कविता
पड़ते पड़ते आ गयी ठंडी
कुछ पता नहीं चला
पड़ते पड़ते ठंडी आ गयी
कुछ पता नहीं चला
मेने सपनो में सोचा था
ठंडी जल्दी आ गया
वो भी हमको पता नहीं चला
पड़ते पड़ते ठंडी आ गया
कुछ पता नहीं चला
पड़ते पड़ते ठंडी आ गयी
कुछ पता नहीं चला
मेने सपनो में सोचा था
ठंडी जल्दी आ गया
वो भी हमको पता नहीं चला
पड़ते पड़ते ठंडी आ गया
कुछ पता नहीं चला
नाम - विष्णु
कक्षा- 4
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें