मंगलवार, 9 जुलाई 2019

कविता : कभी कुछ खाश

" कभी कुछ खाश "

मैं सोचता हूँ कभी कुछ खास,
जिस पर मुझे खुद है विश्वास |
मेरी बचपन से ये पढ़ने की प्यास,
बना देती है मुझे उदास |
मेरी ये जिंदगी और बड़नसबी,
कहीं कर दे न सपने चूर |
सपनों पर निखरना चाहता हूँ,
लेकिन परिस्थितियाँ निखरने ने देती |
कोशिश करता हूँ सपना हो खाश,
जिस पर मुझे खुद पर हो विश्वास |

नाम : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर


कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं और अपना घर संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | समीर को कवितायेँ लिखना बहुत पसंद हैं और अभी तक वह बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | समीर को क्रिकेट भी खेलना भी बहुत पसंद है |

सोमवार, 8 जुलाई 2019

कविता : बहती हवाएँ

" बहती हवाएँ "

चलती हवाएँ कुछ कह रहीं हैं,
मानो वह मंद मंद बह रहीं हैं |
फूल - पत्तों को छूकर,
बंजर जमीं को फूँककर |
वह सारी सौन्दर्य को बढ़ा रहीं हैं,
चलती हवाएँ कुछ कह रहीं हैं |
पसीने की बून्द को सुखाती है,
पूरे बदन में ठंडक पहुंचाती है,
कितना सफर करके आती है |
रूकती नहीं वह बहतीही जाती है | |

नाम : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर



कवि परिचय : यह हैं प्रांजुल जिन्होंने यह कविता लिखी है | प्रांजुल मूल रूप से छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और कानपूर के एक "अपना घर" संस्था में रहकर कक्षा 10 की पढ़ाई कर रहे हैं | प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वह कविता लिखते भी हैं |

रविवार, 7 जुलाई 2019

कविता : बारिस

" बारिस " 

रिमझिम - रिमझिम बारिस आई,
अपने संग काले बादल लाई |
लहराते हुए हवाओं में,
पेड़ों की बौछारों में |
ख़ुशी चहचाहट लाई,
खेतों में हरियाली लाई |
रिमझिम -रिमझिम सी बारिस आई,
अपने संग काले बादल लाई |
बूँदों के गिरने से हम,
भूल गए हम अपने सारे गम |
बूँदों ने खुशियां ही भर दी,
सब जगह को हरियाली कर दी |

कवि : सार्थक कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर


कवि परिचय : यह हैं सार्थक जिन्होंने यह कविता लिखी है जिसका शीर्षक है " बारिस " | सार्थक मूल रूप से बिहार के निवासी हैं | वर्तमान समय में अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | सार्थक को खेलना बहुत अच्छा लगता हैं | पढ़ लिखकर इंडियन आर्मी में जाना चाहते हैं |

शनिवार, 29 जून 2019

कविता : चिड़िया

 " चिड़िया "

चिड़िया जब उड़ना शुरू करती है,
तो वह उड़ ही जाती है |
चाहे हो पानी चाहे हो हवा,
वो सभी को पार करते जाती है |
गिरती है फिर भी उड़ती है,
गिर कर ही वह सीख पाती है |
आखिर वह मंजिल तक पहुँच ही जाती है,
तब वह अपने को चिड़िया कह पाती है |   
चिड़िया जब उड़ना शुरू करती है,
तो वह उड़ ही जाती है |

नाम : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर



कवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो प्रयागराज के निवासी है | समीर अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं |समीर को कवितायेँ लिखने का बहुत | समीर को खेलना बहुत अच्छा लगता है | समीर को कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है | समीर एक संगीतकार भी है |

शुक्रवार, 28 जून 2019

कविता : छोटा बन जाऊँ

" छोटा बन जाऊँ "

मन करता है छोटा बन जाऊँ,
माँ का प्यार दोबारा पाऊँ |
उंगली पकड़कर चलना सिखाती,
हर अनजान मोड़ पर राह दिखाती |
`हर गलती को मेरी बक्श दे,
जीवन में मुझे ढेरों प्यार दे |
ममता की साया में रहूँ ,
माँ से मैं दिल की बात कहूँ  |
बचपन बहुत ही कीमती होता है,
जिसको नसीब नहीं वह रोता है |
बचपन के दिन नादान होते हैं,
लेकिन बचपन के बाद खूब रोते हैं |
काश सभी को बचपन नसीब हो,
एक छोटा बच्चा माँ के करीब हो |
                                                                                                       
                                                                                                          नाम : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर



कवि परिचय : यह कविता द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वह ढेरों कवितायेँ लिख चुके हैं | समीर को प्रेरणा भरी कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है जिससे की लोगों को प्रेरणा मिले | समीर इसके अलावा संगीत भी लिखते हैं |



रविवार, 9 जून 2019

कविता : देश होता जा रहा है खोखला

" देश होता जा रहा है खोखला "

फैशन का चल रहा है जलवा,
देश होता जा रहा है खोखला |
तरह -तरह की नई चीजें आती,
ये सब बड़े बड़े को नाच नचाती |
फैशन का चल रहा है जलवा,
गन्दी चीजें कर रही है हमला |
इमारतों से भरती जा रही है दुनिया,
कब समझेंगे देश के बनिया |
पेड़ सब कटते गए,
ऑक्सीजन की मात्रा घटती गई |
फैशन का चल रहा है जलवा,
देश होता जा रहा है खोखला |

