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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

प्याज की बात निराली ....

प्याज की बात निराली ....
कहते है आलू सब्जी का राजा है।
मगर प्याज ने बजाया सबका बाजा है॥
प्याज की बात निराली है।
लेकिन इसे खाना अब खयाली है॥
प्याज बिना सब स्वाद है सूना।
जैसे पानी बिन तालाब है सूना॥
प्याज की बढती इस महगाई से।
प्याज बिक रहा सरकारी दुकानों से॥
सब जनता हो गई है बेहाल
क्या होगा अब इस देश का हाल॥
जो पड़ गया है प्याज का आकाल।
यूं लगता है देश में गया भूचा

लेख़क: सागर कुमार, कक्षा ७, अपना घर

शनिवार, 20 जून 2009

कविता: कंप्यूटर भाई

कंप्यूटर भाई
कंप्यूटर भाई कंप्यूटर भाई
तुम क्यो होतो हो हमसे गुस्सा॥
गुस्सा तुमको अब नही करना है।
हमारा काम अब तुमको करना है॥
कंप्यूटर भाई कंप्यूटर भाई।
तुम कहाँ चले गए
बिजली गई तो तुम भी गए
मेरा काम अधूरा छोड़ गए
तुम्हारे सहारे सब काम चल रहा है।
तुम ही हो मेरे काम के साथी॥
अब साथ- साथ तुम्हे रहना है
अब मेरा काम भी करना है॥
कंप्यूटर भाई कंप्यूटर भाई।
तुम क्यो होतो हो हमसे गुस्सा

कविता: सागर कुमार , कक्षा 5, अपना घर

मंगलवार, 26 मई 2009

कविता: पेड़.

पेड़
पेड़ है देखो कितने प्यारे।
ये तो है सबसे न्यारे ॥
पेड़ के सहारे सब जीते है।
पंछी तेरा रस पीते है ॥
फल को खाकर हम जीते है ।
छाँव में तेरे सुख पाते है ॥
तुम तो हो स्वपोषी ।
जीते तुमसे परपोषी ॥
तुमसे बहती जीवन की धारा ।
तुम तो हो जीवन का तारा ॥
तुमको हमें बचाना है ।
पेड़ों को खूब लगाना है ॥
कविता: सागर कुमार, कक्षा ५, अपना घर

बुधवार, 6 मई 2009

कहानी:- सांप और चूहे की दोस्ती

सांप और चूहे की दोस्ती
एक बार की बात है, एक बिल में एक चूहा रहता था। एक दिन उसी बिल के पास एक सांप आकर बैठ गया। चूहा ने सोचा अब तो हमारी खैर नही, ये सांप हमे खा जायेगा पर वह सांप ऐसा नहीं सोचता था। वह सांप चूहे से दोस्ती करने आया था, क्यो की उस सांप के पास अपना घर नहीं था। वह सांप एक घर तलाश कर रहा था जहाँ पर वो रह सके, पर चूहा के मन में ये डर बैठा रहा की ये सांप कहीं हमको खा गया तो... सांप ने चूहा को बताया की वो उसे खाने नही आया है वो तो बस एक घर को तलाश रहा है जहाँ पर वो रह सके.... यह सुनकर चूहा अपने बिल से बहार आकर बोला भाई आप कौन हो और मेंरे घर में क्या करने आये हो सांप बोला भाई मेरा कोई नहीं है और मेरा पास घर भी नहीं है। अगर आप मुझे अपने घर में रख लेंगे तो आप की बडी दया होगी चूहा ने बोला ठीक है भाई रख लेगें। चूहे ने अपने घर के एक हिस्से में सांप को रहने के लिए जगह दे दी। चूहा और सांप दोनों साथ - साथ रहने लगे। एक दिन सांप बीमार पड़ गया वो शिकार करने नही जा सका उसे खाने में कुछ नही मिला......भूख के मारे सांप के पेट में दर्द होने लगा। सांप ने सोचा की इस चूहे को ही मार के खा जाते है फ़िर उसने सोचा की इस चूहे ने अपनी जान जाने की परवाह किए बिना हमें रहने की जगह दी है, इसको खाना ठीक नही होगा। सांप को इस तरह पड़ा देखकर चूहा ने सोचा ये सांप कहीं शिकार के लिए गया भी नही और लग रहा है कुछ खाया भी नही है। चूहा चुपके से सांप को देखने लगा सांप भूख के मारे तड़प रहा था.... चूहा को यह देखा नही गया उसने पूछा कि तुम खाना क्यो नहीं खाते हो सांप ने कहा मै बीमार हूँ इस लिए शिकार नही कर सका मेरे पास कोई खाना नही है... भूख के मारे मेरा बुरा हाल है कई बार मेरे मन में बुरा ख्याल आया की मै तुमको खा जाऊ मगर नही दिल ने मना कर दिया। चूहे ने यह सुनकर दौड़कर बहार गया और उसके लिए खाने का इंतजाम किया... फ़िर सांप और चूहे दोनों ने साथ में बैठकर भरपेट खाना खाया..... अब सांप और चूहे दोनों रोज साथ में खाना खाते और घूमने जाते। सांप और चूहा दोनों मजे से एक ही बिल में रहने लगे... धीरे - धीरे सांप और चूहे की दोस्ती की कहानी पूरे जंगल में फ़ैल गई।
कहानी:- सागर कुमार, कक्षा ५, अपना घर
पेंटिंग:- लवकुश कुमार, कक्षा ५, अपना घर

