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गुरुवार, 16 जुलाई 2009

कहानी:- एक भूत और दो आदमी

एक भूत और दो आदमी
बहु़त समय पहले की बात है कि रास्ता था जो जंगल से होकर जाता थाउसी जंगल से एक बार दो आदमी जा रहेथे, वे लोग कुछ दूर चले होंगे कि अचानक उन्हें रस्ते में एक भूत मिल गयाउन दोनों आदमियों ने उस भूत से पूछाक्यों भाई तुम यंही रहते हो क्या ? प्रश्न सुनकर भूत बोला हाँ मै यंही रहता हूँ और यंही पर मेरा घर भी हैफ़िर भूतने उन दोनों आदमियों से पूछा कि तुम दोनों लोग कहाँ जा रहे हो ? उन दोनों ने कहा हम जंगल के उस पर दूसरेगाँव जा रहे हैभूत ने फ़िर पूछा वंहा पर तुम लोगों को क्या काम है ? तब तक ये दोनों आदमी ये समझ गए थे किये भूत है, लेकिन वे डरे नहींउन्होंने भूत से कहा कि हमें उस गाँव के लोगों ने बुलाया हैउस गाँव के लोगों को इसजंगल का कोई भूत है जो बराबर उन्हें परेशान करता है और डराता हैहम दोनों तांत्रिक है और बदमाश भूतों कोठीक करते हैहम उसी भूत को ठिकाने लगाने आए हैभूत ने जैसे ही इन दोनों आदमी कि बात सुनी तो उसकेहोश उड़ गया, वो बहुत डर गयाभूत जल्दी से उन दोनों आदमियों से पीछा छुड़ाकर उस जंगल से भाग गयादोनों आदमी इस प्रकार से आपनी चालाकी से उस भूत से पीछा भी छुड़ा लिया और वो जंगल भी उस भूत से हमेशा के लिए मुक्त हो गया

लेखक: आदित्य कुमार,,कक्षा ७, अपना घर

शनिवार, 9 मई 2009

कविता: रात के अंधेरे में


रात के अंधेरे में
रात के अंधेरे में भूतों के डर से।
निकल पड़ा दुसरे पड़ोसी के घर से॥
रास्ते में निकल पड़ा सांप लंबा सा।
दूर से दिखा तो लगा बिल्कुल लकड़ी सा॥
पास जाकर देखा तो मै डर गया।
डर के मारे मै पड़ोसी के घर भाग गया॥
बीती रात हुआ जब उजाला।
तब मै पड़ोसी के घर से निकला॥
गा रही थी चिड़िया पेडों पर।
मै पहुँच गया अपने घर पर॥


कविता
: आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग: ज्ञान कुमार कक्षा ५, अपना घर