रविवार, 9 जून 2019

कविता : देश होता जा रहा है खोखला

" देश होता जा रहा है खोखला "

फैशन का चल रहा है जलवा,
देश होता जा रहा है खोखला |
तरह -तरह की नई चीजें आती,
ये सब बड़े बड़े को नाच नचाती |
फैशन का चल रहा है जलवा,
गन्दी चीजें कर रही है हमला |
इमारतों से भरती जा रही है दुनिया,
कब समझेंगे देश के बनिया |
पेड़ सब कटते गए,
ऑक्सीजन की मात्रा घटती गई |
फैशन का चल रहा है जलवा,
देश होता जा रहा है खोखला |

नाम : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | कुलदीप कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक वह बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | कुलदीप क्रिकेट बहुत अच्छा खेल लेते हैं | कुलदीप हर दिन कुछ न कुछ नया  करता रहता है और छोटे बच्चों को ज्ञान की बातें बताता रहता है |

गुरुवार, 6 जून 2019

कविता : बचपन

" बचपन "

जब मैं छोटा बच्चा था,
बचपन में मैं गोरा था |
बचपन में मैं शैतान था,
मम्मी गलती पर डाटती थी |
फिर भी वही काम करता था,
पापा मेरे लिए रसगुल्ला लाता था |
मिठाई मैं पेट भर के कहते था,
जब मैं छोटा बच्चा था |
बचपन में मैं मोटा था |
जो काम नहीं करना होता,
वह काम मैं करता था |  

नाम :मंगल कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता अपना घर के सबसे नए छात्र मंगल ने लिखी है जो की मध्य प्रदेश निवासी हैं और अपना घर में रहकर कक्षा 3rd में पढ़ते हैं |
मंगल की यह पहली कविता है जिसको अपने ऊपर लिखा है | मंगल चाहते हैं की वह आगे और भी कविता लिखेंगे |

रविवार, 2 जून 2019

कविता : छोटी सी चिड़िया

 " छोटी सी चिड़िया "

छोटी सी चिड़िया है,
वह कुछ कहना चाहती है |
उसकी भाषा समझ में न आती है,
इसीलिए उदास होकर वह उड़ जाती है |
वह अपने दुःख को ले जाती है,
छोटी सी चिड़िया कुछ कह जाती है |
चिड़िया अपनी आवाज़ों से पुकारती है,
वह लोंगो को खुश कर जाती है |
छोटी चिड़िया कुछ कहना चाहती है,
ऐसा लगता है वह हमारे साथ रहना चाहती है |

कवि : सनी कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सनी के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी  हैं, और अपना घर संस्था में रहकर कक्षा ५ में पढ़ते हैं | सनी को कवितायें लिखना बहुत पसन्द है | सनी एक पुलिस ऑफिसर बनना चाहते हैं |  



शुक्रवार, 31 मई 2019

कविता : छुट्टी

" छुट्टी "

जब छुट्टी हुई स्कूल से,
खूब खेल रहे थे धूल से |
हो गई बड़ी भूल हम से,
मम्मी ने मना किया था खेलना धूल से |
जब छुट्टी हुई स्कूल से | |
पढ़ाई का कोई नाम नहीं,
करने को कोई काम नहीं |
बस खेलते रहते दोपहर से शाम,
यही था छुट्टी का इनाम |
नाम : सनी कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सनी के द्वारा लिखी गई है बिहार के निवासी हैं | सनी कक्षा 5th का छात्र है जिसके अंदर कवितायेँ लिखने की रूचि है | सनी   बहुत ही हसमुख बालक है | सनी को लोगों को हँसाने बहुत मज़ा आती है |

गुरुवार, 30 मई 2019

कविता : गर्मी

गर्मी

गर्मी आई ,गर्मी आई,
संग में कड़ाके की धूप लाई |
गर्मी में धूप से पसीना आई,
गर्मी आई ,गर्मी आई |
गर्मी में फल भी आई,
गर्मी से ठण्डी भी भागी |
गर्मी में पैंट पहन लो भाई,
गर्मी से बचकर रहो मेरे भाई |
बर्फ ,कुल्फी और तरबूज खाओ,
इस कड़ाके की गर्मी का लुफ्त उठाओ |
नाम : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता नवलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | नवलेश बहुत ही हसमुख है और कवितायेँ लिखने में बहुत रूचि रखता है | नवलेश को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है और कविता लिखना भी  बहुत पसंद है |  नवलेश के माता - पिता ईंट भठ्ठों में ईंट पथाई का काम करते हैं |

बुधवार, 29 मई 2019

कविता : चन्दा मामा की बात

" चन्दा मामा की बात "

सो रहे थे जब छत पे हम,
गिन रहे थे तारे को |
तभी कुछ देर बाद आ गए,
चन्दा मां सुलाने को |
तारे बोले अभी तुम न सोना,
अभी करना है कुछ काम |
फैलो जग में इतना,
ताकि हो तुम्हारा नाम |

ये सब सुनकर गुस्से से बोला चन्दा मामा,
सो जा बालक |
नहीं तो भइया कराएंगे तुम से ड्रामा,
यह सुनकर हम ने बोला चुप हो जा मामा |
आज नहीं यह बात हमको कल बताना | |  

तारों की बात मान कर जगे रहे साडी रात,
और चंदा मामा से कभी नहीं करते बात |  
क्यों कहते थे,
सो जा बालक सारि रात |

नाम : कामता कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कामता के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के नवासी हैं | कामता को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कविता लिखते हैं | कामता को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है | पढ़लिखकर एक नेवी ऑफिसर बनना चाहतें हैं |

रविवार, 26 मई 2019

कविता : जाति -धर्म

" जाति -धर्म "

जाति - धर्म मैं क्या जानूँ,
सभी को मैं भाई - बहन मानूँ |
अल्लाह - ईश्वर है एक,
फिर भी बैर रखते हैं लोग अनेक |
रगों में रंग है ताली का,
फिर भी बैर है गोरी और काली का |
अल्लाह ईश्वर एक सामान,
वही खून वही भगवान |

नाम : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

गुरुवार, 23 मई 2019

कविता : एक बात

" एक बात "

