कविता
प्रगति की राह पर
तबाही का घर बना रहे है
ये लोग उन्नति के नाम पर
लोगो को लूट रहे है
ईमानदार है जो
उसे बेईमान बता रहे है
ईमानदारी की राह में
तबाही क घर बना रहे है
सूखती जा रही है डाल
उसे और सूखा रहे है
ये इंसान है जो पर्यावरण
तबाही का घर बना रहे है
ये लोग उन्नति के नाम पर
लोगो को लूट रहे है
ईमानदार है जो
उसे बेईमान बता रहे है
ईमानदारी की राह में
तबाही क घर बना रहे है
सूखती जा रही है डाल
उसे और सूखा रहे है
ये इंसान है जो पर्यावरण
बर्बाद कर रहे है
कविता हमारे कवी साहिल द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018 में आये थे साहिल इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |
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