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शुक्रवार, 11 जून 2010

कविता ; प्रदूषण

प्रदूषण
प्रदूषण ने किया है परेशान ,
खोले हैं ये फैक्ट्ररियों की खान....
गर्मी से हैं अब सब बेहाल ,
मत पूछो अब किसी का हाल......
जब मार्च के महीने में है यह हाल ,
तो मई-जून आदमी हो जायेगा लाल..
आगे और पता नहीं क्या होगा ?
आदमी का कुछ पता नहीं होगा....
गाड़ी मोटर कार जो चलाते,
जाने कितना प्रदूषण कर जाते....
क्यों न करें हम साइकिल का इस्तेमाल ?
तब शायद सुधरे थोडा हाल ....
पड़ रही है गर्मी बहुत इस बार,
पहुँच गया है परा ४८ के पार....

लेखक :धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा :
अपना घर

शनिवार, 17 अप्रैल 2010

कविता: राजा ने किया रानी से मजाक

राजा ने किया रानी से मजाक

एक
दिन राजा बोले रानी से ,
आलू लाओ जाकर खेतो से
रानी बोली मै नहीं जाउंगी खेतो में,
चाहे मुझको रखो तुम अपने घर में
सुनकर रानी की ऐसी बानी,
राजा पीने लगे जल्दी से पानी
राजा बोले मैंने तो मजाक किया,
तुमने उसको सच मान लिया
तुम तो हो इस घर की रानी,
समझा करो तुम मेरी बानी
रानी बोली ऐसा मजाक मुझसे करना,
चली जाउंगी मायके तब पछताते रहना।
राजा बोले माफ़ करो चुप हो जाओ रानी,
भूख लगी है लाओ जल्दी दे दो खाना पानी
किसकी कविता किसकी कहानी,
राजा रानी की ख़त्म हुई कहानी

लेखक: आशीष कुमार, अपना घर, कक्षा ७

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

कविता: कैसे अपना संसार बना

कैसे अपना संसार बना

कई मोहल्लो से मिलकर बनता गाँव,
वंहा पर मिलती सबको पेड़ो की छाँव।
गाँव मिलाकर बनती ग्राम पंचायत,
गर्मी में जब पानी पीते तब मिलती राहत।
ग्राम पंचायत मिलकर ब्लाक है बनता,
अब कोई किसी की नहीं है सुनता।
ब्लाक मिलाकर बनती तहसील ,
दुनिया में तो सबसे होती भूल।
तहसील मिलाकर जिला है बनता,
हर इंसा हर एक पर हँसता।
जिला मिलाकर राज्य है बनता,
हर राज्य में मुख्य मंत्री है रहता।
राज्य मिलाकर बनता देश,
सबका अपना रंग बिरंगे वेश
देश मिलाकर बनते महाद्वीप,
दिवाली में आओ जलाये तेल के दीप।
महाद्वीप मिलाकर ग्रह है बनता,
पृथ्वी ग्रह पर ही जीवन मिलता।
जिसमे हम सब है प्यार से रहते,
संसार को हम सब मिलकर रचते ।

लेखक: आशीष कुमार, कक्षा ७, अपना घर, कानपुर

सोमवार, 31 अगस्त 2009

kavita: रविवार का दिन

रविवार का दिन

रविवार का दिन है कितना अच्छा,
बंद रहती है स्कूल की सभी कक्षा....
इस दिन रहती सभी की छुट्टी ,
बच्चा बच्चा सारा दिन करता मस्ती...
फिल्म देखना फुटबाल खेलना,
नाटक सीखना और दिखाना ...
इधर उधर खूब घूमने जाना ,
यही है दिन भर का दिनचर्या ...
रविवार का दिन है कितना अच्छा,
बंद रहती है स्कूल की सभी कक्षा...

लेखक: धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा ७, अपना घर