बैठा था जब मैं खिड़की के पास,
सोच रहा था बैठ एक बात |
जब आया वह खेल याद,
खेल रहा था मैं दिन - रात |
हार गया तो क्या हुआ,
लेकिन जीतूँगा मैं भी एक बार |
चोट लगी तो क्या हुआ,
मेहनत करना है एक साथ |
चला गया मैं पृथ्वी से पार, 
बैठा था जब मैं खिड़की के पास |

नाम : सुल्तान कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सुल्तान के द्वारा लिखी गई है जो की कक्षा 5 के विद्यार्थी है | सुल्तान मूल रूप से बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं और वर्तमान समय में अपना घर नामक संस्था में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | सुल्तान को खेलना बहुत अच्छा लगता है |

शनिवार, 18 मई 2019

कविता : हँसी तो सभी को आती है

" हँसी तो सभी को आती है "

हँसी तो सभी को आती है,
लेकिन वह हँस नहीं पाता है |
दर्द तो सभी को होता है,
लेकिन वह सह नहीं पाता है |
जिंदगी जीना है सभी को,
लेकिन जी नहीं  पाता |
पढ़ना उसे पड़ता है जो रह नहीं पाता,
दर्द उसे होता है जो सह नहीं पाता |
हँसी तो सभी को आती है
लेकिन वह हंस नहीं पाता |

                                                                                                                नाम : सुल्तान कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : बड़े ख़ुशी के साथ इस कविता को लिखने वाले सुल्तान कुमार बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं और वर्तमान में अपना घर संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | सुल्तान को कवितायेँ लिखना , चित्र बनाना और अन्य गतिविधियां करने में बहुत मजा आता है | मुझे उम्मीद है की आप लोगों के समर्थन से मैं और भी कवितायेँ लिखूँगा |

शुक्रवार, 17 मई 2019

कविता : चिड़िया

" चिड़िया "

छोटी सी चिड़िया उड़ रही है,
आसमान में बादल के नीचे |
उड़ रही है वह छोटी सी चिड़िया,
फुदक फुदक कर उड़ रही है चिड़िया |
आकाश में उड़ रही है चिड़िया,
लोंगो से कुछ कह रही है चिड़िया |
मन ही मन में मचल रही है चिड़िया,
फिर भी गीत गति है चिड़िया |  

नाम : शिवा कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता शिवा के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के निवासी हैं | शिवा की यह पहली कविता उम्मीद है जो कि आपको यह कविता पसंद आएगी | शिवा को कविता लिखना बहुत अच्छा लगता है और बड़े लोंगो से प्रेरणा लेकर और भी कविताएँ लिखता है |

कविता : आज मैंने ये जाना है

" आज मैंने ये जाना है "

आज मैंने ये जाना है,
ये तो सिर्फ एक बहाना है |
सबको पैसा ही बस खाना है,
मुझे बताओ कहाँ अब जाना है |
ये पैसा ही सिर्फ बहाना है,
बस सबको बड़ा ही बनना है |
मुझे तुमसे बस इतना ही कहना है,
ये जवाना ही बस बहाना है |
बस पैसा ही इनको खाना है | |

                                                                                              नाम : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं और अपना घर संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कवितायेँ लिखते भी हैं | इसके अलावा क्रिकेट खेलना भी बहुत पसन्द है |

बुधवार, 15 मई 2019

कविता : माँ

" माँ " 

माँ तू कितनी प्यारी है,
दुनियाँ में सबसे न्यारी है |
तेरे बिना सारा जीवन अधूरा है,
माँ तू कितनी प्यारी है |
रोते को हँसना सिखाती है,
गिरते को चलना बताती है |
नई नई बात बताती,
अपनी अंचल में सुलाती |
दुःख से लड़ना सिखाती,
उँगली पकड़ राह दिखती |
माँ तू कितनी प्यारी है,
दुनियाँ में सबसे न्यारी है |

नाम : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सार्थक के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के निवासी हैं | सार्थक को कहीं भी घूमना और लोगों से बात करना बहुत अच्छा लगता है | सार्थक आर्मी में जाना चाहते हैं | खेलने के आलावा कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है |

कविता : मैं चाहकर भी न रोक सका

" मैं चाहकर भी न रोक सका "

मैं चाहकर भी न रोक सका,
उस मधुर से गीत को |
वह क्या सुर और ताल था,
जिसमें सुरीली आवाज़ थी |
मन मस्त मगन हो जाता है,
जो उस गाना को सुनता है |
उस संगीतकार का क्या तारीफ करूँ,
जिसने उसे रचाया है |
नींद मुझे आ जाती है,
उस संगीत की झंकार से |
मैं चाह भी न रोक सका,|
उस मधुर संगीत को |

नाम : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कवितायेँ लिखते भी हैं | कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं | कुलदीप को खेलना बहुत पसंद है |  

रविवार, 12 मई 2019

कविता : जनता की बारी

" जनता की बारी "

आई अब जनता की बारी,
सही नेता चुनने की तयारी |
वोट जनता का हथियार है,
संभलना नेता बहुत होशियार है |  
करेंगे चिकनी चुपड़ी बातें,
इनके चक्कर जनता है आतें |
पाँच सालों में कुछ किया नहीं,
जनता सही से जिया ही नहीं |
किसी का हल्का किसी का पलड़ा भारी,
आई अब जनता की बारी |
सही नेता चुनने की तैयारी | |

कवि : अखिलेश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता अखिलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | अखिलेश कानपुर के आशा ट्रस्ट नामक संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | अखिलेश को फुटबॉल खेलना बहुत पसंद है और कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है |

शनिवार, 11 मई 2019

कविता : आम का महीना आया

"आम का महीना आया "

आम का महीना आया,
 बच्चों के मुँह में पानी आया |
मुँह से लार टपकता टप टप कर,
आमों में रस भरा रहता है ठस ठस कर |
धूप से गिरता टप टप,
बच्चे खाए खूब चूसकर |
रंग रसीला आम लाया,
बच्चों के मन में खुशियाँ लाया |
आम का महीना आया,
 बच्चों के मुँह में पानी आया |

नाम : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सार्थक के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | सार्थक को मौसम और चीजों के बारे में कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | सार्थक एक इंडियन आर्मी बनना चाहते हैं | सार्थक को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है |

शुक्रवार, 10 मई 2019

कविता : माँ

" माँ "

