी गये है जो की प्रयागराज के रहने वाले है | राज को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | राज का शिक्षा के प्रति  रखते हैं इस कविता के माध्यम से बयां किया है | राज पढ़ाई में बहुत ही अच्छा है | राज को लोगों से बात करना बहुत ही अच्छा लगा है | 

शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2019

कविता : सत्य की राह पर

" सत्य की राह पर "

चल पड़े है देश की ओर,
लेकर आज़ादी की तमन्ना | 
सत्य और अहिंसा को,
वो अपने जीवन पर अपनाएँ | 
अपनी राह में सत्य को अपनाए,
यह बात उन्होंने कितनों को बतलाए |  
न फ़िक्र की अपनी जिंदगी की,
न सोचा अपने तन की | 
जो सोचे थे देश के सपने, 
जहाँ हो केवल अपने | 
जब हर एक कोई उठ गया,
जो देखे सपने वो पूरा हो गया | 
इस सत्य की राह पर, 
आज़ादी की तमन्ना पूरा हुआ | 

कवि : संजय कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता संजय के द्वारा लिखी गई है जो की एक सीख को दर्शाती है | जीवन में यदि सच्चाई को अपना लेगें तो यह एक सुखद प्रणाम मिलता है | जीवन में लोग झूठ बोलने के लिए सच्चाई को छुपाने की कोशिश करते हैं परन्तु एक दिन वह सबके सामने आ ही जाती है | संजय को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है | 

बुधवार, 23 अक्तूबर 2019

कविता : मेर प्यारी माँ

" मेर प्यारी माँ "

कौन है जिसने हमें जीना सिखाया,
कौन है जो हर वक्त साथ निभाया | 
गर्मी की वो छाँव है ,
सर्दी की वो धूप है | 
जितने भी मौसम है, 
उसके कर्ज़दार हैं हम | 
रात में वह पहरेदार है,
हमारी हर गलती की जिम्मेदार है | 
न ही वह धरती है 
और न ही है कोई आसमां,
वह तो है मेरी प्यारी माँ |   

कवि : अखिलेश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता अखिलेश के द्वारा लिखी गई है जो  कि  बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं और "अपना घर" संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं | इस कविता का शीर्षक" माँ "है जिसपर उन्होंने यह कविता लिखी है | अखिलेश पढ़ाई में बहुत ही अच्छे हैं | 

कविता : छोड़ दिया तूने ये देश

" छोड़ दिया तूने ये देश "

क्या आशा करके छोड़ दिया तूने ये देश, 
जहाँ पड़ा है कचरों का ढेर | 
जिसको तूने आज़ाद करवाया,
उसने तुझे इस मन से हटाया | 
प्रदूषित है यह हवा और पानी, 
बिलक - बिलक मर रहे हैं प्राणी | 
क्या आशा करके छोड़ दिया तूने ये देश,
जहाँ पड़ा है अत्याचारों का ढेर | 
हर इंसान है डरा सहमा, 
तब भी उसे शांत है रहना | 
तुम थे इस देश की शान,
तुमको खोकर हो गए अनजान | 
क्या आशा करके छोड़ दिया तूने ये देश,
जहाँ पड़ा है कचरों का ढेर | 

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर 
कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक है "छोड़ दिया तूने ये देश "| कुलदीप ने यह कविता उन लोगों के लिए लिखी है जो इस भ्रम में आकर यह देश छोड़ देते हैं की यहाँ गन्दगी और अर्थव्यवस्था फैली हुई है लेकिन कभी यहाँ की संस्कृति की गहराइयों में नहीं जातें है की यहाँ की संस्कृति कितने वर्ष पुरानी है | 

सोमवार, 21 अक्तूबर 2019

कविता : हर पल सुहाना लगता है

" हर पल सुहाना  लगता है "

हर पल सुहाना  लगता है,
हर कल बेगाना लगता है | 
हर सुबह नयी लगती है,
हर मंज़िल नज़दीक लगती है | 
हर सपना सच लगता है,
हर घर पुराना लगता है | 
ख्वाइश पर खेलना भी बेगाना लगता है,
तारों का टिमटिमाना सुंदर लगता है |
बच्चों की तरह खिलखिलाना अच्छा लगता है,
क्योंकि हर पल सुहाना लगता है |  

कवि :  कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है | कुलदीप छत्तीसगढ़  के रहने वाले हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | कुलदीप डांस  भी अच्छा कर लेते हैं | कुलदीप को पढ़ना , खेलना और अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेना बहुत अच्छा लगता है |  

कविता : नदी के पास

" नदी के पास "

जब  मैं बैठा था नदी के पास,
मेरे दिमाग  रही थी कुछ बातें खास |
क्या होता है इसके अंदर,
क्या जुड़ा है इससे कोई समंदर | 
या फिर है इसमें सिर्फ पत्थर ही पत्थर,
या फिर इसमें भी है कुछ मच्छर | 
जिनके अंदर है कुछ अलग ही लक्षण,
बस ममें इसी बात पर दौड़ाऊँ दिमाग,
जब मैं बैठा था नदी के पास |   

