मंगलवार, 7 नवंबर 2017

कविता: तितली के सुनहरे पंख

" तितली के सुनहरे पंख " 

 तितली के सुनहरे पंख,
देखकर मन बहल जाए | 
छुओ तितली के कोमल पंखों को ,
तो टिम -टिमाते हुए उड़ जाए | 
सुनहरे से मौसम के पल में,
तितली की रंगों की रौशनी | 
उनके सुंदर पंखों से निकलती है,
पंखो में कुछ जादू है जिससे | 
जुगनू के रंग जैसे बदलती है,
बाग - बगीचों में तितली  रंग | 
सुनहरे से तारे टिमटिमाते हैं,
थोड़ी सी किरण तितली पर पड़ती है | 
कोमल से पंख टिमटिमाकर बताती है,
पंख हिलाकर पास चली आती है | 
तितली के सुनहरे रंग संसार में बिखर जाए 
फिर से नई एक दुनियाँ बन जाए | 

कवि : सनी कुमार , कक्षा : 6TH ,अपनाघर

कवि खेल में बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं |  परिचय : यह है सनी जो की बिहार के नवादा जिले से आकर अपनाघर में अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे है | ये चाहते है की मैं अपने घर की लाइफ स्टाइल बदलूँगा | जिससे की मेरा परिवार और खुशहाल व खुश होकर जिए | 



1 टिप्पणी:

Meena Sharma ने कहा…

बहुत सुंदर शब्दावली ।