बुधवार, 19 सितंबर 2018

कविता : हंस लो हसने वालों

" हंस लो हसने वालों,"

हंस लो हसने वालों, 
करो घृणा करने वालों | 
पर दिल का दुःख नहीं,
समझ पाओगे पैसा वालों | 
दुःख की धरा को लेकर मैं निडर रहता हूँ, 
जुल्म करो या सितम 
इस मिटटी की शरीर को लिए रहता हूँ | 
कब तक हुक्म चलाओगे,
समाज को बेवकूफ बनाओगे | 
चारो तरफ है पैसा का धंधा, 
पैसे के लालच में लोग है अँधा | 
जरूर उठेगा कभी अच्छा,
कानून भारत का डंडा | 

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा :8 , अपना घर 


कवि परिचय : यह है विक्रम जो की बिहार के रहने वाले हैं और अभी अपना घर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | विक्रम को समाज से जुडी बुराइयों को ख़त्म करने के लिए उससे जुडी कवितायेँ लिखना बहुत पसंद है | 

शनिवार, 15 सितंबर 2018

कविता : चंद्रशेखर आज़ाद

" चंद्रशेखर आज़ाद "

चंद्रशेखर आज़ाद की थी यह क़ुरबानी, 
खूनों से भरी थी तालाब और नदियों का पानी | 
अंग्रेज़ भारतवासियों को लटका रहे थे, 
मौका मिलने पर धीरे से टपका रहे थे | 
 भारतवासियों में से निकला एक हीरो, 
अंग्रेज़ों को पटक -पटक कर दिया ज़ीरो | 
अब बताइये आप वो कौन थे हीरो, 
वरना आप भी है  देशभक्ति में ज़ीरो| 
चंद्रशेखर आज़ाद की थी यह क़ुरबानी, 
खूनों से भरी थी तालाब और नदियों का पानी | 

कवि : अकीबुल अली , कक्षा : 4th , अपना घर

कवि परिचय : यह  अकीबुल अली जो की असम के रहने वाले हैं अपना घर में रहकर कक्षा 4 की पढ़ाई कर रहे हैं | अकीबुल अली की यह पहली कविता है जो देश के एक महापुरुषके जीवन पर  लिखी है और वैसे   दूसरी कविता है | अकीबुल को गतिविधियों में भाग लेना बहुत अच्छा लगता है और अपने दिमाग का बहुत प्रयोग करते हैं | 


कविता : हिंदुस्तान में पली बड़ी है हिंदी

" हिंदुस्तान में पली- बड़ी है हिंदी "

हिंदुस्तान में पली -बड़ी है हिंदी,
देश के हर गली में है हिंदी | 
जिह्वा के हर कण में है हिंदी,
मातृभाषा के हर शब्द में है हिंदी | 
मातृभाषा रूपी भाषा है हिंदी, 
शब्दों को जानने की  अभिलाषा है हिंदी | 
देश की शान बढ़ाता है हिंदी, 
जन -जन  पहचान बनाता है हिंदी | 
हिंदी की लालिमा को जानों,
हिंदी के अक्षरों को पहचानों | 
यह तो हिंदी भाषा का बहार है, 
इस भाषा में शब्दों का भंडार है | 
हिंदी में बिंदी लगाए रखना,
हिंदी भाषा की शान बढ़ाए रखना | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले है और अपना घर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | यह कविता प्रांजुल ने हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में लिखी है जिससे की हम अपने देश की मातृभाषा को कभी नहीं भूले बल्कि इसकी चर्चा और दूसरों तक फैलाए | 

रविवार, 9 सितंबर 2018

कविता : शिक्षा ग्रहण

 " शिक्षा ग्रहण "

