एक बार कि बात है कि एक बिल्ली थी, जिसक नाम बाटी था और एक चूहा जिसका नाम चोखा था। उन दोनों में बहुँत अच्छी दोस्ती थी। वे जँहा भी जाते एक साथ जाते और एक दूसरे के ऊपर मुसीबत आ जाने पर सहायता करते थे। एक दिन बिल्ली किसी के घर दूध पीने गई। उसने देखा कि दूध भरा हुआ कटोरा रसोई घर में हुआ है, वो रसोई घर में घुस गयी, तभी चूहा भी पीछे से आ धमका, बाटी ने दूध क कटोरा गिरा दिया। दूध जमीन पर गिर गया बाटी और चोखा दोनों मस्त होकर दूध पीने लगे। थोड़ी देर में चूहे का पेट भर गया वो एक तरफ जाकर आराम फरमाने लगा। तभी बाटी के ऊपर किसी ने जाल डाल दिया, और उसे जाल में बांधकर रसोईघर के एक कोने में रखदिया। उस आदमी के जाने के बाद चोखा धीरे से बाहर आया और बाटी को आजाद करने के लिए जल्द से उस जालको काट दिया, और बाटी को मरने से बचा लिया। घर का कोई आदमी फिर आकर मारे उससे पहले दोनों वंहा से भाग लिए। इस तरह से चूहे ने बिल्ली कि जान बचा ली और अपनी मित्रता कि शान बढा ली।
बुधवार, १० फरवरी २०१०
कहानी: चूहा और बिल्ली कि दोस्ती
एक बार कि बात है कि एक बिल्ली थी, जिसक नाम बाटी था और एक चूहा जिसका नाम चोखा था। उन दोनों में बहुँत अच्छी दोस्ती थी। वे जँहा भी जाते एक साथ जाते और एक दूसरे के ऊपर मुसीबत आ जाने पर सहायता करते थे। एक दिन बिल्ली किसी के घर दूध पीने गई। उसने देखा कि दूध भरा हुआ कटोरा रसोई घर में हुआ है, वो रसोई घर में घुस गयी, तभी चूहा भी पीछे से आ धमका, बाटी ने दूध क कटोरा गिरा दिया। दूध जमीन पर गिर गया बाटी और चोखा दोनों मस्त होकर दूध पीने लगे। थोड़ी देर में चूहे का पेट भर गया वो एक तरफ जाकर आराम फरमाने लगा। तभी बाटी के ऊपर किसी ने जाल डाल दिया, और उसे जाल में बांधकर रसोईघर के एक कोने में रखदिया। उस आदमी के जाने के बाद चोखा धीरे से बाहर आया और बाटी को आजाद करने के लिए जल्द से उस जालको काट दिया, और बाटी को मरने से बचा लिया। घर का कोई आदमी फिर आकर मारे उससे पहले दोनों वंहा से भाग लिए। इस तरह से चूहे ने बिल्ली कि जान बचा ली और अपनी मित्रता कि शान बढा ली।
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कविता: तुलसी प्यारी
कितनी न्यारी कितनी प्यारी,
बड़ी सुन्दर है इसकी क्यारी।
छोटी छोटी इसकी डाली,
खिल रही देखो हरियाली।
लगती है ये बड़ी ही प्यारी,
इसकी पत्ती बड़ी ही न्यारी।
इससे बनती दवा है सारी,
इसकी खुश्बू बहुत ही प्यारी।
इसका नाम है बड़ा ही प्यारा,
तीन अक्षर का नाम है सारा।
सभी प्यार से कहते तुलसी,
सबके आंगन में रहती तुलसी।
कितनी न्यारी कितनी प्यारी,
जिसको चाहे दुनिया सारी।
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मंगलवार, ९ फरवरी २०१०
कहानी -श्यामू ने पंडित जी का मजाक उड़ाया
लेखक -आशीष कुमार, कक्षा ७ ,अपना घर
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कविता : पान ने बनाया सबसे बड़ा "डान"
एक था पान का पत्ता
दिखने में लगता जैसे लत्ता
सब इसको खाते कलकत्ते में,