कवि : समीर कुमार, कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं और कानपुर के ' अपना घर ' नामक संस्था में रहकर अपनी शिक्षा को ग्रहण कर रहे हैं | समीर को कवितायेँ लिखने  का बहुत शौक है | समीर एक अच्छे संगीतकार भी हैं | छोटे बच्चों को कुछ नया करने के लिखे बहुत प्रेरित करते हैं |  

शनिवार, 19 अक्तूबर 2019

कविता : मौसम

" मौसम "

यह मौसम है बड़ा सुहाना,
मन करता है बस इसी में जीना | 
इस मौसम में किसी को तो है भीगना,
क्योंकि किसी को न आता पसीना | 
मन करता है बस इसी को जीना, 
नहीं होगी मुश्किल अब देखना | 
क्योंकि अब है हमें सिर्फ खेलना,
इस मौसम से बातें है करना | 
यह मौसम है बड़ा सुहाना,
मन करता है बस इसी में जीना | 

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के रहने वाले हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | समीर कवितायेँ के अलावा संगीत और खेलकूद गतिविधियों में भी अच्छे हैं | पढ़लिखकर अपने परिवार की सहायता करना चाहते हैं |  

मंगलवार, 8 अक्तूबर 2019

कविता : हटाते हैं कचरों का ढेर

" हटाते हैं कचरों का ढेर "

क्या आशा करके तूने छोड़ ये देश,
जहाँ पड़ा है कचड़ों का ढेर |
जिस को तूने आज़ाद कराया,
उसने तुझे इसे मन से हटाया |
प्रदूषित है यहाँ का हवा और पानी,
बिलक - बिलक मर रहे प्राणी |  
क्या आशा करके तूने छोड़ ये देश,
यहाँ पड़ा है अत्याचारों का ढेर |
हर इंसान है डरा सहमा,
तब भी उसे शान्त है रहना |
तुम  थे इस देश की शान,
तुमको खोकर हो गए अनजान |
न करो अब तुम देर,
अब  हटाते हैं यह कचरों का ढेर |
क्या आशा करके तूने छोड़ ये देश,

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | कुलदीप ने यह कविता फ़ैल रहे भ्रस्टाचारों
के प्रति लिखी है की कैसे धीरे धीरे लोग इस देश से जा रहे है जिससे देश और भी कमजोर हो रहा है |

कविता : रविवार

" रविवार "

शब्द सुनकर ही मन में उल्लास आता है
जब दिल , मन मनमौजी बनकर उछलता है |
लेकिन रविवार की असहनीय सी शांति,
कहीं ला न दे क्रांति |
मुझे डर इसी बात का रहता है,
क्योंकि अब तो हर शख्स यही कहता है |
रविवार हमारा आरामदेह का दिन है,
और हमें बस विश्राम ही करना है |
जो करते हैं रविवार को भी काम,
बस लेते हैं वे सभी रविवार का नाम |
हमें मिलकर देना होगा इसका अंजाम,
क्योंकि रविवार को कर रहे है काम |
हर घर में रहे सहनीय सी शांति,
जिसे न बनना पड़े एक क्रांति |

कवि : समीर कुमार, कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है प्रयागराज के रहने वाले हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | समीर अपनी कविताओं में ऐसी चीजों को व्यक्त जो उन्होंने खुद अनुभव किया हो |

शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2019

कविता : बरसात

" बरसात "

बरसात का मौसम आया,
चरों तरफ हरियाली छाया |
खेतों में भी फसल खूब आया,
जब बरसात का मौसम आया |
बादल ने भी बूंदें मजे से गिराया,
तालाबों में तब पानी भर आया |
जब बरसात का मौसम आया | |

कवि : कामता कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कामता के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले निवासी हैं | कामता को कवितायेँ लिखने बहुत शौक है | इस कविता का शीर्षक है बरसात | कामता ने बरसात के आने पर जो भी बदलाव आते हैं उसको अपनी कविता के माध्यम से उल्लेख किया है | कामता एक नेवी अफसर बनना चाहते हैं |  

गुरुवार, 3 अक्तूबर 2019

कविता : बदल रही है इंसां की सोच

" बदल रही है इंसां की सोच "

बदल रहा है जमाना,
बदल रही है इंसां की सोच |
बढ़ रही है जनसंख्या,
बढ़ रही तकनीकी खोज |
पुरानी सोच को भुलाकर,
भीड़ - भाड़ की जिंदगी में आकर |
जीवन की रेस में दौड़ रहे हैं,
गिर रहे , फिसल रहे हैं और,
वक्त आने पर संभल रहे |
घड़ी की सुई बढ़ रही है,
पल - पल वक्त बदल रहा है |
मन तो मचल रहा है,
पर इंसां की सोच बदल रहा है |

कवी : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर


कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखना बहुत पसंद है | प्रांजुल को नै चीजें सिखने में बहुत रूचि है | प्रांजुल पढ़ाई के साथ - साथ गतिविधियों में भी अच्छा है |

सोमवार, 23 सितंबर 2019

कविता : सुहाना मौसम

" सुहाना मौसम "

यह सुहाना सा मौसम,
करता है दिल को रौशन |
ठण्डी हवाओं का झोका,
जो बनाता मन को अनोखा |
खुशबू से भरा आसमां,
जो करते मन को खुशनुमा |
हर पल जब यह बीतता,
कुछ न कुछ उन पलों से सीखता |
यह सुहाना सा मौसम,
करता है दिल को रौशन |

