सोमवार, 13 जुलाई 2026

कब से पड़ी हुई है रूखी सी जिन्दगी

 कविता 

कब से पड़ी हुई है रूखी सी जिन्दगी 

बेजान सी है ये ख़ुशी 

बदली नहीं ये दुःख की घडी 

टूट चुकी है एक आशा बड़ी 

छूट गयी सारि कड़ी 

कब से पड़ी हुई है रूखी सी जिंदगी 

सब्र छूट रहा है ध्यान खो रहा है 

पता नहीं क्यों बेजान हो रहा है 

 

नाम- साहिल 

कक्षा- 10 

(अपना घर )

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