मंगलवार, 1 सितंबर 2026

ढूंढने निकल पड़े उस राह को

 कविता 

ढूंढने निकल पड़े उस राह को
जहाँ पर खुशियों का उपहार है 
चलते चलते पहुँच जायेंगे उस मंजिल तक 
जहाँ पर शांति का त्यौहार है 
हर जगह एक नयी चुनौती आएगी 
केवल ठोकर देकर जाएगी 
जारी रखो बस अपना सफर 
तुम्हे मिल जाएगी वो डगर
जहाँ से होगा जीत का सफर  
ढूंढने निकल पड़े उस राह को 
 कविता हमारे कवी अजय  कुमार   द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023   में आये  थे  अजय    इस समय कक्षा 5    में पढ़ते है | अपना घर में 2   साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |    

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