शिक्षा ग्रहण करनी है तो, 
पहले विद्यार्थी बनना पड़ेगा | 
ज्ञान ग्रहण करनी है तो,
पहले ज्ञानी बनना पड़ेगा | 
ज्ञान का समंदर बहाना है तो, 
पहले समंदर बनना पड़ेगा | 
कुछ नया सीखना है तो, 
पहले गुरु बनना पड़ेगा | 
गुरु की जिज्ञासा लेकर, 
तुमको आगे बढ़ना पड़ेगा | 
और कुछ सीखना है तो, 
पहले किताब पढ़ना पड़ेगा | 
शिक्षा ग्रहण करनी है तो, 
पहले विद्यार्थी बनना पड़ेगा | 

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर 

कवि परिचय : यह है समीर जो की इलाहबाद के रहने वाले हैं और अपना घर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | समीर कवितायेँ लिखने के साथ साथ अच्छे गीत भी गा  लेते हैं | समीर एक संगीतकार बनना चाहते हैं और इसके लिए वह म्हणत करता है | 

गुरुवार, 6 सितंबर 2018

कविता : ये खुला आसमान है अपना

" ये खुला आसमान है अपना "

ये खुला आसमान है अपना ,  
जिस पर सजाना है सपना |
हर एक दिन हो अपना ,  
जिस पर हक़ हो अपना | 
जीने और मरने की हो आज़ादी ,  
जाति धर्म में नहीं करेंगे बर्बादी |
जिस जहाँ में कुछ कर सकते है ,  
एक दूजे के साथ रह सकते है |
मन में सदा जिज्ञासा हो ,  
एक ऐसा अपना जहां हो | 
जिस पर सपने अपने हो ,  
एक ऐसा जहां हो | 
जहां तुम और हम हो | | 

कवि : प्रांजुल कुमार,   कक्षा : 9th ,  अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जो की कक्षा 9th के छात्र है और अपना घर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं | प्रांजुल को कविताएं लिखने का बहुत शौक है | यह बड़े होकर एक महान व्यक्ति बनने  के साथ -साथ एक इंजीनियर बनना चाहते हैं | 

बुधवार, 5 सितंबर 2018

कविता : बारिश का दिन आया

" बारिश का दिन आया "

पहले काले  बादलों ने डराया ,  
फिर पानी खूब बरसाया | 
बारिश का दिन आया ,  
बूंदों का भंडार लाया | 
गर्मी का तापमान गिराया ,  
मेंढक भी खूब टर्र - टर्रया | 
किसानों का भी मन बहलाया ,  
बंजर जमीं को खूब भिगाया | 
बारिश का यही है माया , 
कहीं धुप और कहीं छाया | 

कवि : कामता कुमार ,   कक्षा : 7th ,   अपना घर 

कवि परिचय : यह हैं कामता जो की बार के रहने वाले हैं और अपना घर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। कामता को एक दूसरों की मदद करना बहुत अच्छा लगता हैं | कामता बड़े होकर कुछ होनहार काम करना चाहते हैं | 

मंगलवार, 4 सितंबर 2018

कविता : कल का भविष्य हैं हम

" कल का भविष्य हैं हम "

हम मज़दूर हैं तो क्या हुआ ,  
कल का भविष्य हैं हम | 
मेरी सफलताओं को ,  
कदम चूमेगी एक दिन | 
हौसला और जज्बा को ,  
कम होने नहीं देंगे हम | 
जब तक मंजिल तय न हो जाए ,  
तब तक कोशिश करते रहेंगे हम | 
मुश्किलों से नहीं घबराएंगे ,  
हर संकटों को पार कर जाएँगे | 

कवि : नितीश कुमार  ,  कक्षा : 8th  ,  अपना घर 

                                                                              


कवि परिचय : यह हैं नितीश कुमार जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | नितीश को टेक्नोलॉजी में बहुत रूचि है | नितीश को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता हैं और अपनी कवितायेँ के मद्धम से दूसरों को जागरूक करते हैं | 

सोमवार, 3 सितंबर 2018

कविता :पाँच उँगलियाँ मिलने से

" पाँच उँगलियाँ मिलने से "

