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बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

कहानी: चूहा और बिल्ली कि दोस्ती

चूहा और बिल्ली कि दोस्ती

एक बार कि बात है कि एक बिल्ली थी, जिसक नाम बाटी था और एक चूहा जिसका नाम चोखा था। उन दोनों में बहुँत अच्छी दोस्ती थी। वे जँहा भी जाते एक साथ जाते और एक दूसरे के ऊपर मुसीबत जाने पर सहायता करते थे। एक दिन बिल्ली किसी के घर दूध पीने गई। उसने देखा कि दूध भरा हुआ कटोरा रसोई घर में हुआ है, वो रसोई घर में घुस गयी, तभी चूहा भी पीछे से धमका, बाटी ने दूध कटोरा गिरा दिया। दूध जमीन पर गिर गया बाटी और चोखा दोनों मस्त होकर दूध पीने लगे। थोड़ी देर में चूहे का पेट भर गया वो एक तरफ जाकर आराम फरमाने लगा। तभी बाटी के ऊपर किसी ने जाल डाल दिया, और उसे जाल में बांधकर रसोईघर के एक कोने में रखदिया। उस आदमी के जाने के बाद चोखा धीरे से बाहर आया और बाटी को आजाद करने के लिए जल्द से उस जालको काट दिया, और बाटी को मरने से बचा लिया। घर का कोई आदमी फिर आकर मारे उससे पहले दोनों वंहा से भाग लिए। इस तरह से चूहे ने बिल्ली कि जान बचा ली और अपनी मित्रता कि शान बढा ली।

लेखक: आदित्य कुमार, कक्षा , अपना घर

शनिवार, 10 अक्टूबर 2009

कहानी: हरहर सिंह की तरकीब

हरहर सिंह की तरकीब
प्राचीन काल की बात है की एक राजा किसी नगर में राज्य करता था वह बड़ा ही निर्दयी और क्रूर और हरदम दुखी रहने वाला राजा था वह लोगो को हमेशा सताया और डराया करता था वह सभी लोगो से अपने खेतों में काम करवाता था और काम के बदले जो भी पैसा तय करता उतने देकर उससे बहुत ही काम पैसे देता था, मजदूर जब अपने पैसे मांगते थे तो उनकी पिटाई करता और उन्हें जेल में डाल देता इस तरह से राजा नगर के लोगों को सताया करता था उसी नगर में हरहर सिंह नाम काल एक नौजवान रहता था उसकी उम्र लगभग २८ वर्ष थी, वह कुछ पढ़ा लिखा था और बहुत समझदार भी था जब उसे पता चला की राजा नगर के वासियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहा है, तो हर हर सिंह ने लोगों को बुलाकर एक बैठक की और उन्हें समझाया कि हम लोगों को स्वतन्त्रता पूर्वक जीवन जीने का अधिकार है और हम लोगो से कोई जबरदस्ती करके काम नही ले सकता है मगर हम लोगों को अपने अधिकार लेने के लिए एक साथ संगठित और शिक्षित होकर संघर्ष कारन पड़ेगा तब हमें अपना अधिकार मिलेगा हमें अपना अधिकार तब मिलेगा सब हम सभी राजा के पास चलाकर इस अन्याय का विरोध करे और हम स्वतंत्रता पूर्वक जीवन जीने का अधिकार मांगे बैठक के बाद कुछ लोगो राजा के पास जाकर विरोध करने के लिए तैयार ही गए, मगर कुछ लोगो राजा के डर से इस विरोध में शामिल नही हो रहे थे हर हर सिंह ने उन लोगों को फ़िर से खूब समझाया कि राजा तुम्हारा कुछ नही कर सकता है करेगा, इसलिए आप सभी इस संघर्ष में शामिल हो... ये तुम्हारा अधिकार है अगर आप नहीं लोगो तो वो कौन लेगा, तुम्हे अपना अधिकार लेने के लिए राजा का विरोध करना चाहिए, अगर नही करोगे तो तुम्हे अधिकार नही मिलने वाला है इतन कहते ही सभी नगर वासी संघर्ष के लिए तैयार हो गए औए अगले दिन राजा के राजा के दरबार में विरोध करने पहुँच गए और अपने अधिकार के मांग को लेकर नारे लगाने लगे राजा सभी नगरवासियों को इकठ्ठा देख कर डर गया वो सोचने लगा कि कंही सभी मिलकर हमें पीटने लगे राजा सभी से बातचीत करने लगा और उसने नगरवासियों से कहा कि मै ग़लत था आप सबसे अपनी गलतियों के लिए माफ़ी चाहता हूँ आज से आप सभी अपने मर्जी से काम का समय तय करेंगे और जो भी मजदूरी आप सभी मिल कर तय करेंगे वो मजदूरी आपको पूरी कि पूरी मिलेगी और राजा ने उनके सभी अधिकार दिए नगर के लोगो इस जीत से बहुँत ही खुश हुए नगरवासियों ने हरहर सिंह को इस जीत के लिए धन्यवाद् दिया और खूब बधाइयां दी हरहर सिंह कि तरकीब देखकर राजा बहुँत ही प्रभावित हुआ राज ने भी निर्दयता, क्रूरता, सताना और डरना छोड़कर लोगो के साथ अच्छा ब्यवहार करने लगा राजा अब सभी के साथ खेतो में जाकर ख़ुद काम करने लगा सभी लोगो के साथ मिलकर उनके साथ प्रेमपूर्वक जीने लगा इस प्रकर अब नगर के सभी लोग हरहर सिंह के साथ खुशी से रहने लगे साथ में अब राजा भी बहुत खुश रहने लगा....
lekhak: आदित्य कुमार, कक्षा ७, अपना ghar