तेरा कसूर कुछ नहीं,
जो तेरा कर्म तूने किया,
मुझे पता है तूने ही मुझे जन्म दिया |

सहा है बहुत सी मुसीबतों को,
बिना किए अपनी परवाह |
तेरी ममता मेरी जान से प्यारी,
तू ही है दुनियाँ की सबसे न्यारी |

अब यह क्या तेरे चेहरे पर झुर्रियॉ,
आँखों में आँसू |
मुँह में आह की आवाज़,
वह ठोकरों से भरी राह |

फिर भी सह कर है मुस्कराती,
तू मेरी अनमोल रत्न |
मेरी जान से भी प्यारी,
तू ही तो है मेरी सर्वोपरी |
मेरी जान से प्यारी मेरी माँ |

नाम : राज कुमार,  कक्षा : 10th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता राज के द्वारा लिखी गई जो की  हमीरपुर के निवासी हैं और अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पड़े कर रहे हैं | राज को कवितायेँ लिखने का बहित शौक है | राज एक होनहार छात्र हैं |
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गुरुवार, 9 मई 2019

कविता : पीड़ा

" पीड़ा "

जब मैं बैठा था एक खाली रोड पर,
पीड़ा होने लगी कसके मेरे दिमाग पर |
मैं सोच रहा था अपने इतिहास पर,
जो नहीं दिखा कुछ खास |
मैंने सोचा अपने आने वाले कल पर,
मैं बदल सकता था अगले साल पर |
अब मैं जीना चाहता हूँ एक नई जिंदगी,
जिसमें मिले मुझे ढेर ख़ुशी |
मैं बदल दूँगा उस दुःख समय को ,
जिससे मेरे जिंदगी में बस ख़ुशी हो |


कवि : सुल्तान , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सुल्तान के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | सुल्तान को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | सुल्तान को खेल खेलना बहुत अच्छा लगता है | सुल्तान बहुत ही अच्छा बच्चा है |

मंगलवार, 7 मई 2019

कविता : मजदूरों का अवकाश था

" मजदूरों का अवकाश था "

वह दिन कुछ खाश था,
मजदूरों का अवकाश था |
1 मई का दिन था,
मजदूर दिवस का वह दिन था |
यह पल था प्रेम और खुशियों का,
यहाँ जन्मदिन था हम सबका |
कुछ लोगों ने सजाया था,
रात में जन्मदिन मनाया था |
कुछ मेहमान आए थे,
खाना बड़े मजे से खाए थे |
रात में नाच गाना था,
वह दिन सबसे मस्ताना था |


कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घ
कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वह लिखते भी हैं | कुलदीप पढ़लिखकर एक नेवई ऑफिसर बनना चाहते हैं |

सोमवार, 6 मई 2019

कविता : सागर बन जाऊँ

" सागर बन जाऊँ "

मन करता है सागर बन जाऊँ,
नदियों के संग मैं मिल जाऊँ |
कभी बिहार तो कभी कश्मीर,
पूरी दुनियाँ की सैर कर आऊँ |
चले मेरे ऊपर से ठंडी समीर,
गाए बस मेरे बारे में कबीर |
चाहे हो वो अमीर या हो गरीब,
अच्छा हो जाए सभी का नसीब |

कवि : समीर कुमार  कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचाय : यह कविता समीर के द्वार लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी है और अपनी शिक्षा को ग्रहण करने के लिए अपना घर संस्था से जुड़े हुए है | समीर को कवितायेँ लखने के आलावा गीत भी गाना बहुत पसंद है | समीर को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है |

रविवार, 5 मई 2019

कविता : तपती हुई धूप

" तपती हुई धूप "

इस तपती  हुई धुप ने,
पसीना से लथपथ किया |
गर्म हवा में शरीर है जलता,
यही लू से बीमार है करता |
बाहर निकलने का हिम्मत न करता,
पेड़ों को ये दर्द पहुँचाता |
धूपों से लोग तड़प रहे हैं ,
पेड़ की छाँव के लिए झूझ रहे हैं |
ये तपती हुई धूप ने,
पसीना से लतपत किया |
पानी के लिए तरस रहे हैं,
बिना पानी के मर रहे हैं | 

नाम : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सार्थक के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | सार्थक को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कवितायेँ लिखते हैं | सार्थक आर्मी में भर्ती होना चाहता है | सार्थक बहुत अच्छा लड़का है और सबकी मदद करता है |

शुक्रवार, 3 मई 2019

कविता : जाऊँ मैं कहाँ और क्या चुनूँ

" जाऊँ मैं कहाँ और क्या चुनूँ "

जाऊँ मैं कहाँ और क्या चुनूँ,
क्या मैं करूँ और क्या सुनूँ |
मुझे नहीं समझ में आता,
पता नहीं मेरा दिल क्या कह जाता |
ये मेरे दिल का सुरूर,
मैं कहाँ से करूँ शुरू |
पर मुझे नहीं पता,
क्या और कब है होता |
पर मुझे अपने लक्ष्य लिए,
चुनना पड़ेगा एक अच्छा गुरु |
जाऊँ मैं कहाँ और क्या चुनूँ,
क्या मैं करूँ और क्या सुनूँ |

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह हैं नितीश कुमार जिन्होंने यह कविता लिखी है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | नितीश को कवितायेँ लिखना बहुत पसंद है और बहुत सी कवितायेँ लिखते हैं | नितीश को टेक्नोलॉजी में बहुत रूचि है | नितीश एक इंजीनियर बनना चाहते हैं |

बुधवार, 1 मई 2019

कविता : एक जहाज है कुछ ऐसा

" एक जहाज है कुछ ऐसा "

एक जहाज है कुछ ऐसा,
जिसपे सब कोई है बसा |
पेड़ - पौधे , झील - नदियाँ,
सब थे इसके सवारी |
जब इस पर मनुष्य सवार हुए,
बदल गया चल - चलन |
संभाला फिर भी न संभला,
अब कौन बचाएगा हमें बला |
न जाने अब कहाँ रुकेगी,
अब न बचा कोई चालक इसका |
नाम : नितीश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर



कवि परिचय : नितीश जिन्होंने यह कविता लिखी है जो की बैहर के नवादा जिले के निवासी हैं | नितीश को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | नितीश को टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी रखना और कैसे काम करना इसपर नितीश को बहुत ज्ञान हैं | नितीश अपने माता - पिता का नाम रोशन करना चाहते हैं |

मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

कविता : नोट

" नोट "

बहुत कीमत होती है,
छोटे से कागज की |
बस गाँधी की फोटो हो,
गवर्नर का साइन हो |
उसी को नोट कहते हैं,
लोग उसी नोट में  रहते हैं |
दुनियां ऐसी हो गई है,
कहते हैं पैसा फेको तमाशा देखो |
इसका कागज है लाइट,
इसके चलते हो जाती है फाइट |   

नाम : सूरज , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सूरज के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के निवासी हैं | सूरज ने यह कविता नोट पर लिखी है जैसा की वह सोचता है आज लोग से महत्वपूर्ण तो पैसा हो गया है | उन्हें आज रूपए से मतलब है |

सोमवार, 29 अप्रैल 2019

कविता : एक पल ऐसा था

" एक पल ऐसा था "

एक पल ऐसा था,
जब मुझको पता न था |
अचानक से तापमान,
बढ़ता जा रहा था |
मन भी इधर उधर ,
मचलता जा रहा था |
चक्कर जैसा हो रहा था,
मुझको सोने का मन |
जिससे मुझको हो गया फीवर,
तापमान न मेरा घटता था |
होकर इससे मैं परेशान,
सोने लगा रातों -रात |
ठीक हुआ चार दिन बाद,
जो था मेरा पल का बेकार दिन |

                                                                                                           नाम : कुदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जिन्होंने यह कविता लिखी है | कुलदीप को डांस करना बहुत अच्छा लगता है और वह हर पार्टी व् उद्घाटन में खूब नाचता है | कुलदीप पढ़लिखरा एयरफोर्स में जाना चाहते हैं और अपने माता पिता का नाम रोशन करना चाहते हैं |  

कविता : वोट का खुमार

" वोट का खुमार "

वोट का ये खुमार है,
भाजपा को दे या कांग्रेस को |
न मिले तो सपा को दो,
चरों ओर से बेमिशाल से प्रचार है |
अबकी बार किसकी सरकार है,
सभी को वोट डालने का अधिकार है |
१८ से ऊपर खुला बहार है,
सभी को सही नेता चुनने का अधिकार है |
क्योंकि उनके हाथ में वोट का हथियार है | |


कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह हैं विक्रम जिन्होंने यह कविता लिखी है जो की बिहार  के नवादा जिले के निवासी है | विक्रम को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वः अभी तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | विक्रम पढ़लिखकर समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं क्योंकि उनका मन्ना है की जिस परिस्थिति से मैं आया हूँ मैं भी उन्हें कुछ दे सकूँ |


रविवार, 28 अप्रैल 2019

कविता : बाल मजदूर

 "बाल मजदूर "

नाजुक हाथों ने क्या कर दिया पाप, 
जन्म से ही दे दिया कामों का वनवास |
कलियों जैसी खिलने वाले उस मासूम, 
जिंदगी को कर दिया तबाह |
हर बचपन के लम्हों को, 
हर सजाये हुए सपनों को |
दो मिनुट में कर दिया राख,
दर्दनाक जिंदगी उसे तडपा दिया |
बचपन के खिलौनों की जगह,
 जिंदगी से लड़ना सिखा दिया | 
पेन ,किताब और कॉपी की जगह, 
कम का बोझ इर पर लाद दिया |

नाम : विक्रम कुमार , कक्षा : 7 , अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं विक्रम जिन्होंने यह कविता लिखी है, जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | विक्रम को कवितायेँ अच्छे से लिखी आती है | विक्रम ज्यादातर समाज पर लिखते हैं और उस कविता के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं | बड़े होकर एक नेक इंसान बनना चाहते है |  

कविता : जब लोगों ने किया तंग

" जब लोगों ने किया तंग "

जब लोगों ने किया तंग,
तब सिर्फ तूने दिया संग,
जातिप्रथा का था वो समय,
बस लोगों में थी प्रलय |
सभी थे जातिप्रथा के बस में,
जातिवाद दौड़ रही थी सभी के नश में |
नहीं था कोई अपने बस में,
क्योंकि थे वो सिर्फ अंग्रेजों के बस में |   

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर


कवि परिचय  : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई जो की प्रयागराज के निवासी हैं और अपना घर संस्था में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं | समीर को गीत गाना बहुत अच्छा लगता है | समीर एक संगीतकार बनना चाहते हैं | समीर जब भी समय मिलता है वो छोटे बच्चों को गीत सिखाता है |

कविता : चीजें समझ में आई

" चीजें समझ में आई "

अब मुझे चीजें समझ में आई,
जब दो कदम आगे चलकर देखा |
मैंने पीछे देखा , मैंने देखा की
पापा मुझे मर रहे थे,
हर गलतियों का कसार निकल रहे थे |
तब मुझे गुस्सा आता था,
कभी घर से भाग जाने का मन करता था |
दूसरे बच्चों की किस्मत देखी,
खुद को दोषता था |
तो कभी सब को बुरा भला कहता था,
किस्मत ने भी क्या साथ निभाया
मुझे अपना यार बनाया  |
परिवार से परेशांन होकर
मैंने मरने की ठानी,
पर समय ने गठनी की नै कहानी |
बहुत कठिनाइयों के बाद खड़ा हूँ मैं आज,
जरा आप भी सोचो जिंदगी को |
लिखो डायरियों के पन्नों के बीच,
शायद वो आपको आने वाले समय |
में दे आपको नई संगती | |

कवि : देवराज , कक्षा : 9th , अपना घर


कवि परिचय : यह हैं देवराज जिन्होंने यह कविता लिखी है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं और वर्तमान में अपना घर संस्था में रहकर वह अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | देवराज को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वह अब तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | देवराज को हमेशा कुछ नई चीज सिखने की ललक रहती है |  


रविवार, 21 अप्रैल 2019

कविता : दुनिया कितनी सुन्दर है

" दुनिया कितनी सुन्दर है "