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक कुलिप ने बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं जो की बाहत ही अच्छी हैं | कुलदीप एक नेवी अफसर बनना चाहते हैं | कुलदीप पढ़लिखकर अपने घर वालों की मदद करना चाहता है |

रविवार, 22 सितंबर 2019

कविता : राजभाषा हिंदी

" राजभाषा हिंदी "

हिंदी हमारी राजभाषा कहलाए,
पंजाबी हो या गुजराती |  
सबको हिंदी बोलना सिखलाए,
अपनी भाषा का महत्त्व बताए |
मन कहता है हिंदी बोलूं,
पर समझ में न आए कैसे बोलूं |
बोल - बोलकर सीखूं मैं,
सीख - सीखकर बोलूं मैं |
हिंदी को मैं भूल न पाऊँ,
सभी को मैं यह बात बतलाऊँ |
हिंदी को कोई भूल न जाना,
जीवन में सदैव हिंदी अपना |
हिंदुस्तान की जमीं में रहकर,
हिंदी संस्कृति का मान बढ़ाना |

कवि : महेश कुमार , कक्षा : 5TH , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता महेश के द्वारा लिखी गई है जो की बाँदा के रहने वाले हैं | कक्षा पाँचवीं से ही कवितायेँ लिखने का जूनून पैदा हो गया है | महेश पढ़ाई में बहुत अच्छा है और हमेशा कुछः नया करने की कोशिश में जुटा रहता है | महेश एक बहुत अच्छा लड़का है |

शनिवार, 21 सितंबर 2019

कविता : हिंदुस्तान से ही हिंदी

" हिंदुस्तान से ही हिंदी "

हिन्द देश के निवासी हैं हम सभी,
जहाँ हिंदी बोलते हैं हम सभी |
चाहे हो बंगाली , या फिर गुजराती
हिंदी हमें इतना ही बतलाती |
ये सारी भाषाएँ भी हिंदी ही कहलाती |
हिंदी से ही हिंदुस्तान बना है,
हिंदुस्तान से ही हिंदी |
दोनों ही एक दूसरे से बने हैं,
एक दूसरे के ही साथ चलते हैं  |

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के रहने वाले हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कवितायेँ भी लिख चुके हैं | समीर एक हसमुख लड़का है जो की हमेशा अपने पढ़ाई के पीछे सीरियस रहता है | | समीर एक सिंगर बनना चाहतें हैं |  

कविता : हिंदी दिवस गर्व का दिन

" हिंदी दिवस गर्व का दिन "

एक बार फिर गर्व का दिन आया
पर कैसे मनाएँ हिंदी के बिन
जो अपना सम्मान है,
जो भारतवासियों की जान है |

लब्ज़ों पर यह सजती है,
पंक्तियों में यह जब अलग सा रस भरती है |
अपना महत्व बताने में,
ज़माने को सांस्कृतिक सिखाने में |
कभी पीछे नहीं हठती है,
रामायण।, महाभारत और गीता
सब इसी की उन्हें भरती है |

गली -गली जाके , हिमालय की छोटी में समाके,
बस हिंदी यह कहती है |
अमेरिका चीन या पुर्तगाल,
गगन ,सागर या हो पाताल |
या हो अंतरिक्ष में फैला अपना जाल,

अब हर कण में जलाएँगें अपनी मशाल |
हम और हमारे सपने हैं रंगीन,
एक बार फिर गर्व का दिन,
पर मनाएँ कैसे हिंदी के बिन | |

नाम : देवराज कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह हैं देवराज जिन्होंने यह कविता लिखी है | देवराज को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | देवराज एक केमिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं इस उपलब्धि को पाने के लिए वः बहुत ही मेहनत करता है | देवराज एक जिज्ञासु लड़का है जिसे हर पल कुछ जानने की ललक रहती है |

शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

कविता : धूप ने लिया अवतार

" धूप ने लिया अवतार "

गर्मी में हुए बेहाल,
धूप ने लिया अवतार |
पसीना भर -भर गिर रहा है,
बच्चे घट -घट पानी पी रहा है |
मन करता है तो नहा ले यूँ
ठंडा होकर हो जाए तन |
गर्मी से हुए बेहाल,
धुप ने लिया अवतार |

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक" राखी का पर्व" है | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | कुलदीप पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं | कुलदीप को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है | कुलदीप नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं |

गुरुवार, 19 सितंबर 2019

कविता : गर्मी

" गर्मी "

यह उमस  से भरी गर्मी ,
जरा सा भी नहीं कोई नरमी |
पानी के लिए प्यासी यह धरती,
एक बरसात के लिए तरसती |
न जाने लिस बात की उदासी,
पानी होते हुए भी खूब प्यासी |
पसीने की बूंदें भी बताती हैं,
कूलर , पंखें भी सताती हैं |
फिर भी मन को बैठाकर
कुछ करने की सोचते हैं
कूलर , पंखे जितना भी हो
गर्मी हम चुपचाप सह्तें हैं |