गुरुवार, 16 जुलाई 2009

कहानी:- एक भूत और दो आदमी

एक भूत और दो आदमी
बहु़त समय पहले की बात है कि रास्ता था जो जंगल से होकर जाता थाउसी जंगल से एक बार दो आदमी जा रहेथे, वे लोग कुछ दूर चले होंगे कि अचानक उन्हें रस्ते में एक भूत मिल गयाउन दोनों आदमियों ने उस भूत से पूछाक्यों भाई तुम यंही रहते हो क्या ? प्रश्न सुनकर भूत बोला हाँ मै यंही रहता हूँ और यंही पर मेरा घर भी हैफ़िर भूतने उन दोनों आदमियों से पूछा कि तुम दोनों लोग कहाँ जा रहे हो ? उन दोनों ने कहा हम जंगल के उस पर दूसरेगाँव जा रहे हैभूत ने फ़िर पूछा वंहा पर तुम लोगों को क्या काम है ? तब तक ये दोनों आदमी ये समझ गए थे किये भूत है, लेकिन वे डरे नहींउन्होंने भूत से कहा कि हमें उस गाँव के लोगों ने बुलाया हैउस गाँव के लोगों को इसजंगल का कोई भूत है जो बराबर उन्हें परेशान करता है और डराता हैहम दोनों तांत्रिक है और बदमाश भूतों कोठीक करते हैहम उसी भूत को ठिकाने लगाने आए हैभूत ने जैसे ही इन दोनों आदमी कि बात सुनी तो उसकेहोश उड़ गया, वो बहुत डर गयाभूत जल्दी से उन दोनों आदमियों से पीछा छुड़ाकर उस जंगल से भाग गयादोनों आदमी इस प्रकार से आपनी चालाकी से उस भूत से पीछा भी छुड़ा लिया और वो जंगल भी उस भूत से हमेशा के लिए मुक्त हो गया

