बुधवार, 5 जुलाई 2017

कविता :बाल गोपाला

 " बाल गोपाला "

लल्लन के लाल ,बाल गोपाला,
यशोदा का नटखट नंदलाला |
पूरे मथुरा में बजाता मुरली,
बंसी से आवाज़ निकलती सुरीली | 
मन को मोह लेने वाला,
मथुरा का था बाल गोपाल |
सुदामा संग चुराता मख्खन,
अद्भुद प्यारा था वो बचपन |
गौ चराता मुरली बजाता,
राधा संग प्रेम की बंसी बजाता |
गोपाला था तो बहुत कला,
फिर भी था एक सच्चा दिलवाला |
कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 8th ,अपनाघर 

कवि का परिचय : छत्तीसगढ़ के रहने वाले ये हैं  प्रांजुल | अपनाघर का सदस्य है | इनको कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | अपनी हर एक कविता को मन से लिखते है | खेलने का भी शौक है | इनके परिवार वाले मजदूरी का कार्य करते है | अपनाघर में रह कर ये अपनी शिक्षा को और भी मजबूत बना रहे है | हमें उम्मीद है कि इनकी कविता जरूर सबको पसंद आएगी | 


मंगलवार, 4 जुलाई 2017

"रिमझिम करती बारिश आयी "

रिमझिम करती बारिश आयी ,
कही कही बादल गिरते 
तो कही बम के गोले गिरते ,
ऐसी बारिश में नहाने को बहुत मन 
करता 
कभी कभी मन करता की समुन्दर पर 
तैरु ,
बारिश में खाने का  ,टीवी देखने 
का दिलचस्प रहता मन ,
प्यासी रहती भी बृष और बगीचे 
इनकी प्यास बुझाने बारिश आयी 

                     नाम =राज ,कक्षा =८ 
                        अपना घर 

सोमवार, 3 जुलाई 2017

"गर्मी आती है हर साल "

गर्मी आती है साल
करती है सबको बेहाल
प्रचंड गर्मी और लू का कहर बरपाते
दिन दोपहर में निकलने से  घबराते
तापमान गिरने का नाम न लेता
औसत से अधिक तापमान है जाता
मौसम है नहीं अनुकूल
बाहर निकलने न करना भूल
कोई न लेता नहीं हाल चाल
गर्मी आती है हर साल
करती है  सबको करती बेहाल


         नाम =अखिलेश , class 7th
              अपना घर 

शुक्रवार, 30 जून 2017

"बोझ न बनो दूसरो के सर में "

बोझ न बनो दूसरो के सर में 
ऐसी ख्वाइस है उनकी 
दूसरों की बात भी मनो 
अमल भी करो 
न की किसी दबग करो 
निर्भर रहो अपने आप 
ऐसा करो तुम काम 
कि खास रहो दूसरो के माथे में 
बोझ बनो सिर्फ अपने आप में 
और कुझ करने की ख्वाइस 
रखो अपने ताप में 
दृढ शक्ति से कदम बढ़ा 
"फिर क्या "
मजिल आएगी अपने आप 
से। .. 

                     राज 
                        अपना घर 

गुरुवार, 29 जून 2017

"अनजान  सा .. "


अनजान सा मैं आया था ,
विदवान सा बन गया | 
दुनिया भर की बातें ,
मुझे में भर गया | 
गलत और सही सही को मैं समझा ,
अमीरी गरीबी को मैं परखा | 
मैं घर और दवार समझा, 
मैं भूमि और भूमिका समझा | 
हमारा क्या है तुम्हारा क्या ,
उनको भी मैं समझा लेकिन 
किसी ने | 
माँ की ममता को , 
पिता की पसीने की | 
कीमत नहीं समझा ,

          नाम =देवा ,class 8th ,अपना घर 

जिंदगी एक शब्द नहीं जो

"जिंदगी एक शब्द नहीं जो "

जिंदगी एक शब्द नहीं जो ,
जो चाहे भुला नहीं सकता | 
तेरी मुस्कान में हजारों खुश होते है ,
गरीबों की  जिंदगी बनाते है | 
काश ;मैं भगवान होता ,
जब चाहे इंसान बना लेता | 
मेरी एक सहायता से ,
हजारों को अच्छा बनाता | 
जिंदगी में खुश हजारों लोग होंगे ,
दुःखी  में अकेले होंगे। ...... 



