रविवार, 9 जून 2019

कविता : देश होता जा रहा है खोखला

" देश होता जा रहा है खोखला "

फैशन का चल रहा है जलवा,
देश होता जा रहा है खोखला |
तरह -तरह की नई चीजें आती,
ये सब बड़े बड़े को नाच नचाती |
फैशन का चल रहा है जलवा,
गन्दी चीजें कर रही है हमला |
इमारतों से भरती जा रही है दुनिया,
कब समझेंगे देश के बनिया |
पेड़ सब कटते गए,
ऑक्सीजन की मात्रा घटती गई |
फैशन का चल रहा है जलवा,
देश होता जा रहा है खोखला |

नाम : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | कुलदीप कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक वह बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | कुलदीप क्रिकेट बहुत अच्छा खेल लेते हैं | कुलदीप हर दिन कुछ न कुछ नया  करता रहता है और छोटे बच्चों को ज्ञान की बातें बताता रहता है |

गुरुवार, 6 जून 2019

कविता : बचपन

" बचपन "

जब मैं छोटा बच्चा था,
बचपन में मैं गोरा था |
बचपन में मैं शैतान था,
मम्मी गलती पर डाटती थी |
फिर भी वही काम करता था,
पापा मेरे लिए रसगुल्ला लाता था |
मिठाई मैं पेट भर के कहते था,
जब मैं छोटा बच्चा था |
बचपन में मैं मोटा था |
जो काम नहीं करना होता,
वह काम मैं करता था |  

नाम :मंगल कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता अपना घर के सबसे नए छात्र मंगल ने लिखी है जो की मध्य प्रदेश निवासी हैं और अपना घर में रहकर कक्षा 3rd में पढ़ते हैं |
मंगल की यह पहली कविता है जिसको अपने ऊपर लिखा है | मंगल चाहते हैं की वह आगे और भी कविता लिखेंगे |

रविवार, 2 जून 2019

कविता : छोटी सी चिड़िया

 " छोटी सी चिड़िया "

छोटी सी चिड़िया है,
वह कुछ कहना चाहती है |
उसकी भाषा समझ में न आती है,
इसीलिए उदास होकर वह उड़ जाती है |
वह अपने दुःख को ले जाती है,
छोटी सी चिड़िया कुछ कह जाती है |
चिड़िया अपनी आवाज़ों से पुकारती है,
वह लोंगो को खुश कर जाती है |
छोटी चिड़िया कुछ कहना चाहती है,
ऐसा लगता है वह हमारे साथ रहना चाहती है |

कवि : सनी कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सनी के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी  हैं, और अपना घर संस्था में रहकर कक्षा ५ में पढ़ते हैं | सनी को कवितायें लिखना बहुत पसन्द है | सनी एक पुलिस ऑफिसर बनना चाहते हैं |  



शुक्रवार, 31 मई 2019

कविता : छुट्टी

" छुट्टी "

जब छुट्टी हुई स्कूल से,
खूब खेल रहे थे धूल से |
हो गई बड़ी भूल हम से,
मम्मी ने मना किया था खेलना धूल से |
जब छुट्टी हुई स्कूल से | |
पढ़ाई का कोई नाम नहीं,
करने को कोई काम नहीं |
बस खेलते रहते दोपहर से शाम,
यही था छुट्टी का इनाम |
नाम : सनी कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सनी के द्वारा लिखी गई है बिहार के निवासी हैं | सनी कक्षा 5th का छात्र है जिसके अंदर कवितायेँ लिखने की रूचि है | सनी   बहुत ही हसमुख बालक है | सनी को लोगों को हँसाने बहुत मज़ा आती है |

गुरुवार, 30 मई 2019

कविता : गर्मी

गर्मी

गर्मी आई ,गर्मी आई,
संग में कड़ाके की धूप लाई |
गर्मी में धूप से पसीना आई,
गर्मी आई ,गर्मी आई |
गर्मी में फल भी आई,
गर्मी से ठण्डी भी भागी |
गर्मी में पैंट पहन लो भाई,
गर्मी से बचकर रहो मेरे भाई |
बर्फ ,कुल्फी और तरबूज खाओ,
इस कड़ाके की गर्मी का लुफ्त उठाओ |
नाम : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता नवलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | नवलेश बहुत ही हसमुख है और कवितायेँ लिखने में बहुत रूचि रखता है | नवलेश को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है और कविता लिखना भी  बहुत पसंद है |  नवलेश के माता - पिता ईंट भठ्ठों में ईंट पथाई का काम करते हैं |

बुधवार, 29 मई 2019

कविता : चन्दा मामा की बात

" चन्दा मामा की बात "