लेखक: आदित्य कुमार,,कक्षा ७, अपना घर

मंगलवार, 7 जुलाई 2009

कहानी: पॉँच साहसी दोस्त

पॉँच साहसी दोस्त....
बहुँत समय पहले की बात है एक घना जंगल था उसी जंगल के पास एक गाँव था, गाँव के लोगों का मानना था कि इस जंगल में कई भूत, जंगली जानवर और बड़े - बड़े सांप रहते है, पर उस जंगल में ऐसा कुछ नही था बहुँत ही सुंदर और प्यारा जंगल था मगर गाँव के जितने बड़े लोग थे वह अपने बच्चों से कहते थे कि उस जंगल में मत जाना वर्ना कोई जंगली जानवर तुम्हे मार कर खा जाएगा या फ़िर तुम्हें भूत पकड़ लेगा सभी गाँव के बच्चे उस जंगल में जाने से डरते थे उसी गाँव में एक बच्चों कि टोली थी, उन पांचो बच्चों में आपस में बहुत ही अच्छी दोस्ती थी वे थोड़े शैतानी जरुर करते थे मगर निडर और साहसी थे एक दिन उन्होंने ने आपस में सलाह कि चलो उस जंगल में जाकर देखा जाय कि क्या है वंहा पर, हो सकता है ये बड़े लोग ऐसे ही झूठ बोल रहे हो फ़िर पांचो दोस्त गाँव में बिना किसी को बताये उस जंगल कि तरफ चल दिए जंगल में चलते - चलते वो बहुत दूर निकल आए मगर अभी तक उन्हें कंही भी कोई भूत, सांप ये जंगली जानवर नजर नही आया, रस्ते में उन्हें मोर, खरगोश, हिरन, तोते, जंगली कबूतर और ढेर सारे रंग बिरंगी चिड़िया दिखी आगे चलने पर उन लोगो ने देखा कि पेड़ों के बीच एक बहुत ही सुंदर महल बना है , और उस महल के आस-पास ढेर सारे बच्चे खेल रहे थे, पांचो दोस्त उन्ही बच्चों के साथ खेलने लगे महल के पास वाले बगीचे में ढेर सारे फल के पेड़ लगे थे, सभी ने पेड़ से तोड़ कर ढेर सारे फल खाया और झूला भी झूला अब शाम हो चली थी बातचीत में उन बच्चों ने बताया कि ये हम लोगो का स्कूल हैऔर हम लोग यंहा रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे है हमारे परिवार के लोग इसी जंगल में रहते है सभी बच्चों के साथ इनकी दोस्ती हो गई पांचो दोस्तों ने सभी बच्चों से बिदा लेकर अपने गाँव कि तरफ़ चल दिए इस तरफ़ बहुत देर से बच्चों के गाँव में होने से गाँव वाले परेशान हो गए थे उन्हें लग रहा था कि हो हो ये बच्चे उस जंगल में गए होंगे और वनः पर उन्हें जंगली जानवर या भूत मार डाला होगा जंगल में उन्हें खोजने डर के मारे कोई नही जा रहा था तभी जंगल से वो पंचों बच्चे आते हुए दिखाई दिए गाँव वाले सभी खुश हो गए, पांचो दोस्तों ने जंगल के बारे में और वहाँ के स्कूल के बारे में बताया अगले दिन सभी गाँव वाले उस जंगल में गए उन्होंने वहां पर स्कूल देखा सभी से मिले और बहुँत खुश हुए उन्होंने अपने गाँव के सभी बच्चों को उस स्कूल में भेजने लगे अब उन्हें पता चला कि जंगल के बारे में कितनी झूठी अफवाह फैली हुई थी अब उस गाँव में बड़े लोग उन पांचो दोस्तों कि साहस कि कहानी अपने बच्चों को सुनाने लगे

लेखक: आदित्य कुमार, कक्षा , अपना घर, कानपूर

शनिवार, 30 मई 2009

कहानी: मछुआरे और नेवले कि दोस्ती

मछुआरे और नेवले कि दोस्ती
एक समय की बात है कि एक मछुआरा मछली मारने के लिए जाल लेकर अपने घर से नदी की ओर चला, चलते- चलते रास्ते में उसे एक बडा सा सांप मिला, वह सांप बहुत काला और खतरनाक था वह सांप रास्ते में खड़ा हो गया और बोला कि मैं तुम्हें काटूगा इतने में मछुआरे ने कहा कि मैंने आपका क्या बिगाडा है, जो आप मुझे काटेगें सांप ने कहा मैं भूखा हूँ और मुझे कुछ खाने को चाहिए मछुआरे ने कहा ठीक है जब मै मछली मारकर वापस आऊंगा , तब मैं आपको मछली दूंगा, आप उन्हें खाकर अपनी भूख मिटा लेना सांप नें कहा कि अगर मछली मिली तो मैं तुमको काट लूँगा मछुआरे नें कहा कि ठीक है, तो जाओ और जल्दी वापस आना, सांप ने कहा जब मछुआरा वहां से थोडी दूर बढ़ा तो उसने देखा कि एक नेवला प्यास की वजह से चल नहीं पा रहा है तो उस मछुआरे को दया गई, उसने नेवले को उठाया और पहुंच गया नदी के पास ,वहाँ जाकर नेवले को मछुआरे ने पानी पिलाया और चुप चाप एक जगह पर जाल लगाकर बैठ गया नेवले ने पूछा कि क्या बात है तुम इतने उदास क्यों हो मछुआरे ने सारी बात बता दी नेवले ने कहा कि तुम चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा, जब तक मैं तुम्हारे साथ हूँ तुम्हें कुछ नहीं होगा मछुआरे को वहाँ जाल से एक भी मछली नहीं मिली, अब मछुआरा बहुत उदास हुआ नेवले ने कहा कि तुम घर कि ओर चलो और मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ मछुआरे ने नेवले को अपनी पोटली में रख लिया और घर कि तरफ़ चल दिया, थोड़ी दूर चलते ही वहीं साँप रस्ते में मिला और वह फुंफकारते हुए बोला कि मछलियाँ कहाँ हैंमछुआरे ने पोटली खोलकर नेवले को बाहर निकाल दिया नेवला पोटली से निकलते ही साँप पर टूट पड़ा, नेवले और सांप में खूब लड़ाई होने लगी सांप को काफी चोट भी लग गई सांप वंहा से जंगल कि तरफ़ भाग निकलामछुआरा नेवले को अपने साथ घर ले गया और इस प्रकार से घर में सही सलामत पहुच कर मछुआरे और नेवले ने साथ में कहना खायाइस प्रकार से मछुआरे और नेवले में पक्की दोस्ती हो गईअगले दिन से दोनों दोस्त साथ में मछली मरने जाने लगे
कहानी: आदित्य कुमार, कक्षा , अपना घर