                                                            नाम   -  सार्थक कुमार               
                                                 कक्षा  -    ,अपना घर       

बुधवार, 28 जून 2017

कविता

गर्मियों की छुट्टियों का ख़त्म हुआ जमाना,
सब कुछ भूलकर अब स्कूल है जाना | 
बच्चे करते पढाई आधा, 
पढ़ते कम खेलते है ज्यादा|  
दिन भर मस्ती मन में गस्ती, 
गुस्से में लड़ाई बाद में दोस्ती | 
पढ़ो लिखो खेलो औरखाओ
दिन भर पढ़ो और मौज उड़ाओ | 
क्या कहे अब ये नादान 
इन्हीं को बनना है महान | 

अपना घर 
हॉस्टल 
               

 " पेड़ " 

शाम ,सुबह यह छाया देता,
रात में ये कभी - कभी सोता |  
सूंदर - सूंदर ये फूल देता, 
रस भर -भरकर फल देता | 
फूल को सूंघने में आनंद आता,
जड़ तो अंदर में छिप जाता |  
तना रात दिन खड़ा रहता,
पूरा पेड़ दूप को सहता | 
सुबह-सुबह जब पानी मिलता, 
पूरा दिन खुसी से रहता | 
शाम सुबह यह छाया देता, 
सारी रात खूब सोता | 
नाम : अवधेश कुमार ,कक्षा : 4th , अपनाघर 

मंगलवार, 27 जून 2017

 " कोई कुछ कह रहा है "

कोई कुछ कह रहा है, 
ये हवाएं जो बह रही हैं | 
उड़ती चिड़ियाँ कुछ कह रही हैं, 
छाय बदल भी कुछ कह रहे हैं | 
रात को जुगनू कुछ कह रहा है, 
नीला आसमान कुछ कह रहा है | 
अब ये तारे ,ये जमीं ,ये पौधे, 
ये पूरी दुनियां यही कह रही है | 
हवा और नदियां बह रही हैं, 
क्यों आवाज जहर बन रही है | 
वो पवित्र नदी नाला बन कर, 
क्यों जहर  बनकर बह रही है |
जिंदगी क्यों नरक बन रही है,
रोक लो यारों ये हर कोई कह रहा है  | |

नाम : देवराज कुमार ,कक्षा : 7th ,अपनाघर। 


कवि परिचय -: यह बिहार के रहने वाले देवराज हैं | इन्होंने एक से एक बढ़कर कविताऍं लिखी हैं | अबतक इन्होनें लगभग ५० -६० कविताऍं लिख चुके हैं | इनको डांस करना बेहद पसंद है | क्रिकेट में छक्के बहुत मारते हैं | हर वक्त कुछ नया सिखने को चाहते है | ये कक्षा सात में पढ़ते है |  अपना घर परिसर में रहकर अपनी शिक्षा को मजबूत बना रहे हैं | इनके माता - पिता ईंट भठ्ठे में बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रहे हैं | ये बड़े होकर एक नेक इंसान तथा एक अच्छे खेल के खिलाड़ी बनना चाहते हैं | 

सोमवार, 26 जून 2017

"आशाओं का सूरज निकल रहा हैं  "

आशाओं का सूरज निकल रहा है ,
कामयाबी रास्ते खुल रहें है | 
मंजिल तो  हमारी हो नहीं सकती दूर ,
क्योंकि हमारी सोच बदल रही है | 

हमारी रफ़्तार बदल रहे है ,
हवाओ के जैसे हम चल रहे है | 
अब जल्द ही बदलेगा जहा ,
क्योकि हम बदल रहे है | 
हर बच्चो की ज्ञान देना ,
ये तो माँ -बाप का धर्म बन चुका है | 
उनके जिंदगी  को सवारना ,
ये तो कर्म बन चुका है | 