ये दुनिया कितनी सुन्दर है,
जहाँ देखो हर जगह समुन्दर है |
पर ये है इतना खारा,
इसका इस्तेमाल न होता सारा |
जिव जंतु हैं बहुत सारा,
जो घूमते फिरते हैं आवारा |
ये दुनिया कितना सुन्दर है,
पेड़ों का भरमार है |
इससे जिव को जीवन मिलती,
छोटे बड़े सभी के चेहरे खिलती |
पेड़ पौधे है कितना प्यारा,
यही है जीने का गुजारा |
ये दुनिया कितनी सुन्दर है,
जहाँ देखो हर जगह समुन्दर है |

                                                                                                            कवि : कामता कुमार , कक्षा : 8th , आनाघर

कवि परिचय : यह कविता कामता के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं और अपना घर में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | कामता को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है और शिखर धवन को अपना गुरु मानते हैं | कामता को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वह बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं |

कविता : बारिश आया

 " बारिश आया "

काले - काले बादल आसमान पे छाया,
यह देखकर मोर , मेंढक शोर मचाया |
फिर बड़े -बड़े बूंदें गिराया,
सूखे हुए पौधों में जीवन लाया |
बारिश आया बारिश आया,
बूंदें भी खूब गिराया |
हवा -पानी साथ में लाया,
लम्बे - लम्बे पेड़ों को गिराया |
बारिश आया बारिश आया | |
                                                                                                          कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई हैं जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और वर्तमान समय में कानपुर में अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | कुलदीप को कवितायेँ  लिखने का बहुत शौक है और वह बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | कुलदीप पढ़ लिखकर नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं | कुलदीप के माता - पिता को कुलदीप से बहुत आशा है की कुलदीप कुछ पढ़लिखकर बन जाए | कुलदीप दिल से बहुत अच्छा और मन से सुखी व्यक्ति है |

मंगलवार, 9 अप्रैल 2019

कविता : बारिश आई

" बारिश आई "

बारिश आई बारिश आई ,
साथ में देखो पानी लाई |
जब बारिश आ जाती है,
फूलों की कलियाँ खिल जाती है |
पेड़ भी हरे - भरे हो जाते हैं,
सब थककर अंदर सो जाते हैं |
बारिश आई बारिश आई,
मस्ती करने का महीना लाई |
बच्चे नाव बनाते हैं,
बारिश में खूब नहाते हैं |
बारिश आई बारिश आई ,
साथ में देखो पानी लाई |

कवि : अजय कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता अजय कुमार के द्वारा लिखी गई है, जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | अजय अपनी चंचल भरी कविताओं से सबका मन मोह लेते हैं | अजय को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है अजय बहुत ही हसमुख छात्र है और हमेशा अपनी पचकानी हरकतों से सबको हंसाते रहते हैं |
अजय बहुत महान बच्चा है |

सोमवार, 8 अप्रैल 2019

कविता : एक ऐसे मोड़ पर

" एक ऐसे मोड़ पर "

जब मैं खड़ा था एक ऐसे मोड़ पर,
मेरी जिंदगी ले गई उस छोर पर |
दिखाए मुझे कई किनारे उस छोर पर,
पर मुझे ही नहीं था भरोसा अपनी सोच पर |
मेरी जिंदगी ने मुझे वहाँ पर टोका,
पर मुझे डर था कहीं मैं खा न जाऊ धोखा |
मैंने वहाँ पर भी कुछ ठहर कर सोचा,
मुझे लगा इसमें है कुछ न कुछ लोचा |
मुझे लगने लगा अब अकेलापन,
जब मैं खड़ा था एक ऐसे मोड़ पर |

                                                                                                                 कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर


कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं और वर्तमान समय में अपना घर संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | समीर एक संगीतकार भी हैं और अपनी कला को दूसरों को भी सिखाते हैं |

बुधवार, 3 अप्रैल 2019

कविता : सुबह का मौसम

" सुबह का मौसम "

ये सुबह का मौसम
कुछ ऐसा होता है |
जो सुबह फिर सोने पर,
मजबूर कर देता है |
धीरे धीरे हौले हौले
ठंडी ठंडी बहती ये हवाएँ |
मेरे शरीर को छूकर है जाती,
पता नहीं वह क्या कह जाती |
शोर होता है यहाँ,
चिड़ियाँ चहकती है जहाँ |
बड़ा खूबसूरत होता है,
ये सुबह का नजारा |


                                                                                                              कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कविता : सुहानी सी सुबह

" सुहानी सी सुबह "

सुहानी सी सुबह खिली है,
लगता है धरती सूरज से मिली है |
उसके एक एक कण ऊर्जा से भरे है,
ऐसा लगता है जैसे सागर में मोती बिखरे हैं |
सुनहरी सुबह प्रकति से बात करती है,
पता नहीं प्रकति क्यों इतना मचलती है |
चहचहाती चिड़ियाँ, खुली हुई खिड़कियाँ,
बंधन से टूटी साडी वो बेड़ियाँ |
लहलहाते फसल मन में हलचल,
उम्मीद रहती है अच्छा हो कल |


  कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर



कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जिन्होंने यह कविता लिखी है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और हर हफ्ते ये कवितायेँ लिखते हैं | प्रांजुल इंजीनियर की पढ़ाई करना चाहते हैं | प्रांजुल को गणित बहुत ही अच्छा लगता है और उसको विषय के रूप में न लेकर मस्ती में पढ़ते हैं |

मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

कविता : लम्हा जो मैंने खो दिया

" लम्हा जो मैंने खो दिया "

वह लम्हा जो मैंने खो दिया,
हर कदम वह लगन जो मैंने कम कर दिया |
वह याद आती है और दुबारा बुलाती है,
जोश और होश में आने की आशा दिलाती है |
दिमाग और दिल तड़पकर कुछ कर
जाने को आहट निकलती है |
खोकर वह एक नया पहचान बनाना चाहती है |
वह लम्हा जो खो गया उसे पाना चाहती है,
वह अपने - आप में मशाल बनना चाहती है |


कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर


कवि परिचय : यह हैं विक्रम कुमार जिन्होंने यह कविता लिखी है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी है | विक्रम को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | पढ़लिखकर रेलवे डिपार्टमेंट में काम करना चाहते हैं | विक्रम बहुत ही हसमुख छात्र हैं |

सोमवार, 1 अप्रैल 2019

कविता : सुहानी सी सुबह

" सुहानी सी सुबह "

