शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

पानी का बहाओ

 कविता 

पानी का बहाओ 
बांध टूटते  ही थिरक उठते है 
पानी का बहाओ 
पाथर में भी रास्ता बनाते है 
मुश्किलों में भी साथ रहते है 
एक दूसरे का हाथ पकड़कर 
जो हर मंजिल तक साथ निभाते है 
पानी का बहाओ 
जो अपना लिया है लोगों ने उनका रास्ता 
अब बरी है उनकी बहने के 
टूट जाये सरै मंजिले 
या टूट जाये घर गिरना 
पानी का बहाओ 

कविता हमारे कवी सुल्तान   कुमार   द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 201 3   में आये  थे  सुल्तान   इस समय कक्षा १२ में पढ़ते है | अपना घर में 14  साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है

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