शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

पड़ते पड़ते आ गयी ठंडी

कविता 

पड़ते पड़ते आ गयी ठंडी 
कुछ पता नहीं चला 
पड़ते पड़ते ठंडी आ गयी 
कुछ पता नहीं चला 
मेने सपनो में सोचा था 
ठंडी जल्दी आ गया 
वो भी हमको पता नहीं चला 
पड़ते पड़ते ठंडी आ गया 
कुछ पता नहीं चला  
नाम - विष्णु 
कक्षा- 4 

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