मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती

 कविता 

सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती 
आसमान में लालिमा बिखराती 
अपनी मनोरम दृष्टि से 
संसार को चमकती 
अपनी तेज ऊर्जा  पृथिवी पर बरसाती 
सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती 
आसमान में लालिमा बिखराती 
ऊर्जा सूरज की लेकर 
पेड़ अपना जीवन प्रक्रिया चलता 
खाना इसी की मदद से बनाता 
प्राणदायिनी वायु देता 
खुद दूषित वायु लेता 
इसे किसी न जरुरत पड़ती 
सुबह की किरणे जब पृथिवी पर पड़ती 

यह कविता साहिल द्वारा लिखी गयी है |  ये समय कक्षा 10  के छात्र है | 

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