शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

प्रगति की राह पर

 कविता 

प्रगति की राह पर 
तबाही का घर बना रहे है 
ये लोग उन्नति के नाम पर 
लोगो को लूट रहे है 
ईमानदार है जो 
उसे बेईमान बता रहे है 
ईमानदारी की राह में
तबाही क घर बना रहे है
सूखती जा रही है डाल 
उसे और सूखा रहे है 
ये इंसान है जो पर्यावरण 
बर्बाद कर रहे है  

कविता हमारे कवी साहिल द्वारा  लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे साहिल इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |  



 


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