गुरुवार, 22 अक्तूबर 2020

मौसम मस्ताना हो चला है

" मौसम मस्ताना हो चला  है "
मौसम मस्ताना हो चला है।
बारिश  का स्तर बढ़ चला है।।
रिमझिम - रिमझिम बरस रहा है।
काली घटा का बवन्डर मड़रा रहा है।।
नदी तालाब सब भर चला है।
पूरे शहर में सड़कों पर पानी भर चला है।।
नदियों का स्तर बढ़ चला है।
किनारे पड़े घर फसल बह चला।।
 नदियों का स्तर बढ़ चला है ।
मौसम मस्ताना हो चला है।।
हर तरफ हरियाली  बढ़ चला है।।
मौसम मस्ताना हो चला है।
कविः - प्रांजुल कुमार ,कक्षा - 11th , अपना घर ,कानपुर ,

बुधवार, 21 अक्तूबर 2020

प्रकृति का मनमोहक नजारा


 

"प्रकृति का मनमोहक नजारा"

प्रकृति का मनमोहक नजारा।
मन करता है देखूँ दोबारा।।
इतना सुन्दर लगे इनका इशारा।
सभी की नजरें  अपनी ओर निहारा।।
सुनहरी सुबह से ढलती शाम तक ।
चमकते सूरज से चाँदनी रात  तक।।
एक - एक कण में दिया उजियारा।
मन करता है देखूँ दोबारा।।
पेड़ की टहनियों से आसमां की ऊंचाई तक ।
जमी से लेकर समुंद्र की गहरायी तक।।
छल -छल कल -कल आवाज दोहराया।
मन करता है देखू दोबारा ।।
प्रकृति का मनमोहक नजारा। 
कविः -प्रांजुल कुमार , कक्षा - 11th ,अपना घर ,कानपुर,
 
 

मंगलवार, 20 अक्तूबर 2020

गरजने दो बादल को अब

" गरजने दो बादल को अब "

  गरजने दो बदल  को अब ,
बरसने दो पानी को अब |
मौसम है  हरियाली  का ,
 गायेंगे सब गीत खुशहाली  का ,
मेंढक खूब बोलेंगे | 
अपने  दिल की  राज  खोलेंगे ,
बच्चे कागज के कस्ती संग | 
 करेंगे मस्ती और तंग ,
बच्चे बूढ़े  और जवान |
 चलेंगे जब सीना तन ,
गिराने से चली जाएगी शान |
गरजने दो बादल को  अब,
बरसने दो  पानी को अब | 

कविः - शनि कुमार ,कक्षा, 9th, अपना घर,  कानपुर

 

 

सोमवार, 19 अक्तूबर 2020

मै आसमां को निहारता रहता हूँ

" मै आसमां को निहारता रहता हूँ "

मै आसमां को निहारता रहता हूँ ,

उड़ते हुए पक्षियों को देखा करता हूँ | 

आसमां में बनात द्रश्य ,

कितने ख़ूबसूरत लगते हैं  |

बस उसी को निहारता रहता हूँ ,

मै  आसमां  को देखा करता हूँ | 

दिन से रात  हो गये  अब सुबह की बरी है ,

चिडिंयो  की आवाज बहुत प्यारी है  |

सुबह की खुशहाल जिंदगी की बरी हैं ,

सुबह की ओंस मोतियों से भी प्यारी है  |

मै आसमा को निहारता रहता हूँ ,

उड़ाते हुए पक्षिंयों को देखा करता हूँ  |

कविः - संजय कुमार , कक्षा - 10 th , अपना घर ,

 


शनिवार, 17 अक्तूबर 2020

आजाद हुए है हम वर्षो पहले

"आजाद हुए है हम वर्षो पहले "

आजाद हुए है हम वर्षों  पहले ,

आओ याद  उन शहीदों  को कर लें | 

कुरबान हुए इस मिट्टी के तारे ,

 आओ नमन करे उनको सारे  |

सीमा  पर खड़े वीर हमारे ,

 सुरक्षित करे देश को हमरे  |

गूंज रही है जय हिन्द के नारे ,

 आजाद  हुए है हम वर्षों  पहले | 

आओ  याद  शहीदों को कर लें ,

कविः - रविकिशन ,कक्षा - 11 th , अपना  घर ,

शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2020

मेरा देश बदल रहा है

" मेरा देश बदल रहा है "