नाम : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के निवासी हैं | कुलदीप कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक वह बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | कुलदीप क्रिकेट बहुत अच्छा खेल लेते हैं | कुलदीप हर दिन कुछ न कुछ नया  करता रहता है और छोटे बच्चों को ज्ञान की बातें बताता रहता है |

गुरुवार, 6 जून 2019

कविता : बचपन

" बचपन "

जब मैं छोटा बच्चा था,
बचपन में मैं गोरा था |
बचपन में मैं शैतान था,
मम्मी गलती पर डाटती थी |
फिर भी वही काम करता था,
पापा मेरे लिए रसगुल्ला लाता था |
मिठाई मैं पेट भर के कहते था,
जब मैं छोटा बच्चा था |
बचपन में मैं मोटा था |
जो काम नहीं करना होता,
वह काम मैं करता था |  

नाम :मंगल कुमार , कक्षा : 3rd , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता अपना घर के सबसे नए छात्र मंगल ने लिखी है जो की मध्य प्रदेश निवासी हैं और अपना घर में रहकर कक्षा 3rd में पढ़ते हैं |
मंगल की यह पहली कविता है जिसको अपने ऊपर लिखा है | मंगल चाहते हैं की वह आगे और भी कविता लिखेंगे |

रविवार, 2 जून 2019

कविता : छोटी सी चिड़िया

 " छोटी सी चिड़िया "

छोटी सी चिड़िया है,
वह कुछ कहना चाहती है |
उसकी भाषा समझ में न आती है,
इसीलिए उदास होकर वह उड़ जाती है |
वह अपने दुःख को ले जाती है,
छोटी सी चिड़िया कुछ कह जाती है |
चिड़िया अपनी आवाज़ों से पुकारती है,
वह लोंगो को खुश कर जाती है |
छोटी चिड़िया कुछ कहना चाहती है,
ऐसा लगता है वह हमारे साथ रहना चाहती है |

कवि : सनी कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सनी के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी  हैं, और अपना घर संस्था में रहकर कक्षा ५ में पढ़ते हैं | सनी को कवितायें लिखना बहुत पसन्द है | सनी एक पुलिस ऑफिसर बनना चाहते हैं |  



शुक्रवार, 31 मई 2019

कविता : छुट्टी

" छुट्टी "

जब छुट्टी हुई स्कूल से,
खूब खेल रहे थे धूल से |
हो गई बड़ी भूल हम से,
मम्मी ने मना किया था खेलना धूल से |
जब छुट्टी हुई स्कूल से | |
पढ़ाई का कोई नाम नहीं,
करने को कोई काम नहीं |
बस खेलते रहते दोपहर से शाम,
यही था छुट्टी का इनाम |
नाम : सनी कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता सनी के द्वारा लिखी गई है बिहार के निवासी हैं | सनी कक्षा 5th का छात्र है जिसके अंदर कवितायेँ लिखने की रूचि है | सनी   बहुत ही हसमुख बालक है | सनी को लोगों को हँसाने बहुत मज़ा आती है |

गुरुवार, 30 मई 2019

कविता : गर्मी

गर्मी

गर्मी आई ,गर्मी आई,
संग में कड़ाके की धूप लाई |
गर्मी में धूप से पसीना आई,
गर्मी आई ,गर्मी आई |
गर्मी में फल भी आई,
गर्मी से ठण्डी भी भागी |
गर्मी में पैंट पहन लो भाई,
गर्मी से बचकर रहो मेरे भाई |
बर्फ ,कुल्फी और तरबूज खाओ,
इस कड़ाके की गर्मी का लुफ्त उठाओ |
नाम : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता नवलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | नवलेश बहुत ही हसमुख है और कवितायेँ लिखने में बहुत रूचि रखता है | नवलेश को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है और कविता लिखना भी  बहुत पसंद है |  नवलेश के माता - पिता ईंट भठ्ठों में ईंट पथाई का काम करते हैं |

बुधवार, 29 मई 2019

कविता : चन्दा मामा की बात

" चन्दा मामा की बात "

सो रहे थे जब छत पे हम,
गिन रहे थे तारे को |
तभी कुछ देर बाद आ गए,
चन्दा मां सुलाने को |
तारे बोले अभी तुम न सोना,
अभी करना है कुछ काम |
फैलो जग में इतना,
ताकि हो तुम्हारा नाम |

ये सब सुनकर गुस्से से बोला चन्दा मामा,
सो जा बालक |
नहीं तो भइया कराएंगे तुम से ड्रामा,
यह सुनकर हम ने बोला चुप हो जा मामा |
आज नहीं यह बात हमको कल बताना | |  

तारों की बात मान कर जगे रहे साडी रात,
और चंदा मामा से कभी नहीं करते बात |  
क्यों कहते थे,
सो जा बालक सारि रात |

नाम : कामता कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर

कवि परिचय : यह कविता कामता के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के नवासी हैं | कामता को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और बहुत सी कविता लिखते हैं | कामता को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है | पढ़लिखकर एक नेवी ऑफिसर बनना चाहतें हैं |