पाँच उँगलियाँ मिलने से , 
एक हाथ बन जाता है |
हर जन लोग मिलने से , 
एक समाज बन जाता है |
एक दूसरे का साथ दो तो , 
वह  सहारा बन जाता है |
पहाड़ के बीच झरना निकलने से , 
एक किनारा बन जाता है |
मन में जिज्ञासा भर लो तो , 
वह जिज्ञासु कहलाता है |
अच्छे कर्म करने से ही , 
वह महान बन जाता है | 

कवि : प्रांजुल कुमार  ,  कक्षा : 9th  ,  अपना घर 

                                                                               
 
कवि परिचय : ह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | प्रांजुल बड़े होकर एक  इंजीनियर बनना चाहते हैं | प्रांजुल पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं और अच्छे से पढ़ाई करके दूसरों की मदद करना चाहते हैं | 

रविवार, 2 सितंबर 2018

कविता : खेल नसीब का

" खेल नसीब का "

अजीब है खेल नसीब का ,  
टूटता है सपना मज़दूर का | 
मासूमियत से भरा चेहरा है,  
यह बात बहुत ही गहरा है | 
उस घर ने सबको मजबूर बना दिया,  
पैदा हुआ सबको  मज़दूर बना दिया | 
वहाँ भी सपना सजा दिया,  
आखिर में आँसुओं को मिटा दिया | 
यह बात है एक गरीब का,  
अजीब है खेल नसीब का | 
टूटता है हर सपना मजदूर का | | 

कवि : अखिलेश कुमार ,  कक्षा : 8th , अपना घर

                                                                                      


कवि परिचय : यह है अखिलेश कुमार जो की एक मजदूर के नसीब के बारे एक कविता के माध्यम से उनके नसीब को दर्शाया है | अखिलेश पढ़ाई में बहुत ही अच्छे हैं | अखलेश को गणित में बहुत ही रूचि है | 

कविता : खुदा सम्मान है

" खुदा सम्मान है "

खुदा नहीं इस जहान में,  
नहीं तेरी इन्द्रियों के ज्ञान में | 
वो सदा तुम्हारे साथ है,  
आदर और सम्मान में | 

खुदा खुद को जानता है, 
अपने घर को पहचानता है | 
जहाँ आदर और सम्मान है,  
वहीँ उसका विश्राम है | 

खुदा को कहीं खोदा नहीं जाता, 
खुदायी को कहीं खोजा नहीं जाता | 
क्योंकि खुदा खोदने की चीज़ नहीं,  
और खुदायी खोजने की चीज़ नहीं | 

वो है सबके अंदर,  
बकरी हो या बन्दर | 
कवि : हंसराज कुमार  , अपना घर 

कवि परिचय : यह हैं हंसराज कुमार अपना घर के पूर्व छात्र है जो की घाटमपुर के रहने वाले हैं | हंसराज अभी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं | हंसराज ने बहुत सारी रोचकभरी कविताएँ लिखी हैं | 

शनिवार, 1 सितंबर 2018

कविता : चाँद

" चाँद "

बैठ बिस्तर पर चाँद निहारता, 
उसकी किरणों को आँखों में भरता | 
अंधियारे को दूर मैं करता, 
सभी में एक उम्मीद भरता | 
गोल मटोल है इसका आकार, 
देख तो मन में आया विचार | 
क्यों न इसको समझा जाए, 
इसके बारे में उत्तर पाए | 
शीतल करता हैं मन को ये, 
चमककर भी न जलता है ये | 

कवि परिचय : प्रांजुल कुमार ,  कक्षा : 9th ,  अपना घर 

                                                                                   

कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और अपना घर में रह कर अपनी पढ़ाई कर रहें हैं | प्रांजुल ने अपनी कविता में चाँद के बारे में बताया है की हमें हमेशा जिज्ञाशु रहना चाहिए | प्रांजुल बड़े होकर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं |