गुरुवार, 22 अगस्त 2019

कविता : बूँदे भी कुछ कहना चाहती है

" बूँदे भी कुछ कहना चाहती है "

ये बूँदे भी कुछ कहना चाहती है,
कुछ बताना चाहती है |
और कुछ सुनना चाहती है,
जब मैं गिरूँ इस धरती पर,
तो मुझे एक सरोवर में बचा लेना |
या फिर तुम अपनी एक पात्र में,
मुझे थोड़ी सी जगह दे देना |
ऐसा बस लिए कुछ कर देना,
मेरे अस्तित्व को ख़त्म मत कर देना |

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता बिहार के निवासी नितीश के द्वारा लिखी गई है जो की कवितायेँ लिखने में महारथ हाशिल किए हुए हैं | नितीश को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और कवितायेँ लिखते भी हैं | नितीश पढ़लिखकर अपनी परिजन की सेवा करना चाहते हैं |

बुधवार, 21 अगस्त 2019

कविता : मेरे देश के शहीदों

" मेरे देश के शहीदों "

मेरे देश शहीदों ने,
करवाया हमें आज़ाद |  
दुश्मनों से लड़कर,
किया उनके परिवारों को बर्बाद |
हम लोगों को मिली है आज़ादी,
आज़ादी को मत करना बर्बादी |
चाहे मेरे शहीदों के सामने,
खड़ी कर दो सेना
लेकिन शहीदों के मरने के बाद
देश को अपने झुकने मत देना |
तभी मेरे इस देश का झंडा,
हर जगह में फहराया जाएगा |
मेरे देश को आज़ाद कराने में,
जिन्होंने दिया है बलिदान |
उन शहीदों को आज,
भी याद किया जाएगा |

कवि : महेश कुमार  कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता महेश के द्वारा लिखी गई है जो की कक्षा ५ के विद्यार्थी है | महेश को कवितायें लिखने का बहुत शौक है | कवितायेँ लिखने के साथ ही साथ खेल और चित्र बनाने में भी रूचि है | महेश एक बहुत ही अच्छा छात्र है |

मंगलवार, 20 अगस्त 2019

बाल सजग: कविता : मैं क्या बनूँ

बाल सजग: कविता : मैं क्या बनूँ: " मैं क्या बनूँ " मैं क्या बनूँ, इस सवाल ने सताया | मैं क्या करूँ, किसी ने नहीं बताया | फिर मैं परिवार वालों से पूछा,...

कविता : बूँद

" बूँद "

जब भी पानी बरसता है,
फिर बूँद जरूर बरसता है |  
बूँद -बून्द से ही खेती है,
जिसकी जरूरत हमको सदा होती है |
बूँद -बूँद से बना है यह संसार,
बिना बूँद नहीं होगी बड़ा पार |
बूँद चीज है जो कभी मर नहीं सकती,
बूँद के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती |
बूँद से ही जीते हैं संसार,
बूँद -बूँद से ही भरा है ये संसार |

कवि , मंगल कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता एक छोटे से कवि जिसकी कविता लिखने की नई शुरुआत हुई है और कविता ी शुरुआत एक बूँद कविता से की है | मंगल मध्य प्रदेश के निवासी है जो की कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं |  

सोमवार, 19 अगस्त 2019

कविता : बलिदान

" बलिदान "

बलिदान देकर अपनी जान,
दिया हमें स्वतन्त्र जहान | 
न भूलेंगे हम उनके प्राण,
जो दिया है हमको शान |
दिन - रात उन्होंने लड़ी लड़ाई,
तब जाकर हमें मिली रिहाई |
संघर्ष भरा था हर समय,
सोच में डूबा था हर नयन |
वीर हुए इस देश में बहुत सारे,
जिन्होंने दे दी जान वतन के हवाले |
स्वतन्त्र दिवस हमने मनाया,
श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद किया |  

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8TH , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी है | कुलदीप ने यह कविता उन शहीदों के लिए लिखी है जो देश को आज़ाद कराते कराते शहीद हो गए हैं | शहीदों को यद् करना हमारा कर्त्तव्य होना चाहिए | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है |  

रविवार, 18 अगस्त 2019

कविता : एक ख्वाईश

" एक ख्वाईश "

मेरी भी एक ख्वाईश है,
तुम चाहे इसे ज़िद समझो |
या फिर कोई अरमान समझो,
किसी का न था साथ |
मैं थी अकेली मासूम भोली और डरी,
हवा के खिलाफ थी |
बादल ने गरजते हुए दस्तक दी,
मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही न रहा |
फिर मैंने लम्बा सफर तय किया | |

कवि : राज कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर

शनिवार, 17 अगस्त 2019

कविता : बदला सा हूँ

" बदला सा हूँ "

मैं थोड़ा बदला सा हूँ,
पहले थोड़ा ठीक था |
पर मैं थोड़ा पतला हूँ,
क्योंकि मैं थोड़ा बदला हूँ |
मेरे भाषण में अंतर आया है,
सोच में गहरी छाया है |
जिम्मेदारी की अहसास तो है,
पर निभाने का समय नहीं है |
मैं बहुत बार गिर कर संभला हूँ,
क्योंकि मैं थोड़ा बदला सा हूँ |

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता देवराज के द्वारा लिखी गई है जो की बैहर के नवादा जिले के निवासी है | देवराज को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | देवराज को नई चीजों के बारे में जानकारी एकत्र करने में बहुत मज़ा आता है | देवराज पढ़ाई में बहुत अच्छा है | देवराज को कवितायेँ बहुत लिखते हैं |

शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

कविता : फूल बन जाऊँ

" फूल बन जाऊँ "

मन करता है फूल बन जाऊँ,
सुन्दर सी महक फैलाऊँ |
महान व्यक्तियों के लिए,
मैं सुन्दर सी माला बन जाऊँ |
एक घर के लिए मैं साया बन जाऊँ,
मैं उन लोगों के लिए सहारा बन जाऊँ |
क्यारियों और बगीचों के लिए,
सुन्दर सा सजावट जाऊँ |
मंदिर , मस्जिद दोनों के लिए के,
रंग बिरंगे फूल बन जाऊँ |
मन करता है फूल बन जाऊँ,
सुन्दर सी महक फैलाऊँ |

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सार्थक के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | सार्थक को क्रिकेट खेलना का बहुत शौक है | सार्थक पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं | साथक एक आर्मी बनना चाहते हैं | एक फूल बनने की कल्पना की है |

गुरुवार, 15 अगस्त 2019

कविता : चेहरे की मुस्कान

" चेहरे की मुस्कान "

चेहरे की मुस्कान,
यु ही बनाए रखना |
हर मंजिल मेंहर दिक्कत में,
यूँ ही बचाये रखना |
रुकावटें लाखों आए,
मगर तुम पीछे मत हटना |
मिल कर लड़ेंगें हम,
बस तुम यूँ ही मुस्कराते रहना |
चेहरे की मुस्कान,
यूँ ही बनाए रखना |

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | कुलदीप को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वह बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं | कुलदीप को डांस करना बहुत पसंद है |

बुधवार, 14 अगस्त 2019

कविता : मैं मुसाफिर

" मैं मुसाफिर "

कड़क धुप की गर्म हवाओं में,
चलता रहता हूँ मैं मुसाफिर |
न छाँव और न ही थकान, 
महसूस करता हूँ मैं आखिर |
उस लक्ष्य को मुझे पाना है,
बिना रुके लक्ष्य को है जाना |
चाहे हो जितनी बाधाएँ ,
हर मुसीबतों को तर जाएँ |
हर कदम को संभल कर रखना,
हर बाधाओं को परखना |
आखिर लक्ष्य तक जाना है,
यह संदेशा सभी को बताना है |

कवि : प्रांजुल कुमर , कक्षा : 10th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता प्रांजुल के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखे का बहुत शौक है और वह बहुत सी कवितायेँ भी लिख चुके हैं | पढ़ लिखकर एक अच्छे इंजीनियर बनना चाहते है |

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

कविता : सागर बन जाऊँ

" सागर बन जाऊँ "

मन करता है सागर बन जाऊँ,
सन्देश देने वाली लहरें बन जाऊँ |
ऐसे उठूँ कि गिर न सकूँ,
लोगों को जीना सिखाऊँ |
पानी की तरह रहना सिखाऊँ,
मैं उन सभी से यह बात कह पाऊँ |
मन करता है सागर बन जाऊँ,
सन्देश देने वाली लहरें बन जाऊँ |
काश सभी को सन्देश पसंद आए,
मेरी बातें लोगों के दिल को छू जाए |  
काश मैं एक संदेशा कहलाऊँ,
मन करता है सागर बन जाऊँ |

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं | समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कवितायेँ लिख भी चुके हैं | कवितायेँ लिखने के आलावा क्रिकेट खेलना और संगीत में भी बहुत रूचि है |