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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

प्याज की बात निराली ....

प्याज की बात निराली ....
कहते है आलू सब्जी का राजा है।
मगर प्याज ने बजाया सबका बाजा है॥
प्याज की बात निराली है।
लेकिन इसे खाना अब खयाली है॥
प्याज बिना सब स्वाद है सूना।
जैसे पानी बिन तालाब है सूना॥
प्याज की बढती इस महगाई से।
प्याज बिक रहा सरकारी दुकानों से॥
सब जनता हो गई है बेहाल
क्या होगा अब इस देश का हाल॥
जो पड़ गया है प्याज का आकाल।
यूं लगता है देश में गया भूचा

लेख़क: सागर कुमार, कक्षा ७, अपना घर

सोमवार, 15 नवंबर 2010

कविता : कैसे होगा जीवन पार

कैसे होगा जीवन पार
कैसे होगा अब जीवन पार ,
सबके ऊपर है कुछ पैसे का भर....
इस पैसे का भार चुकाने के लिए,
कोई चोरी करता हैं ,और कोई मरता हैं.....
कैसे होगा अब जीवन पार,
इस जीवन को चलाने के लिए....
कोई कमाता हैं, और कोई गुलामी करता हैं,
कैसे होगा अब जीवन पार.....
लेख़क : ज्ञान
कक्षा :
अपना घर , कानपुर

मंगलवार, 9 नवंबर 2010

कविता: बाल दिवस

बाल दिवस
बाल दिवस हैं आने वाला,
चाचा नेहरू की याद दिलाने वाला....
चाचा नेहरू को बच्चे प्यार कराते हैं,
बाल दिवस तक याद रखते हैं....
चाचा नेहरू करते थे सबसे प्यार,
सब बच्चे करते थे उनसे अच्छा व्यहार....
बाल दिवस हैं आने वाला,
चाचा नेहरू की याद दिलाने वाला ....
लेख़क: चन्दन कुमार
कक्षा :
अपना घर , कानपुर