गुरुवार, 24 सितंबर 2026

हर किसी को बढ़ना है

कविता 

हर किसी को बढ़ना है 
बचपना छोड़ बड़ा होना है 
अपनी अपनी मंजिल ढूंढ़ना है 
मंजिल के लिए आगे बढ़ना है 
कुछ बढ़ने के चक्कर में  पड़कर 
जीना भूल गए 
अपना बचपना छोड़ जल्दी ही बड़े हो गए 
खुद को आगे निकलना है 
यही सोचकर लोग एकदूसरे से भिड़ गए 
जीतने के लिए 
सब एक दूसरे को हारने में लग गए 
बचपना छोड़ बड़े हो गए 

कविता हमारे कवीसाहिल द्वारा  लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018   में आये थे साहिल  इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8   साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |  



 


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