बुधवार, 23 सितंबर 2026

कभी कभी लगता है

 कविता 

कभी कभी लगता है 

की मंजिल सामने है 

न जाने अब क्या होगा 

की अब मंजिल से दूर हो गया 

ये वक्त का दिन अब देखना पड़ता है 

की मंजिल मिलेगा या नहीं 

कभी कभी लगता था मंजिल सामने है 

कविता हमारे कवी  शिवा द्वारा  लिखी गयी है | ये अपना घर में 2018   में आये थे शिवा   इस समय कक्षा 10 में पढ़ते है | अपना घर में 8   साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के ये बहुत छोटे ही उम्र में कवितायेँ लिखने लगे है |  



 


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