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गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

कविता: बैगन के है नसीब फूटे

बैगन के है नसीब फूटे

बैगन जी कि दिल्ली गई बरात,
पहुचते पहुचते हो गई आधी रात ।
मूली जी दुल्हन बनी थी ,
मन ही मन वो सोच रही थी ।
कब आयेंगे दुल्हे राजा ,
उन्हें खिलाऊंगी हलुआ ताजा।
तब तक आ गए दुल्हे राजा ,
मूली ने देख रुकवाया बाजा।
क्योकि दूल्हा थे बैगन काला ,
मूली बोली मै नहीं डालूंगी माला ।
दूल्हा काला दुल्हन गोरी ,
टूट गई शादी कि डोरी ।
बैगन बोला हमारे नसीब है क्यों फूटे,
मूली झट से बोली क्योकि तुम हो काले कलूटे।


लेखक: आदित्य कुमार, कक्षा ७, अपना घर

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

कविता: थोड़ी सी कर ले पढाई

थोड़ी सी कर ले पढाई

मैदान में लगी है कितनी घास ,
जिसमें लगती है रोज लात।
जानवर उसको खाते है ,
अपना पेट फुलाते है ।
उसी घास में सब खेलते है ,
मौज मस्ती करते है ।
मौज मस्ती नहीं ज्यादा करना ,
सबको थोडा है पढाई करना ।

लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ६, अपना घर

बुधवार, 18 नवंबर 2009

कविता: उत्तक

उत्तक

कोशिका से उत्तक बनता है,
जो करते है अंगो का गठन....
अंगों से से बनता है अंग - तंत्र,
सभी मिल करते शरीर का गठन....
संयोजी उत्तक सब अंगों का,
जोड़ कर देता है सहारा....
उत्तक से उत्तक को जोड़ता,
आपस में अंग जोड़ते हमारा....
सभी ऊतक ही अस्थिया है,
जो
शरीर को देती ढांचा है ....
अधिक कठोर होती है ये,
कंकाल खड़ा कर देती है....
पेशी उत्तक शरीर को,
गति प्रदान है करता....
ह्रदय हमारा बिना थके चलता रहता,
जीवन भर हर पल धड़कता रहता....


लेखक: धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा ७, अपना घर....

मंगलवार, 17 नवंबर 2009

कविता: पड़ोसी के घर से निकली रे गइया....

पड़ोसी के घर से निकली रे गइया

दईया हो दईया सुन मोरे भइया,
पड़ोसी के घर से निकली रे गइया....
काली - काली सी उसकी है बछिया,
भाग रही है गलियाँ रे गलियाँ....
जिसके डर से भागे रे सारे,
भोले - भोले बच्चें रे प्यारे....
दईया हो दईया सुन मोरे भइया,
कोई तो पकड़े जाके रे भइया....
सब कोई डर के घर में छुप जाए,
पास उसके अब कोई जाए....
आओ रे बच्चों सब मिल ही जाओ,
मिल के सभी खूब शोर मचाओं....
डर के भागेगी काली रे बछियाँ,
फ़िर हम खेलेंगे गलियाँ रे गलियाँ....
दईया हो दईया सुन मोरे भइया,
पड़ोसी के घर से निकली रे गइया....

लेखक: अशोक कुमार, कक्षा ७, अपना घर ...




रविवार, 1 नवंबर 2009

कविता फूल

फूल

नीले- पीले हरे रंग- बिरंगे ,
फूल है जैसे हर रंगो से रंगे .....
बाग में फूल है हर रंग के अनेक ,
बाग में है सब एक .....
रंग- बिरंगे हरे नीले- पीले ,
फूल है सभी बाग में खिले ......
सुंदर -सुंदर न्यारे -न्यारे ,
फूल लगे बाग में प्यारे प्यारे .....
नीले -पीले हरे रंग -बिरंगे ,
फूल है जैसे हर रंगों से रंगे....
सुंदर- सुंदर न्यारे- न्यारे ,
फूल है कितने प्यारे -प्यारे ......
लेखक -धर्मेन्द्र कुमार कक्षा अपना घर