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बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

कविता: चाय गरम

चाय गरम

चा बनी है गरम - गरम,
ठंढ़ी लगे नरम - नरम।
चाय पीये हम गरम - गरम,
ठंढ़ी लागे हमको गरम
ठंढ़ी से हम सबको बचना होगा,
इसका हमको ध्यान रखना होगा


लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ६, अपना घर

बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

कहानी: चूहा और बिल्ली कि दोस्ती

चूहा और बिल्ली कि दोस्ती

एक बार कि बात है कि एक बिल्ली थी, जिसक नाम बाटी था और एक चूहा जिसका नाम चोखा था। उन दोनों में बहुँत अच्छी दोस्ती थी। वे जँहा भी जाते एक साथ जाते और एक दूसरे के ऊपर मुसीबत जाने पर सहायता करते थे। एक दिन बिल्ली किसी के घर दूध पीने गई। उसने देखा कि दूध भरा हुआ कटोरा रसोई घर में हुआ है, वो रसोई घर में घुस गयी, तभी चूहा भी पीछे से धमका, बाटी ने दूध कटोरा गिरा दिया। दूध जमीन पर गिर गया बाटी और चोखा दोनों मस्त होकर दूध पीने लगे। थोड़ी देर में चूहे का पेट भर गया वो एक तरफ जाकर आराम फरमाने लगा। तभी बाटी के ऊपर किसी ने जाल डाल दिया, और उसे जाल में बांधकर रसोईघर के एक कोने में रखदिया। उस आदमी के जाने के बाद चोखा धीरे से बाहर आया और बाटी को आजाद करने के लिए जल्द से उस जालको काट दिया, और बाटी को मरने से बचा लिया। घर का कोई आदमी फिर आकर मारे उससे पहले दोनों वंहा से भाग लिए। इस तरह से चूहे ने बिल्ली कि जान बचा ली और अपनी मित्रता कि शान बढा ली।

लेखक: आदित्य कुमार, कक्षा , अपना घर

मंगलवार, 17 नवंबर 2009

कविता: हिंदुस्तान हमारा है........

हिंदुस्तान हमारा है

हिंदुस्तान हमारा है,
हमको जान से प्यारा है....
इसकी खातिर लोगो ने दी क़ुरबानी,
तब जाकर मिली हम सबको आजादी....
देश के खातिर जो मिट गए,
अंग्रेजों को देश से खदेड़ गए.....
अंग्रेज तो कब के चले गए,
पर अपनी अंग्रेजियत छोड़ गए ....
आज काले अंग्रेज करते है राज,
नही सुनता कोई गरीबों की आवाज....
क्या इस अंग्रेजियत से पार पाएंगे,
जाने कब इनको मार भगायेंगे ....

लेखक: आदित्य कुमार, कक्षा ७, अपना घर



गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009

कविता: आसमान क्या रंग बदलता

आसमान क्या रंग बदलता


ऊपर देखो तारे देखो,
आसमान के नज़ारे देखो...
नीचे देखो बजारें देखो,
बच्चों के भी मजाके देखो...
आसमान भी क्या रंग बदलता,
हम बच्चों का मन बदलता...
तन है कैसा मन है कैसा,
ये आसमान का रंग है कैसा...

लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ४, अपना घर