      नाम =देवा ,class 7th
        अपना घर 

रविवार, 25 जून 2017

कविता :मजबूरी

"मजबूरी " 
दलितों को जिंदगी जीना है मजबूरी,
समाज उनके लिए क्या कर रही 
यह बात पता नहीं किसी को पूरी |  
आर्थिक संकटों की वजह से, 
आ रही बड़ी -बड़ी रुकावटें |  
जिससे जिंदगी के हर राह पर,
खेल  रही मौत की आहट ,
जिंदगी से लड़ लड़कर क्या है जीना,
यह बहादुरी की बात नहीं|  
अपने अधिकार को लड़कर लेना,
शाबाशी की ताज तेरे सर पर सही | 
नाम : विक्रम ,कक्षा : 7th ,अपनाघर  

कवि  परिचय : इनका नाम विक्रम है | ये कविताओं को नरम हाथों से लिखकर उसमें जान फूक देते है | इनको रेस करना बहुत  पसंद है | शांत स्वभाव के विक्रम कुमार हमेशा अपने चेहरे में ख़ुशी रखना पसंद करते है | हमेशा नई  जानकारी को पाने की कोशिश करते रहते है |  इनको एक्टिंग करना पसंद है | 


कविता : "आशा है मुझे बारिश होगी "

"आशा है मुझे बारिश होगी " 

आशा है मुझे बारिश होगी ,
आशा है मुझे कुछ नया होगा  | 
देखने में लगता है कुछ खास ,
काश बादल रुक जाये आज  | 
मेरे आसपास के इस वातावरण,
में हो जाये झमाझम बरसात | 
बारिश के बूँदें को  देखू ,
  बारिश को महसूस  करूँ| 
 उछल कूदकर मैं खूब नहाऊँ  ,
अपने सपने को  खुद सजाऊँ | 
 नाम : राज कुमार , कक्षा : 8th , अपनाघर 

कवि का परिचय: राज   "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये हमीरपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 8 th  के छात्र है। राज को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।

             
"दिन का तू ख्याल न कर "
दिन का तू ख्याल न कर
सुबह भी होगी शाम भी होगी
वही धूप होगी वही छाव होगी
सूर्य चन्द्रमा के प्रकाश को बस
फेरन होगा

सोमवार, 15 मई 2017

कविता : चाह है दुनियां घूमूं

 "चाह है दुनियां घूमूं "

चाह है मेरी दुनियां घूमूं ,
 हर जगह मस्ती में झूमूँ | 
देखूं मैं नई किरणों का शहर, 
जहाँ न हो दुश्मनों का कहर | 
पद यात्रा से हवाई यात्रा करूँ,
आसमान में जाकर साँसें भरूँ |  
जहाँ - जहाँ भी जाऊँ मैं,
सारे संस्कृति को अपनाऊं मैं | 
ठंडी गर्मी और झेलूं बरसाते, 
घूमूं दिनभर और सारी रातें | 
जहां भी जाऊँ ख़ुशी से झूमूँगा, 
जिंदगी एक है खुल के जीऊंगा | 

कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 8th ,अपनाघर

कवि का परिचय : छत्तीसगढ़ के रहने वाले ये हैं  प्रांजुल | अपनाघर का सदस्य है | इनको कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है | अपनी हर एक कविता को मन से लिखते है | खेलने का भी शौक है | इनके परिवार वाले मजदूरी का कार्य करते है | अपनाघर में रह कर ये अपनी शिक्षा को और भी मजबूत बना रहे है | हमें उम्मीद है कि इनकी कविता जरूर सबको पसंद आएगी | 

" जिंदगी " 

जिंदगी मिली है तो क्यों न जिऊँ, 
कल के दिन में आसमान को छुऊँ |  
अच्छा इंसान बनने के लिए जिंदगी को चुनूं , 
आसमान के रास्ते में पैदल ही चलूँ | 
औरों को ये बात बताऊँ,
सारे समाज को सुनाऊँ | 
जिंदगी मिली है तो क्यों न अच्छे से जिऊँ | 

कवि : ओमप्रकाश कुमार , कक्षा : 6th , अपनाघर हॉस्टल 
 " राही " 