सुहानी सी सुबह खिली है,
लगता है धरती सूरज से मिली है |
उसके एक एक कण ऊर्जा से भरे है,
ऐसा लगता जैसे सागर में मोती बिखरे  है |
सुनहरी सुबह प्रकति बात करती है,
पता नहीं प्रकति क्यों इतना  मचलती है |
चहचहाती चिड़ियाँ खुली हुई खिड़कियाँ,
बंधन से टूटी सारी वो बेड़ियाँ |
लहलहाते फसल , मन में हलचल,
उम्मीद रहती है अच्छा हो कल |

                                                                                                 कवि : प्रांजुल कुमार।, कक्षा : 10th , अपना घर

कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जिन्होंने यह कविता लिखी है, जो की छत्तीसगढ़ के निवासी है और अभी अपना घर संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | पढ़लिखकर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं | गणित में बहुत रूचि है और उसको विषय के तौर पर नहीं पढ़ते बल्कि मज़े लेकर पढ़ते हैं |

रविवार, 31 मार्च 2019

कविता : वीरों को याद करो

" वीरों को याद करो "

गर्मी के मौसम में,
धरती के आँचल में |
गर्म हवाएँ चल रही हैं,
गर्मी से भू दहक रही है |
लू लपाटा चले फर्राटा,
कर न पाए कहीं सैर सपाटा |
पेड़ पत्ते जल रहे हैं,
बिन हवा के मचल रहे हैं |
दिन लम्बा तो हो ही गया है,
ठण्ड मानों सो ही गया है |
आलस कर देता है मन में,
सोना बस रहता है दिन में |

कवि : प्रांजुल कुमार , : कक्षा : 10th , अपना घर



कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कवितायेँ लिखते हैं | प्रांजुल पढ़लिखकर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं | प्रांजुल को छोटे बच्चों को पढ़ाने में बहुत मज़ा आता है |



कविता : वीरों को याद करो

" वीरों को याद करो "

उन वीरों को याद करो,
जो देश के खातिर प्राण दिए |
अपने लहू का एक एक कटरा,
अपने देश के लिए त्याग दिया |
जिस माँ ने लाल को जन्म दिया,
देश को आज़ाद करने का वचन दिया |
उस माँ के बेटे ने न की जान की चिंता,
हँसते हँसते चूमा था उसने मौत का फंदा |
उन हजारों इंसानों को याद करो,
जिन्होंने देश के लिए प्राण दिए |

कवि : संजय कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता संजय के द्वारा लिखी गई है जो की झारखण्ड के निवासी हैं | संजय बहुत सी कविताएँ लिखते हैं | संजय को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है और अपनी तेज गेंद की तेज़ गति से सबको चौका देते हैं | संजय पढ़लिखकर आर्मी में जाना चाहते हैं |


शनिवार, 30 मार्च 2019

कविता : आसमां के परिंदे

" आसमां के परिंदे "

आसमां के परिंदे,
हमेशा उड़ना चाहते हैं |
कुछ कर पाने के लिए,
इंतज़ार करते रहते हैं |

आसमां के छाए बादल,
मौसम बदलना चाहते हैं |
बारिश की बूंदें गिरते है,
पर हमसे कुछ कह जाते हैं |

ये टपकते बारिश की बूंदें,
हर लम्हें को दर्शाते हैं |
नए जीवन जीने के लिए,
मौसम बदलना चाहते हैं |

आसमां के परिंदे,
हमेशा उड़ना चाहते हैं |
कुछ कर पाने के लिए,
इंतज़ार करते रहते हैं |

कवि : सनी कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सनी कुमार के द्वारा लिखी गई है जो की कक्षा ८ के विद्यार्थी है | सनी बिहार राज्य के निवासी है | सनी को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है और वह क्रिकेट बहुत अच्छा खेलते हैं |

कविता : काश मेरा सपना ऐसा होता

" काश मेरा सपना ऐसा होता "

काश मेरा सपना ऐसा होता,
पक्षी की तरह मैं होता |
आसमां में उड़ पाते,
संसार को अलग से देख पाते |
काश वह ऐसा होता,
मेरे भी कुछ सपने होते |
मैं कुछ कर पाता,
काश मेरा सपने ऐसा होता |
संसार की बड़ी इमारतों को देख पाता,
काश पक्षी के तरह मैं होता |
आसमां में उड़ पाता | |

                                                                                                        कवि : अमित कुमार, कक्षा : 5th , अपना घर

 कवि परिचय : यह कविता अमित के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के गया जिले के निवासी है | अमित को पढ़ना लिखना बहुत पसंद है  और पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं | अमित को कवितायेँ लिखना भी बहुत पसंद है |

कविता : भगत सिंह बनना हम है चाहते

" भगत सिंह बनना हम है चाहते "

वीरों के वीर थे,
तीनों बड़े शेर थे |
क्रान्तिकारी ये कहलाते थे,
अंग्रेजों से ये न घबराते थे |
बेम फेंक सबको चौकाया,
बिना डरे इन्होने कर दिखाया |
नाम इनके थे बड़े प्यारे,
राजगुरु,सुखदेव और भगत सिंह
बस गए देश के न्यारे |
२३ मार्च को संकट सा आया,
चुपके से इन्हे फाँसी पर लटकाया |
हो गए ये वीर गति को प्राप्त,
फिर भी न गई इनकी याद |
शहीद दिवस हम है मनाते,
भगत सिंह बनना हम है चाहते |

                                                                                                       कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा :8th ,अपनाघर

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जिन्होंने यह कविता लिखी है | इस कविता में इन्होने शहीद दिवस को दर्शाया है | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | कुलदीप पढ़कर नेवी में जाना चाहते हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने के आलावा डांस करना भी आता है |


कविता : दोस्ती तेरी याद में

" दोस्ती तेरी याद में "

दोस्ती तेरी याद में,
दिल धड़क रहा है |
तुमसे मिलने के लिए,
आंखें तरस रही है |
याद आते हैं वो गाने,
तेरे मेरे गुनगुनाने के,
चाहत है तेरे संग रह जाने की|
दूर है तो क्या,
जैसे आसमां और जमीं |
कोई बात इस दोस्ती में,
क्या रह गई कमीं |

