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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

कविता: चिड़िया के घोसले में अंडा

चिड़िया के घोसले में अंडा

एक दिन मैंने देखा था ,
चिड़ियों के घोसले में अंडा था ।
उस अंडे में बच्चे थे,
बच्चे सबसे अच्छे थे।
चिड़िया जब जब आती थी ,
बच्चों के मुहं में दाना दे जाती थी ।
बच्चे अच्छे से खाते थे ,
घोसले में मौज उड़ाते थे ।

लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ६, अपना घर

कविता: थोड़ी सी कर ले पढाई

थोड़ी सी कर ले पढाई

मैदान में लगी है कितनी घास ,
जिसमें लगती है रोज लात।
जानवर उसको खाते है ,
अपना पेट फुलाते है ।
उसी घास में सब खेलते है ,
मौज मस्ती करते है ।
मौज मस्ती नहीं ज्यादा करना ,
सबको थोडा है पढाई करना ।

लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ६, अपना घर

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2009

कविता: तितली


तितली

जब -जब आती तितली प्यारीं
मन को भाती तितली प्यारी ॥
रंग -बिरंगी तितली प्यारी
फूलो से भी है सबसे न्यारी
फूलो पर मडराती है
यहा-वहा उड़ जाती है
हाथ में हमारे आती है
पख फैलाकर उड़ जाती है

लेखक: ज्ञान, कक्षा ६, अपना घर, १३/१२/२००९



बुधवार, 25 नवंबर 2009

कविता: सर्दी का अमरुद्ध

सर्दी का अमरुद्ध

अमरुद्ध लगे हैं कितने प्यारे,
लगता है मुँह में जाए सारे...
पर डर लगता है सर्दी का,
डाक्टर लेगा पैसा फर्जी का...
पैसा नहीं लगाना अब फर्जी का,
अमरुद्ध नही खाना अब सर्दी का....


लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ६, अपना घर , १६/११/2009

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009

कविता: आसमान क्या रंग बदलता

आसमान क्या रंग बदलता


ऊपर देखो तारे देखो,
आसमान के नज़ारे देखो...
नीचे देखो बजारें देखो,
बच्चों के भी मजाके देखो...
आसमान भी क्या रंग बदलता,
हम बच्चों का मन बदलता...
तन है कैसा मन है कैसा,
ये आसमान का रंग है कैसा...

लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ४, अपना घर

रविवार, 20 सितंबर 2009

कवि़त: आओ - आओ नाव में बैठो

आओ - आओ नाव में बैठो

आओ -आओ बच्चों आओ,
नाव में बैठो मजे उडाओं...
पानी देखो मछली देखो,
उपर देखो नीचे देखो...
आओ - आओ भाग के आओ,
नाव में जल्दी बैठ भी जाओ...
पानी की लहरों को देखो,
मछली की चहलों को देखो...
देखो - देखो बच्चों देखो,
आओ मिलके इनसे सीखो...
कहाँ है बगुला कहाँ है कछुआ,
ये मिलकर सब पता लगाओ...
जल्दी आओ जल्दी आओ,
नाव में बैठे मजे उडाओं...

लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा , अपना घर