वो राही अब तू क्या,
पथ अपना खो गया  | 
या फिर तू हार कर,
कही अँधेरे में सो गया |  
वो राही अब तू  क्या,
 पथ अपना खो गया | 
मत छोड़ तू अपना लक्ष्य,
 चलते रहना लगातार तुम बस |  
वो अब सुहाना दिन गया,
वो रही तू क्या पथ अपना खो गया | 

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर 

कवि परिचय :  बिहार के रहने वाले देवराज | आजकल कविताओं के बादशाह माने जाते है | ये हमेशा कुछ नई सोच  के साथ अपनी कविताओं  को ख़ूबसूरत बनाते है | ये क्रिकेट खेल में भी माहिर है|  ए बी डिविलियर्स इनके बेस्ट खिलाडी है | इनको   डांस करना बेहद पसंद है | उम्मीद है की ये हमेशा नई सोच के साथ अपनी कविता को लिखेगें | 

रविवार, 14 मई 2017

कविता : फूल


 "फूल"

            सुन्दर -सुन्दर फूल जीना सिखाती है ,
         हर मुश्किलों से लड़ना सिखाती है /
चाहे बाधाएं हो कितनी 
उन बाधाओं से लड़ना  सिखाती है /
काँटों में खिलती है और 
हर जगह महकाती है /
    कुछ -कुछ हमसे कहती है फूल ,
    याद रखना मुझको  जाना भूल /

कवि : देवराज कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर 


कवि परिचय :  बिहार के रहने वाले देवराज | आजकल कविताओं के बादशाह माने जाते है | ये हमेशा कुछ नई सोच  के साथ अपनी कविताओं  को ख़ूबसूरत बनाते है | ये क्रिकेट खेल में भी माहिर है|  ए बी डिविलियर्स इनके बेस्ट खिलाडी है | इनको डांस करना बेहद पसंद है | उम्मीद है की ये हमेशा नई सोच के साथ अपनी कविता को लिखेगें | 

कविता :स्कूल

 " स्कूल "  

स्कूल का दिन आया,
पढ़ने का मौका लाया | 
कॉपी ले जाते है हम ,
बुक से पढ़कर आते हम | 
दिनभर रहते स्कूल में,
 मैडम आती है देर में | 
 बच्चे चिल्लाते रहते हैं,
मॉनिटर शांत करते थक जाते हैं | 
कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा 6th , अपनाघर 

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार | ये छतीसगसढ़  राज्य के प्रवासी मजदूर का बेटा है | अपनी पढाई पूरी करने के लिए अपना घर हॉस्टल में रहते है | इनको कविता लिखने का बहुत शौक है| कक्षा 6 th के छात्र हैं | कुलदीप  क्रिकेट के दीवाने है | विराट कोहली के फैन है | कुलदीप को डांस करना बहुत पसंद है| हमें उम्मीद है कि आपको कुलदीप  की रचनाएँ पसंद आएँगी

शनिवार, 13 मई 2017

कविता : बच्चे

 " बच्चे " 

बच्चे ही जाने ममता का प्यार,
बच्चे ही जाने मां का संसार | 
हर पल मां रखती हैं ध्यान,
 बच्चे ही समझे मां हैं भगवान|  
बच्चें है भविष्य यहाँ के, 
बच्चे सजायगें भविष्य यहाँ पे| 
 बच्चों की कोई बात नहीं ,
 खेलते और शरारत करतें 
 यही उनकी आदत है बनती | 

कवि : नितीश कुमार ,कक्षा : 7th ,अपनाघर 

कवि परिचय : यह हैं नितीश कुमार | ये बिहार राज्य के प्रवासी मजदूर का बेटा है | अपनी पढाई पूरी करने के लिए अपना घर हॉस्टल में रहते है | इनको कविता लिखने का बहुत शौक है|  कक्षा 7th के छात्र हैं | नितीश फूटबाल के दीवाने है | लिओन मेसी  के फैन है | नितीश को डांस करना बहुत पसंद है| हमें उम्मीद है कि आपको नितीश  की रचनाएँ पसंंद आएँगी 

कविता : अगर मैं होता साधू

"अगर मैं होता साधू " 