बुधवार, 20 मई 2009

कहानी: बाग की परियाँ

बाग की परियाँ
पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा सा गाँव, जिसका नाम सुन्दरपुर था । मानस और उसका परिवार उसी गाँव में रहते थे, माँ जब पहाड़ों पर जंगल से लकड़ी बीनने जाती तब मानस भी माँ के साथ बकरियों को लेकर पहाड़ पर चराने जाया करता था। उस गाँव के पास दूसरे पहाड़ पर एक बहुत ही सुंदर बगीचा था। मानस उस बगीचे में घूमने और फल खाने जाया करता था, कभी - कभी तो रात को भी उस बगीचे में घूमने चला जाता था। एक बार उसकी माँ ने कहा बेटा उस बगीचे में रात को मत जाया करो, वहां पर रात को परियां नाचने आती है। मानस ने कहा माँ तुम चिंता मत करो मुझे परियों से डर नही लगता , परियां अगर कभी मुझसे बगीचे में मिल गई तो मै उनके साथ खूब खेलूँगा और नाचूँगा भी। माँ के लाख मना करने के बाद भी मानस बगीचे में जाना नहीं छोड़ा। वो हमेशा दिन रात उन परियों के बारे में सोचता रहता। एक दिन घर के सभी लोग रात को गहरी नींद में सो रहे थे, मानस अपने बिस्तर से उठा और चुपके से बगीचे की तरफ़ चल दिया। बगीचे में दूर से रौशनी दिख रही थी, मानस और तेजी से बगीचे की तरफ भागा। बगीचे में पहुच कर मानस ने देखा की सफ़ेद रौशनी में गुलाबी, सफ़ेद, नीली, पीली, लाल और कई रंग की कपड़े पहने सुंदर - सुंदर परियां नाच रही है। मानस भी उनके साथ नाचने लगा, कुछ देर में परियों ने नाचना बंद कर दिया। सभी परियां मानस को चारो तरफ़ से घेर कर खड़ी हो गई, और उसके बारे में पूछने लगी। मानस और परियों में आपस में खूब दोस्ती हो गई। परियों ने कहा मानस अब हम लोग सात पहाड़ों के पार फूलों की घाटी में नाचने जा रही है तुम भी चलोगे क्या ? मानस ने कहा मै कैसे जा सकता हूँ मेरे पास तो पंख ही नहीं है। मानस का मन उदास हो गया, मानस को उदास देख कर लालपरी ने अपनी जादू की छड़ी से मानस की पीठ को छुआ, जादू की छड़ी को छूते ही मानस के पीठ पर सुंदर से पंख उग आए। मानस सभी परियों के साथ फूलों की घाटी की तरफ़ उड़ चला। फूलों की घाटी में मानस और परियों ने खूब नाचा, मानस नाचते - नाचते अब थक गया था। मानस परियों से बिदा लेकर अपने घर की तरफा उड़ चला, आसमान से उसका घर पास दिख रहा था। वो अब और तेजी से अपने घर की तरफ उड़ा, वो घर पहुचने ही वाला था तभी एक पेड़ की डाली से मानस टकरा गया, डाली से टकराकर वो धड़ाम से जमीं पर गिर पड़ा, उसके सारे पंख टूट गए। जमीं में पड़े उसकी आँख बंद होने लगी, अचानक उसकी आंख खुली और मानस ने देखा की वो बिस्तर से नीचे जमीं पर गिरा पड़ा है, अब उसे समझ में आया की ये सब सपना था।
कहानी: जीतेन्द्र कुमार, कक्षा , अपना घर
पेंटिंग: मुकेश कुमार, कक्षा , अपना घर

