सोमवार, 16 जुलाई 2018

कविता : तूने क्या कर डाला

" तूने क्या कर डाला " 

तू ने ये क्या कर डाला,
इस दुनियाँ को बदल डाला |
न देखी तूने खाई ,न देखा नाला,
जहाँ भरा है गन्दगी का प्याला |
पर तूने एक गलती कर दी,
इस गर्मी को और बढ़ा दी |
बैठा है ऊपर काला - काला,
लगा दिया वहाँ जाला - जाला |
तू ने ये क्या कर डाला,
इस दुनियाँ को बदल डाला | 

कवि : समीर कुमार, कक्षा : 8th , अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं समीर कुमार जो की इलाहबाद के रहने  वाले है | समीर को कवितायेँ लिखना बहुत पसंद है, और हमेशा ऐसी कविता लिखते हैं जो समाज में काम आ सके | समीर को इसके अलावा क्रिकेट खेलना बहुत पसंद हैं | समीर बड़े होकर एक महान क्रिकेटर बनना चाहते हैं |   

शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

कविता : हवाओं के झरोके में

" हवाओं के झरोके में "

चलती हुई हवाओं के झरोके में,
कुछ तो करना होगा इस मौके में | 
देखते देखते गुजर जाएंगे ये दिन,
जब तुम भविष्य की राहों में रहोगे | 
तब याद आयेंगें ये बीते हुए दिन, 
लेकिन तुम्हें सपना करना है रंगीन | 
परिश्रम करना होगा तुम्हें दिन -रात, 
पता नहीं चलेगी बीते हुए बात | 
ये हवाएँ तुम्हारे जज्बों को उड़ाएगी, 
कोशिश है ये तुम्हारे जीवन को बनाएगी | 
चलती हुई हवाओं के झरोके में,
कुछ तो करना होगा इस मौके में | 

कवि : अखिलेश कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर


कवि परिचय : यह हैं अखिलेश माँझी जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | अखिलेश के माता - पिता ईंट भट्ठों में काम करते हैं | अखिलेश बड़े होकर एक कविकार और वायुसेना में जाना चाहते हैं | यह कविता बहुत ही अच्छे लिखते हैं | 

कविता : फूलों की तरह

" फूलों  की तरह "

फूलों  की तरह खिला है, 
नए रस्ते की ओर चला है | 
बढ़ते जा रहे हैं मेरे कदम,
एक नए दिशा की ओर | 
होंगें सही गलत के रास्ते,
चुनना है इन दोनों में से एक |
 नहीं भरोसा है किसी पर,
 भरोसा करूंगा खुद पर | 
चलूँगा मैं सही रास्ते पर, 
लगाकर अपने सपनों के पर | 
फूलों  की तरह खिला है, 
नए रस्ते की ओर चला है | 

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 8th ,  अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं नितीश जी जो की बिहार के नवादा जिले के  रहने वाले हैं | कवितायेँ बहुत अच्छी लिखा करते हैं | नितीश अपने कार्य के प्रति बहुत जिम्मेदार हैं | नितीश को टेक्नोलॉजी में बहुत रूचि है | पढ़ - लिखकर एक अच्छी नौकरी करना चाहते हैं और परिवार वालों की मदद करना चाहते हैं | 

बुधवार, 11 जुलाई 2018

कविता : स्वच्छ शहर बनाओ

" स्वच्छ शहर बनाओ "

सुनो सुनो ये शहर की कहानी,
जहाँ रहता है कूड़ा और गन्दा पानी |
जगह जगह पड़े रहते कूड़े का ढेर,
कूड़ा  उठाने में  कर देते हैं देर |
नजर नहीं जाती किसी की उस पर,
ख्याल नहीं आता कूड़ा है धरती पर |
धीरे - धीरे बढ़ता जा रहा कूड़े का ढेर,
सोचा नहीं किसी ने इस बारे में |
न ही ढूँढा किसी ने  कोई उपाय,
सोचा फिर भी कुछ न कर पाए |
अपने शहर को सुन्दर बनाओ,
इसको पेड़ पौधों से सजाओ |
कहीं  न छोडो कूड़ा -गन्दा पानी,
अपनी न करो कहीं पर  मनमानी
जब कहीं भी न होगा कड़ा करकट,
तब न होगी प्रदूषण का कोई संकट | 
शहर में अपने पेड़ पौधे लगाओ, 
अपने शहर को स्वच्छ शहर बनाओ | 

कवि : नितीश , कक्षा : 8th , अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं नितीश जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | नितीश को कविता लिखने का बहुत शौक है | इस कविता में नितीश अपने शहर को  कूड़ा मुक्त करने का सन्देश दे रहे हैं और वह अपने शहर को सुन्दर बनाना चाहते हैं और शुरुआत इस कविता से की है | 

मंगलवार, 10 जुलाई 2018

कविता : शीतल वायु

" शीतल वायु "

ये शीतल हवा का क्या कहना,
हमको इसके बिना नहीं रहना | 
गर्मी में यह हमको राहत दिलाए, 
ठंडी में यह खूब हम को सताए | 
जिसने इस चीज़ को बनाया है, 
उसने सभी का मन  भाया है | 
मनुष्य इसे कर देते है  बेकार, 
काला धुँआ फैलाती है कार | 
इससे बच्चे हो रहे हैं बीमार, 
महंगे हो रहें हैं सभी उपचार | 
महँगा हो रहा है साँस लेना,
बचकर तुम इस वायु से रहना | 
हम सब को मिलकर शुद्ध है करना | | 

कवि : कुलदीप , कक्षा : 7th , अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो कानपुर के अपना घर में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं | कुलदीप को डांस करने का बहुत शौक है और कवितायेँ लिखने का | कुलदीप का मन पसंद खेल क्रिकेट है और वह एक क्रिकेटर बनना चाहते हैं | कुलदीप पढ़ने में बहुत ही अच्छे हैं | 