अगर होता मैं कोई साधू ,
दिखा देता दुनियां को जादू |
कर लेता प्रदूषण पर काबू ,
मिटा देता प्रदूषण का जादू |
साधुओं जैसा काम मैं करता,
सच्चा जादू की तरह मैं बनता |
नाम कमाता इस दुनियां में,
भर देता कुछ फल झोलिओं में |
जादू का सीख होता है निराला,
सुन लो बच्चो से प्यारा -प्यारा |
बाँट देता बच्चों को जादू ,
अगर मैं होता कोई जादू ,
कर देता प्रदूषण पर काबू |

कवि : समीर कुमार ,कक्षा : 7th ,अपनाघर 

कवि परिचय :  समीर अपनाघर के सदस्य है |  यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 7th के छात्र है। समीर को गीत गाना और लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है, विराट कोहली इनके आदर्श है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी

गुरुवार, 11 मई 2017

कविता : सुन्दर संसार हमारा

"सुन्दर संसार हमारा "

सुन्दर सा संसार  हमारा,
जिस पर बसा है दुनियां सारा | 
ढूंढ आये और जग सारा,
पर नहीं मिला  पृथ्वी जैसा  सहारा | 
हो जाती एक तरफ की रात,
जब -जब पृथ्वी घूमती बार -बार | 
पृथ्वी बनी खुली आसमान में,
तारे दिखते हर रात में | 
पृथ्वी दिखती नीला और हरा, 
क्योंकि इस पर है पानी भरा | 

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर हॉस्टल 


कवि परिचय : यह हैं नितीश कुमार | ये बिहार राज्य के प्रवासी मजदूर का बेटा है | अपनी पढाई पूरी करने के लिए अपना घर हॉस्टल में रहते है | इनको कविता लिखने का बहुत शौक है|  कक्षा 7th के छात्र हैं | नितीश फूटबाल के दीवाने है | लिओन मेसी  के फैन है | नितीश को डांस करना बहुत पसंद है| हमें उम्मीद है कि आपको नितीश  की रचनाएँ पसंद आएँगी 

बुधवार, 10 मई 2017

कविता: पृथ्वी का सहारा

"पृथ्वी का सहारा"

सुन्दर सा संसार हमारा,
लगता है सबसे प्यारा | 
इसको बचा कर  रखना यारा, 
यही मनोकामना है हमारा |  
पानी में भी ढूँढा यारा,
फिर भी न मिला सहारा | 
ढूंढ डाला हमने जग सारा,
फिर मिला पृथ्वी का सहारा |  
ढूंढना बंद हुआ तब हमारा,
जब मिल गया पृथ्वी का सहारा |   

कवि : समीर कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर 


कवि परिचय : इस कवि का नाम  समीर  है | मन से बिलकुल चंचल और दिल से बिलकुल साफ किस्म के इंसान है | इनको गाना  गाने का बहुत शौक है और अपने गाने को अपने अंदाज़ में लिखते है | क्रिकेट के बहुत बड़े प्रेमी  है |  ये गाना  बहुत अच्छा गाते हैं | इलहाबाद के रहने वाले समीर अपनी पढ़ाई अपनाघर में रह शिक्षा ग्रहण कर रहे है | इनके माता पिता ईंट भठ्ठे में ईंट निकलने का काम करते है | हमें उम्मीद है की अपनी कविताओं के जरिये हम सभी को प्रेरित करते रहेंगे | 
 "DRIZZLING LIGHT "
A drizzling light knock my door,
when I lies on the floor.
Entire room fullfil with light,
The whole life like problem fight.
It brings immortial light,
Make us way with light.
marvelous idea on my mind,
Each and  every of  kind.
Future life with so much light,
darkness becomes bright ,
At once we would catch the light ..........
                      Name : Pranjul kumar , class :8th ,Apnaghar hostel 


poet introduction : He is pranjul and he belongs to chhatisgarh.His parents work in construction site his family background is very poor .He is getting education from Apnaghar assossiation .Pranjul interest in dance , play the cricket Biology,physics and mathematics .His favorite batsman is Virat Kohli .Always smile in his face .We hope that he will write new poems with new inspirations in his future.
                   

मंगलवार, 9 मई 2017

कविता :कोशिश


"कोशिश "

अपने मंजिल को पाने के लिए,
हर तरह की होती है कोशिश | 
रास्ते  चलते -चलते गिर जाओ,
उठकर भी चल न पाओ | 
फिर भी मंजिल को पाने की,
हर तरह की होती है कोशिश | 
जिंदगी में एक सही स्थान पर,
जाना होता है जरूरी | 
 तभी तो समाज में कहेंगे ,
कोशिश होती है जरूरी | 
कवि : विक्रम कुमार ,कक्षा ; 7th  अपनाघर हॉस्टल 


कवि  परिचय : इनका नाम विक्रम है | ये कविताओं को नरम हाथों से लिखकर उसमें जान फूक देते है | इनको रेस करना बहुत  पसंद है | शांत स्वभाव के विक्रम कुमार हमेशा अपने चेहरे में ख़ुशी रखना पसंद करते है | हमेशा नई  जानकारी को पाने की कोशिश करते रहते है |  इनको एक्टिंग करना पसंद है | 
"ख़ुशी "

हम तो रौशनी के परिंदे है,
अँधेरे से डरते कहाँ | 
हम मिलते है जिस जगह पर,
खुशियां रहती हैं जहाँ | 
मुश्किलें आएं पर मुस्कराहट
 से लकीर नहीं हटती,
मुस्कराहट रहती है जहाँ पर | 
रौशनी ही है बसती,
चाहे हम हो या तुम हो,
सबके लिए है ये ख़ुशी सस्ती | 
देखो भाई हँसते रहो,
क्योंकि जो खुश रहते है,
वही खुशियां ही है रहती | 
कवि : देवराज ,कक्षा : 7th , अपनाघर हॉस्टल 



कवि परिचय :  बिहार के रहने वाले देवराज | आजकल कविताओं के बादशाह माने जाते है | ये हमेशा कुछ नई सोच  के साथ अपनी कविताओं  को ख़ूबसूरत बनाते है | ये क्रिकेट खेल में भी माहिर है|  ए बी डिविलियर्स इनके बेस्ट खिलाडी है | इनको डांस करना बेहद पसंद है | उम्मीद है की ये हमेशा नई सोच के साथ अपनी कविता को लिखेगें | 

रविवार, 7 मई 2017

कवि :मत कर



"मत कर "
ये तो तू मत कर ,
वह तू मत कर | 
 तुझको न रोकेगा वह कि ,
तू प्रकृति से खिलवाड़ | 
हसकर  मत  कर ,
अगर तू  न समझ सका | 
तो रह -रह कर ,
बरसेगा कहर जब उसका | 
तब तुम्हे रहना होगा ,
उस आँचल में | 
बस सहना होगा तुमको मर- मरकर ,
तेज धूप होगी तेज बारिस होगी | 
तेरी वह कहर भरी ,
आवाज से | 
बादल की हॅसने की बारी होगी ,
ये तू मत कर | 
वह तू मत कर ,
प्रकृति से तू खिलवाड़ न कर  | 

                                                                                कविः राज , कक्षा : 8 th  अपना घर 


कवि का परिचय: राज   "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये हमीरपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 8 th  के छात्र है। राज को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।                             


शनिवार, 6 मई 2017

कविता : डर

"डर" 

दुनियाँ से परे लोगों से डरे,
रहता हूँ मैं पैरों पे खड़े | 
डर कर जीना मैंने तो सीखा,
पर वही था सबसे बुरा तरीका |   
लोग कहते है की खुल कर जीना चाहिए,
पर कोई नहीं बताता  कब जीना चाहिए | 
जो डरके जी रहे हैं,
वो लोग नहीं बुरे हैं | 
दुनियां से परे लोगों से डरे,
रहता हूँ मैं पैरों पे खड़े | 

