गुरुवार, 21 जनवरी 2021

कविता:- हाथ पाँव हमारे काँप रहे हैं

 "हाथ पाँव हमारे काँप रहे हैं"
हाथ पाँव हमारे काँप रहें हैं।
  अब हर जगह आग तप रहें हैं।। 
स्वेटर टोपी मोजा पहने।
अब कहीं घूमने न निकलें।।
सर सर ठंडी हवा का झोका।
चलते-चलते कहीं उड़ जायें न टोपा।।
अपने को बचाना पड़ जाता है मुश्किल।
जम गए हैं दुनियाँ  के सारे झील।।
कट-कट की आवाज निकल रही है। 
शर्दी में दाँत-दाँत को काट रही हैं।।
हाथ पाँव हमारे काँप रहें हैं। 
अब हर जगह आग ताप रहें हैं।।
कविः- कुलदीप कुमार, कक्षा -9th, अपना घर, कानपुर,
 

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।  कुलदीप पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं।  कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं।  कुलदीप अपनी कविताओं से लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं।  इनको  क्रिकेट खेलना पसंद है
 

शनिवार, 16 जनवरी 2021

कविता:- मै एक गुलाब हूँ

 "मै एक गुलाब हूँ"
मै एक गुलाब हूँ। 
मेरी  खूबसूरती ऐसी है।।
की लोग मेरी तरफ खिचे आते हैं।
मै एक गुलाब हूँ।।
जो सबके दिलों पर राज करता हूँ।
मेरी कलियाँ  इतनी अच्छी।।
कि सब तोड़ना चाहते हैं। 
मै एक गुलाब हूँ।।
जो सबके साँसों में बसता हूँ।
मुझे तोड़ना आसान नहीं।।
मैं काटो से घिरा रहता हूँ। 
 कविः- नितीश कुमार, कक्षा -10th ,अपना घर, कानपुर,
 
कवि परीचय : शांत स्वभाव के नितीश कुमार बिहार के नवादा  जिले से अपना घर में पढ़ाई के लिए आये  हैं। इन्हें कविता लिखना पसंद है।
 
 
 

शुक्रवार, 15 जनवरी 2021

कविता:- आयी प्यारी-प्यारी शर्दी

"आयी प्यारी-प्यारी शर्दी"
आयी प्यारी-प्यारी शर्दी।
धरती पहन ली है वर्दी।।  
देखो नाच रही है शर्दी।
सब लोग पहन लिए हैं वर्दी।।  
बर्फ गिरने लगी टपटप।
सब चले गए घर में खटपट।। 
सब लोग सो गए चादर के अंदर।
बाहर शर्दी मचा रही गदर।। 
आयी प्यारी-प्यारी शर्दी। 
धरती पहन ली है वर्दी।।  
कविः-रोहित कुमार, कक्षा- 3th, अपना घर, कानपुर,
कवि परिचय:- ये रोहित कुमार हैं । जो बिहार के नवादा जिले के पाली नामक गाँव के रहने वाले हैं। इनको कविता लिखना पसंद है।  

बुधवार, 13 जनवरी 2021

कविता:- कोरोना आया पूरा कहर मचाया

"कोरोना आया पूरा कहर मचाया"
कोरोना आया पूरा कहर मचाया।
एक न दो पूरी दुनियाँ हिलाया।।  
न बाहर जाना न किसी से मिलना। 
 मास्क लगा के हमेशा चलना।। 
बार-बार हाथ धोना।
 सभी को पता है आ गया कोरोना।।  
जगह-जगह किया जा रहा छिड़काव।
जीने के लिए सीखना पड़ेगा नया पड़ाव।।  
घर की सफाई में नहीं छोड़ना है कोई कसर।
नहीं तो कोरोना करेगा असर।।  
 कविः- अखिलेश कुमार, कक्षा -10th, अपना घर, कानपुर,
 
कवि परिचय : यह कविता अखिलेश के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक "कोरोना आया पूरा कहर मचाया"है। ये बिहार के नवादा जिले के रहने वाले है।
 

मंगलवार, 12 जनवरी 2021

कविता:- वो दोस्तों की बातें

"वो दोस्तों की बातें"
वो दोस्तों की बातें।
मुझे याद आ रहे हैं।।
क्लास में की गयी शरारत। 
मुझे याद आ रहे हैं।। 
वो पीछे क्लास में।
बैठकर लंच बॉक्स खाना।। 
आज मुझे याद आ रहे हैं।
मैम से सज़ा मिलाना।। 
कान पकड़े खड़े हो जाना।
मुझे याद आ रहे हैं।। 
स्कूल की गलियारों में।
दोस्तों के साथ बाते करना।।
टीचर के आने पर।
दौड़कर क्लास मे चले जाना।।
चुपचाप आकर बैठ जाना।
मुझे याद आ रहे हैं।। 
 कविः- नितीश कुमार, कक्षा -10th ,अपना घर, कानपुर, 
कवि परीचय : शांत स्वभाव के नितीश कुमार बिहार के नवादा  जिले से अपना घर में पढ़ाई के लिए आये  हैं। इन्हें कविता लिखना पसंद है।

सोमवार, 11 जनवरी 2021

कविता:-छोटे से सपने थे किसी समय

 "छोटे से सपने थे किसी समय"
छोटे से सपने थे किसी समय। 
नाजुक से हाथ थे जिस समय।। 
मुश्किलों का बवण्डर था। 
बस खुशियों का समुन्दर था।।
रबर के चपल थे।
बालो में कंघी न थी।।
कोई दिशा निर्धारित न थी।
जीवन का कोई आधार न था ।।
बस था तो जुनून। 
सोच थी दायरा का जुलूस।। 
जिसने बना दिया मायूश। 
आज सपने बड़े है इस समय में।।
मजबूत कंघा है इस समय। 
बस देरी है मुसीबतों को सुलझाने की।।
खुशियों को और बढ़ाने की।   
   कविः -प्रांजुल कुमार ,कक्षा -11th ,अपना घर ,कानपुर ,

