शनिवार, 25 नवंबर 2017

कविता: ठंडी का मौसम आया

 " ठंडी का मौसम आया "

ठंडी का मौसम आया है  
उनींदार कपड़ें है लाया है | 
बिना स्वेटर लगती है ठंडी, 
पहनो टोपी पूरी ठंडी | 
ठिठुर रहे हैं हाथ हमारे, 
चलो बैठते हैं आग के किनारे | 
कोहरा भी होता है इस दिन,
देख कर चलो भईया नहीं तो 
भिड़ोगे  किसी दिन | | 

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 6th , अपनाघर 


कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | अपनाघर में रहकर पिछले तीन सालों  से पढ़ाई कर रहे हैं | कवितायेँ बहुत अच्छी लिख लेते हैं तथा डांस भी बहुत अच्छा कर लेते हैं | हमेशा मुस्कुराते रहते हैं | 

5 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 26 नवम्बर 2017 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Purushottam kumar Sinha ने कहा…

ढेरो आशीष। कल्पना के इस उड़ान को और पंख लगने दो।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर

Nitu Thakur ने कहा…

बहुत शानदार
बधाई और शुभकामनाये

Sudha Devrani ने कहा…

बहुत सुन्दर
शुभाशीष..