कवि :देवराज , कक्षा : 7th अपनाघर 

कवि परिचय : यह हैं देवराज कुमार | ये बिहार राज्य के प्रवासी मजदूर का बेटा है | अपनी पढाई पूरी करने के लिए अपना घर हॉस्टल में रहते है | इनको कविता लिखने का बहुत शौक है | इन्होने अभी तक बहुत सी अचरज भरी कवितायेँ लिख चुके हैं | कक्षा 7th के छात्र हैं | देवराज क्रिकेट के दीवाने है | विराट कोहली के फैन है | देवरज को डांस करना बहुत पसंद है| हमें उम्मीद है कि आपको देवराज की रचनाएँ पसंद आएँगी 

रविवार, 16 अप्रैल 2017

कविता : हिंदी


हिंदी 

       हिंदी दिवस पर अरमान लगाए रखना,
हिंदी में बिंदी लगाकर,
इसकी पहचान बनाए रखना | 
इस संसार में भाषाएँ है अनेक, 
उनमें से हिंदी भाषा है एक  | 
रंग लाएगी एक शब्द बोलकर देखो 
न होगी कोई कठिनाई,
बाजार में बाल काट रहा होगा नाइ | 
नहीं आएगी तो चिल्लाओगे माई -माई,
क्योंकि लगा दिया है हमने|

                                                                                                कवि :अखिलेश कुमार , कक्षा : 7th ,अपनाघर



                                                                                            

वि का परिचय: अखिलेश   "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये  बिहारके रहने वाले है। इनका परिवार ईंट भठ्ठे में पथाई  का कार्य करते है. अखिलेश  यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा ७ के छात्र है।  अखिलेश  को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है,  अखिलेश  को खेलना बहुत पसंद है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएग

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

कविता: मुश्किलें

"मुश्किलें"

मुश्किलें  की आहत आई ,
ओठों में उदासी  सी छाई | 
वो फूल  का खिलना ,
वो तेज हवा का चलना | 
उससे डटकर खड़े रहना ,
पंखुडिया जैसे न छेड़ना |   
इसे कहते है जिंदगी की पहले पाँव का चढ़ना | 
वो चन्द्रमा की प्रकाश की तरह बौछार करना |  
अँधेरी सी मुश्किलों में प्रकाश को भरना | 
कभी न किसी मुशिकलों से डरना , 
यही है मेरी चाहत आगे को ही है बढ़ना  |

कवि: राज , कक्षा 8th, कानपुर



कवि का परिचय: राज   "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये हमीरपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 8 th  के छात्र है। राज को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।                             

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

कविता :खुशियाँ फिर आएंगी

खुशियाँ फिर आएंगी 

अपने घर भी खुशियां आएगी,
अपने घर भी रंग छाएगी | 
बस धैर्यता को साथ चाहिए ,
हर वो ख्वाब पूरे होंगें | 
हम खुशियों के रंग में झूमेंगें,
बस थोड़ा सा विश्वास  चाहिए,
एक दोस्त का साथ चाहिए | 
   अपने सपनों को सच कर  पायेंगें,
हम नई दुनियाँ बनायेंगें,
 फिर उसको दिल से सजायेंगे  | 
वो खुशियां फिर से आएंगी, 
अपने घर रंग छाएंगी | 
कवि देवराज कुमार ,कक्षा 7th अपना घर 


कवि का परिचय: देवराज "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये बिहार के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. देवराज यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 7th  के छात्र है। देवराज को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है, विराट कोहली इनके पसंद खिलाड़ी  है। देवराज को डांस करना बहुत पसंद है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।

मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

कविता :होली

" होली  "

रंग भरी पिचकारी लाई,
होली आई होली आई । 
रंग भरे इस त्यौहार में,
रंगों की बौछार में । 
भीगे है अपने बदन ,
होली में है  सब मगन । 
अबीर गुलाल और चली पिचकारी,
रंगों की गोलिया है भारी । 
छुप  छुप  कर तुम रह जाओगे,
रंगों से कैसे बच पाओगे ।  
पूरा शरीर  रंग रंगीला,  
हरा , लाल और पीला  । 
ख़ुशी भरी आहार में , 
रंगों की बौछार में  । 
कवि : प्रांजुल  कक्षा :7th  अपना घर 