सोमवार, 18 मई 2009

कहानी: ऊंट और सियार

उंट और सियार
एक बड़ा सा जंगल था, उस जंगल में एक सियार और एक ऊंट रहता था, उन दोनों में पक्की दोस्ती थी। उंट बहुँत ही शांत और समझदार था पर सियार कुछ ज्यादा ही चालक और गुस्सैल था। सियार हमेशा ऊं के बारे में बुरा सोचता रहता था। एक दिन सियार और ऊंट में किसी बात को लेकर बहस छिड़ गई। सियार बातो ही बातो में गुस्सा होने लगा अचानक सियार को बहुँत गुस्सा आ गया। सियार गुस्से में बोला अगर तू चुप नही हुआ तो मै तुझे मारकर तेरा मांस भी खा जाऊंगा। ऊंट ये नही चाहता था की आपस में कोई झगडा हो इसलिए उंट शांत होकर बोला मै नही चाहता आपस में कोई झगडा हो अगर मुझे से कोई गलती हुई है तो मै तुमसे माफ़ी मांगता हूँ। ऊंट ने कहा मुझसे जो भी अब तक गलती हुई है उन सबके लिए मै माफ़ी मांगता हूँ अब मुझे माफ़ कर दो, और अब मै ये जंगल भी छोड़कर जा रहा हूँ ताकि तुम्हे कोई कष्ट न हो, इतना कहकर ऊंट जंगल से चल पड़ा। सियार को ये सब सुनकर बड़ा अफ़सोस हुआ की गलती मेरी है और ऊंट मुझसे ही माफ़ी मांग रहा है। उसे बहुँत पछतावा हुआ, सियार दौड़ कर गया और ऊंट के पैरो से लिपट गया और कहा मुझसे गलती हुई है मुझे माफा कर दो और जंगल छोड़कर मत जाओ। आगे से मै ऐसा कभी नही करूँगा, ऊंट ने उसे उठाकर गले से लगा लिया। ऊंट और सियार फ़िर आपस में प्यार और मजे से रहने लगे...
कहानी: आदित्य कुमार, कक्षा , अपना घर
पेंटिंग: सागर कुमार, कक्षा , अपना घर

रविवार, 17 मई 2009

कहानी: मास्टरनी रीना ने बदली गाँव के तस्वीर

मास्टरनी रीना ने बदली गाँव के तस्वीर
एक समय की बात है। एक गाँव में एक गरीब आदमी रहता था, जिसका नाम दयाशंकर था। वह बहुत ही निर्धन आदमी था, उसका जन्म १७ जनवरी १९६६ को हुआ था। वह किसानी का काम करता था। उसके गाँव का नाम रामपुर था, वह गाँव बहुत साफ - सुथरा और खुशहाल था, लेकिन वंहा के लोग बहुत गरीब थे। उस गाँव में शिक्षा का कोई प्रबंध नही था। दयाशंकर अनपढ़ आदमी था, इस कारण जब वह पास के शहर में काम करने जाता तो ठेकेदार उसे पूरी मजदूरी न देकर सिर्फ़ आधी मजदूरी देता था। दयाशंकर अपने चारो बेटों को पढ़ना चाहता था, लेकिन रामपुर में कोई स्कूल ही नही था। वहां के प्रधान उमाशंकर बड़े ही दुष्ट प्रकार के इन्सान थे। वे सिर्फ़ लोगों से वोट मांगते थे मगर गाँव की समस्याओं की तरफ कोई ध्यान नही देते थे। गाँव के सड़क, नाली लोगो को रासन, स्कूल आदि किसी समस्याओ का निदान नही करते थे। दयाशंकर के पत्नी रीना थोड़ा बहुत पढ़ी - लिखी थी। रीना ने अपने बच्चो को ख़ुद पढ़ना शुरू किया, पास के और बच्चे पढ़ने आने लगे, दयाशंकर के घर में ही स्कूल शुरू हो गया। गाँव के और बच्चे सुनीता, मोनी, राजेश, ब्रिजेश, महेश, सोनू, रानी, गीता और अन्य सभी बच्चे स्कूल आने लगे। गाँव के सब लोग रीना को अब मास्टरनी जी कहके बुलाने लगे। गाँव के सभी बच्चें मन लगाकर पढ़ाई करने लगे, रीना भी उन्हें खेल खिलाकर , गीत, गाना के माध्यम से पढाने लगी, धीरे - धीरे सभी बच्चे लिखना, पढ़ना और जोड़- घटना आदि सब सीख गए। पढ़लिखकर बच्चे अब बड़े हो गए थे, वे शहर में जाकर मजदूरी करने लगे, पढ़े - लिखे होने के कारण उन्हें अब पूरी मजदूरी मिलाने लगी। अगले साल चुनाव आया सभी लोगो ने मिलकर मास्टरनी रीना को प्रधान के चुनाव में खड़ा किया। गाँव के सभी लोगो ने मास्टरनी रीना को अपना वोट दिया, वो चुनाव जीत कर रामपुर गाँव की प्रधान बन गई। अब गाँव में विकास के सारे काम शुरू हो गए। गाँव में पक्की सड़क और नाली बन गई मास्टरनी जी के प्रयास से उस गाँव में एक सरकारी स्कूल भी खुल गया। अब गाँव के सभी बच्चे स्कूल जाने लगे और पढ़ाई करने लगे। गाँव के लोगों को अब पूरी मजदूरी भी मिलने लगी, धीरे - धीरे पूरे गाँव के तस्वीर ही बदल गई। इस तरह से रामपुर गाँव एक शिक्षित और खुशहाल गाँव बन गया।
कहानी: मुकेश कुमार, कक्षा ७, अपना घर
पेंटिंग: आदित्य कुमार, कक्षा ६ , अपना घर