कवि परिचय :- यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढाई कर रहे हैं।  प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है।  प्रांजुल पढ़कर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और फिर इंजीनियर बनकर समाज के अच्छे कामों में हाथ बटाना चाहता हैं। प्रांजुल को बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।

शनिवार, 9 जनवरी 2021

कविता:- यह बहती हुई हवा

"यह बहती हुई हवा"
यह बहती हुई हवा। 
आसमान को छूती है।।
यह लहराती हुई हवा।
पर्वतों को चूमती है।।
 यह सनसनाती हुई हवा।
कानो को कुछ कह जाती है।।
यह चलती हुई हवा। 
न जाने कहाँ चली जाती है।।
सिर्फ महसूस कराती है। 
मेरे घर तक चली आती है।।
यह लहराती हुई हवा।
 जाने कहाँ चली जाती है।।
कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा - 6th , अपना घर, कानपुर  
कवि परिचय : यह कविता सुल्तान के द्वारा लिखी गई है। जो की बिहार के रहने वाले हैं। सुल्तान कवितायेँ बहुत अच्छी लिखतेहैं। सुल्तान पढ़ाई के प्रति बहुत ही गंभीर रहते हैं।   

शुक्रवार, 8 जनवरी 2021

कविता:- पेड़

"पेड़"
एक पेड़ हमेशा सुनसान सा लगता है।  
पूरी दुनियाँ हिलती है पर।। 
खुद एक जगह पर खड़ा रहता है।
ये एक वही पेड़ है।। 
जो एक बीज से उत्पन्न हुआ।
खुद अपना फल नहीं खाता।। 
पर दुसरों को देता है दुआ।
मन उदास होकर औरों को छाँव देता।।
पर वक्त के हालात उन्हें काट देता।
हम सभी को सपथ लेना होगा।। 
अब एक पेड़ नहीं दो पेड़ लगाना होगा।
   कविः -प्रांजुल कुमार ,कक्षा -11th ,अपना घर ,कानपुर ,

कवि परिचय :- यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढाई कर रहे हैं।  प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है।  प्रांजुल पढ़कर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और फिर इंजीनियर बनकर समाज के अच्छे कामों में हाथ बटाना चाहता हैं। प्रांजुल को बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।

बुधवार, 6 जनवरी 2021

कविता:- ये जोखिम भरा जमाना

"ये जोखिम भरा जमाना"
ये जोखिम भरा जमाना।
न जाने कब होगा ख़त्म।।
लगता है जिंदगी को दे जायेगा।
गहरा एक जख्म।।
हर गली हर मोहल्ले में। 
बस एक ही बीमारी चल रही है।। 
खतरों से भरी दिख रही है। 
आने वाला कल है।।
आने वाला हर एक दिन।
हर एक के लिए काल है।।
कल कुछ नहीं कर पाता क्यों।
इस धरती का हर मनुष्य ही।।
काल के लिए महाकाल है। 
कविः- समीर कुमार, कक्षा - 10th, अपना घर, कानपुर,
कवि परिचय:- ये समीर कुमार है। उत्तर प्रदेश इलाहाबाद के रहने वाले है। इन्हे संगीत में बहुत रूचि है। ये बड़े  गायक बनाना चाहते है। ये कविता भी अच्छी लिखते है।
 

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

कविता:- कल अब कहाँ है आता

 "कल अब कहाँ है आता"
कल अब कहाँ है आता।
कल-कल करके काम है टल जाता।।
लाखों लोग रखते है इस पर भरोसा।
यह दिन होता है हर एक लिए अनोखा।।
कई जीवन है बस इसी पर टिकी।
कहीं चली न जाये यह कल फीकी।।
कल अब कहाँ है आता।
उगता सूरज अब रोज है ढल जाता।।
आती है वही रात और सवेरा।
सोच रहा हूँ कल कब आएगा मेरा।।
कल अब कहाँ है आता।
कल-कल करके काम है टल जाता।।
कविः- कुलदीप कुमार, कक्षा -9th, अपना घर, कानपुर,
 

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।  कुलदीप पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं।  कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं।  कुलदीप अपनी कविताओं से लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं।  इनको  क्रिकेट खेलना पसंद है
 

सोमवार, 4 जनवरी 2021

कविता:- बहती हवाएँ कुछ कहती हैं

"बहती हवाएँ कुछ कहती हैं"
बहती हवाएँ कुछ कहती हैं।
बहते वक्त किसी की नहीं सुनती हैं।।  
कभी सर-सर तो कभी भर-भर।
कभी ठण्डी तो कभी बंजर।।
ठण्ड में तो सिकुड़ ही जाती।
गर्मी में अपने को फैलाती।।
बसन्त में मन्द-मन्द बहती। 
गर्मी में अपने को लू है कहती।।  
सुबह-शाम शान्त है रहती।
दोपहर में अपने को कुछ और कहती।।
  कविः -प्रांजुल कुमार ,कक्षा -11th ,अपना घर ,कानपुर ,

कवि परिचय :- यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढाई कर रहे हैं।  प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है।  प्रांजुल पढ़कर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और फिर इंजीनियर बनकर समाज के अच्छे कामों में हाथ बटाना चाहता हैं। प्रांजुल को बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।