बुधवार, 15 जुलाई 2026

कितना लम्बा है ये सफर

 कविता 

कितना लम्बा है ये सफर 
जहाँ कोई न आता है नजर 
न छांव है न है मस्ती की डगर 
कास छोटा होता ये सफर 
जहां न है कोई घर 
बस अति है पड़े ही नजर 
बस कैसे भी पार  करना है ये डगर 
फिर शुरू करते है दूसरा सफर 
कितना लम्बा है ये सफर 
जबतक पूरा न होगा ये सफर 
तबतक कोई दूसरी न चुनेगे डगर
 

नाम- सुल्तान 

कक्षा -12  

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