नाम : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपनाघर

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | इस कविता का शीर्षक है " महान हिंदी " जिसमें की हिंदी भाषा को दर्शाया है | हिंदी हमारी मात्रा भाषा है और पूरे भारतवर्ष में 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मानते हैं इस अवसर पर प्रांजुल ने यह कविता लिखी है |

मंगलवार, 17 सितंबर 2019

कविता : हिंदी है हमारी शान

" हिंदी है हमारी शान "

हिन्द देश के हैं हम वासी,
हिंदी ही है हमारी साथी |
हर पल है कंठ पर रहना,
जो सोचूँ वो स्पष्ट कराती |
साथ - साथ है इसके चलना,
जब तक हमें है बढ़ते रहना |
मात्रा भाषा है यह कहलाती,
हिन्दी सांस्कृतिक हमें सिखाती |
जब तक है हम में जान,
न भूलेंगें हम हिंदी की शान |
हिन्द देश के हैं हम वासी,
हिंदी ही है हमारी साथी |

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | कुलदीप पढ़लिखकर एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने के आलावा डांस करना बहुत पसंद है |

सोमवार, 16 सितंबर 2019

कविता : महान हिंदी

" महान हिंदी "

कैसे करूँ तेरा गुणगान,
जिस देश में है तू महान |
जहाँ राज्य का नेतृत्व लेकर बैठी है
तू जुबाँ की मनचाही भाषा हिंदी है |
लिपि के द्वारा तुझे लिख तो लेता हूँ,
बिना सोचे समझे तुझे यूँ ही बोल देता हूँ |
तू एक पवित्र ग्रन्थ की तरह उभरी है,
तेरे हर एक वर्ण में लौह भरी है |
तू बदल रही है हर गली की सड़कों में,
तेरा प्रसार हो रहा है देश - विदेशों में |
हर वर्ण मन में उमंग भरता है,
क्या बोलूं यह कभी नहीं डरता है |
तू मेरे तरंग मन में साहस भरता है,
ऐ महान हिंदी , दिल तुझे धन्यवाद करता है |

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | इस कविता का शीर्षक है " महान हिंदी " जिसमें की हिंदी भाषा को दर्शाया है | हिंदी हमारी मात्रा भाषा है और पूरे भारतवर्ष में 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मानते हैं इस अवसर पर प्रांजुल ने यह कविता लिखी है |

शनिवार, 14 सितंबर 2019

कविता : खिलौना

" खिलौना "

यह खिलौना है मेले का,
मन करता है लेने का |
भीड़ - भाड़ लोगों के बीच में,
धक्का मुक्के और दुकान के सटीक में |
रंग बिरंगे खिलौने मन मोह लेता है,
पर क्या करूँ कोई पैसा नहीं देता |
तमाम विनती के बाद पैसे पता हूँ,
इन्ही पैसों से खिलौने को लेता हूँ |
यह खिलौना है मेले का,
मन नहीं करता किसी को देना का

कवि : अखिलेश कुमार , कक्षा : 9th , अपनाघर

कवि परिचय : यह कविता अखिलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी है | वर्तमान समय में "अपना घर" संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | अखिलेश पढ़ाई में बहुत अच्छा हैं | कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | इस कविता में उन्होंने एक खिलौने के बारे में बताया है |

बुधवार, 4 सितंबर 2019

Poem : Dazzling sound

" Dazzling sound "

While playing in the ground,
I heard a dazzling sound.
then I looked around
but not evidence I found.
I determine not to play
I informed my team,
and run along the way.
this time it was going dark outside,
I seen all but avoid.
I took up my books,
and went on the roof.

Poet : Devraj kumar , class : 9th , Apnaghar

Poet introduction : This poem is belongs to Devraj kumar who is very interested in writing poems. He basically writes the poems on recent topic which going in mind . he wants to become an engineer of chemical . He give his best efforts in his studies . I hope you would like this poem.

मंगलवार, 3 सितंबर 2019

कविता : आज़ादी का दिन

" आज़ादी का दिन "

अब आया फुल आज़ादी का दिन,
जिओ जिंदगी 370 धरा के बिन |
रोक जो था कश्मीर के जमीं पर
जो था बंधन घूमने वालों पर,
अब वह रह सकते है जिंदगी भर |
खाना हैं वहां पेट भर |
बिना किसी परेशानी और उदासी के बिन,
अब आया फुल आज़ादी का दिन |
 कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपनाघर

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई जो की प्रयागराज के रहने वाले हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | समीर कवितायेँ लिखने के साथ साथ गीत भी गाते हैं | समीर एक सिंगर बनना चाहते हैं |

सोमवार, 2 सितंबर 2019

कविता : सेब

" सेब "

कश्मीर की सर जमीं पर,
उगता हूँ बर्फ जमीं पर |
ठण्ड की वजह से ख़राब नहीं हूँ,
मैं तो एक लाल रसीला सेब हूँ,
मीठा तो हूँ पर खट्टा नहीं,
कश्मीर में तो हूँ , पर लोगों के पास नहीं |
मेरी विशेषताएं कुछ ऐसी है,
काफी हद तक राजा जैसी है |
मेरे चाहने वाले इतने है की मुझे पता नहीं,
सभी मुझे कहते है ,कोई मुझसे खफा नहीं |