अधिक दबाते इसको मुंह में।
पान सबका मुंह करता लाल,
तब तक मेरे फोन में आई काल।
हमने उठाया और बोला कौन ?,
उसने बोला मै हूँ मुंबई का " डान"।
फिर मैंने बोला अरे चुप हो जा मौन,
मै हूँ इस भारत का सबसे बड़ा " डान" ।
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कविता: चिड़िया के घोसले में अंडा
एक दिन मैंने देखा था ,
चिड़ियों के घोसले में अंडा था ।
उस अंडे में बच्चे थे,
बच्चे सबसे अच्छे थे।
चिड़िया जब जब आती थी ,
बच्चों के मुहं में दाना दे जाती थी ।
बच्चे अच्छे से खाते थे ,
घोसले में मौज उड़ाते थे ।
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कविता: थोड़ी सी कर ले पढाई
मैदान में लगी है कितनी घास ,
जिसमें लगती है रोज लात।
जानवर उसको खाते है ,
अपना पेट फुलाते है ।
उसी घास में सब खेलते है ,
मौज मस्ती करते है ।
मौज मस्ती नहीं ज्यादा करना ,
सबको थोडा है पढाई करना ।
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कविता: संसार अनोखा
आसमान में है जो तारे,
टिम - टिम कर टिमटिमाते सारे।
टिमटिमाते है जो तारे,
देखने में लगते है कितने प्यारे।
आसमान में एक सूरज अपना,
जिसके बारे में हम देखे सपना।
ये धरती सहती है कितना भार,
जिस पर है पूरा संसार।
पृथ्वी पर ही है बस हरियाली,
सूरज में ही है बस लाली।
ये संसार है कितना अनोखा,
जिसे सोचने में होता है धोखा।
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सोमवार, ८ फरवरी २०१०
कहानी : कौआ और बन्दर की दोस्ती
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रविवार, ७ फरवरी २०१०
कविता: आँक्सीजन गैस का महत्व
प्राक्रतिक ने दिया इसको जन्म ।
जिससे जीवित हैं मानव जीवन ॥
वायुमंडल में इसका प्रतिशत है इक्कीस ।
जिससे मानव है जीवित ॥
"O" है इसका संकेत ।
"02" है इसका सूत्र ॥
सभी सजीवों को है ।
इसकी आवश्यकता ॥
जलने में भी करती बड़ी सहायता ।
इसके बिन जीवन की न थी कल्पना ॥
जिस दिन खत्म हो जाएगी ।
वायुमंडल से इसका प्रितशत ॥
इस भू धरा में ।
सजीवों की भी न होगी कल्पना ॥
लेखक -अशोक कुमार
कक्षा -७
अपना घर
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शनिवार, ६ फरवरी २०१०
कविता: गंगा बचाओ
गंगा बचाओ गंगा बचाओ ।
सदा साफ उसको दिखलाओ ॥
गंगा को प्रदूषित न करो भइया ।
गंगा हमारी रास्ट्रीय नदी है ॥
गंगा में में कूड़ा करकट न फेको ।
गंगा बचाओ गंगा बचाओ ॥
गंगा में सारे जीव जन्तु रहते हैं ।
गंगा में फैक्ट्री का गंदा पानी न गिराओ ॥
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शुक्रवार, ५ फरवरी २०१०
कविता: ब्लैक बोर्ड
ब्लैक बोर्ड होता काला ।
पडे न इससे मेरा पाला ॥
अगर पड गया इससे पाला ।
तो वी० के० यादव ने पीट डाला ॥
मैं तो हो जाऊंगा काला ।
बच्चे चिडाये काला काला ॥
क्या पड़ा वी० के० से पाला ।
तुम्हारे जगह मैं होता लाला ॥
तो ब्लैक बोर्ड होता न काला ।
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