सो रहे थे जब छत पे हम,
गिन रहे थे तारे को |
तभी कुछ देर बाद आ गए,
चन्दा मां सुलाने को |
तारे बोले अभी तुम न सोना,
अभी करना है कुछ काम |
फैलो जग में इतना,
ताकि हो तुम्हारा नाम |

ये सब सुनकर गुस्से से बोला चन्दा मामा,
सो जा बालक |
नहीं तो भइया कराएंगे तुम से ड्रामा,
यह सुनकर हम ने बोला चुप हो जा मामा |
आज नहीं यह बात हमको कल बताना | |  

तारों की बात मान कर जगे रहे साडी रात,
और चंदा मामा से कभी नहीं करते बात |  
क्यों कहते थे,
सो जा बालक सारि रात |

नाम : कामता कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कामता के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के नवासी हैं | कामता को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कविता लिखते हैं | कामता को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है | पढ़लिखकर एक नेवी ऑफिसर बनना चाहतें हैं |

रविवार, 26 मई 2019

कविता : जाति -धर्म

" जाति -धर्म "

जाति - धर्म मैं क्या जानूँ,
सभी को मैं भाई - बहन मानूँ |
अल्लाह - ईश्वर है एक,
फिर भी बैर रखते हैं लोग अनेक |
रगों में रंग है ताली का,
फिर भी बैर है गोरी और काली का |
अल्लाह ईश्वर एक सामान,
वही खून वही भगवान |

नाम : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

गुरुवार, 23 मई 2019

कविता : एक बात

" एक बात "

बैठा था जब मैं खिड़की के पास,
सोच रहा था बैठ एक बात |
जब आया वह खेल याद,
खेल रहा था मैं दिन - रात |
हार गया तो क्या हुआ,
लेकिन जीतूँगा मैं भी एक बार |
चोट लगी तो क्या हुआ,
मेहनत करना है एक साथ |
चला गया मैं पृथ्वी से पार, 
बैठा था जब मैं खिड़की के पास |

नाम : सुल्तान कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सुल्तान के द्वारा लिखी गई है जो की कक्षा 5 के विद्यार्थी है | सुल्तान मूल रूप से बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं और वर्तमान समय में अपना घर नामक संस्था में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | सुल्तान को खेलना बहुत अच्छा लगता है |

शनिवार, 18 मई 2019

कविता : हँसी तो सभी को आती है

" हँसी तो सभी को आती है "

हँसी तो सभी को आती है,
लेकिन वह हँस नहीं पाता है |
दर्द तो सभी को होता है,
लेकिन वह सह नहीं पाता है |
जिंदगी जीना है सभी को,
लेकिन जी नहीं  पाता |
पढ़ना उसे पड़ता है जो रह नहीं पाता,
दर्द उसे होता है जो सह नहीं पाता |
हँसी तो सभी को आती है
लेकिन वह हंस नहीं पाता |

                                                                                                                नाम : सुल्तान कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : बड़े ख़ुशी के साथ इस कविता को लिखने वाले सुल्तान कुमार बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं और वर्तमान में अपना घर संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | सुल्तान को कवितायेँ लिखना , चित्र बनाना और अन्य गतिविधियां करने में बहुत मजा आता है | मुझे उम्मीद है की आप लोगों के समर्थन से मैं और भी कवितायेँ लिखूँगा |

शुक्रवार, 17 मई 2019

कविता : चिड़िया

" चिड़िया "

छोटी सी चिड़िया उड़ रही है,
आसमान में बादल के नीचे |
उड़ रही है वह छोटी सी चिड़िया,
फुदक फुदक कर उड़ रही है चिड़िया |
आकाश में उड़ रही है चिड़िया,
लोंगो से कुछ कह रही है चिड़िया |
मन ही मन में मचल रही है चिड़िया,
फिर भी गीत गति है चिड़िया |  

नाम : शिवा कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता शिवा के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के निवासी हैं | शिवा की यह पहली कविता उम्मीद है जो कि आपको यह कविता पसंद आएगी | शिवा को कविता लिखना बहुत अच्छा लगता है और बड़े लोंगो से प्रेरणा लेकर और भी कविताएँ लिखता है |

कविता : आज मैंने ये जाना है

" आज मैंने ये जाना है "

आज मैंने ये जाना है,
ये तो सिर्फ एक बहाना है |
सबको पैसा ही बस खाना है,
मुझे बताओ कहाँ अब जाना है |
ये पैसा ही सिर्फ बहाना है,
बस सबको बड़ा ही बनना है |
मुझे तुमसे बस इतना ही कहना है,
ये जवाना ही बस बहाना है |
बस पैसा ही इनको खाना है | |

                                                                                              नाम : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं और अपना घर संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कवितायेँ लिखते भी हैं | इसके अलावा क्रिकेट खेलना भी बहुत पसन्द है |