                                                                                                         कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखना बहुत पसंद है | प्रांजुल को नै चीजें सिखने में बहुत रूचि है | प्रांजुल पढ़ाई के साथ - साथ गतिविधियों में भी अच्छा है |

शनिवार, 31 अगस्त 2019

कविता : फूल

" फूल "

मन करता है फूल बन जाऊँ,
हर जगह मैं खिल जाऊँ |
स्वर्ग सी धरती में मैं खिलूँ
कुर्बान शहीदों पर मैं चढ़ूँ |
घर की शोभा मैं ही बढ़ाऊँ,
खुशबू की महक चारों ओर फैलाऊँ |
क्यारी में रौनक बढ़ाऊँ,
सभी को अपनी ओर खींच लाऊँ |
मंदिर हो या मस्जिद पर,
हर जगह मैं मिल जाऊँ |
मन करता है फूल बन जाऊँ,
हर जगह मैं खिल जाऊँ |

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सार्थक के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी है | सार्थक इस कविता के जरिए अपने मन की इच्छा को व्यक्त करना चाहा है जिसमें उन्होंने कल्पना की है कि काश मैं फूल होता | सार्थक की यह कविता बहुत ही प्रेरणा से भरी है |  

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

कविता : पानी की बूँदें

" पानी की बूँदें "

ये पानी की बूँदें गिरती हुई कहती हैं,
क्या मैं ही हूँ या पूरी दुनियां ऐसी है |
मैं एक बून्द की तरह गिरती है,
शरण न मिलने पर यूँ ही फिरती है |
धूल में मिलूँगी या यूँ ही बून्द रहूंगी,
यदि लक्ष्य पूरा हुआ यह बात सबसे कहूँगी |


कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर
कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखना बहुत पसंद है | प्रांजुल को नै चीजें सिखने में बहुत रूचि है | प्रांजुल पढ़ाई के साथ - साथ गतिविधियों में भी अच्छा है |

बुधवार, 28 अगस्त 2019

कविता : ऊँचे

" ऊँचे "

ऊँचे है ये कितने ऊँचे हैं,
सीधे हैं ये कितने सीधे हैं |
पर ये है कितने फीके,
इनसे हमको भी है सीखना,
कठिनाइयों से है लड़ना |
बस उनको तो है सिर्फ पढ़ना,
ये हैं हिमालय
बस आप से इतना है कहना |

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के रहने वाले हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | समीर कवितायेँ किसी भी विषय पर लिखते हैं | समीर एक बहुत ही नेक छात्र है |

सोमवार, 26 अगस्त 2019

कविता : राखी का पर्व

" राखी का पर्व "

राखी का पर्व है भी बहनों का,
सम्बन्ध है यह रक्षा बंधन का |
भाइयों के कलाइयों में बांधकर,
चली जाती है रक्षा माँगकर |
ख़ुशियों का त्यौहार है,
रक्षाबंधन सा का एक त्योहार है |
प्यारे हाथों से मिठाई खिलाए,
रक्षा सूत्र बांध जाए |
राखी का पर्व है भी बहनों का,
सम्बन्ध है यह रक्षा बंधन का |

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक" राखी का पर्व" है | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | कुलदीप पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं | कुलदीप को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है | कुलदीप नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं |

रविवार, 25 अगस्त 2019

कविता : मन करता है पक्षी बनूँ

" मन करता है पक्षी बनूँ "

मन करता है पक्षी बनकर,
खुले आसमान में उड़ जाऊँ
हर एक पल  को मैं,
अपनी यादों में बसाऊँ |
हरी भरी सी डालियों पर,
मैं अपनी चहचाहट सुनाऊँ |
अपने को साबित करने को,
हर मुश्किल को पार कर जाऊँ |
खुले आसमान में पंख फैलाकर,
अपनी परेशानियों को मैं बतलाऊँ |
तूफान हो मुसीबत का पहाड़,
डट कर सामना मैं करूँ |
मन करता है पक्षी बनकर,
खुले आसमान में उड़ जाऊँ |

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सार्थक के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक "मन करता है पक्षी बनूँ है" | सार्थक को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | सार्थक अपने मन के भावों को कविता के माध्यम से व्यक्त करता है | सार्थक इण्डियन आर्मी में भर्ती होना चाहते हैं |
 

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

कविता : मुस्कुराते फूल

" मुस्कुराते फूल "

हवाओं में हिलती हुई
वह फूल जो कुछ कहना चाहती है |
अपनी सजी हुई टहनियों को लेकर,
हवाओं के साथ खेलना चाहती है |
खुशबु से तन को महकाना चाहती है
आस पास पेड़ पौधों से कहकर,
अपनी खुशबू से मन को बहलाना चाहती है |
यह फूल के पौधे हवाओं से खेलना चाहती है | |

कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सुल्तान के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | सुलटन को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | सुल्तान क्रिकेट बहुत अच्छा खेलते हैं | सुल्तान को स्केटिंग चलना पसंद है |


गुरुवार, 22 अगस्त 2019

कविता : बूँदे भी कुछ कहना चाहती है

" बूँदे भी कुछ कहना चाहती है "