सोमवार, 11 मई 2009

कहानी: भूख से हुई मौत

भूख से हुई मौत
एक गाँव में एक आदमी था, वह बेचारा बहुत ही गरीब और ईमानदार आदमी था, वह अपनी टूटी हुई झोपड़ी में रहता था। उसके परिवार में उसके साथ उसकी पत्नी और एक बेटा रहता था। वह आदमी रोज काम करने दुसरे गाँव में जाता था, उससे जो भी आमदनी होती उसी से उसके परिवार का खर्चा चलता था। जब तक वह काम करता रहा तब तक उसका घर चलता रहा, मगर एक दिन वह बीमार पड़ गया और काम पर नही जा सका। अगले दिन वो काम पर जाने की कोशिश किया मगर वह बहुँत ही कमजोर हो चुका था, वो चाह कर भी बिस्तर पर से उठ नही सका। घर में बस थोड़ा सा आनाज बचा था, अब घर में खाने के लिए कमी होने लगी। उसका घर गाँव से थोड़ी दूरी पर था, गाँव के लोग इधर की तरफ बहुत कम ही आते थे। बारिस का समय होने के कारण अब बारिश भी शुरू हो गई थी। अचानक रातो दिन तेज बारिश होने लगी, वह बेचारा बारिश और बीमारी के कारण काम करने नही जा पा रहा था। अब उसके घर का सारा रासन खत्म हो गया सिर्फ़ पानी पीकर पूरा परिवार गुजारा करते थे, अब उन तीनो में उठने की भी ताकत धीमे-धीमे खत्म हो रही थी, धीरे- धीरे वह तीनो भूख से मरने लगे। पास के नदी का पानी बारिश के कारण उफान पर था। अगले दिन तीनो भूख से लड़ते - लड़ते अंततः मर गये... सारा दिन उनकी लाश उस टूटी झोपड़ी में पड़ी रही.. और बाहर भयंकर तूफ़ान के साथ जोरो की बारिश होती रही.... रात को नदी में जोरो की बाढ़ आ गयी और बाढ़ का पानी अपने साथ उन तीनो और उनकी टूटी झोपड़ी को इस गाँव से बहुत दूर बहा कर ले गई... जहाँ भूख से कोई नही मरता......
कहानी: आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग: सागर कुमार, कक्षा ५, अपना घर

शुक्रवार, 8 मई 2009

कहानी:- नन्हा शिकारी

नन्हा शिकारी
बहुत साल पहले की बात है। एक राजा का ४ - ५ गाँवो का एक छोटा सा राज्य था, उस राज्य में में सभी लोग खुशी से रहते थे। उसके राज्य का एक गाँव जंगल के किनारे पर था। एक बार उस गाँव के किनारे वाले जंगल में कंही से शेर आ गया। उधर से जो भी गुजरता था, शेर उसे मार कर खा जाता था। शेर से परेशान होकर गाँव वालो ने राजा के यंहा फरियाद की, राजा ने ये घोषित करवाया कि जो भी आदमी इस शेर को मार देगा, हम उसे बहुँत सारा धन और १० बीघा खेत भी देंगे। सभी ने ये ये बात सुनी, मगर किसी कि यह हिम्मत नही हुई कि वह जाकर शेर को मारे। उसी गाँव में एक १० वर्ष का लड़का अपने माँ के साथ रहता था। उसकी माँ बहुँत ही गरीब और बीमार थी। उस लड़के ने शेर को मारने के लिए ठान लिया। वो राजा के पास गया और कहा आप बस मुझे एक धनुष और जहर में बुझे कुछ तीर दे दीजिये। मै शेर को मरूँगा, राजा उस छोटे से बच्चे को देखकर मुस्कराए मगर उसकी बहादुरी और जिद को देखकर उसे धनुष और तीर दे दिए। उस लड़के ने धनुष और तीर लेकर जंगल कि तरफ़ चल दिया। वह एक अपने साथ एक आदमी का पुतला भी बना कर ले गया। वह जंगल में जाकर एक पेड़ पर चढ़ गया और उसकी डाल से उस आदमी के पुतले को लटका कर थोडी उचाई पर बाँध दिया, और खुद पत्तो के बीच छुपकर धनुष और तीर लेकर बैठ गया और शेर के आने का इंतजार करने लगा। उधर शेर को कई दिनों से शिकार नही मिला था, घूमते - घूमते वो उस पेड़ के पास पहुँच गया। जैसे ही वो पुतले को देखा उसने सोचा कि वो कोई आदमी है , वो उस पुँतले पर छलांग लगा दी, तभी पत्तो के बीच छुपे लड़के ने उसके दोनों आँखों के बीच निशाना साध कर तीर चला दी, तीर सीधे आँखों के बीच में जाकर लगा गया। शेर एक जोर का दहाड़ लेकर जमीं पर गिर पड़ा, और मर गया। राजा ने जब यह सुना तो उन्होंने उस लड़के को सम्मानित किया और ढेर सारा धन के साथ-साथ १० बीघा जमीं दिया, और उसे अपने राज्य का नन्हा शिकारी बना दिया। अब वो नन्हा लड़का अपनी माँ और सभी गाँव वालो के साथ खुशी पूर्वक रहने लगा।
कहानी:- आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग:- मोनू कुमार, कक्षा ५, अपना स्कूल

