कविता
ढूंढने निकल पड़े उस राह को
जहाँ पर खुशियों का उपहार है
चलते चलते पहुँच जायेंगे उस मंजिल तक
जहाँ पर शांति का त्यौहार है
हर जगह एक नयी चुनौती आएगी
केवल ठोकर देकर जाएगी
जारी रखो बस अपना सफर
तुम्हे मिल जाएगी वो डगर
जहाँ से होगा जीत का सफर
ढूंढने निकल पड़े उस राह को
जहाँ पर खुशियों का उपहार है
चलते चलते पहुँच जायेंगे उस मंजिल तक
जहाँ पर शांति का त्यौहार है
हर जगह एक नयी चुनौती आएगी
केवल ठोकर देकर जाएगी
जारी रखो बस अपना सफर
तुम्हे मिल जाएगी वो डगर
जहाँ से होगा जीत का सफर
ढूंढने निकल पड़े उस राह को
कविता हमारे कवी अजय कुमार द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023 में आये थे अजय इस समय कक्षा 5 में पढ़ते है | अपना घर में 2 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |
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