कविता
आया है बरसात का मौसम
बरसने लगा है पानी
बुँदे है प्यारे प्यारे
बरस रहे जैसे लगता है तारे
बून्द कहाँ से आता है
न जाने कहाँ कहाँ गिरता है
आया है ये बरसात
लायी है बूंदों को अपने साथ
बरसने लगा है पानी
आया है बरसात का मौसम
बरसने लगा है पानी
बुँदे है प्यारे प्यारे
बरस रहे जैसे लगता है तारे
बून्द कहाँ से आता है
न जाने कहाँ कहाँ गिरता है
आया है ये बरसात
लायी है बूंदों को अपने साथ
बरसने लगा है पानी
आया है बरसात का मौसम
कविता हमारे कवी नितीश कुमार द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2023 में आये थे नितीश इस समय कक्षा 6 में पढ़ते है | अपना घर में 3 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है
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