ये बूँदे भी कुछ कहना चाहती है,
कुछ बताना चाहती है |
और कुछ सुनना चाहती है,
जब मैं गिरूँ इस धरती पर,
तो मुझे एक सरोवर में बचा लेना |
या फिर तुम अपनी एक पात्र में,
मुझे थोड़ी सी जगह दे देना |
ऐसा बस लिए कुछ कर देना,
मेरे अस्तित्व को ख़त्म मत कर देना |

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता बिहार के निवासी नितीश के द्वारा लिखी गई है जो की कवितायेँ लिखने में महारथ हाशिल किए हुए हैं | नितीश को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और कवितायेँ लिखते भी हैं | नितीश पढ़लिखकर अपनी परिजन की सेवा करना चाहते हैं |

बुधवार, 21 अगस्त 2019

कविता : मेरे देश के शहीदों

" मेरे देश के शहीदों "

मेरे देश शहीदों ने,
करवाया हमें आज़ाद |  
दुश्मनों से लड़कर,
किया उनके परिवारों को बर्बाद |
हम लोगों को मिली है आज़ादी,
आज़ादी को मत करना बर्बादी |
चाहे मेरे शहीदों के सामने,
खड़ी कर दो सेना
लेकिन शहीदों के मरने के बाद
देश को अपने झुकने मत देना |
तभी मेरे इस देश का झंडा,
हर जगह में फहराया जाएगा |
मेरे देश को आज़ाद कराने में,
जिन्होंने दिया है बलिदान |
उन शहीदों को आज,
भी याद किया जाएगा |

कवि : महेश कुमार  कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता महेश के द्वारा लिखी गई है जो की कक्षा ५ के विद्यार्थी है | महेश को कवितायें लिखने का बहुत शौक है | कवितायेँ लिखने के साथ ही साथ खेल और चित्र बनाने में भी रूचि है | महेश एक बहुत ही अच्छा छात्र है |

मंगलवार, 20 अगस्त 2019

बाल सजग: कविता : मैं क्या बनूँ

बाल सजग: कविता : मैं क्या बनूँ: " मैं क्या बनूँ " मैं क्या बनूँ, इस सवाल ने सताया | मैं क्या करूँ, किसी ने नहीं बताया | फिर मैं परिवार वालों से पूछा,...

कविता : बूँद

" बूँद "

जब भी पानी बरसता है,
फिर बूँद जरूर बरसता है |  
बूँद -बून्द से ही खेती है,
जिसकी जरूरत हमको सदा होती है |
बूँद -बूँद से बना है यह संसार,
बिना बूँद नहीं होगी बड़ा पार |
बूँद चीज है जो कभी मर नहीं सकती,
बूँद के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती |
बूँद से ही जीते हैं संसार,
बूँद -बूँद से ही भरा है ये संसार |

कवि , मंगल कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता एक छोटे से कवि जिसकी कविता लिखने की नई शुरुआत हुई है और कविता ी शुरुआत एक बूँद कविता से की है | मंगल मध्य प्रदेश के निवासी है जो की कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं |  

सोमवार, 19 अगस्त 2019

कविता : बलिदान

" बलिदान "

बलिदान देकर अपनी जान,
दिया हमें स्वतन्त्र जहान | 
न भूलेंगे हम उनके प्राण,
जो दिया है हमको शान |
दिन - रात उन्होंने लड़ी लड़ाई,
तब जाकर हमें मिली रिहाई |
संघर्ष भरा था हर समय,
सोच में डूबा था हर नयन |
वीर हुए इस देश में बहुत सारे,
जिन्होंने दे दी जान वतन के हवाले |
स्वतन्त्र दिवस हमने मनाया,
श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद किया |  

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8TH , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी है | कुलदीप ने यह कविता उन शहीदों के लिए लिखी है जो देश को आज़ाद कराते कराते शहीद हो गए हैं | शहीदों को यद् करना हमारा कर्त्तव्य होना चाहिए | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है |  

रविवार, 18 अगस्त 2019

कविता : एक ख्वाईश

" एक ख्वाईश "

मेरी भी एक ख्वाईश है,
तुम चाहे इसे ज़िद समझो |
या फिर कोई अरमान समझो,
किसी का न था साथ |
मैं थी अकेली मासूम भोली और डरी,
हवा के खिलाफ थी |
बादल ने गरजते हुए दस्तक दी,
मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही न रहा |
फिर मैंने लम्बा सफर तय किया | |

कवि : राज कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर

शनिवार, 17 अगस्त 2019

कविता : बदला सा हूँ

" बदला सा हूँ "

मैं थोड़ा बदला सा हूँ,
पहले थोड़ा ठीक था |
पर मैं थोड़ा पतला हूँ,
क्योंकि मैं थोड़ा बदला हूँ |
मेरे भाषण में अंतर आया है,
सोच में गहरी छाया है |
जिम्मेदारी की अहसास तो है,
पर निभाने का समय नहीं है |
मैं बहुत बार गिर कर संभला हूँ,
क्योंकि मैं थोड़ा बदला सा हूँ |

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता देवराज के द्वारा लिखी गई है जो की बैहर के नवादा जिले के निवासी है | देवराज को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | देवराज को नई चीजों के बारे में जानकारी एकत्र करने में बहुत मज़ा आता है | देवराज पढ़ाई में बहुत अच्छा है | देवराज को कवितायेँ बहुत लिखते हैं |

शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

कविता : फूल बन जाऊँ

" फूल बन जाऊँ "

मन करता है फूल बन जाऊँ,
सुन्दर सी महक फैलाऊँ |
महान व्यक्तियों के लिए,
मैं सुन्दर सी माला बन जाऊँ |
एक घर के लिए मैं साया बन जाऊँ,
मैं उन लोगों के लिए सहारा बन जाऊँ |
क्यारियों और बगीचों के लिए,
सुन्दर सा सजावट जाऊँ |
मंदिर , मस्जिद दोनों के लिए के,
रंग बिरंगे फूल बन जाऊँ |
मन करता है फूल बन जाऊँ,
सुन्दर सी महक फैलाऊँ |

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सार्थक के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | सार्थक को क्रिकेट खेलना का बहुत शौक है | सार्थक पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं | साथक एक आर्मी बनना चाहते हैं | एक फूल बनने की कल्पना की है |

गुरुवार, 15 अगस्त 2019

कविता : चेहरे की मुस्कान

" चेहरे की मुस्कान "

चेहरे की मुस्कान,
यु ही बनाए रखना |
हर मंजिल मेंहर दिक्कत में,
यूँ ही बचाये रखना |
रुकावटें लाखों आए,
मगर तुम पीछे मत हटना |
मिल कर लड़ेंगें हम,
बस तुम यूँ ही मुस्कराते रहना |
चेहरे की मुस्कान,
यूँ ही बनाए रखना |

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वह बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं | कुलदीप को डांस करना बहुत पसंद है |

बुधवार, 14 अगस्त 2019

कविता : मैं मुसाफिर

" मैं मुसाफिर "

कड़क धुप की गर्म हवाओं में,
चलता रहता हूँ मैं मुसाफिर |
न छाँव और न ही थकान, 
महसूस करता हूँ मैं आखिर |
उस लक्ष्य को मुझे पाना है,
बिना रुके लक्ष्य को है जाना |
चाहे हो जितनी बाधाएँ ,
हर मुसीबतों को तर जाएँ |
हर कदम को संभल कर रखना,
हर बाधाओं को परखना |
आखिर लक्ष्य तक जाना है,
यह संदेशा सभी को बताना है |

कवि : प्रांजुल कुमर , कक्षा : 10th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखे का बहुत शौक है और वह बहुत सी कवितायेँ भी लिख चुके हैं | पढ़ लिखकर एक अच्छे इंजीनियर बनना चाहते है |

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

कविता : सागर बन जाऊँ

" सागर बन जाऊँ "

मन करता है सागर बन जाऊँ,
सन्देश देने वाली लहरें बन जाऊँ |
ऐसे उठूँ कि गिर न सकूँ,
लोगों को जीना सिखाऊँ |
पानी की तरह रहना सिखाऊँ,
मैं उन सभी से यह बात कह पाऊँ |
मन करता है सागर बन जाऊँ,
सन्देश देने वाली लहरें बन जाऊँ |
काश सभी को सन्देश पसंद आए,
मेरी बातें लोगों के दिल को छू जाए |  
काश मैं एक संदेशा कहलाऊँ,
मन करता है सागर बन जाऊँ |

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कवितायेँ लिख भी चुके हैं | कवितायेँ लिखने के आलावा क्रिकेट खेलना और संगीत में भी बहुत रूचि है |

रविवार, 11 अगस्त 2019

कविता : मैं क्या बनूँ

" मैं क्या बनूँ "

मैं क्या बनूँ,
इस सवाल ने सताया |
मैं क्या करूँ,
किसी ने नहीं बताया |
फिर मैं परिवार वालों से पूछा,
फिर  भी मुझको कुछ न सूझा |
दिमाग में आने लगे विचार,
क्या पढ़ना लिखना है बेकार |
पर मुझे लगा कुछ होगा यार,
जिससे हो जाएगी नौका पार |
इस सवाल ने कितना सताया,
मैं किस लायक हूँ,
मुझे किसी ने नहीं बताया |

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 9TH , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता देवराज के द्वारा लिखी गई है ,जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं परन्तु वर्तमान समय में कानपुर के 'आशा ट्रस्ट 'नामक संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | देवराज की यह कविता अपने पर आधारित है | देवराज को कुछ भी सिखने में बहुत रूचि है |

कविता : मौसम

" मौसम "


बदल रहें हैं मौसम आज,
फिर भी सभी हैं खास |
बदरी छा रही है पल पल में,
सुनहरी धूप खिल रही है कण कण में |
बादल भी कभी रोने लगते हैं,
सारी गन्दगी धुलने लगती है |
बसंत ,नई कली को जन्म देती,
तपती धूप पेड़ों का दम हर लेती |
गर्मी में भी बारिश की होती है आस,
बदल रहे मौसम ,फिर भी है खास |

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा :  10th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | प्रांजुल के कविताओं का शीर्षक प्रकति से मिलता - जुलता होता है | पढ़ लिखकर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं 

गुरुवार, 8 अगस्त 2019

कविता : छुट्टी हुई

" छुट्टी हुई "