कहानी:- घमंडी शेर

घमंडी शेर
एक गांव के पास में एक खूब घना जंगल था, उस जंगल में ढेर सारे जानवर रहते थे।जंगल के सब जानवरों ने मिलकर अपने यहाँ एक शेर को राजा बनाया। मगर धीरे - धीरे शेर अपने को जंगल का मालिक समझने लगा। वह बहुत घमंडी हो गया था, वह अपने को सबसे महान और ताकतवर समझने लगा। वह सोचता था कि उससे कोई नही जीत पायेगा। घमंडी शेर जंगल में सब जानवरों के ऊपर अत्याचार करने लगा।जंगल के पास के गाँव के लोग उस जंगल में लकड़ी और फल चुनने आते थे। जंगल के जानवर कभी भी उनको परेशान नही करते, गाँव के लोग भी जंगल के जानवरों का ख्याल रखते थे। उस जंगल में कोई भी शिकारी गाँव के डर वालो से शिकार करने नही आता था। गाँव वालो का जंगल में आना उस घमंडी शेर को पसंद नही आया। शेर अब गाँव वालो को परेशान करने लगा, गाँव के लोग अब इस जंगल के तरफ आने से डरने लगे। शेर ये सोच के खुश हो रहा था की सब गाँव वाले मुझसे डरते है अब मै दुनिया में सबसे ताकतवर हूँ। एक दिन शेर जंगल में घूमते - घूमते गांव की सीमा पर पहुचं गया, वंहा खेत में एक किसान अपने खेत में काम कर रहा था। शेर ने उस किसान को डराने के लिए उसे दौड़ा लिया, किसान शेर को अपनी तरफ़ आता देख डर के मारे अपने घर की तरफ़ भागा। शेर भी उस आदमी के दौड़ता हुआ गाँव में पहुँच गया। शेर के गाँव में पहुँचते ही गाँव के सब कुत्तो ने मिलकर शेर को चारो तरफ़ से घेर लिया और उसे काटने लगे शेर घबरा गया मगर वो अब चारो तरफ़ से कुत्तो के बीच घिर गया था। सभी कुत्तो ने मिलकर उस घमंडी शेर को मार डाला। शेर के मरते ही सभी गांव वाले खुश हो गए। उधर जंगल में जैसे ही ख़बर मिली की घमंडी शेर को गाँव के कुत्तो ने मार डाला जंगल के सारे जानवरों ने खूब खुशी मनाई और सभी जानवरों ने मिलकर इस बार सबसे अच्छे हाथी दादा को जंगल का राजा नियुक्त किया। अब जंगल में फ़िर से गाँव वाले जाने लगे और पूरे जगल में सभी जानवर मजे से रहने लगे।
कहानी:- सोनू कुमार, कक्षा ७, अपना घर
पेंटिंग:- आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर

बुधवार, 6 मई 2009

कहानी:- हाथी और बकरी

हाथी और बकरी
एक जंगल में हाथी और बकरी दोनों साथ रहते थे। दोनों में बहुँत दोस्ती थी हाथी और बकरी दोनों खाना ढूंढने साथ में ही निकलते थे। एक दिन दोनो जगंल में दूर निकल गए, उन्हें वहां पर एक तालाब दिखाई दिया, उस तालाब के किनारे एक बेर का पेड़ दिखा, बेर का पेड़ देख कर हाथी और बकरी दोनों खुश हो गए। बेर खाने के लिए हाथी ने बेर के पेड़ को जोर से हिलाया ढेर सरे पके बेर जमीं पर गिरने लगे। उसी पेड़ पर एक चिड़िया का घोसला भी था, उस घोसले में चिड़िया का बच्चा सो रहा था, चिड़िया कहीं दाना चुगने गई थी। बकरी जल्दी- जल्दी बेर बटोरने लगी, बे के पेड़ हिलने से घोसले में सोया चिड़िया का बच्चा तालाब में गिर गया। चिड़िया का बच्चा डूबने लगा ये देख कर बकरी जल्दी से पानी में कूद गई, लेकिन बकरी को ज्यादा तैरने नही आता था। बकरी भी डूबने लगी तभी हाथी तालाब में कूद गया और उसने बकरी और चिड़िया के बच्चे को तालाब से बाहर निकालकर उन्हें डूबने से बचा लिया। चिड़िया तब तक वापस आ गई अपने बच्चे को ठीक देखकर चिड़िया बहुत खुश हुई। उसने हाथी और बकरी को यंही पर साथ में रहने को कहा। हाथी और बकरी चिड़िया के साथ वही पर रहने लगे। कुछ दिनों में चिड़िया का बच्चा बड़ा हो गया। चिड़िया पेड पर और हाथी बकरी पेड के नीचे रहते थे चिड़िया उड़कर पता लगाती कि कहां कहां फल लगे हैं फिर चारो वहां जाते और खूब फल खाकर नाचते कूदते मजे करते।
कहानी :- आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग १:- चंदन कुमार, कक्षा ३, अपना घर
पेंटिंग २:- लवकुश कुमार, कक्षा ५, अपना घर

कहानी:- सांप और चूहे की दोस्ती

सांप और चूहे की दोस्ती
एक बार की बात है, एक बिल में एक चूहा रहता था। एक दिन उसी बिल के पास एक सांप आकर बैठ गया। चूहा ने सोचा अब तो हमारी खैर नही, ये सांप हमे खा जायेगा पर वह सांप ऐसा नहीं सोचता था। वह सांप चूहे से दोस्ती करने आया था, क्यो की उस सांप के पास अपना घर नहीं था। वह सांप एक घर तलाश कर रहा था जहाँ पर वो रह सके, पर चूहा के मन में ये डर बैठा रहा की ये सांप कहीं हमको खा गया तो... सांप ने चूहा को बताया की वो उसे खाने नही आया है वो तो बस एक घर को तलाश रहा है जहाँ पर वो रह सके.... यह सुनकर चूहा अपने बिल से बहार आकर बोला भाई आप कौन हो और मेंरे घर में क्या करने आये हो सांप बोला भाई मेरा कोई नहीं है और मेरा पास घर भी नहीं है। अगर आप मुझे अपने घर में रख लेंगे तो आप की बडी दया होगी चूहा ने बोला ठीक है भाई रख लेगें। चूहे ने अपने घर के एक हिस्से में सांप को रहने के लिए जगह दे दी। चूहा और सांप दोनों साथ - साथ रहने लगे। एक दिन सांप बीमार पड़ गया वो शिकार करने नही जा सका उसे खाने में कुछ नही मिला......भूख के मारे सांप के पेट में दर्द होने लगा। सांप ने सोचा की इस चूहे को ही मार के खा जाते है फ़िर उसने सोचा की इस चूहे ने अपनी जान जाने की परवाह किए बिना हमें रहने की जगह दी है, इसको खाना ठीक नही होगा। सांप को इस तरह पड़ा देखकर चूहा ने सोचा ये सांप कहीं शिकार के लिए गया भी नही और लग रहा है कुछ खाया भी नही है। चूहा चुपके से सांप को देखने लगा सांप भूख के मारे तड़प रहा था.... चूहा को यह देखा नही गया उसने पूछा कि तुम खाना क्यो नहीं खाते हो सांप ने कहा मै बीमार हूँ इस लिए शिकार नही कर सका मेरे पास कोई खाना नही है... भूख के मारे मेरा बुरा हाल है कई बार मेरे मन में बुरा ख्याल आया की मै तुमको खा जाऊ मगर नही दिल ने मना कर दिया। चूहे ने यह सुनकर दौड़कर बहार गया और उसके लिए खाने का इंतजाम किया... फ़िर सांप और चूहे दोनों ने साथ में बैठकर भरपेट खाना खाया..... अब सांप और चूहे दोनों रोज साथ में खाना खाते और घूमने जाते। सांप और चूहा दोनों मजे से एक ही बिल में रहने लगे... धीरे - धीरे सांप और चूहे की दोस्ती की कहानी पूरे जंगल में फ़ैल गई।
कहानी:- सागर कुमार, कक्षा ५, अपना घर
पेंटिंग:- लवकुश कुमार, कक्षा ५, अपना घर