बुधवार, 17 जनवरी 2018

कविता : रौशनी

" रौशनी " 

अँधेरी रात में कहीं से,
रौशनी आ रही थी | 
 ये ही वो रौशनी है जो, 
मेरी जिंदगी को दिखा रही थी | 
ये जुगनू जैसा जलता, 
मेरी जिंदगी में|  
हर मोड़ के साथ चलता,
ये कोई रौशनी नहीं |  
ये तो जिंदगी का मार्ग है, 
बस इस पर चलना मेरा | 
काम है आगे देखना, 
इसका बड़ा परिणाम है | 
नाम : विक्रम कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

कविता : धैर्य रख मेरे दोस्त

" धैर्य रख मेरे दोस्त " 

धैर्य  रख मेरे दोस्त, 
हिम्मत तुझमें भी आएगी | 
कोशिश कर मेरे दोस्त,
 दुनिया बदल जाएगी |  
एक दिन होगा वो, 
जब दुनिया तुझको सुनेगी | 
तेरे हिम्मत परवानों के गीत, 
किताबों में भी बनी जाएगी |  
हर एक कीमती शब्द तेरा, 
जुबान से लेकर दिल से निकलती है |  
मन में धैर्य रखे रहना क्योंकि, 
किश्मत तो आजमाने की है | 

नाम : प्रान्जुल कुमार , कक्षा :8th , अपनाघर 

सोमवार, 15 जनवरी 2018

कविता : जिंदगी का प्यासा सागर

" जिंदगी का प्यासा सागर "

जिंदगी का प्यासा सागर, 
बहुत ही गहरा होता है | 
उम्मीदों से भरा होता है, 
मंजिल से भी दूर होता है |  
कहते हम प्रेम का सागर, 
गौर करें तो है महासागर | 
गहराई में है इसकी दुनियां, 
फिर भी है इसमें लाखो कमियां | 
सात सागरों में बता है सागर, 
बहुत गहरा होता है सागर | 

नाम : विशाल कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर


कविता : " शोर मचाते हैं मोर "

" शोर मचाते हैं मोर " 

शोर मचाते हैं मोर, 
बारिश में करते हैं शोर |  
सुन्दर -२ नाच दिखाते, 
इंसानों का दिल बहलाते |  
बारिश जब आ जाती है, 
नाच दिखकर गाते मोर | 
पंख फैला मचाते शोर, 
जानवरों का भी मन बहलाते | 
मेंढक दादा भी शोर मचाते |  
जब भर जाती है नाली, 
पिलो भाई ठंडा पानी |  
जब जब नाच दीखते नारिश,
समझलो भाई आ गई बारिश |

नाम : समीर कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं समीर जो की इलाहबाद जिले से कानपूर जिले में पढ़ाई के मकसद से आये हुए हैं | पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं साथ ही साथ गण गाने के बहुत शौकीन हैं | पढ़ लिखकर एक अच्छे इंसान बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं |      

शनिवार, 13 जनवरी 2018

कविता : बड़ी सोच

" बड़ी सोच "

छोटे हैं तो क्या हुआ, 
हमारी  सोच बड़ी है | 
करते नहीं हम छोटे काम, 
करते रहते हैं बड़े काम होता 
 सोच पाते नहीं हम, 
बड़ा कर दिखलाते हम | 
सोच हमारी ऊँचे अरमानों के,
खुले आकाश में बहती है | 
सूरज की तरह चमकती है, 
क्योंकि छोटा सोच पाते नहीं | 
बड़े काम दिखलाते हम | | 

नाम ; विशाल , कक्षा : ८थ , अपनाघर  

शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

कविता : भौ - भौ करते कुत्ते आए

" भौ - भौ करते कुत्ते आए " 

भौ - भौ करते कुत्ते आए,
खरगोश बेचारा लगे कापने | 
कुत्ते का झुण्ड करीब आया,
खरगोश का दिल घबराया | 
कान उठाकर वहाँ से भागा,
पीछे पड़ गए कुत्ता दादा | 
दोनों की है बात निराली,
खरगोश भागने में है माहिर | 
पर कुत्ता दादा है शिकारी  |  

नाम : अखिलेश कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर


 कवि परिचय : यह हैं अखिलेश जो की बिहार राज्य से आये हुआ है | कक्षा 7th में ही कवितायेँ  लिखना शुरु कर दिया और आजकल अच्छी कवितायेँ लिखते हैं | खेल भी बहुत अच्छा खेलते हैं | पढ़ लिखकर अपने घर और समाज की सेवा करना चाहते हैं | 