कवि परिचय : यह कविता संतोष के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान समय में अपना घर संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | संतोष को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वह हर हफ्ते कविता लिखते हैं | इस कविता में उन्होंने प्रेम रस की व्याख्या की है |

मंगलवार, 26 मार्च 2019

कविता : भगत सिंह

" भगत सिंह "

वह लहू जो देश के काम आया,
बढ़ते हुए जुल्म से मुल्क के लोग राहत पाया |
सोते हुए भी नींद की अपेक्षा न रख पाया,
असेम्ब्ली में बम फेकते हुए सबको सूचना दे आया |
हर कदम वह रहता तत्पर तैयार,
वह था भगत सिंह मशाल |
जज्बाज जो उन्हें रोक सका,
उसके खिलाफ कोई कह न सका |
देश के लिए मरकर भी न लम्हा
बनकर सबके आत्मा में बस गया |

                                                                                                        कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर


कवि परिचय : यह हैं विक्रम जिन्होंने एक देश भक्त भगत सिंह पर कविता लिखी है के नवादा जिले के निवासी है | विक्रम को देश भक्तों पर कवितायेँ लिखने में बहुत मज़ा आता है | विक्रम को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक वह बहुत सी कवितायेँ लिख चूका है | विक्रम एक अच्छे इंजीनियर बनना चाहते हैं |



कविता : मेरा गाँधी ऐसा था

" मेरा गाँधी ऐसा था "

मेरा गाँधी ऐसा था,
भारत देश का बापू था |
कहीं मिट जाए इनका सम्मान
कहीं न हो जाए इनका अपमान |
इसने हमको अंग्रेजों से बचाया,
हम इनको दुनियाँ से बचाएँगे |
इनका अपमान अब नहीं सह पाएँगे,
गाँधी गाँधी इनका नैरा लगाएँगे |
नए नए नोटों में हम इसको लगाएँगे,
एक बार फिर से सब गाँधी चिल्लाएँगे |
हम दिलाएँगे गाँधी को इंसाफ,
कर देंगे सरकार का पर्दाफास |  

                                                                                                         कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह हैं समीर कुमार जिन्होंने यह कविता लिखी है, जो की प्रयागराज के निवासी हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | समीर हर हफ्ते एक न एक कविता जरूर लिखते है | समीर इसके आलावा गीत भी बहुत अच्छा गए लेते हैं | समीर एक संगीतकार बनना चाहते हैं |

रविवार, 24 मार्च 2019

कविता : फाल्गुन का महीना आया

" फाल्गुन का महीना आया "

फाल्गुन का महीना आया,
रंग बिरंगी पिचकारी लाया |
गालों पर गुलाल लगाएंगे,
गुझिया और मिठाइयाँ खाएँगे |
धूम - धाम से होली मनाएँगे,
सबके चेहरे पर रंग लगाएँगे |
खुशियों का यह त्योहार है,
बस रंगों का बहार है |
सारी मर्यादाओं को भूलकर,
ख़ुशी में एक साथ झूमकर |
दोस्तों पर रंग चढ़ाएँगे,
ख़ुशी से होली मनाएँगे |

                                                                                                             कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर


कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जिन्होंने यह कविता लिखी है | प्रांजुल वैसे तो मूल रूप से छत्तीसगढ़ के निवासी है परन्तु वह अपना घर संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | प्रांजुल ने यह कविता त्योहार पर लिखी है जिसका शीर्षक फाल्गुन का महीना आया | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है |  

मंगलवार, 19 मार्च 2019

कविता : फाल्गुन का महीना

" फाल्गुन का महीना "

फाल्गुन का महीना आया,
बच्चों ने रंग खेलने की तैयारी की |
भरे पिचकारी फेके पडे हैं,
लाल , हरे ,पिले रंग झेले पड़े हैं |
खूब मौज -मस्ती से खेले पड़े है,
फाल्गुन के महीने में झूम उठे है |
होली में सब जाग चुके हैं,
फाल्गुन में उमंग से फूल चुके हैं |

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर


कवि परिचय : यह हैं विक्रम जिन्होंने यह कविता लिखी है | विक्रम गया जिला का रहने वाला है | विक्रम को रोचक भरी कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | विक्रम अपने आप में एक चीज ढूँढना चाहता है | विक्रम के अंदर बहुत ही क्षमता है कुछ करने की | विक्रम पढ़लिखकर गरीब लोंगो की मदद करना चाहता है |

कविता : होली आई

" होली आई "

होली आई होली आई,
पीला , लाल और हरा रंग लाई |
मन को मोह लेता है भाई,
होली आई होली आई |

होली का त्यौहार आया,
दोस्तों को लाल रंग लगाया |
रंग भरे पिचकारी से उसे मारा,
इस खेल में कोई नहीं हारा |

मन को मोह लेता है भाई,
इसीलिए होली है आई |
सब लोगों की टोली आई,
एक दूसरे के लिए प्यार जगाई |

                                                                                                            कवि : अजय कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह है अजय जिन्होंने यह कविता लिखी है , अजय कक्षा 5th के विद्यार्थी है और बिहार के नवादा जिला के निवासी है | अजय को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है | अजय एक हसमुख छात्र है हमेशा ख़ुशी उसकी चेहरे पर नज़र आती है |

कविता : कुछ ऐसा करूँ

" कुछ ऐसा करूँ "

मन करता है कुछ ऐसा करूँ,
हर  मुसीबतों को पार कर सकूँ |  
देश की गन्दगी को साफ कर सकूँ,
जो भी भूल हो उसे माँफ कर सकूँ |
बस इतनी ही चाहत है रब से,
यह दरख्वास्त है मेरा सबसे |
हर राह से गुजर कर कुछ बन सकूँ,
बनने के बाद देश के लिए कुछ कर सकूँ |
मन करता है कुछ ऐसा करूँ,
हर  मुसीबतों को पार कर सकूँ |  

                                                                                                       कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की मूल रूप से प्रयागराज के निवासी है और अपना घर संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और यह बहुत सी कवितायेँ लिखते है | समीर एक संगीतकार बनना चाहते हैं |

रविवार, 17 मार्च 2019

कविता : मच्छर

" मच्छर "

