शनिवार, 6 जून 2020

कविता : एक पेड़

" एक पेड़ "

जब मैं बैठा  था एक पेड़ के पास ,
कुछ नया सोचने के लिए | 
हवाएँ चली बारिश आई,
मुझे तंग करने के लिए | 
मुझे पता न चला कि 
मेरे पास ही एक पेड़ था,
जो गिर पड़ा मुझे डरने के लिए | 
मैं नहीं डरा चलता रहा,
अपनी खोई हुई मंजिल का पाने के लिए | 
उस बारिश और हवा में जाने क्या था,
जो बस मुझे छू कर जा रहा था | 
मैं जनता उसमें कोई तो है,
जो मुझसे कुछ कहना चाहता था | 

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के रहने वाले हैं | समीर को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है और साथ ही साथ गीत भी गाना अच्छा लगता है | बड़े होकर एक संगीतकार बनना चाहते हैं |

शुक्रवार, 5 जून 2020

कविता : बारिश के मौसम में

" बारिश के मौसम में "

बारिश के मौसम में,
कितना मज़ा आता है | 
गर्मी को दूर भगा कर,
ठंडी का अहसास कराया | 
बारिश की बूंदें करे परेशां,
लेकिन बेजान पौधे में
 भी डाल दे जान | 
पेड़ -पौधों और फसलों को 
हरा भरा कर दे 
कितना मजा आता है बारिश में,
जब मछलियाँ उछलती है तालाबों में | 

कवि : राहुल कुमार , कक्षा : 7th , अपना घर
 



गुरुवार, 4 जून 2020

कविता : फूलों की खुशबू

" फूलों की खुशबू "

मौसम है सुहाना,
और सुहाना है ये जहाँ | 
फूलों की खुशबू महके,
प्रकति में हलचल हो वहाँ | 
मधुमक्खियों की भनभनाहट,
शहद से भरी छत्तों की बनावट | 
उतनी ही मीठा होती है,
जितनी अच्छी फूलों  खुशबू होती है | 
महक उठा है वातावरण,
चहक उठा है चिड़ियों का गगन | 
अब आँखों में न होंगें आँसू,
क्योंकि चेहरे पर है फूल जैसी खुशबू | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 11th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता जिसका शीर्षक  " फूलों की खुशबू " प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | प्रांजलको कवितायेँ लिखने के साथ चैत्राकला  भी बहुत अच्छी लगती है | गणित में बहुत रूचि रखते हैं | 

बुधवार, 3 जून 2020

कविता : कोरोना का कहर

" कोरोना का कहर "

पूरी दुनियाँ में फैली है कोरोना 
मुश्किल हो गया है लोगों का जीना | 
देशों में लग गया है lockdown 
 घर के सिवाय कहीं और न जाएँ | 
अब कोरोना का डर भी सताने लगा,
यह एक खतरनाक महामारी है 
ये बात भी डॉक्टर बताने लगे | 
मन करता है बाहर जाने का,
दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने का | 
बस ऑनलाइन पढ़ाई होती है,
जो मजा  क्लास में होती थी 
 अब ख़त्म हो गया | 
जल्द जाए कोरोना का कहर,
फिर हम घूमें दिन , दोपहर |

कवि : अप्तर अली , कक्षा : 3rd , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता जिसका " कोरोना का कहर " अप्तर के द्वारा लिखी गई है जो की असम के रहने वाले हैं | अप्तर को कविता लिखना बहुत अच्छा लगता है और अच्छी कवितायेँ लिखने की कोशिश करते हैं |  
 

मंगलवार, 2 जून 2020

कविता : गांव की मिट्टी

" गांव की मिट्टी "

रंग बदलें रूप बदलें,
बदला सारा बहार |
अपनों से दूर होकर,
जाना मैनें सारा संसार |
ये सब जानने के बाद,
मुझे  लगे सब अनोखी |
पर मुझसे जो जुड़ा है,
वह है मेरे गांव की मिट्टी| 

मिझे अभी भी याद है वो
बरसात के दिन |
मैं जब झूमा करता था,
अपनों के बिन यहाँ तेज़ हवाओं के साथ |
उड़ने वाली रंग - बिरंगें तितली होती थी,
और उस दीवाने मौसम में |
मेरे साथ सोंधी मिट्टीके खुशबू होती थी,
मैं थोड़ी देर रुक जाऊँ
इसलिए अपने दिल बेइंतिहां गुजारिश थी | 
और वक्त भी चलता था,
इसलिए वहाँ खूब बारिश की |
लेकिन खुद समझाया,
और बताया कभी और मिलेंगें |
ये अपने ख़ुशी के,
शायद कभी और खिलेंगें |

इसलिए सोचा आज,
लिख दूँ एक चिठ्ठी |
की मेरा मन जीत लिया अपनी गांव की मिट्टी  || 

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता देवराज के द्वारा लिखा गया है जो की बिहार के रहने वाले हैं | देवराज को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा  लगता है साथ ही साथ डांस करना बहुत अच्छा लगता है | विज्ञानं में बहुत रूचि रखते हैं