मेरा देश बदल रहा है ,

समय पर आगे बढ़  रहा है  |

मेरा देश बदल रहा है ,

 खेतो में  फसल लहलहा रहा है  |

 धीरे धीरे मेरा  देश बढ़  रहा है ,

  लोग कड़ी  मेहनत करते है धूप हो या छाँव | 

देश की तरक्की में  थकते नहीं पाँव ,

मेरा देश बदल रहा  है | 

समय पर आगे  बढ़  रहा है ,

कविः - अमित कुमार ,कक्षा - 6 th , अपना घर ,

गुरुवार, 15 अक्तूबर 2020

कविता : नदियों के बीच से आती वो

" नदियों  के  बीच से  आती वो "

 नदियों के  बीच से  आती वो।
किलकारिंयो भरी आवाज।।
भरी गोद , अब याद  आती है।
खिलखिलाहट भरी मुस्कान।।
 आती है वो पुरानी  साड़ी  का मखमल।
भरा वो आँचल।।
लोरिंयो से भरी  वो रात।
माँ की सिखायी हर बात।।
बहुत याद आती  है।
छोटे - छोटे पैरों से बने पद चिन्ह।।
बचपन की  करते शरारते।
ननिहाल में बिताये वो दिन।।
बहुत  याद आते है ,
नदियो के बीच से  वो। 
किलकारियों भरी अवाज।।

कविः राज कुमार ,कक्षा :11th , अपना घर, कानपुर 

बुधवार, 14 अक्तूबर 2020

कविता : गर्मी का मौसम में

" गर्मी का मौसम में "

गर्मी का  मौसम में ,

हवाओ  के उलझन में | 

कड़कत हुई धूप में ,

खेतों की हरयाली में | 

बहती हुई झरने में ,

चहरे पर पसीना | 

मुश्किल कर दिया जीना ,

पंखा कूलर काम न करे | 

पेड़ो से छाव मिल पाए ,

 

कवि : अमित कुमार  , कक्षा : 6th , अपना घर                            

 

 

शनिवार, 10 अक्तूबर 2020

कविता : हम सब मिलकर ये सपथ जताए

 " हम सब मिलकर ये सपथ जताए "

हम सब मिलकर ये सपथ जताए ,

आओ मिलकर कानपुर को स्वच्छ बनाए | 

ऐसे पेड़ -पौधे इस इस शहर में लगाए ,

रोड वेज पर कूड़ा न फैलाए | 

पॉलीथिन पर प्रतिबद्ध लगाए ,

पेपर बैग का उत्पादन बढ़ाए | 

 हर बच्चो को शिक्षा दिलाए ,

इस शहर को हरयाली दिलाए  | 

हर चौराहो पर जागरूकता अभियान चलाए ,

कहता है हर छोटा बच्चा  | 

अपना कानपुर सबसे अच्छा ,


कवि : प्रांजुल कुमार  , कक्षा  : 11th  , अपना घर


 


बुधवार, 7 अक्तूबर 2020

कविता : दुरी बनाने में अच्छा नहीं लगता

 " दुरी बनाने में अच्छा नहीं लगता "

दूरी बनाने में अच्छा नहीं लगता ,

सबके साथ रहने में अच्छा लगता | 

कोरोना ने कर दिया दोस्तों से दूर ,

अकेले रहने में दिन जाए पुर | 

कोरोना ने कर दिया दोस्तों से  दुरी  ,

अब रहीगी  दोस्ती अधूरी | 

अकेले रहने में दिन हो जाए पूर  ,

कोरोने कर दिया दोस्तों से दुर | 

 

कवि  :  नवलेश कुमार  , कक्षा  : 6th  , अपन घर

 

मंगलवार, 6 अक्तूबर 2020

कविता : हर समय रास्ता मोड़ रहा है

" हर समय रास्ता मोड़ रहा है "

हर  समय रास्ता मोड़ रहा है ,

बीते  हुए समय को पीछे छोड़ रहा है | 

समय यही बीत  जाता है पता नहीं चलता ,

जो हर समय को स्तमाल करे | 

 वही  महान कहलातें  हैं   ,

तूफान के आगे वही चटटान है | 

समय के अनुसार चलना सीखो ,

सूरज के साथ ढलना सीखो | 

मौसम की तरह बदलना सीखो ,

समय के अनुसार चलना सीखो | 


कवि  : अजय कुमार  , कक्षा  : 6th  , अपना घर