गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

वो मज़दूर है और खुद

 कविता 

वो मज़दूर है और खुद 

के कमाए पैसों पर जीते है 

धुप में तपते है पर काम 

से पीछे नहीं हटते है 

कष्ट तो होता है उनकों भी बहुत 

पर मन से वह उड़ते है 

बारिश में भी लगते है और 

ठण्ड में हवाएं में भी जुटते है कष्ट तो होता है उनको भी बहुत 

पर मन से उठते नहीं है 

खुद की लड़ाई खुद ही लड़ते है 

इंसाफ जहा मिलना चाहिए 

उसके लिए भी भिड़ते है 

कामयी तो अक्सर नहीं मिलती 

पर खुलकर जीते है 

कसगत तो होता है उनको भी 

पर मन से उतट नहीं है 

नाम- गोविंदा 

क्लास -9