शनिवार, 18 अप्रैल 2009

कहानी:- मेहनत का फल

मेहनत का फल
एक बार की बात है। एक गाँव में एक किसान रहता था ।वह बड़ा दयालु किस्म का आदमी था वह रोज जंगल में जाता और लकड़ी काटकर लाता और उससे जो बीस पच्चीस रूपये मिल जाते उसी से अपना गुजर बसर करता वह किसान के पास एक विस्वा खेत था वह बेचारा इतना गरीब था कि वह अपना चप्पल जूता भी नही खरीद सकता फिर वह उसके पास थोड़ी बहुत जमीन थी वह भी बंजर पड़ी थी । बंजर के कारण उसके खेत खेलिहान सब सूख गये थे। उसके पास पानी का कोई साधन नही था तो बेचारा वह क्या करता। उसके पास टूटी -फूटी झोपड़ी थी वह उसी में रहता था। एक दिन वह फिर जंगल में गया और उसने कडी़ मेहनत करके लकड़ी काट कर लाया, फ़िर वह बाजार गया और उसने दस हजार की लकड़ी बेच दी फिर उसने दो बैल और दो गाय खरीदी सात हजार रूपये की और खुद के लिए १००० रुपये के बढ़िया कपड़े लाया, और अपने गाय बैलों के लिये भूसा चारा आदि के लिये २००० रुपये रख लिए। वह खुशी से रहने लगा, तभी एक दिन बहुत जोर बारिश हुई, बारिश के कारण नदी, तालाब, खेत खलिहान सब भर गये, अब किसान को बहुत प्रशन्नता हुई। वह बैलों को लेकर अपना थोड़ी बहुत जो खेती थी उसे जोतने लगा, फिर अब उसके पास धन नही था, फिर वह लकड़ी काटने गया। उससे जो पैसा मिला उससे वह अपने खेत के लिये बीज ले आया, फिर वह उसे बो दिया और उसके पास जो गाय थी, वह उसको चारा खिलाता कुछ दिन बाद गाय को एक बछड़ा पैदा हुआ, और अब वह दूध बेचने लगा, फिर उसने सोंचा कि गांव में कोई दूध नही लेगा, और उसने सोचा दूध को कैसे बेचा जाये, उसके पास साइकिल तो नही थी। उसने गेहूं को काटा और उसे पछोर कर बाजार में बेचने चला गया, और उसे बेचकर अपने लिये एक साईकिल लाया। अब वह रोज शहर मे जाकर दूध बेचने लगा, दूध बेचने पर उसे ढेर सारे पैसे मिले, उस पैसों से उसने अपनी टूटी फूटी झोपड़ी बनवा ली। अब वह सुख व शांति पूर्वक रहने लगा। इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है की इस दुनिया मे जो मनुष्य मेहनत करता है वही सफल होता है।
आदित्य कुमार, कक्षा 6
अपना घर,
बी-135/8, प्रधान गेट, नानकारी,
आई0आई0टी0, कानपुर-16

सोमवार, 2 मार्च 2009

कविता:- आज का नेता

आज का नेता
कितना खराब नेता है भइया
ये तो बहुत घूसखोर है भइया
ये नियमो का उलंघन करते है भइया
इसे ऊँचे पद से हटाव भइया
नया नियम बनावो भइया
अपना भारत के चमकाओ भइया
कितना खराब नेता है भइया
ये तो बहुत घूसखोर है भइया
ये देश के लिए कुछ नही करते भइया
देश को बेच के खा जाते भइया
विकास के लिए पैसा आता है भइया
पर गाँव तक आते - आते
नेता लोग खा जाते भइया
कितना खराब नेता है भइया
ये तो बहुत घूसखोर है भइया
सागर कुमार
कक्षा ५, अपना घर

शनिवार, 14 फ़रवरी 2009

कविता:- हाथी

हाथी
हाथी पों पों करता है
कभी किसी की नहीं सुनता है
अपनी धुन में चलता है
खूब मजे से रहता है
हाथी पों पों करता है
कान उसके बड़े बड़े
सूप जैसे कितने अच्छे
हाथी है कितने अच्छे
उसके दांत है लंबे लंबे
मानस
अपना घर, कक्षा 5