सोमवार, 9 जुलाई 2018

कविता : पल भर की हँसी

" पल भर की हँसी "

क्यों उदास बैठा है मेरे दोस्त, 
एक पल के लिए  हँस तो सही | 
हँस के तो एक बार तू  देख,
सच होंगें तेरे सपने सभी | 
उदास मन तेरे सोच को जमाएगा, 
तेरी हँसी तेरे दुखों को पिघलाएगा | 
तेरा मन प्रफुल्लित हो उठेगा, 
जब तू खुल कर एक बार हँसेगा | 
एक हँसी में जो बात होती है, 
वह और किसी में कहाँ होती है | 
तेरी हँसी से उड़ जाएंगे होश, 
क्यों उदास बैठा है मेरे दोस्त | 

कवि : प्रांजुल , कक्षा : 9th , अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और अपनी पढ़ाई एक अपना घर में रहकर पूरी कर रहे हैं | प्रांजुल को गतिविधियों में हिस्सा लेने में बहुत मज़ा  और मन लगाकर हर काम करता हैं | प्रांजुल बड़े होकर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं | 

रविवार, 8 जुलाई 2018

कविता : गर्मी की बरसात

" गर्मी की बरसात " 

दोपहर की क्या वो बात थी ,
धूप और गर्मी की बरसात थी | 
टपक रहा था पानी टप टप, 
राहत की भीख  माँग रहे थे सब | 
सोच रहे थे कैसे छुटकारा मिल जाए, 
थोड़ा सा गर्मी का पारा कम हो जाए | 
काश  एक बार छुटकारा मिल जाए, 
इस गर्मी में काश मौसम ठंडा हो जाए | 
दोपहर की क्या वो बात थी ,
धूप और गर्मी की बरसात थी | 

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 8th ,अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं विक्रम कुमार जो की बिहार के रहने वाले हैं और अपना घर में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं | विक्रम हमेशा खुश नज़र आते हैं और विक्रम  को कवितायेँ लिखना  बेहद पसंद हैं | 

बुधवार, 4 जुलाई 2018

कविता : मेरी चाह

 " मेरी चाह "

मेरी चाह एक ऐसी  हो ,
दुनियाँ में हर एक जैसा हो |
हर गरीब की एक छाया हो,
बंधू और भाई  माया हो |
दुःख का कोई  नाम न हो,
खुशियों से भरा हर शाम हो |
दुनियाँ में हर किसी का नाम हो,
जिंदगी में हर कोई महान हो |
मेरी चाह एक ऐसी  हो ,
दुनियाँ में हर एक जैसा हो | 

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं विक्रम कुमार जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | विक्रम को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | विक्रम मन से बहुत ही अच्छा है | 

गुरुवार, 28 जून 2018

कविता : खुले आसमान के जैसा

" खुले आसमान के जैसा "

खुले आसमान के जैसा, 
मौसम के बौछार जैसा | 
पक्षियों की चहचहाहट ,
फूलों की महकाहट | 
सभी को ये अच्छा लगता, 
खुले आसमान के जैसा | 
बादल बन जाते है काले,
कलियों की यह कोमल डालें | 
हो रही हैं बूंदों का बौछार, 
लगते हैं मोतियों का भंडार | 
ये मोतियों ने कर डाली हरियाली, 
छा गई दुनिया में हरियाली | 

कवि : संजय कुमा , कक्षा : 8th , अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं संजय कुमार जिनको कवितायेँ लिखने  का बहुत शौक है और अच्छी कवितायेँ भी लिखा करते हैं  |  संजय झारखण्ड के रहन वाले हैं लेकिन ये बचपन से ही कानपुर में रह रहे हैं और अपना घर में पढ़ाई कर रहे हैं | पढ़ाई में हमेशा कोशिश करते रहते हैं | 

कविता : हवा की तूफानी

" हवा की तूफानी "

गर्मी की आ  गई परेशानी,
लू गरम , हवा की तूफानी | 
कूलर , फ्रीज़ की मेहरबानी, 
चल - चलकर दे रही है क़ुरबानी | 
कितनी  तूफानी ये गर्मी, 
सहन करना हो गया मुश्किल | 
 कड़क दौर का यह है गर्मी,
कितनी जलन की उपहार गर्मी | 
गर्मी की आ  गई परेशानी,
लू गरम , हवा की तूफानी | 

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर 


कवि परिचय : यह हैं विक्रम और यह बिहार के रहने वाले हैं इनके परिजन ईंट भट्ठों में कामकरते हैं और विक्रम अपना घर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा है जिससे की वह अपने परिवार की मदद कर सके और उनको एक मुकाम दिला सके | विक्रम को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है |  

कविता : मन्द मन्द हवाएँ बहती हैं,

" मन्द मन्द हवाएँ बहती हैं "

मन्द मन्द हवाएँ बहती हैं, 
इशारा से ये कुछ कहती है |  
उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है, 
पेड़ की पत्तियों से कुछ कहती है |  
जीवन की हर साँसों में रहती है,
फूलों की खुशबू को बढ़ाती हैं | 
खुशबू को चिड़ियों तक पहुँचाते है,
कभी कभी हँसती भी है हवाएँ |  
तो पता चलता नहीं है हमको,
ठण्डी ठण्डी हवाओं को छूकर | 
मन है अपना मचलता  | | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

  

कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और अपना घर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं | प्रांजुल हमेशा चाहते हैं की कुछ नया सीखे इसीलिए हमेशा कोशिश करते रहते हैं | प्रांजुल को गणित और विज्ञान विषय बहुत पसंद है |