कविता
बारिश हो रही है ज़ोरदार
रिमझिम रिमझिम
बहुत दिनों से लगता है मौसम नाराज़ है
हर तरफ से पानी है बरसा रहा
लगातार बारिश कहर है अपना दिखा रहा
घर के अंदर बैठे बैठे हो रहे है बोर
बारिश हो रही है जोर जोर
बच्चे भी खूब नहा रहे है
बारिश हो राजहि है जोर जोर
रिमझिम रिमझिम
रिमझिम रिमझिम
बहुत दिनों से लगता है मौसम नाराज़ है
हर तरफ से पानी है बरसा रहा
लगातार बारिश कहर है अपना दिखा रहा
घर के अंदर बैठे बैठे हो रहे है बोर
बारिश हो रही है जोर जोर
बच्चे भी खूब नहा रहे है
बारिश हो राजहि है जोर जोर
रिमझिम रिमझिम
कविता हमारे कवी विष्णु द्वारा लिखी गयी है | ये अपना घर में 2024 में आये थे विष्णु इस समय कक्षा 4 में पढ़ते है | अपना घर में 2 साल से रह रहे है | ये बड़े होनहार छात्र है यहाँ के |