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शुक्रवार, 11 जून 2010

कविता ; प्रदूषण

प्रदूषण
प्रदूषण ने किया है परेशान ,
खोले हैं ये फैक्ट्ररियों की खान....
गर्मी से हैं अब सब बेहाल ,
मत पूछो अब किसी का हाल......
जब मार्च के महीने में है यह हाल ,
तो मई-जून आदमी हो जायेगा लाल..
आगे और पता नहीं क्या होगा ?
आदमी का कुछ पता नहीं होगा....
गाड़ी मोटर कार जो चलाते,
जाने कितना प्रदूषण कर जाते....
क्यों न करें हम साइकिल का इस्तेमाल ?
तब शायद सुधरे थोडा हाल ....
पड़ रही है गर्मी बहुत इस बार,
पहुँच गया है परा ४८ के पार....

लेखक :धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा :८
अपना घर

रविवार, 1 नवंबर 2009

कविता फूल

फूल

नीले- पीले हरे रंग- बिरंगे ,
फूल है जैसे हर रंगो से रंगे .....
बाग में फूल है हर रंग के अनेक ,
बाग में है सब एक .....
रंग- बिरंगे हरे नीले- पीले ,
फूल है सभी बाग में खिले ......
सुंदर -सुंदर न्यारे -न्यारे ,
फूल लगे बाग में प्यारे प्यारे .....
नीले -पीले हरे रंग -बिरंगे ,
फूल है जैसे हर रंगों से रंगे....
सुंदर- सुंदर न्यारे- न्यारे ,
फूल है कितने प्यारे -प्यारे ......
लेखक -धर्मेन्द्र कुमार कक्षा ७ अपना घर

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2009

कविता: बिजली का करो न दुरूपयोग

बिजली का करो न दुरूपयोग

बिजली का सभी करते उपयोग,
कुछ लोग तो करते इसका दुरूपयोग....
भारत में ऐसी जगह है आती,
जंहा पर बिजली पहुँच नही पाती....
बड़े - बड़े ये जो बाँध बनाते,
जिससे लोग है बिजली बनाते.....
ये पानी बहकर गांवों में आता,
जिससे गाँव पुरा डूब जाता....
बिजली का न करो दुरूपयोग,
बिजली बचाकर करना उपयोग...
देश के लोग सभी है एक समान,
सभी को बिजली करो प्रदान....

लेखक: धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा ७, अपना घर


गुरुवार, 24 सितंबर 2009

कविता: जल का न करे दुरूपयोग

जल का न करे दुरूपयोग

जल ही जीवन है हम सबका,
कभी न करे दुरूपयोग इसका....
जल बिन जीवन होगा कैसा,
बंजर धरती बिन प्राणी जैसा....
आओ हम मिल सरंक्षण करे इसका,
जल ही जीवन है हम सबका....
आओ मिल पानी की बूंद बचाए हम,
जीवन के सबको सुखी बनाये हम....
जल के दुरूपयोग को मिल रोके हम,
दुनिया के जीवन आगे बढाये हम....
जल का है महत्त्व बड़ा,
इससे ही हर चीज खड़ा...
जल का हम सब करते उपयोग,
इसलिए कभी न करे इसका दुरूपयोग.....

लेखक: धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा ७, अपना घर

मंगलवार, 11 अगस्त 2009

कविता: रसीले आम

रसीले आम

आम क्या है ये रसीले,
पेड़ों पर लगे है पीले-पीले...
सोच रहे है कब जोर से हवा चले,
पीले रसीले आम खाने को मिले...
आम का अब समय आया है,
खट्टे-मीठे आम खाने को जी ललचाया है...
पेड़ों पर लगे है कच्चे-पक्के आम,
बाजारों में इनके कितने महंगे दाम...
आम क्या है ये रसीले,
पेड़ों पर लगे है पीले-पीले ...

लेखक: धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा ७, अपना घर

मंगलवार, 28 जुलाई 2009

कविता: बारिस का मौसम आया

बारिस का मौसम आया

बरसात का है ये मौसम आया,
हरियाली से धरती को है सुंदर बनाया...
बरसात हुई तो पक गई जामुन,
खाने में लोगों को बड़ा मजा आया...
बरसात में हरी भरी घास से,
क्यारियों को लोगों ने खूब सजाया...
रंग बिरंगे सुंदर फूलों ने मिलकर,
इस संसार को है ऐसा महकाया...
आज हुई है जमकर खूब बरसात ,
सब लोगों ने मिलकर खूब नहाया...
बरसात का है मौसम आया,
धरती को है सुंदर बनाया...

धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा ७, अपना घर