छोटा सा एक मच्छर,
बड़ा धमाल करता है |
गन्दगी में रहना इसकी आदत,
जमे हुए पानी में ही यह इबादद |
ये होता है छोटा सा,
दिखता है बिल्कुल अजीब सा |
बिना पूछे काट लेता है,
पूरी रात परेशान कर देता है |
इसकी आदत ख़राब सी है,
बिना कुछ कहे ही काट लेता है |
जितना भी भगाओ नहीं भागता,
भगाने पर अपने दोस्तों को बुलाता है |

कवि : धरम कुमार , कक्षा : 2nd , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता धरम के द्वारा लिखी गई है जो की कक्षा 2 के छात्र है | धरम बिहार के रहने वाले हैं यह उनकी पहली कविता है |धरम बहुत ही चंचल बच्चा है और पढ़ाई बहुत मन से करता है |



शनिवार, 16 मार्च 2019

कविता : होली

" होली "

इस महीना लग रहा है कुछा खास,
आने वाला है दस दिन के बाद |
उस दिन का है इंतजार,
रंगों की होगी बरसात |
उस में सभी रंग होंगे,
न कोई भेदभाव सब खेलेंगे |
सब दुश्मन होंगे एक साथ,
क्योंकि लग रहा है कुछ खास |
रंग भरी पिचकारी चलेगी,
रंग , मिष्ठान और गुलाल उड़ेंगे |
हर कोई रंग खेलेगा,
कोई बुरा भला नहीं बोलेगा |
         

कवि : रवि किशन , कक्षा : 10th , अपना घर



कवि परिचय : यह कविता रविकिशन के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के निवासी हैं | रविकिशन ने यह कविता आने वाले त्यौहार होली पर लिखी है | जिस प्रकार सभी होली में रंग जाते हैं उसी प्रकार रविकिशन भी रंग जाना चाहता है | रविकिशन को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है |

शुक्रवार, 15 मार्च 2019

कविता : मुझे भी संग ले चलो

" मुझे भी संग ले चलो "

ऐ जाने वालों मुझे भी संग ले चलो,
गले मिलते चलो ,सबको रिझाते चलो |
ऐ मेरे दोस्तों मुझे भी लेकर चलो,
मैं भी देखना चाहता हूँ सारा जहाँ,
मेरे भी कुछ सपने हैं यहाँ |
मेरे भी यार मेरे यार मेरे यार,
जैसे अपनी ही माँ से मिली है माँ मेरी,
हर कदम पर तेरी रतना करूँ मैं तेरी |
तेरी रचना से ही मेरी माँ की ये रचना,
ये उम्मीद मेरी जुडी माँ से मेरी |

कवि : कामता कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता अपना घर के छात्र कामता कुमार के द्वारा लिखी गई है जो की मूल रूप से बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | कामता कविता पुलवामा हमला के उपलक्ष  में लिखा है |

कविता : हम चलेंगे

" हम चलेंगे "

हम चलेंगें , हम चलेंगे,
छाया घोर अँधेरा था |
तूफानों का डेरा था ,
मंजिल की ओर जाना था |
फिर भी आगे जाना था,
घर घर में दीप जलाना था |
पथ में जो भी आएगा,
ठोकर से वह उड़ जाएगा |
हम चलेंगें , हम चलेंगे,
छाया घोर अँधेरा था |

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह हैं सार्थक जिन्होंने यह कविता लिखी है जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | सार्थक को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कवितायेँ भी लिखते हैं | सार्थक पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं | सार्थक को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है |  

कविता : पत्ता जब गिरता है

" पत्ता जब गिरता है "

पेड़ से एक पत्ता जब वो गिरता है,
न जाने कितना दर्द उसको होता है |
कौन जाने उसकी कस्ट और दर्द ,
वो किसे अपनी दर्द बताए |
इतनी कड़े धुप में रहते हैं,
चाहे तूफान हो या फिर आँधी |
पेड़ जो सबको समान समझे
पर मुसीबत में वो मुड़कर न देखे |
हमें आज सुधरना होगा,
एक नहीं सौ पेड़ लगाना होगा |
प्रकृति से ही इसकी रौनक है,
उसके दर्द को समझना होगा |
पेड़ से एक पत्ता जब वो गिरता है,
न जाने कितना दर्द उसको होता है |

                                                                                                         कवि : निरंजन कुमार , कक्षा : 2nd , अपना घर

कवि परिचय : यह हैं निरंजन कुमार जिन्होंने यह कविता लिखी है जो की बिहार के निवासी है | निरंजन को पेंटिंग बनाने का बहुत शौक है और कभी कभी बड़े कला प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेते है और उपहार भी जीतते हैं | निरंजन बहुत ही नेक बच्चा है जो सबकी बायत मानता है |

गुरुवार, 14 मार्च 2019

Poem : exam stress

Exam stress

Exam increase children's stress,
and not have time to little rest . 
we always thing to score good marks,
and not give our best .
it always deprive us,
and burdun of syllabus over right us . 
there is no any ways,
to reduce our stress . 
we can now give our best,
sometime we always use to play . 
which is only thing,
which keeps our mind on right way .

                                                                         Poet : Devraj kumar , Class : 9th, Apna Ghar


 Poet introduction : This poem is written by Apna Ghar' student Devraj Kumar . Devraj loves to write poems and then compose it . His traditional birth place is Bihar but his parent migrate to Kanpur in search of work as well as his child's future they work in brickfield . Devraj at beginning also work in that field but now he enrolled himself in education and he is the first one who is studying from his home.

कविता : जब गई ये ठंडी

" जब गई ये ठंडी "

धीरे से जब गई ये ठंडी,
तेज़ी से तब आई ये गर्मी |
जमीन हुए बर्फ़ में भी
पहुँचा गई नमीं |
मच्छरों ने किया हमला,
परेशां हुए हम सभी |
इनसे बचना मुश्किल है,
रजाई में भी घुस जाए ये |
तब धड़कते ये दिल है | |  
कानों में भी भन -भन करते,
सभी के दिल थम थम जाते | 
जानें ली इन्होने कई,
धीरे से जब गई ये ठंडी,
तेज़ी से तब आई ये गर्मी |

                                                                                                     कवि : समीर कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर


कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं और वर्तमान समय में अपना घर संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक समीर ने बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | समीर को इसके अलावा गीत गाने का बहुत शौक है |