सोमवार, 1 जून 2020

कविता : कोरोना मियाँ

" कोरोना मियाँ "

कितने सुंदर वो दिन थे,
जब एक  साथ घूमते थे |
कोई कुछ  नहीं कहता था,
अपनी मन मर्जी किया करते थे | 
अब जाने कैसा दिन आ गया 
रोकते है एक दूजे को पास आने से | 
उस दिन की यादें घूम रही है,
सपनों में बस झूम रही है |   
छीन ली हमारी खुशियाँ, 
अपने छोटे कोरोना मियाँ | 
कितने सुंदर वो दिन थे,
जब एक  साथ घूमते थे |


कवि : साहिल कुमार , कक्षा : 4th , अपना घर

रविवार, 31 मई 2020

कविता : साल

" साल "

जनवरी , फरवरी मार्च आएगा,
पतझड़ और बसंत ऋतु लाएगा |
अप्रैल , मई ,जून आएगा,
गर्मी को साथ में लाएगा | 
जुलाई , अगस्त सितम्बर आएगा,
पानी का भवंडर आसमान में छाएगा | 
अक्टूबर , नवम्बर , दिसम्बर आएगा,
सर्दी को साथ में लाएगा | 
पूरा साल बस यूँ ही निकल जाता है,
कब क्या हुआ कहा नहीं जाता | 
बच कर रहना इन बिगड़ते मौसम में,
मत फसना बिमारियों के चुंगल में | 

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता नितीश के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक " साल " है | इस कविता में नितीश ने एक साल के बारे में बताया है की कैसे एक साल इतने जल्दी निकल जाता है | नितीश को कविता लिखना बहुत अच्छा लगता है |

शुक्रवार, 29 मई 2020

कविता : महामारी

" महामारी "

लोगों के आँखों में आँसूं देकर,
मैनें डॉक्टर की सलाह माँगी है | 
इस दुनियाँ को बचाने के लिए,
अपनी जान को जोखिम में डाली है | 
लोगों के दुःख दर्द को महसूस किया 
अपनी जिंदगी छोड़ और की जिनदगी जिया | 
लोग तड़प कर बीमारी से मर रहें हैं,
सब चुप है पर कुछ नहीं कर रहे |
इस महामारी में जाति धर्म है 
इस बार केवल एक दूजे के लिए मर्म हो | 
लड़ना है इस महामारी से अगर,
मिल जुलकर चलना होगा हर डगर | 

कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 6th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता सुल्तान के द्वारा लिखी गई है जो की बैहर के नवादा के रहने वाले हैं |  सुल्तान को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है | वर्तमान समय को देख इस कविता का शीर्षक " महामारी " दिया है |
 

कविता : गर्मी में बेहाल

" गर्मी में बेहाल "

इस गर्मी में हालत है ख़राब,
दुनियाँ वाले हो जाएगें बेहाल | 
पेड़ - पौधे हो गए सूखे,
कुछ लोग बैठे हैं भूखे | 
हवाएँ भी रुख मोड़ लिया,
गर्मी को हमसे जोड़ दिया | 
पंखें कूलर सब हो गए बेकार,
गर्मी से सब हो गए बेकार | 
बाहर जाना हो गया बंद,
बच्चे हो गए तंग |
इस गर्मी में हालत है ख़राब,
दुनियाँ वाले हो जाएगें बेहाल | 

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता जिसका शीर्षक " गर्मी में बेहाल " कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | डांस करना भी बहुत अच्छा लगता है | 

बुधवार, 27 मई 2020

कविता : एक दूजे के लिए मर्म हो

" एक दूजे के लिए मर्म हो "

 मुझे वहाँ जाना है,
जहाँ कलियाँ बेझिझक खिलती है | 
मुझे वहाँ जाना है,
जहाँ दो राहे एक साथ मिलती है  |
उस डगर की तलाश में चलूँगा, 
हर मोड़ में अपने पद रखूँगा | 
 तोड़ दूँगा उस बंधे हुए जंजीरों को,
खोल दूँगा बंधें हुए आशियाना को | 
मुझे वहाँ जाना है,
जहाँ जाति धर्म न हो | 
मुझे वहाँ जाना है,
जहाँ केवल एक दूजे के लिए मर्म हो |

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 11th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता जिसका शीर्षक " एक दूजे के लिए मर्म हो " प्रांजु के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है | विज्ञानं में बहुत रूचि रखते हैं |

सोमवार, 25 मई 2020

कविता : जून की गर्मी

" जून की गर्मी "

जून की लहलहाती गर्मी,
थोड़ा सा भी नहीं है नरमी | 
प्यास लगता बाररम बार,
शरीर ऐसे हो गए गरम 
जैसे लगा हो बुखार | 
सभी परेशां घूम रहे हैं,
घर बैठे ऊब रहे हैं  |
अलग से गरम गरम हवाएँ चलती,
पसीना टपके ऐसा जैसे
 की कोई बर्फ पिघलती | 

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता देवराज के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | देवराज को creativity में बहुत रूचि है | देवराज को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है | डांस करना भी अच्छा लगता है |