कविता
कब से पड़ी हुई है रूखी सी जिन्दगी
बेजान सी है ये ख़ुशी
बदली नहीं ये दुःख की घडी
टूट चुकी है एक आशा बड़ी
छूट गयी सारि कड़ी
कब से पड़ी हुई है रूखी सी जिंदगी
सब्र छूट रहा है ध्यान खो रहा है
पता नहीं क्यों बेजान हो रहा है
नाम- साहिल
कक्षा- 10
(अपना घर )
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