छुट्टी हुई , छुट्टी हुई,
स्कूल से आज छुट्टी हुई |
चार को स्कूल खुलेगा,
उसी दिन कॉपी , किताब मिलेगा |
फिर मैं स्कूल जाऊंगा,
स्कूल में पहले प्रार्थना करूँगा |
फिर दूसरा पीरियड लगेगा,
उसके आगे पता पता नहीं है |
फिर समय हो जाऊँगा,
तो मैं घर आ जाऊँगा |

कवि : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता नवलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | कानपुर के अपना घर संस्था में रहकर कक्षा ५ में पढ़ाई करते हैं | नवलेश को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है | पढ़ाई के प्रति बहुत सिरियस रहता है |

बुधवार, 7 अगस्त 2019

कविता : एक कण हूँ मैं

" एक कण हूँ मैं "

बचपन से धूप में तपता रहा हूँ मैं,
धूल के कणों से खेलता रहा हूँ मैं |
पर मुझे आज एक मौका मिला है,
जो बहुत ही मुश्किल से मिला है |
इतने बड़े संसार में,
इस बड़े परिवार में |
शायद एक कण हूँ मैं | |
छोटे चीजों से खेलना पसंद करता हूँ,
उन्हें हाथों में रखकर देखना पसंद करता हूँ |
उसे एक सुनहरी जगह रखकर,
करीब से समझना पसंद करता हूँ मैं,
क्योंकि शायद मैं एक कण हूँ |

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता देवराज के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिला के रहने वाला है | देवराज को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है | इस कविता का शीर्षक है " एक कण हूँ मैं "जो की परिवार में सदस्य के महत्व को दर्शाता है |

सोमवार, 5 अगस्त 2019

कविता : डर है मुझे

" डर है मुझे "

रंग के त्योहारों में,
एक अनोखे नज़ारों में,
खुद को मुझे खोने का डर है |
डर है मुझे उन चीजों से,
जो मुझे आकर्षित करती है |
डर है मुझे उन शक्षों से,
जो अपने बातों में दूसरों को गुमराह करते हैं  |
नयी हसीन बाज़ार में,
एक कहीं दुनिया के आढ़ में |
खुद को मुझे खोने का डर है,
डर है मुझे रंगीन चेहरे से |
डर है मुझे हसीन पहरे से,
मुझे डर है खुद को खोने का |

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता देवराज के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " डर है मुझे " | देवराज ने यह कविता समाज को देखकर लिखी है की आज के युग में लोग आकर्षित होकर खुद खो देते हैं | देवराज को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | देवराज एक इंजीनयर  बनना चाहते है |

रविवार, 4 अगस्त 2019

कविता : प्यारी माँ है तू

" प्यारी माँ है तू "

धूप की तपती कहर है तू,
दोनों हाथों में स्वर्ग का आनंद है तू |
वह प्यारी माँ है तू,
छाती से दूध पिलाने वाली माँ है तू |
हर दर्द को समझने वाली,
हर मुसीबत से निपटने वाली |
एक प्यार का समुन्दर की लहरों का,
भरा हुआ जलासय है तू |
वह नाज़ुक से पैर को सराहने वाली,
गिर जाने पर दौड़ कर उठाने वाली |
मेरा सारा जहान तू है,
मेरी माँ है तू |


कवि : विक्रम  कुमार , कक्षा: 9TH , अपना घर

कवि परिचय : यह है विक्रम जिन्होंने यह कविता लिखी है जिसका शीर्षक है मेरी प्यारी माँ है तू | विक्रम को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | विक्रम रोचक भरी कवितायेँ भी लिखते हैं | विक्रम एक  नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं | आशा है की यह कविता सबके मन को भाएगी |

शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

कविता : हौशला

" हौशला "

मुझमें भी वह हौशला है,
मेरे भी कुछ ख्वाइश हैं |
मैं अपने को साबित कर सकता
पेन और कॉपी के सहारे |
अपना उज्जवल भविष्य लिख सकता हूँ,
उसको सबके सामने पढ़ सकता हूँ |
सुनहरे अक्षरों का ज्ञान हममे भी है,
गहराई में जाने की क्षमता हममे भी है |
तैरते हुए समुन्दर को पार करना है,
अब किसी से नहीं डरना है |   

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सार्थक के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक हौशला है | हौशला सभी में होता है लेकिन उसे दिखाने में झिझकते हैं |
सार्थक को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | सार्थक बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | सार्थक एक आर्मी ऑफिसर बनना चाहते हैं |

गुरुवार, 1 अगस्त 2019

कविता : सावन की पहली बारिश

" सावन की पहली बारिश "

सावन की पहली बारिश ऐसे आया,
जैसे अँधेरे कोठरी में कोई मुशाफिर आया |
सुनशान जगह में कोई नया जीवन लाया,
हरे हुए लोगों का जोश बढ़ाया |
पूरे तरफ हरियाली ही छाई है,
लगता है कोई रौनक लाई है |
प्रकति ने अपना जलवा बिखेरा है,
जिसके कारण सबसे अच्छा सबेरा है |
ये सावन कुछ अलग से आया है,
जो सबको कुछ ज्यादा भाया है |

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता देवब्रज के द्वारा लिखी गई जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं और कानपूर के अपना घर नामक संस्था में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं | देवराज को कवितायेँ लिखने के आलावा डांस करना है | देवराज एक साइंटिस्ट बनना चाहते हैं |