कवि का परिचय: प्रांजुल  "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये छत्तीसगढ़  के रहने वाले है। इनका परिवार निर्माण कार्य  में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. प्रांजुल  यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा ७ के छात्र है।  प्रांजुल को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है,  प्रांजुल को खेलना बहुत पसंद है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।

सोमवार, 3 अप्रैल 2017

कविता: साल


  "  साल  "

बीत गया साल पता न चला यार,
आके गई ऐसे जैसे कोई बयार ।
हर चीज को सँभालने में,
खुद को इस कदर ढालने में ।
किस बात की जीत या हार,
बीत  गया साल पता न चला यार  । 
क्या हुआ समझ न आया,
समय पल भर में कैसे गुजर गया ।
सबसे मुख मोड़ गया,
बीता हुआ कल छोड़ गया ।
किसी को ख़ुशी, किसी को प्यार,
बीत गया साल पता न चला यार ।

कवि:  देवराज,  कक्षा  7th, अपना घर

कवि का परिचय: देवराज "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये बिहार के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. देवराज यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 6th के छात्र है। देवराज को कवितायेँ लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है, ए वी डिविलयर्स इनके आदर्श है। देवराज को डांस करना बहुत पसंद है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।


सोमवार, 20 मार्च 2017

कविता: होली


"होली"

होली आई होली आई ,
रंगों की बरसात लाई |
तरह तरह के रंग लाई,
होली के रंग मुझको भाई |
पिचकारी से जब निकली होली,
ऐसा लगा बन्दूक से निकली गोली |
सुबह भूलो ,शाम को भूलो,
पर होली में रंग लगाना न भूलो |

बाल कवि: अजय कुमार,  कक्षा 2nd, कानपुर

 

अजय (Ajay) "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये बिहार के नवादा जिले के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. अजय यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 2nd के छात्र है। अजय को कविता लिखने में बहुत रूचि नहीं है, पर कभी-कभी लिख देते है। भारतीय क्रिकेट टीम के बहुत बड़े फैन है| अजय को हँसना बहुत पसंद है, इसलिए इनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है. उम्मीद है कि आपको इनकी होली पर लिखी कविता पसंद आएगी | 

शनिवार, 11 मार्च 2017

कविता: होली


"होली"

होली आया होली आया,
साथ में रंगों की गोली लाया |
दुश्मनी भूल हाथ मिलाया,
दुश्मनी को दूर भगाया |
जिन्दगी में खुशियाँ लाया,
दोस्तों को जलवा दिखाया|
अबीर लगा गले मिलाया,
रंगों के साथ खुद को भिगोया|
होली आया होली आया,
सबके दिल को बहलाया|

कवि: कामता, कक्षा 5th, कानपुर


कामता (KAMTA) "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये बिहार के नवादा जिले के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. कामता यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 5th के छात्र है। कामता को कविता लिखने में बहुत रूचि नहीं है, पर कभी-कभी लिख देते है। भारतीय क्रिकेट टीम के बहुत बड़े फैन है | किताबें से बहुत दोस्ती है उनके बीच रहना अच्छा लगता है. हमें उम्मीद है कि आपको इनकी होली पर लिखी कविता पसंद आएगी | 

गुरुवार, 9 मार्च 2017

कविता: मैंने देखा एक सपना


"मैंने देखा एक सपना"

जन्नत जैसा घर है अपना,
मैंने देखा रात को सपना |
सपने में एक चिड़िया आई, 
उसने बोला सुन मेरे भाई |
तोता आम है मीठा खाता ,
मुझको है बहुत ललचाता |
तब तक तोता उड़ कर आया ,
अपने साथ वो आम भी लाया |
तोते ने फिर मुझसे कहा ,
मै कभी न चुपचाप रहा  |
हरे रंग का है मेरा बाल ,
चोच मेरी है मिर्च सी लाल |
आओ आम मिलकर खाए ,
दोस्ती के हम गीत गाएँ|

                                                    कवि: समीर कुमार, कक्षा 6th, कानपुर


समीर कुमार (Sameer) "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये उत्तर प्रदेश के इलहाबाद  के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. समीर यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 6th के छात्र है। समीर को गीत गाना और लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है, विराट कोहली इनके आदर्श है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।