गुरुवार, 11 जनवरी 2018

कविता : हर नारी जीना चाहती है

" हर नारी जीना चाहती है " 

हर कोई नारी जीना चाहती है,
अपनी मंजिल पाना चाहती है | 
जीवन में खुशियाँ लाना चाहती है,
हर कोई  नारी जीना चाहती है | 
अपने  हक़ के लिए लड़ना चाहती है, 
अपने ख्वाइश पूरा करना चाहती है |  
अपने जी में कुछ करना चाहती है,
हर कोई नारी जीना चाहती है |  

नाम : संजय कुमार , कक्षा : 7th, अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं संजय कुमार जो की आजकल ये बहुत अच्छी कवितायेँ लिख रहे हैं पहले ऐसा नहीं था | आजकल इनकी कविताओं से कुछ न कुछ मेसेज निकलता है | पढ़ाई में थोड़ा कमजोर हैं फिर भी खूब मेहनत करते हैं हमें उम्मीद है की ये भविष्य में कुछ अच्छा करेंगे | झारखंड के रहने वाले हैं |  
  

बुधवार, 10 जनवरी 2018

कविता : भूखी चुहिया

" भूखी चुहिया " 

चुहिया ने चूहा से बोली,
 सामान ले आये एक दो बोरी | 
दाना पानी नहीं है घर पे, 
बारिश का मौशम आईं सर पे | 
भूखे प्यासे मरेंगे हम अब,
दाना पानी लाओगे कब |  
मैं न रहूंगी भूखी - प्यासी, 
भूखी  कभी न मैं रहूंगी |  
जल्दी कुछ करना पड़ेगा, 
वारना  भूखा मरना पड़ेगा | 

नाम : देवराज कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर

कवि परिचय : यह हैं देवराज कुमार जो की बिहार के नवादा जिले से कानपुर जिले के अपनाघर में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहें हैं | पढाई में बहुत अच्छे हैं साथ ही साथ खेल में भी अच्छे हैं | बड़े होकर एक डांसर बनाना चाहते हैं | 

कविता : हम मजदूर हैं

" हम मजदूर हैं " 

हम मजदूर हैं तो क्या हुआ, 
कल का भविष्य है हम | 
मेरी सफलताओं को, 
कदम चूमेगीं एक दिन | 
हौशला और जज्बों  को, 
कम नहीं होने देंगे हम | 
मंजिल तय न हो जाए, 
कोशिश करते कहेंगे हम | 
मुश्किलों से न घबराएँगे, 
हर संकट को पार कर जाएंगे | 

नाम : नितीश कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर


कवि परिचय : नितीश कुमार बिहार के रहने वाले हैं लेकिन अपने परिजन के साथ कानपूर में आकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | पढाई में बहुत मेहनत करते हैं | पढ़ लिखकर अपना परिवार वालों की  मदद करना चाहते हैं |  

मंगलवार, 9 जनवरी 2018

कविता: काले बदल छाया है

"काले बदल छाया है" 

काले बदल छाया है, 
पानी बरसाने की  संभावना है | 
गरज रह था कड़ -कड़, 
बरस रहा था भड़ -भड़ |  
मेंढक की खुशीयां लाया है,
पानी में खूब नहाया है |  
जीवों को साथ में बुलाया हैं, 
सभी मिलकर बरसात का | 
आनंद जी भर के उठाया है | |  

नाम : विक्रम कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं अपने विक्रम भाई जो की बिहार के नवादा जिला से कानपुर जिला में पढ़ाई करने के लिए आये हुआ है | पढ़ाई में हमेशा अच्छे होने की कोशिश करते हैं |   

कविता :हूँ मजबूर

" हूँ मजबूर " 

हूँ मजबूर, हूँ  सबसे दूर,
मेरी मंजिल न हुआ पूरा | 
आगे आगे कदम है रखना,
मंजिल मेरी, मेरा काम परखना | 
राह ऐसी है यह सुनहरा, 
इस पर चलना काम है मेरा | 
थककर हो गया हूँ चूर, 
हूँ मजबूर सबसे दूर | | 

नाम : देवराज , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परिचय : देवराज लगभग बहुत सी कवितायेँ लिख चुके है इससे ये पता चलता हैं की केवल जो बड़े - बड़े   कविकार होते हैं वही केवल कवितायेँ लिख सकते हैं पढ़ाई करने का ये भी फायदा होता है | अपने जीवन में बहुत कुछ सिख रहे हैं और औरों को भी सीखना चाहिए |